" बेहद इश्क " - Chapter 1( ट्रेलर
रात का समय था। सुनसान सड़क पर एक काली रंग की कार बहुत तेज गति से दौड़ रही थी। कार की एक तरफ़ की खिड़की खुली हुई थी, जिससे उस लड़की के बाल हवा में उड़ रहे थे। उस लड़की की आँखों से आँसू बह रहे थे।
उस लड़की के बगल वाली सीट पर रखे उसके फ़ोन पर अभी-अभी किसी का फ़ोन कट चुका था। उसमें समय दिखा रहा था – रात के नौ बज चुके थे।
वो लड़की स्टीयरिंग पर अपने हाथ कसकर कार की गति और तेज कर देती थी। उसकी आँखों के आँसू अभी भी नहीं रुक रहे थे, कि अचानक उसने कार के ब्रेक लगाए और कार रोककर बाहर की ओर देखा। और कार से बाहर आ गई।
वह बाहर आकर उस बड़े से बंगले को देख रही थी, जो एकदम सुनसान सा था। उसने वहाँ पर लगी नेम प्लेट को देखा, जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ था – "शेखावत मेंशन"। उसे देखने के बाद उसने उसे पूरी तरह अनदेखा कर दिया और सीधा अंदर चली गई।
वह बिना किसी को देखे, बेहद गुस्से में बंगले के अंदर आ गई जहाँ सोफ़े पर एक लड़का कुछ कर रहा था।
उस लड़के ने जैसे ही उस लड़की को देखा, वह सोफ़े से खड़ा हो गया और उस लड़की की ओर देखकर मुस्कुरा दिया।
वो लड़की अभी भी उस लड़के को बेहद गुस्से से देख रही थी। उस लड़की ने एक नज़र चारों ओर की और थोड़ा तेज और गुस्से से कहा,
"कहाँ है वो...?"
वो लड़का बिना कुछ बोले सीढ़ियों की ओर देखने लगा। उसकी नज़र को देख वो लड़की भी अपना चेहरा सीढ़ियों की ओर करती है, तो सामने से आ रहे लड़के पर उसकी नज़र एक पल के लिए ठहर जाती है।
पर उस लड़के पर से वो अपनी नज़रें हटाकर बेहद गुस्से में बोली,
"मेरे भाई कहाँ है? बताओ।"
वो लड़का उस लड़की की ओर देखकर मुस्कुराया और सोफ़े पर बैठ गया। उसने अपने दोनों हाथ गर्दन के पीछे लगा लिए और एक पैर दूसरे पैर पर रख लिया।
लड़की: "देखो, मेरे भाई को छोड़ दो। चाहते क्या हो तुम?"
लड़का: (मुस्कुराते हुए) हाँ, छोड़ दूँगा, लेकिन पहले...
लड़की: "प्लीज, उन्हें कुछ मत करो, प्लीज।"
लड़का: "ठीक है, मैं तुम्हारे भाई को छोड़ दूँगा, लेकिन उसके लिए..."
लड़की: (बीच में ही) "तुम जो बोलोगे, मैं करूँगी वो।"
लड़का: "हम्म... सही बोला। तो तुम मुझसे शादी कर लो।"
लड़की: (बेहद गुस्से से) "व्हाट...? तुम पागल हो! तुमसे शादी कभी नहीं! तुम जैसे इंसान से शादी करने से अच्छा है मैं मर जाऊँ।"
लड़का: (सोफ़े से उठकर) "सोच लो। मरने से अच्छा है मुझसे शादी कर लो और अपने भाई को बचा लो। वैसे भी तुम मर जाओगी तो तुम्हारा भाई..."
लड़की: "नहीं, प्लीज, मेरे भाई को कुछ मत करना, प्लीज।"
लड़का: "हम्म... ठीक है। कल सुबह दस बजे तक मुझे तुम्हारा हाँ का जवाब चाहिए। और अगर तुमने मना किया तो... तुम्हारा भाई..."
लड़की: "नहीं, प्लीज, भाई को छोड़ दो।"
लड़का: उसके करीब आकर उसे कमर से पकड़कर बोला, "बोला ना, मिसेज़ चाहत रुद्र सिंह शेखावत, तुम्हारा जवाब आने पर सब सही होगा!"
लड़की: "छोड़ो मुझे, समझें..."
लड़का: "हम्म... समझ गया।" इतना बोलकर वो लड़का उस लड़की को जोर से छोड़ देता है, जिससे वह लड़की सीधा जमीन पर गिर जाती है।
वो लड़की अपने हाथ को देखती है और खड़ी होकर जाने लगती है, तो वो लड़का वापस उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर करता है और उसके हाथ से उसका फ़ोन लेकर अपना नंबर लगा देता है और वापस उसे फ़ोन दे देता है।
वो लड़का वहाँ से उस पहले वाले लड़के की ओर आता है और उसे धीरे से बोलता है,
"घर छोड़ दे इसे।"
पहला लड़का: "हम्म..." इतना बोलकर वह घर से बाहर आकर गाड़ी के पास चला जाता है।
वो लड़की जैसे ही घर से बाहर जाती है, उसके सामने वो लड़का कार लाकर रोक देता है।
लड़का: "बैठो। भाई ने कहा है घर छोड़ने को। रात बहुत हो गई है, अकेले जाना ठीक नहीं है।"
वो लड़की: "ओह, और तुम्हारे उस भाई के साथ रहना वो ठीक है? मुझे कुछ नहीं होगा, मैं चली जाऊँगी।"
तो वही बालकनी में खड़ा वो लड़का अभी भी सब कुछ सुन रहा था, जिसके हाथों में सिगरेट थी। उसने अपनी सिगरेट वहीं फेंककर नीचे आ जाता है और उस पहले वाले लड़के को जाने को बोलकर उस लड़की का हाथ पकड़कर उसमें बिठा लेता है।
वो लड़की खिड़की से बस एकटक बाहर देख रही थी, और वो लड़का बस उसे देखकर कार चला रहा था।