Love Unbound : A Cry For Justice Ch. 2

Chapter 2 (ACP वर्तिका सहाय!)

Posted by Dev Srivastava • Feb 15, 2025 11:31 PM

उस लड़की ने अपने सामने खड़े लड़के की ओर देख कर अपनी भौंहें उठा कर कहा, "क्यों? तुम्हारा ससुर है ये, जो इसे जिंदा ले चलना है!" और इसी के साथ एक गोली उस आदमी के सिर में उतार दी।

फिर उसने सबकी ओर देख कर कहा, "चलो, सब।"

फिर वो सब बाहर आ गए। कुछ दूर आकर उन सबने अपनी अपनी कैप उतारी तो बाकी के तीन लड़के थे और एक लड़की थी। फिर उन सबने अपना मास्क उतारा तो उनके चेहरे नजर आने लगे।

लड़की की उम्र 30-31 साल रही होगी। कैप उतारने के बाद उसके लंबे घने बाल हवा में लहरा रहे थे। उसकी काली आंखों में इस वक्त एक अलग ही ठंडक थी।

उसकी पतली नाक फक्र से ऊंची उठी हुई थी और उसके पतले गुलाबी होंठ बिल्कुल खामोश थे। उन सभी लड़कों की उम्र भी उस लड़की जितनी ही रही होगी।

उनमें से दो लड़कों के चेहरे एक जैसे ही थे। फर्क था तो सिर्फ उनके आंखों के रंग में। जहां एक की आंखों का रंग नीला था तो वहीं दूसरे के आंखों का रंग हरा।

बाकी उनकी कद काठी, रंग और बाकी सब कुछ एक जैसा ही था। तीसरे लड़के की लंबाई उन लड़कों से कुछ ज्यादा थी और उसका मिजाज थोड़ा कड़क था।

वो चारों एक साथ पीछे की ओर पलटे और उनके होठों पर एक सनक भरी मुस्कान आ गई और इसी के साथ लड़की ने तेज आवाज में कहा, "फाइव!"

फिर नीली आंखों वाले लड़के ने भी उसी तरह से कहा, "फोर!"

हरी आंखों वाले लड़के ने भी कहा, "थ्री!"

चौथे लड़के ने भी कहा, "टू!"

और फिर सबने एक साथ अपना दायां हाथ ऊपर करके धमाके का इशारा करके कहा, "बूम!"

और इसी के साथ उस गोदाम के हर हिस्से में धमाके होने शुरू हो गए। ये देख कर उन चारों की मुस्कान और बड़ी हो गई और वो मुस्कान भी ऐसी थी कि देख कर किसी के भी रीढ़ की हड्डी में सिहरन दौड़ जाए।

वो सभी अपने सामने, गोदाम को धूं-धूं करके जलते हुए देख रहे थे। आग कि लपटें आसमान छू रही थीं और उन सबको जैसे ये देख कर सुकून मिल रहा था।

वो चारों सामने देख ही रहे थे कि इतने में कुछ और उन्हीं के जैसे लोग वहां पहुंच गए। उन सभी के साथ कुछ लड़कियां भी थीं।

लड़की ने उनकी ओर देख कर सिर हिला दिया तो वो सभी आगे बढ़ गए। उनके बाद वो लड़की और तीनों लड़के भी आगे बढ़ गए।

शाम का समय,

पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर मीडिया की भीड़ लगी हुई थी क्योंकि यहां पर प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली थी। सारे रिपोर्टर्स पूरी लगन के साथ रिपोर्टिंग में लगे हुए थे।

एक लड़की ने कैमरे के सामने कहा, "तो जैसा कि आप सब देख सकते हैं, ACP वर्तिका सहाय आज फिर से अपने कारनामों के वजह से सुर्खियों में हैं।

आज एक बार फिर, मुजरिम उनके हाथों में आते आते रह गए और ACP वर्तिका की पकड़ में आने से पहले ही उनकी मौत हो गई।"

इतने में वो लड़की अपने साथियों के साथ हेडक्वार्टर से बाहर आई। इस वक्त वो सभी वर्दी में थे। लड़की के वर्दी पर 3 स्टार लगे हुए थे।

उसके नेम प्लेट पर ACP वर्तिका सहाय लिखा हुआ था। उसने अपने बालों का जुड़ा बना रखा था और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ रही थी हाँलाकि उसके हाथों पर जगह जगह छोटे छोटे बैंडेज लगे हुए थे।

जिन लड़कों के चेहरे एक जैसे थें उनमें हरी आंखों वाले लड़के के नेम प्लेट पर अक्षित ठाकुर और नीली आंखों वाले लड़के के नेम प्लेट पर रक्षित ठाकुर लिखा हुआ था।

अक्षित के सिर पर पट्टी बंधी हुई थी और रक्षित के सिर पर बैण्डेज टेप लगा हुआ था। उन दोनों के भी हाथों पर जगह जगह बैंडेज थे।

तीसरे लड़के के नेम प्लेट पर अमर सक्सेना लिखा हुआ था और उसके बाएं हाथ पर एक प्लास्टर चढ़ा हुआ था। वर्तिका जाकर कुर्सी पर बैठ गई और वो सभी लड़के आकर उसके पीछे खड़े हो गए।

इसी के साथ रिपोर्टर्स ने अपने सवाल पूछने शुरू कर दिए।

एक रिपोर्टर ने वर्तिका से सवाल करते हुए कहा, "मैम, एक बार फिर मुजरिम आपके हाथ आते-आते रह गए और हर बार की तरह इस बार भी उनमें से एक भी जिंदा नहीं बचा। इस बारे में क्या कहना चाहेंगी आप?"

वर्तिका ने आराम से, शांत आवाज में कहा, "देखिए, हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी कि उन्हें जिंदा पकड़ सकें, लेकिन उन सबने पहले ही वहां RDX लगा रखे थें।

इससे पहले कि हम कुछ कर पातें, वहां पर धमाके होने शुरू हो गए और उसका सबूत है ये!"

इतना बोल कर उसने अमर को कुछ इशारा किया तो अमर ने अपना प्लास्टर चढ़ा हुआ हाथ आगे कर दिया।

वर्तिका ने उसका हाथ कैमरे के सामने करके और अक्षित व रक्षित के बैंडेजेस को प्वाइंट करके कहा, "ये देखिए, कैसे हमारे ऑफिसर्स भी इस धमाके का शिकार हुए हैं। अब ऐसे में मैं अपने साथियों को बचाती या उन क्रिमिनल्स को!"

उस रिपोर्टर ने फिर से अपनी आँखें सिकोड़ कर कहा, "आपकी बात सही है, मैम! पर हर बार ऐसा ही होता है। आखिर कैसे?"

वर्तिका ने अपने दोनों हाथों को आप में मिला कर टेबल पर रख दिया।

उसने थोड़ा सा आगे की ओर झुक कर उस रिपोर्टर की आंखों में देख कर कहा, "इस सवाल जा जवाब जानना हो, तो हमारे अगले मिशन में आप हमारे साथ चलिएगा। जब आप खुद उस जगह पर होंगी तो आपको हमसे ये सवाल नहीं पूछना पड़ेगा।"

ये सुन कर पूरी मीडिया शॉक्ड हो गई थी। सभी लोग अपना गला तर कर रहे थें लेकिन वर्तिका को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा। वो अभी भी उस रिपोर्टर को ही देख रही थी।

उसने अपनी भौंहें उठा कर कहा, "तो बोलिए, चलेंगी न हमारे साथ!"

ये बात सुन कर उस रिपोर्टर ने अपनी नजरें झुका लीं और इसी के साथ वो पीछे हो गई लेकिन बाकी के रिपोर्टर्स फिर से कुछ बोलने को हुए ही थे कि वर्तिका ने खड़े होते हुए कहा, "बस! अब और सवाल नहीं।"

उस रिपोर्टर ने कहा, "पर मैम..."

लेकिन वर्तिका और उसके साथी उन सभी को पूरी तरह से नजरंदाज करके आगे बढ़ गए।

जारी है...

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