" बेहद इश्क " - Chapter 2
रात का समय था। एक बड़ा सा घर, जिसके चारों ओर लाइटें जली हुई थीं। उस घर के बाहर कुछ बॉडीगार्ड खड़े थे। उस घर की नेम प्लेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ था: "मेहरा हाउस"।
और उस घर के अंदर बने बड़े से हॉल में बीचों-बीच एक सोफा रखा हुआ था। जिस पर एक लड़की, पीहू, आलती-पालती मारकर अपना मुँह फुलाए बैठी थी। और उसके पास ही एक औरत, मीरा काकी, अपने हाथ में खाने की प्लेट लेकर खड़ी हुई थी।
मीरा काकी: "पीहू बिटिया, खाना खा लीजिए ना। अगर बाबा को पता लगा कि आपने अब तक खाना नहीं खाया तो हमें डाँट पड़ेगी।"
पीहू: "हाँ तो काकी, मैं नहीं खाऊँगी। बोलो आप के बाबा से, जब तक वो नहीं आते मैं नहीं खाऊँगी।"
एक आदमी, रामू काका, किचन की ओर से आते हुए बोला, "अरे मीरा दीदी, आप क्यों उसके पीछे पड़ी हैं? वो नहीं खाने वाली जब तक बाबा नहीं आ जाते।"
पीहू (सोफे पर से उठकर उस पर खड़े होते हुए): "हाँ रामू काका, आपने सही बोला। जब तक आपके बाबा नहीं आ जाते, मैं खाना नहीं खाऊँगी।"
मीरा काकी (उसके पीछे खाने की प्लेट वापस लेकर जाते हुए): "बिटिया, खा लो थोड़ा सा। अगर बाबा को पता लगा तो बहुत डाँटेंगे आपको।"
पीहू (अपने दोनों हाथ कमर पर रखकर): "ओफ्फो! आप इतने बड़े होकर उनसे डरते हो? मैं तो नहीं डरती।"
तभी सबके कानों में किसी की आवाज़ आई, "ओह, तो आप मुझसे नहीं डरती?"
पीहू (बिना उस ओर देखे सोफे पर बैठ गई और अपना मुँह दूसरी ओर कर लिया।)
वो लड़का (वहाँ से अंदर आया और पीहू के पास सोफे पर बैठकर बोला), "ओह, तो मेरा बच्चा नाराज़ हो गया।" और खाना क्यों नहीं खाया आपने अभी तक?
पीहू (मुँह बनाते हुए): "मुझे भूख नहीं है।"
मीरा काकी: "देखिए ना बाबा, मैं कब से बोल रही हूँ, लेकिन पीहू बिटिया खाना ही नहीं खा रही।"
वो लड़का: "पीहू, खाना क्यों नहीं खाया? काकी ने बोला फिर भी नहीं?"
पीहू: "देखिए ना काका, इन्हें पता तो है फिर भी..."
वो लड़का: "फिर भी...?"
पीहू: "आपको पता है ना, मैं आप के बिना खाना नहीं खाती, फिर भी आप काकी को बोलते हो मुझे खाना खिला दे।"
वो लड़का: "पर बच्चा, आपको खा लेना चाहिए। मैं लेट हो जाता हूँ ना कभी-कभी।"
पीहू (मासूम सा चेहरा बनाकर): "फिर आप लेट क्यों करते हो? आपको मालूम है ना साहिल भाई, हम आप के बिना खाना नहीं खाते, फिर भी..."
साहिल: "उम्मम्म्... लेकिन अब क्या? मेरा पेट ऐसे बातों से ही भरोगी? वैसे ना, मुझे ना भूख लगी है बहुत।"
पीहू: "मुझे भी बहुत जोरों की।"
काकी: "लेकिन आपको तो अभी भूख नहीं थी ना?"
पीहू (मासूमियत से): "पर अभी लगी ना, वो भी इतनी बड़ी वाली।"
साहिल: "मैं चेंज करके आता हूँ। तुम बैठो।"
पीहू: "हाँ, जल्दी जाइए।"
साहिल मुस्कुराते हुए अपने कमरे में गया, और वॉर्डरोब से अपने कपड़े लेकर वाशरूम में चला गया। थोड़ी देर में चेंज करके बाहर आया और एक नज़र बेड पर रखे अपने फोन को उठाकर देखा और मुस्कुराते हुए नीचे आ गया।
पीहू (डाइनिंग टेबल पर बैठी हुई अजीब-अजीब हरकतें कर रही थी।)
साहिल: "ओह पीहू, क्या कर रही हो?"
पीहू: "कुछ नहीं।"
साहिल: "हम्मम, काकी, काका, आप दोनों भी बैठ जाइए ना।"
काकी ने सबका खाना लगाया और खाने बैठ गई।
पीहू: "भाई!"
साहिल: "हाँ बच्चा।"
पीहू: "मैं ना क्या सोच रही थी...कि क्यों ना मैं भी आपके साथ ऑफिस ज्वाइन कर लूँ।"
साहिल: "व्हाट...? नहीं, तुम अभी ऑफिस ज्वाइन नहीं कर रही हो।"
पीहू: "मैं घर पर बोर हो जाती हूँ।"
साहिल ने एक बाइट पीहू को खिलाया, और पीहू ने भी साहिल को खिलाया।
पीहू (मुँह लटकाकर): "हम्मम..." इतना बोल पीहू ने डिनर किया और सोफे पर आकर बैठ गई। साहिल भी खाना खत्म कर चुका था, वो भी अपना फोन लेकर सोफे पर आ गया।
पीहू: "कल का क्या प्लान है?"
साहिल (फ़ोन में देख मुस्कुराते हुए): "रोज़ जैसा ही है...ऑफिस जाना है।"
पीहू (साहिल को घूरते हुए): "रियली?"
साहिल: "हाँ...कुछ सोच कर...नहीं-नहीं, कल तो संडे है ना।"
पीहू: "अरे वाह! आपको याद है।"
साहिल: "येस...और ये भी याद है कल हम शॉपिंग करने जाएँगे।"
पीहू: "हाँ, पहले शॉपिंग, फिर डिनर, फिर आइसक्रीम, और फिर..."
साहिल: "आह बच्चा, मुझे सब मालूम है। लेके चलूँगा मैं पक्का।"
पीहू: "हम्मम, ठीक है। अभी मैं सोने जा रही हूँ।"
साहिल: "हम्मम, चलो।"
पीहू: "वो भाई नहीं आ रहे।"
साहिल: "पता नहीं कब आएगा।"
इतना बोल पीहू अपने कमरे की ओर चली गई। थोड़ी देर वैसे ही रहने के बाद साहिल भी अपने कमरे की ओर आ रहा था कि उसकी नज़र पीहू के कमरे में गई, जिसका दरवाज़ा खुला हुआ था। उसके क़दम पीहू के कमरे की ओर बढ़ गए। उसने कमरे में देखा तो पीहू बेड पर आराम से सो रही थी।
साहिल ने उसे ब्लैंकेट से ढँका और उसके माथे पर किस करके, उसके माथे पर हाथ फिरते हुए सोचने लगा।
साहिल (मन में): "तुम कितनी मासूम हो पीहू। तुम्हें अभी किसी से कोई मतलब नहीं है। भगवान तुम्हारी खुशियों को किसी की नज़र न लगने दे।"
इतना बोल साहिल ने कमरे की लाइट्स ऑफ की और एक कम रोशनी वाली लाइट ऑन करके अपने कमरे में आ गया और सोने चला गया।
तो वहीं दूसरी ओर एक बड़ा सा बंगला, जो दिखने में खूबसूरत था, लेकिन रात के अंधेरे से ढँक चुका था। लेकिन अंदर हॉल में कुछ लाइटें जली हुई थीं।
तो वहीं एक कमरा, जिसके सोफे पर एक लड़का, रुद्र, कुछ सोच रहा था। सोचते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गई थी।
उसी के सामने बैठा एक और लड़का, शिवांश, अपने लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था और किसी से फोन पर बात कर रहा था।
रुद्र: "और उसका पता लगा...?"
शिवांश: "उसका भी अभी नहीं पता लगा।"
रुद्र: "और तू कब तक पता लगाएगा?"
शिवांश: "बहुत जल्द।"
रुद्र: "हम्मम..." इतना बोल उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।
तभी उनके कान में किसी की आवाज़ आई, "साहब, खाना लगा दिया है। आ जाइए।" एक नौकर इतना बोल वहाँ से चला गया।
रुद्र: "चल!"
शिवांश: "हम्मम, चलो।"
इतना बोल दोनों नीचे आए और डाइनिंग टेबल पर आकर खाना खाने लगे। थोड़ी देर में दोनों खाना खाकर अपने-अपने कमरे में आ गए थे।
शिवांश अपने कमरे में लैपटॉप पर जल्दी-जल्दी उंगलियाँ चला रहा था और कोई काम कर रहा था।
और रुद्र अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ा सिगरेट पी रहा था। चाँद की चाँदनी उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी।
अगली सुबह थी। आज संडे था। पीहू अपने कमरे में अभी भी सो रही थी। साहिल भी अपने कमरे में सोया हुआ था कि उसके फ़ोन का अलार्म बजने लगा। साहिल ने एक बार उसे बंद किया और वापस से सो गया, लेकिन कुछ ही मिनटों में उसके पास टेबल पर रखी क्लॉक का अलार्म फिर से बजने लगा।
साहिल के कानों में जैसे ही अलार्म की आवाज़ आई तो साहिल उठकर बैठ गया और बोला, "पीहू की बच्ची, ये सब तेरा काम है।"
इतना बोल साहिल उठा और वॉर्डरोब से अपने कपड़े लेकर वाशरूम में चला गया। थोड़ी देर में रेडी होकर साहिल पीहू के कमरे में आया तो देखा पीहू अभी भी आराम से सो रही थी।
साहिल (उसके पास जाकर): "वहाँ बेटा, हमारी नींद खराब करके खुद सो रही है।"
इतना बोल साहिल पीहू के पास गया और उसके मुँह पर पानी का जग डाल दिया।
अचानक पानी आने से पीहू जल्दी से उठी और बोलने लगी, "भाई-भाई! बाढ़ आ गई! बचाओ मुझे!" इतना बोलते हुए उसकी नज़र जैसे ही साइड में गई जहाँ साहिल खड़े होकर हँस रहा था।
पीहू: "मतलब ये सब आपने...?"
साहिल: "हाँ, तो तूने भी तो मेरी नींद खराब की।"
पीहू (बेड पर खड़े होकर अपनी कमर पर हाथ रखकर): "अच्छा, मैंने क्या किया?"
साहिल: "अलार्म तूने लगाया था ना।"
पीहू (बेड से उतरकर): "हाँ, क्योंकि नहीं लगाती तो आप जल्दी नहीं उठते, फिर हम शॉपिंग के लिए लेट हो जाते ना।"
साहिल: "हम्मम, चलो अब जल्दी से रेडी होकर आ जाओ, मैं नीचे वेट कर रहा हूँ।"
पीहू: "ओके।"
साहिल वहाँ से नीचे आ गया और सोफे पर बैठकर पीहू का इंतज़ार करने लगा। धीरे-धीरे दस मिनट से पंद्रह मिनट और पंद्रह से अब पूरा आधा घंटा हो चुका था। आखिरकार परेशान होकर साहिल उठा और जैसे ही जाने को हुआ उसकी नज़र सीढ़ियों पर गई जहाँ से पीहू आ रही थी।
ब्लैक जीन्स, ग्रीन कलर का शॉर्ट कुर्ता, ऊपर से जैकेट डाला हुआ, बालों को खुला छोड़ा हुआ जो कमर से नीचे तक आ रहे थे। आँखों में काजल जो और भी प्यारी लग रही थी, और लाइट लिपस्टिक, एक हाथ में बहुत प्यारा ब्रेसलेट और एक में वॉच।
साहिल: "ओये, ऐसे जाएगी ना तो बीमार हो जाएगी।"
पीहू (असमंजस में): "मतलब...?"
साहिल: "अरे, बाबा, नज़र लग जाएगी।"
मीरा काकी: "और नहीं तो क्या?" इतना बोल उन्होंने अपनी आँखों के कोरों से थोड़ा काजल लेकर पीहू को लगा दिया।
पीहू (मुस्कुराते हुए): "काकी, मुझे नहीं लगती नज़र-वज़र।"
साहिल: "अब चलो मेरी जान।"
पीहू (नौटंकी करते हुए): "चलो पुत्र।"
इतना बोल दोनों हँसते हुए शॉपिंग के लिए मॉल के लिए चले गए।
रुद्र भी उठ गया था और रेडी होकर नीचे हॉल में बैठा हुआ था।
शिवांश (रुद्र से): "रुद्र, आज संडे है तो कहीं चलें।"
रुद्र: "कहाँ जाना है?"
शिवांश: "शॉपिंग।"
रुद्र (उसे घूरते हुए): "तू लड़की है?"
शिवांश: "क्यों? शॉपिंग लड़कियाँ ही करती हैं? मैं नहीं कर सकता?"
रुद्र: "अच्छा, ठीक है, मैं चलूँगा, लेकिन नौटंकी बंद कर।"
शिवांश (मुस्कुराते हुए): "थैंक यू।" इतना बोल वो रुद्र के गले लग गया।
रुद्र अभी भी शिवांश को घूर रहा था। शिवांश को अपनी गलती का अहसास हुआ तो वो तुरंत रुद्र से लगा हुआ और सॉरी बोलता हुआ बाहर चला गया।
रुद्र भी थोड़ी देर सोचने के बाद बाहर चला गया।
क्रमशः