काशी: एक संघर्ष - Chapter 3
काशी ने पूजा को खुद से दूर करते हुए कहा, "अबे यार ये गले लगना जरूरी है क्या? दूर हो अब! क्या रुलाएगी क्या? मैं रोई ना तो बाढ़ आ जाएगी!" उसने पूजा के गाल पर हाथ रखकर कहा, "तू मेरी दोस्त हमेशा रहेगी, इसलिए ये रोना-धोना बंद कर। समझी? ना? तू तो हँसती-मुस्कुराती हुई अच्छी लगती है। अपना ध्यान रखना।" अपने बैग से कुछ पैसे निकालकर उसने पूजा को दिए, "ये ले और कुछ सामान दिला देना छोटी को, और उसकी स्कूल की फीस दे देना।" काशी ने सबसे छुपाकर धीरे से पैसे दिए।
पूजा ने कहा, "नहीं, मैं ये नहीं ले सकती!"
काशी ने कहा, "नहीं, चुपचाप रख ले!"
वैदेही ने कहा, "चल काशी!"
ज्ञान ने कहा, "कैसे जाएगी आंटी? ज्ञान दे रही है ना लोगों को, इसे तो यही काम है। मिलने दो दोनों को!" काशी की ओर देखकर बोला, "ओह मैडम! ये ऑटो वाले अंकल तुम्हारे चाचा नहीं हैं जो तुम्हारा वेट करेंगे। चलो बैठो!"
काशी ने पूजा को अलविदा कहा और ऑटो में आकर बैठ गई। वैदेही भी बैठ चुकी थी। वैदेही की आँखों में हल्की नमी आ चुकी थी, लेकिन काशी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। वैदेही ने पीछे देखा तो सब लोग उन्हें ही देख रहे थे। ज्ञान लगातार काशी की ओर देख रहा था, लेकिन काशी अपनी ही धुन में अंदर सीट से टेक लगाकर बैठी हुई थी।
काशी को गुस्सा बहुत आता था। हर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा उसकी नाक पर ही सवार रहता था। कुछ दूर चलने के बाद अचानक ही ऑटो के ब्रेक लगे। काशी ने वैदेही को देखा और ड्राइवर से कहा, "क्या हुआ अंकल?"
ड्राइवर ने कहा, "मैडम, लगता है गाड़ी खराब हो गई। आप थोड़ी देर रुकिए, मैं चेक करके बताता हूँ।"
काशी ने अपनी साइड का दरवाजा खोला और बाहर निकलकर देखा, "आप एक बार चेक कर लीजिए ना! फिर बताओ कितना टाइम लगेगा? हम दूसरा ऑटो ले लेते हैं!"
ड्राइवर ने कहा, "जी मैडम, थोड़ा इंतज़ार कीजिए। अभी देखकर बताता हूँ।"
काशी ऑटो से लगकर खड़ी हुई थी। वह आस-पास से निकल रही गाड़ियों को देख रही थी, जो कभी तेज तो कभी धीरे चल रही थीं। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। काशी ने अपनी नज़रें अपने बगल में की तो उसके बगल में वैदेही खड़ी हुई थी। काशी ने उन्हें देखा और कहा,
वैदेही ने कहा, "अब हम कहाँ चलेंगे काशी? यहां हम किसी को नहीं जानते।"
काशी ने कहा, "हाँ, वो तो है, लेकिन जहाँ हम जाएँगे ना, उन्हें आप बहुत अच्छे से जानती हैं। डोंट वरी।" वैदेही को देखकर आगे बढ़ते हुए, "कुछ खाओगे क्या?"
वैदेही ने काशी को देखा और कहा, "मेरा मन नहीं है। तुम खा लो। सामने आइसक्रीम है, तुम खा लो।"
काशी ने वैदेही को देखा और काम कर रहे ड्राइवर को देखते हुए कहा, "अंकल, दुनियाँ भर का समय इसी में लगेगा क्या?"
ड्राइवर ने कहा, "हाँ, बेटा, लगता नहीं ये ठीक होगा। मुझे और अब टाइम भी बहुत लगेगा, इसलिए आप दूसरा ऑटो ले लो।"
काशी ने कहा, "अजीब नहीं हो! एक घंटा खराब करके फिर बोल रहे हो!" इतना बोल काशी ने ड्राइवर को देखा और उसे घूरने लगी।
वैदेही ने कहा, "तुम यहीं रुक। मैं कुछ लेकर आती हूँ तुम्हारे लिए।"
काशी ने कहा, "हाँ, जाओ। तब तक मैं सामान निकाल लेती हूँ।"
वैदेही ने कहा, "ऑटो भी देखती हूँ मैं।"
काशी ने कहा, "तुम जाओ, मैं देख लूँगी।" इतना बोल काशी ने वैदेही को जाने को बोला और खुद ऑटो से सामान निकालने लगी।
वैदेही सामने देखते हुए रोड पार कर रही थी। उसने आस-पास देखा और सामने की ओर देखा तो आइसक्रीम वाला दूसरी साइड था। वैदेही उस ओर आई। जल्दी से दो आइसक्रीम लेकर वापस आई तो उसका पल्लू अचानक वहाँ रोड पर लगे डिवाइडर में उलझ गया। वैदेही ने आइसक्रीम को एक हाथ में लिया और एक हाथ से अपने पल्लू को निकाला और जल्दीबाजी में आगे बढ़ी कि सामने से आ रही कार, जो कि काफी तेज थी, वैदेही डर की वजह से वहीं रुक गई। कार वाले ने वैदेही को रुका हुआ देखा तो उसने तुरंत जोर से ब्रेक लगाकर गाड़ी रोक दी। गाड़ी बिलकुल वैदेही के पैरों के पास आकर रुकी थी। वैदेही के हाथ से डर के मारे आइसक्रीम नीचे गिर गई थी।
कार चला रहे लड़के ने सामने खड़ी वैदेही को देखा तो वह तुरंत बाहर आ गया। उसने वैदेही को देखते हुए कहा, "आप ठीक हैं ना मैम? आपको लगी तो नहीं ना? सॉरी, वो मेरा ध्यान नहीं रहा।"
काशी की नज़र अचानक अपनी माँ पर गई तो उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। काशी तुरंत भागकर वैदेही के पास आई और उसे सही से देखते हुए कहा, "आप ठीक हो ना?"
वैदेही ने कहा, "मैं ठीक हूँ।"
लड़के ने कहा, "सॉरी।"
वैदेही कुछ बोलती उससे पहले काशी ने उस लड़के की ओर देखा और जोर से खींचकर उसके गाल पर थप्पड़ मार दिया। काशी ने जैसे ही थप्पड़ मारा तो वैदेही ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया, "क्या कर रही है काशी?" वैदेही ने काशी को देखते हुए कहा।
काशी ने कहा, "आप रुकिए, मैं देखती हूँ।" इतना बोल काशी ने उस लड़के को देखा तो वो लड़का अपना चेहरा नीचे करके गाल पर हाथ रखे हुए खड़ा था। उसने गुस्से से काशी को देखा। तो काशी ने गुस्से से उसकी कॉलर को पकड़ते हुए कहा, "लगते तो किसी अमीर घर से हो। तुम्हारे घर वालों ने तुम्हें सिखाया नहीं है क्या? किसी को भी उड़ा के चले जाओगे! इंसान हो ना, तमीज़ नाम की चीज़ नहीं है! तुम अमीर लोग खुद को समझते क्या हो, मुझे ये बताओ!"
उस लड़के की आँखें गुस्से से एकदम लाल हो गई थीं। उसके हाथों की नसें तनी हुई थीं। उस लड़के ने काशी के हाथ को पकड़ा और खुद से जोर से दूर किया और उंगली दिखाते हुए कहा, "शिव राणा किसी की नहीं सुनता। मैंने गलती नहीं की, फिर भी मैंने उनसे सॉरी बोला है। तुम लड़की हो, वरना मैं क्या करता, ये तो तुम्हें अच्छे से पता चल जाता कि शिव राणा से पंगा लेना कितना भारी पड़ता है!" इतना बोल शिव ने काशी को घूरा और खुद से धक्का देते हुए अपनी गाड़ी के पास आया ही था कि तभी वैदेही ने उसके हाथ को पकड़ लिया।
शिव ने वैदेही को देखा और कहा, "देखिए मैम, आप…" शिव इतना ही कहा था कि तभी वैदेही ने शिव के गाल पर हाथ रखकर कहा, "काशी की तरफ़ से मैं सॉरी बोलती हूँ।" काशी की ओर देखकर बोली, "काशी, गलती मेरी ही थी। तुमने बिना पूछे उन पर हाथ उठा दिया। ऐसे कौन उठाता है बेटा?"
काशी ने नीचे जमीन पर बिखरी आइसक्रीम को देखते हुए कहा, "मेरी आइसक्रीम…"
शिव ने जैसे ही काशी के मुँह से आइसक्रीम का नाम सुना तो उसका गुस्सा और भी बढ़ गया। उसे लगा कि काशी उसे सॉरी बोलेगी, लेकिन उसने तो अपनी आइसक्रीम के लिए रोना शुरू कर दिया! शिव ने वैदेही को देखा और कहा, "हो सके तो मैम, अपनी बहन को हॉस्पिटल ले जाएँगा।"
वैदेही ने जैसे ही काशी के बारे में सुना तो उसे हँसी आ गई। उसने हँसते हुए कहा, "मैं उसकी बहन नहीं, माँ हूँ।" इतना बोल उन्होंने काशी की ओर देखा और कहा, "काशी, सॉरी तो बोलो!"
कोई कुछ बोलता उससे पहले काशी ने चिल्लाते हुए कहा, "ओह भाई! वीडियो काहे बना रहे हो? मुझे फेमस करने का विचार है या इन भाई साहब को?" इतना बोल काशी ने भीड़ में खड़े उस लड़के को घूरा। सब के सब काशी की बात सुनकर उस लड़के की ओर देखने लगे। उस लड़के ने अपना फोन साइड में पकड़ा हुआ था। उसे देखकर लग नहीं रहा था कि वह वीडियो बना रहा है। काशी की बात सुनकर शिव ने भी उसे घूरा तो उस लड़के ने तुरंत फोन नीचे कर लिया।
काशी ने कहा, "कहाँ फेमस करने वाले हो? खुद के लाइक-व्यू बढ़ जाएँगे, मेरी तारीफ हो जाएगी कि क्या बहादुर लड़की है! और इन भाई साहब के लिए आपने मुसीबत खड़ी कर दी। डिलीट करो उसे!" इतना बोल काशी ने शिव को देखा और आँखें दिखाते हुए कहा, "आगे से देखकर चलाना! अगली बार मैं या मम्मा नहीं होंगी!" इतना बोल काशी ने आइसक्रीम को देखा और मुँह बनाते हुए वहाँ से वैदेही का हाथ पकड़कर चली गई।
दोनों रोड के पास आकर ऑटो का इंतज़ार करने लगीं, लेकिन कोई ऑटो रुक ही नहीं रहा था। और काशी को पहले से ही गुस्सा आ रहा था। उसने एक सामने से आ रहे ऑटो को इशारा किया तो वो भी नहीं रुका। तो काशी ने उस ऑटो को पीछे से लात मार दी। तो वहीं गाड़ी में बैठे शिव ने उसे देखा तो उसे काशी को परेशान देखकर हँसी आ गई। उसने कार स्टार्ट की और काशी के आगे आकर मुस्कुराते हुए कहा, "हाथ देकर आराम से बोलोगी तो कोई तुम पर तरस खाकर रोक भी दे… वरना खड़ी रहो इस धूप में!" इतना बोल शिव ने काशी को घूरते हुए अपनी आँखों पर चश्मा लगा लिया।
To be continue.........
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रिया पाराशर