Wife With Benefits - Chapter 2
सुबह मेरी आँख 7:00 बजे के करीब खुली। मैं हमेशा इससे भी जल्दी उठती थी मगर रात को लेट सोई थी तो इस वजह से मेरी आँख लेट खुली। उठते ही मैंने अपने बगल में देखा, यह सोचकर कि क्या पता मेरा पति रात को आ गया हो और मेरे बगल में लेट गया हो, मगर ऐसा कुछ भी नहीं था। मेरा बिस्तर ख़ाली था और वहाँ बस गुलाब की कुछ पंखुड़ियों के अलावा और कुछ भी नहीं था। मैं उठी और नहाने के लिए चली गई।
नहाते वक़्त मुझे बस एक ही चीज़ खाए जा रही थी कि आख़िर वह रात को रुका कहाँ होगा और ऐसा कौन सा ज़रूरी काम होगा कि वह शादी की पहली रात अपनी पत्नी को अकेले छोड़कर चला गया और वापस आने के बारे में भी नहीं सोचा। वापस आना तो दूर की बात, उसने एक बार फ़ोन करके बताया भी नहीं कि आखिर वह कर क्या रहा है और वह आज रात वापस नहीं आएगा। दुनिया में ऐसा कौन सा पति होगा जो अपनी खुबसूरत पत्नी के साथ ऐसा करता है?
मैं नहा रही थी कि तभी बाहर मेरा फ़ोन बजने लगा। मैंने तुरंत शावर बंद किया और बाहर आकर कॉल पिक किया। कॉल की दूसरी ओर मेरी सेक्रेटरी हिना थी।
"मैडम, क्या मैं आज की आपकी मीटिंग कैंसिल कर दूँ? मुझे नहीं लगता आप आज की मीटिंग में आ पाएँगी।"
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या जवाब दूँ। अगर मेरी शादी की पहली रात अच्छे से बीती होती तो शायद मैं छुट्टी कर लेती। मगर क्योंकि कुछ हुआ ही नहीं तो छुट्टी करने का कोई मतलब नहीं बनता था।
"नहीं, मैं आ रही हूँ। कोई भी मीटिंग कैंसिल नहीं होगी," यह कहकर मैंने कॉल काट दिया।
फिर मैं वापस जाने के लिए मुड़ी कि तभी मुझे दरवाजे पर किसी के ज़ोर से चीख़ने की आवाज़ सुनाई दी। जब मैं दरवाजे की तरफ मुड़ी तो वहाँ पर एक हैंडसम लड़का खड़ा था जिसे देखते ही कोई भी लड़की उस पर पूरी तरह से पागल हो जाए।
नीली आँखों वाला एक लड़का, जो दिखने में इतना खूबसूरत था कि उसकी खूबसूरती को बयाँ नहीं किया जा सकता। यह मेरा पति था। 6 फीट की हाइट, परफेक्ट बॉडी, व्हाइट कलर की टाइट शर्ट, उस पर रेड कलर की टाई और ब्लैक कलर की पेट, यह इस वक्त की उसकी आउटफिट थी।
हाँ, मेरा पति देखने में बहुत हैंडसम है, इतना कि अगर मैं भी इसे एक नॉर्मल लड़की की तरह देखूँ तो पूरी तरह से उस पर लट्टू हो जाऊँ। हालाँकि, इस वक़्त उसका चेहरा डरा हुआ लग रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे उसने कुछ ऐसा देख लिया जो उसे नहीं देखना चाहिए था।
तभी मैंने खुद को देखा और मैं समझ गई कि उस लड़के के चिल्लाने की वजह क्या है। इस वक़्त मैंने कुछ भी नहीं पहन रखा था। मैं पूरी तरह से बिना कपड़ों के थी। और वह मुझे इस तरह से देखकर ही चिल्लाया था। थोड़ी ही देर में मेरे गाल शर्म से लाल हो गए। शरीर ऐसे गरम हो गया था जैसे मैं किसी चिमनी के सामने खड़ी हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं फ़ोन उठाने के लिए इस तरह से बाहर कैसे आ गई। हाँ, मुझे पता था कि मेरे कमरे में कोई नहीं है मगर फिर भी मुझे कम से कम एक टॉवल तो ले ही लेना चाहिए था। मैंने अपनी आँखों को कसकर बंद किया और फिर दौड़कर बाथरूम की तरफ़ चली गई। थोड़ी देर बाद मैं टॉवल पहनकर बाहर आई।
"क्या तुम एक बेवकूफ़ लड़की हो? कोई इस तरह से किसी अनजान आदमी के सामने बिना कपड़ों के कैसे खड़ा हो सकता है?" उसके शब्दों में डांट थी। मेरे पति का चेहरा भी पूरी तरह से लाल था। अब यह बात मुझे नहीं पता थी कि यह गुस्से की वजह से लाल था या फिर शर्म की वजह से। क्योंकि मैं तो अभी भी अपनी बॉडी का टेंपरेचर महसूस कर सकती थी। इस वक़्त अगर कोई मुझे हाथ लगाकर देखता तो शायद उसे यही लगता है कि मुझे बुखार हुआ पड़ा है।
"मुझे लगा इस कमरे में कोई नहीं है, इसलिए ऐसे ही बाहर आ गई। अगर मुझे पता होता कि यहाँ पर कोई है तो मैं पहले से ही कुछ पहनकर बाहर निकलती," मैंने जवाब दिया। अब इसके अलावा भला मैं क्या जवाब देती? ग़लतियाँ इंसानों से ही होती हैं।
"मगर फिर भी एक अनजान आदमी के सामने इस तरह से?" उसने दोबारा मुझसे कहा।
"आखिर मैं तुम्हारे लिए कैसे अनजान हुई? तुम तो मेरे पति हो, और एक पति अपनी पत्नी को इस तरह से देख सकता है, तो इतना भी ओवररिएक्ट मत करो?" आखिरकार मैंने वह कहा जो मुझे कहना चाहिए था, क्योंकि अगर वह मेरा पति है तो इसमें ओवररिएक्ट करने वाली कोई बात नहीं थी, उसका तो मुझ पर हक़ बनता है।
"हाँ, लेकिन मेरी जगह कोई और होता तो क्या होता? तुम्हें पता है मुझे भी तुम्हें इस तरह से देखकर कितनी शर्म आ रही थी?" उसने फिर से गुस्से में अपनी बात कही।
"अगर तुम्हें शर्म आ रही थी तो तुमने अपनी आँखें बंद क्यों नहीं कर लीं? उल्टा तुम तो मुझे और भी गौर से देखने लगे थे। खासकर मेरे सीने को, यह आखिर किस तरह की शर्म है जिसमें आप सामने वाले को गौर से देखने लग जाओ?"
"क्या...क्या...क्या यह क्या कह रही हो तुम?" मैंने जो बात कही थी उसके बाद मेरे पति की ज़ुबान लड़खड़ाने लगी थी।
"वही कह रही हूँ जो मुझे कहना चाहिए? मुझे तो समझ में नहीं आ रहा तुम्हें सबसे पहले आकर मुझे सफाई देनी चाहिए थी कि कल रात तुम कहाँ पर थे, और तुम हो कि किसी और वजह से लड़ाई कर रहे हो।"
"मैं कल रात अपनी ज़रूरी मीटिंग में बिजी था, इसलिए नहीं आ पाया।"
"ज़रूरी मीटिंग? आखिर रात को ऐसी कौन सी ज़रूरी मीटिंग थी, और कौन सी ऐसी कंपनी है जो रात को ज़रूरी मीटिंग रखती है? आई नो, मैं तुम्हारे बिजनेस के बारे में ज्यादा नहीं जानती, लेकिन मैं भी एक बिजनेस गर्ल हूँ, तो मुझे भी पता है मीटिंग कौन-कौन से वक्त पर होती है। मुझे सच-सच बताओ, क्या तुम्हारा कहीं अफेयर चल रहा है?" मुझे हमेशा से स्ट्रेट फॉरवर्ड बात करने की आदत थी, और मेरे पति का यह कहना कि मैं रात को ज़रूरी मीटिंग में था, इससे यही पता चलता था कि उसका कोई अफेयर चल रहा है, और वह रात को अपने इस अफेयर के पास था।
"यह तुम क्या कुछ भी कह रही हो? मेरा किसी के साथ अफेयर नहीं चल रहा है। लगता है रात की थकावट अभी भी उतरी नहीं है। खैर छोड़ो, मैं यहाँ पर तुम्हें लेने आया था। हम अब जा रहे हैं। तुम्हारे पास आधा घंटा है, तैयार होकर नीचे आ जाना। मैं वहाँ तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।"
यह कह कर मेरा पति जाने को हुआ। मुझे अभी भी मेरे सवालों का जवाब नहीं मिला था, मैं उसे रोकना चाहती थी और पूछना चाहती थी आखिर कल रात मुझे अकेले छोड़ने के पीछे का कारण क्या था?
मैं उसके इंतजार में कितना तैयार होकर बैठी थी, मैंने शादी की भारी भरकम ड्रेस को रात के 2:00 बजे तक पहन कर रखा था। पता नहीं किस तरह के सपने देखे थे, मुझे मेरे सवालों का जवाब चाहिए था। मेरे सोते सोते वह कमरे से चला गया।
शादी की पहली रात बुरी थी, अब पहला दिन भी बुरा ही जाएगा, क्योंकि पहले दिन ही मैंने अपने पति से लड़ाई कर ली। क्या मेरा अफेयर वाली बात कहना सही था? शायद बिल्कुल भी नहीं। अगर मैं किसी सीधी-सादी बहू की तरह सोचूँ तो मुझे अपने पति से इस तरह के सवाल कभी नहीं करने चाहिए थे। क्या मतलब सवाल नहीं करने चाहिए थे? अगर वह पूरी रात से गायब था, तो एक पत्नी को पता होना चाहिए कि वह रात भर क्या कर रहा था।