Chapter 3 (टीम)
जैसे ही वर्तिका और उसके साथी गाड़ी की ओर बढ़ें वैसे ही उनके पीछे रिपोर्टर्स ने कैमरे के आगे कहा, "तो देखा आप सबने, कि कैसे ACP वर्तिका ने हर बार की तरह इस बार भी वही किया।
उन्होंने उन सारी लड़कियों को तो बचा लिया जिनकी तस्करी हो रही थी लेकिन उनके क्रिमिनल्स को नहीं और वो हमारे सवालों के जवाब देने से भी बच रही हैं।"
इसी के साथ वर्तिका को उसके साथियों के साथ पुलिस की गाड़ी में बैठते हुए भी दिखाया जा रहा था।
वहीं दूसरी तरफ,
एक लड़का किसी साइबर कैफे में बैठा हुआ था। उसने सफेद रंग की टी शर्ट के साथ काले रंग की जींस पहनी हुई थी। उसने अपने सिर पर बेस कैप पहन रखा था।
उसके मुंह पर मास्क था और आंखों पर काला चश्मा चढ़ा हुआ था। उसने बाएं हाथ में एक काले रंग की घड़ी थी और दाएं हाथ में एक कलावा बंधा हुआ था।
उसके पैरों में सफेद रंग के स्नीकर्स थे। उसके हाथ में एक कॉफी की ग्लास थी जिसकी स्ट्रॉ उसने अपने मास्क के नीचे से अपने मुंह में डाली हुई थी।
उसी कैफे में सामने टी वी पर लाइव न्यूज चल रही थी और जैसे ही वर्तिका कैमरे के सामने आई, उस लड़के ने कॉफी पीनी बंद कर दी। उसने अपनी गर्दन टी वी की ओर घुमाई और आराम से अपनी कुर्सी पर पसर कर वो न्यूज देखने लगा।
जब वर्तिका अपनी गाड़ी में बैठ रही थी तो उस लड़के ने कहा, "तुमने मुझे वी से दूर रखने की बहुत कोशिश की डॉक्टर विक्रांत सहाय! पर अफसोस, तुम्हारी कोशिश थोड़ी कमजोर पड़ गई। अब मैं और वी तो मिल कर ही रहेंगे।"
फिर उसने गहरी आवाज में कहा, "और वी खुद चल कर मेरे पास आएगी।"
फिर उसने अपने कॉफी के गिलास को कस कर दबाते हुए कहा, "ये मेरा वादा है तुमसे।"
कुछ देर बाद,
पुलिस की गाड़ी एक 2 मंजिला घर के बाहर आ रुकी। उस घर की चौड़ाई 30 फीट के आस पास रही होगी। घर के सामने एक बड़ा सा गेट लगा हुआ था।
गेट के अंदर इतनी जगह थी कि 2-3 गाड़ियां आराम से खड़ी हो जाएं लेकिन वहां गाडियां खड़ी ना करके दीवारों के किनारे बहुत सारे फूलों के पौधे लगे हुए थे।
उन पौधों पर लगे फूलों से जो खुशबू आ रही थी वो माहौल को खुशनुमा बना रही थी। पुलिस की गाड़ी देख कर वॉचमैन ने गेट खोल दिया तो गाड़ी आगे बढ़ गई।
गाड़ी के रुकते ही वर्तिका और सारे लड़के गाड़ी से उतर कर अंदर की ओर बढ़ गए। वर्तिका ने बेल बजाई तो एक महिला ने आकर दरवाजा खोल दिया जिसकी उम्र कोई 36-37 साल रही होगी।
उन सभी को देख कर उस महिला के होठों पर मुस्कान आ गई।
उसे देख कर अक्षित ने हल्के से मुस्करा कर कहा, "कैसी हैं, दीदी?"
महिला ने भी हल्के से कहा, "मैं ठीक हूं, भैया। आप बताइए।"
इससे पहले कि अक्षित कुछ कहता, रक्षित ने कहा, "हम सब भी अच्छे ही हैं।"
फिर उसने अक्षित के गले को अपने बाजुओं की गिरफ्त में करके उसके सिर पर हल्के से चपत लगा कर कहा, "बस इसका दिमाग थोड़ा स्लो हो गया है।"
ये सुन कर अक्षित ने पहले अपनी साइड आइज से उसे घूरा और फिर गंभीर आवाज में कहा, "रक्ष, तू कुछ ज्यादा ही नहीं बोल रहा है।"
रक्षित ने आराम से कहा, "नहीं, बल्कि मुझे तो लगता है कि मैं कम बोल रहा हूं।"
अक्षित ने चिढ़ कर उसका हाथ झटक कर कहा, "तू शायद भूल रहा, पर मैं 5 मिनट बड़ा हूं तुझसे।"
रक्षित ने तुरंत कहा, "और तुझे कैसे पता! तुझे क्या ऊपरवाले ने मेल करके बताया था।"
उन दोनों की हरकतें देख कर वर्तिका ने अपना सिर ना में हिला दिया तो वहीं अमर बिना कुछ कहे उन दोनों के कान पकड़े और अंदर की ओर बढ़ गया और वो दोनों अपने कान छुड़ाने की कोशिश करते हुए अंदर चले गए।
अंदर जाने पर सबसे पहले एक हॉल था जिसके एक तरफ किचन था तो दूसरी तरफ सीढ़ियाँ जो ऊपर की ओर जा रही थीं। वर्तिका अपने साथियों के साथ हॉल में आई तो वहां पहले से ही विक्रांत बैठा हुआ था।
उसी के पास एक बच्ची बैठी हुई थी। जिसकी उम्र कोई 5 साल रही होगी। उस बच्ची का चेहरा वर्तिका से थोड़ा बहुत मिल रहा था।
छोटे छोटे शॉर्ट्स और टी-शर्ट में वो बहुत ही क्यूट लग रही थी। विक्रांत बैठ कर उसका होमवर्क करा रहा था कि इतने में उसके कानों में अक्षित और रक्षित की आवाज पड़ी जो अमर को अपने कान छोड़ने के लिए बोल रहे थें।
आवाज सुनते ही उसकी नजरें उनकी ओर घूम गईं और सामने का नजारा देख कर उसे हँसी आ गई। वहीं उस बच्ची की नजरें जैसे ही वर्तिका पर पड़ीं, वो भाग कर उसके पास आ गई।
वर्तिका भी जमीन पर बैठ गई और जैसे ही वो बच्ची उसके पास पहुंची, वर्तिका ने उसे गोद में उठा लिया और उसे पुचकारते हुए आगे बढ़ गई।
वहीं अमर की नजरें विक्रांत पर टिकी हुई थीं जिसके माथे पर उसे चिंता की लकीरें दिख रही थीं, लेकिन उसने अभी किसी से भी कुछ नहीं कहा।
उसने अक्षित और रक्षित के कान छोड़ दिए तो वो दोनों अपने कान सहलाते हुए दर्द होने की नौटंकी करने लगे। अमर ने एक नजर उन दोनों को घूरा तो वो दोनों भी सीरियस हो गए।
फिर अमर ने धीरे से उनके कान में कुछ कहा तो उन दोनों ने हाँ में सिर हिला दिया। इसके बाद वो तीनों आगे बढ़ गए।
अमर ने विक्रांत के पास बैठते हुए उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा, "और विक्की, क्या हाल है?"
विक्रांत ने अपने होठों पर झूठी मुस्कान सजा कर कहा, "मैं ठीक हूं। तुम सब बताओ, क्या चल रहा है आजकल?"
अक्षित ने उसके दूसरी ओर बैठते हुए कहा, "क्या बताएं यार! तेरी बीवी आज तक नहीं बदली। कॉलेज में भी गुंडी थी और आज शहर की ACP है तो भी गुंडों वाली हरकतें ही हैं इसकी।"
इतने में वो महिला पानी लेती आई। वर्तिका ने अपनी बच्ची को उस महिला की गोद में दे दिया जिसने दरवाजा खोला था तो वो महिला उसे लेकर अंदर चली गई।
जारी है...