Wife With Benefits Ch. 3

Wife With Benefits - Chapter 3

Posted by Aarvi Nair • Mar 08, 2025 10:03 AM

मैंने जल्दी से तैयार होना शुरू कर दिया। मेरे पास पूरे 30 मिनट थे और मुझे हर हाल में तैयार होना था। मेरे पिता को भी लगता था कि मैं एक अच्छी पत्नी नहीं बन पाऊंगी और बच्चा पैदा करने का तो दूर-दूर तक कोई चांस ही नहीं है, इसलिए वो इतना कॉन्फिडेंट थे कि सब कुछ देने को तैयार हो गए। लेकिन मैं सबको गलत साबित करके दिखाऊंगी।

मैंने अपने वॉर्डरोब से एक सिंपल सी ड्रेस निकाली। मैं जानती थी कि मेरे पति को ब्रांडेड चीजों से कोई मतलब नहीं है, इसलिए मैंने बिना सोचे-समझे एक साधारण सी ड्रेस पहनी और नीचे चली गई।

जब मैं नीचे पहुंची तो मेरे पति मेरे लिए दरवाजे के पास ही इंतजार कर रहे थे। वह काले रंग के सूट में बहुत हैंडसम लग रहा था। हालांकि मेरा उस पर कोई क्रश नहीं था, लेकिन फिर भी वह देखने में एक कमाल का हस्बैंड था। थोड़े बहुत ही रिश्तेदारों से मिलना जुलना हुआ और मैं सबसे इजाजत लेकर बाहर निकल गई।

"चलो", उसने मुझसे कहा और कार का दरवाजा खोल दिया।

मैं बिना कुछ कहे कार में बैठ गई। पूरे रास्ते हम दोनों में से किसी ने भी एक भी शब्द नहीं कहा। कार शहर से दूर एक शांत इलाके में जा रही थी। मुझे नहीं पता था कि मेरा पति कहां जा रहा है और ना ही मैं उससे पूछना चाहती थी। मुझे लग रहा था कि शायद वह मुझे अपने घर लेकर जा रहा है, और मैं वहां पर अपनी एक नई जिंदगी की शुरुआत करूंगी। भले ही वह जिंदगी थोड़ी कड़वी हो, लेकिन जिंदगी तो जिंदगी ही होती है।

तकरीबन 1 घंटे के बाद हमारी गाड़ी एक बहुत बड़े फार्म हाउस के सामने रुकी। यह फार्म हाउस इतना बड़ा था कि कोई भी आसानी से इसमें गुम हो सकता था। अगर मैं फिल्मी दुनिया की दीवानी होती तो पहली नजर में मुझे यही लगता कि मेरा पति यहां पर मुझे जान से मारना चाहता है, क्योंकि यहां पर अगर किसी को मारने की कोशिश की जाए तो वह कितना भी क्यों न चिल्ला ले, दूर-दूर तक उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था।

"यह तुम्हारा घर है?" मैंने अपने पति से पूछा।

"हां, यही मेरा घर है। मैं यहीं पर रहता हूं।"

"वाह, यह तो बहुत सुंदर है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं किसी सपने में हूं।" अब घर शानदार था तो यह तो कहना बनता ही था। हां मेरे पास भी पैसों की कमी नहीं है और ना ही मेरे डैड के पास, मगर हमने कभी किसी दूर दराज के इलाके में घर खरीदने पर अपने पैसे वेस्ट नहीं किए।

"सपने में नहीं, हकीकत में हो। चलो अब अंदर चलते हैं।" मेरे पति ने मुस्कुराते हुए कहा। मैंने जो उसकी तारीफ की थी उससे वह मन ही मन खुश हो गया था। पता नहीं लड़के इतनी जल्दी कैसे खुश हो जाते हैं?

मेरे पति ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे फार्म हाउस के अंदर लेकर चला गया। अंदर का नजारा बाहर से भी ज्यादा सुंदर था। हर तरफ एंटीक चीजें लगी हुई थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी राजा-महाराजा के महल में आ गई हूं। मानना पड़ेगा मेरे पति ने इस पूरे घर पर खुलकर खर्च किया है, बिना किसी कंजूसी के। शायद इसे शौक होगा एंटीक चीजों से घर को भरने का और खुद को इतनी आलीशान जिंदगी देने का जिसके बारे में कोई सपना भी ना देख सके। मुझे इस बात से खुशी हो रही थी कि मैं भी अब इस आलीशान जिंदगी का एक हिस्सा हूं चाहे कुछ वक्त के लिए क्यों ना सही, क्योंकि 1 साल के बाद तो मैं अपने इस पति को छोड़कर जाने वाली हूं।

"तुम यहां पर अकेले रहते हो?" मैंने अपने पति से पूछा।

"हां, मैं यहां पर अकेले ही रहता हूं। मुझे लोगों के बीच में रहना पसंद नहीं है।"

"ओह, मुझे माफ करना। मुझे नहीं पता था।" मुझे ऐसी फीलिंग आ रही है जैसे मैं किसी अनजान आदमी से ही बात कर रही हूं, जबकि शादी से पहले ही आपको अपने पति की इन सब चीजों के के बारे में पता होना चाहिए।

"कोई बात नहीं। अब तुम्हें पता चल गया है।"

तभी एक नौकरानी हमारे पास आई और उसने मेरे पति से कहा, "सर, आपके लिए नाश्ता तैयार है।"

"ठीक है, हम अभी आते हैं।" मेरे पति ने कहा।

"चलो, हम नाश्ता करते हैं।" मेरे पति ने मुझसे कहा।

हम दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठ गए और नाश्ता करने लगे। नाश्ता बहुत स्वादिष्ट था। मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा नाश्ता पहले कभी नहीं खाया था। या फिर मैंने कल रात से खाना नहीं खाया था इसलिए मुझे ही यह कुछ ज्यादा स्वादिष्ट लग रहा था।

"तुम्हें कैसा लग रहा है?" मेरे पति ने मुझसे पूछा।

"यह बहुत स्वादिष्ट है। शुक्रिया।"

"मुझे खुशी है कि तुम्हें पसंद आया।"

नाश्ता करने के बाद मेरे पति ने मुझसे कहा, "आज मैं तुम्हें पूरा फार्म हाउस घुमाता हूं।"

"यह बहुत अच्छा होगा।" मैंने कहा।

और फिर मेरे पति ने मुझे पूरा फार्म हाउस घुमाया। फार्म हाउस बहुत बड़ा था और उसमें बहुत सारे अलग-अलग कमरे थे। एक कमरा लाइब्रेरी था जिसमें हजारों किताबें थी। एक कमरा गेमिंग रूम था जिसमें हर तरह के गेम्स थे। एक कमरा मूवी थिएटर था जिसमें हर तरह की फिल्में थी। और एक कमरा स्विमिंग पूल था।

शाम हो गई थी और हम दोनों फार्म हाउस के बाहर बैठे थे। आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे और ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी।

"तुम्हें कैसा लग रहा है यहां पर?" मेरे पति ने मुझसे पूछा।

"यह बहुत सुंदर है। मैं यहां पर बहुत खुश हूं।" मैंने कहा।

"मुझे खुशी है कि तुम्हें पसंद आया।"

तभी मेरे पति ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, "आशिका, मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूं।"

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मुझे नहीं पता था कि मेरा पति क्या कहने वाला है। मैं अपने दिमाग के घोड़े भी दौड़ा रही थी ताकि मैं सही से गैस कर पाऊं आखिर उसे किस बारे में बात करनी होगी, उसके चेहरे को देखकर कहीं से भी ऐसे नहीं लग रहा था जैसे वह प्यार भरी बात करने वाला है, जरूर उसकी बात मुझे झटका देने वाली ही होगी।

“बताओ तुम्हें क्या बताना है?” मैंने उसे बताने के लिए कहा।

उसके चेहरे का रंग बदलने लगा, चेहरा लाल हो गया और उसके हाथ बार-बार उसकी गर्दन पर घूमने लगे। जरूर यह ऐसी बात थी जिसे वह खुलकर नहीं बता सकता, इसे बताने से पहले उसके दिमाग में भी एक जंग चल रही है जो या तो उसे बताने के लिए कह रही होगी या नहीं बताने के लिए कह रही होगी।

“तुम सही थी।” उसने कहा।

मैं सही थी? आखिर में किस मामले में सही थी?

“तुम आखिर किस चीज की बात कर रहे हो?”

“तुमने सुबह मुझसे कहा था क्या मेरा कहीं अफेयर चल रहा है, तो तुम इस मामले में बिल्कुल सही थी। इसे अफेयर कहना गलत होगा क्योंकि मैं उस लड़की से प्यार करता हूं, वह भी तुम्हारे आने से पहले, मैं पिछले 4 सालों से उसके साथ रिलेशन में हूं। कल रात उसकी मॉम बीमार हो गई थी और उसकी लाइफ में उसकी मॉम और उसके छोटे भाई के अलावा और कोई नहीं है, उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था तो मुझे हीं जाना पड़ा और पूरी रात वहीं पर निकल गई।”

मुझे समझ में नहीं आ रहा था मेरा पति आखिर क्या बकवास कर रहा है। मैंने सुबह इस तरह से भी नहीं कहा था कि मुझे सामने से यही सुनने को मिले कि हां मेरा अफेयर चल रहा है। वह बस एक टोंट था, एक टोंट जो सिर्फ इसलिए सामने वाले को सुनाया जाता है क्योंकि वह देरी से घर पर आया था। वह भी अपनी शादी की पहली रात को इग्नोर करके जहां उसे अपनी पत्नी की बाहों में होना चाहिए था। मेरी मुठिया गुस्से में बंद थी और मेरे होंठ बुरी तरह से कांप रहे थे। मेरा मन कर रहा था मैं अभी के अभी एक जोरदार मुक्का अपने पति के मुंह पर दे मारूं।

“अगर ऐसा था तो तुमने मुझसे शादी क्यों की? तुम शादी के लिए मना भी कर सकते थे?” ओफकोर्स मुझे यह सवाल पूछना ही था, अगर वह पहले से ही किसी और से प्यार करता है तो मुझसे शादी करने का क्या मतलब। वह एक अमीर बिजनेसमैन है तो ऐसे भी नहीं था किसी ने जबरदस्ती उसके हाथ पकड़ कर मेरे साथ सात फेरे दिलवा दिए हो।

“क्योंकि मेरे ग्रैंडफादर ऐसा चाहते थे, जब तुम्हारा रिश्ता आया था तब मेरे ग्रैंडफादर को हार्ट अटैक आया था, डॉक्टर ने कहा था उनका ध्यान रखना जरूरी है और हम कुछ भी ऐसा नहीं कर सकते जिससे उनके इमोशंस पर फर्क पड़े। उन्होंने मुझसे यह भी नहीं पूछा क्या तुम्हें शादी करनी है या फिर नहीं, वह मुझसे बोले यह मेरे दोस्त की बेटी है, और मैंने उसे वादा किया था मेरा पोता तुम्हारी बेटी के साथ ही शादी करेगा, मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था सिवाय तुम्हें हां कहने के”

यहां कोई फिल्म चल रही है जो ग्रैंडफादर बीमार हुआ नहीं और किसी तरह के वादे के चक्कर में लड़के ने शादी के लिए हां कर दी। मैंने भी शादी के लिए हां बोली है मगर कम से कम मेरा रीज़न इतना घटिया और फ्रस्ट्रेशन से भरा हुआ नहीं है।

“मुझे लगा था जब मेरे ग्रैंडफादर की तबीयत ठीक हो जाएगी तब मैं शादी के लिए मना कर दूंगा” मेरे पति ने आगे की बात बताई “लेकिन शादी के दिन नजदीक आते गए मगर ग्रैंडफादर की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ, इसलिए मैंने सोचा जब शादी हो जाएगी तब मैं तुम्हें सारी सच्चाई बता दूंगा, मेरे ग्रैंडफादर के पास ज्यादा वक्त नहीं है, डॉक्टर ने कहा है वह बड़ी मुश्किल से एक साल और बच पाएंगे, मैं अपने ग्रैंडफादर से बहुत प्यार करता हूं और जब तक वह जिंदा है तब तक मैं उन्हे परेशान नहीं करना चाहता। बस एक साल की बात है और इसके बाद हम तलाक ले लेंगे।”

मेरा चेहरा और भी ज्यादा गुस्से से लाल हो गया था और अब मेरे हाथ भी गुस्से के मारे कांपने लगे थे। मैंने किसी मकसद के चलते शादी की थी मगर यहां पर मेरा पति है कि वह अपनी अलग ही कहानी लेकर बैठा है।

“हमारे बीच में कोई पर्सनल इमोशनल अटैचमेंट नहीं है, और ना ही मैंने किसी तरह के इमोशनल अटैचमेंट को बनाने की कोशिश की, इसलिए जब से रिश्ता हुआ है तब से मैंने तुमसे ज्यादा फोन पर बात भी नहीं की और ना ही मैं तुमसे मिलने आया, ताकि जब मुझे तलाक लेना हुआ तो हमें ज्यादा तकलीफ ना हो, और अब शादी के बाद भी हम किसी तरह का पर्सनल अटैचमेंट नहीं बनाएंगे। हम पति-पत्नी तो रहेंगे और एक घर में भी रहेंगे लेकिन हम अपने-अपने काम पर ध्यान देंगे। कुछ महीनों तक यही सब होगा और फिर हम दोनों अलग हो जाएंगे।”

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे शरीर के आर पार तलवारों से हमला कर दिया हो या फिर किसी ने मुझे गोलियों से भून दिया हो, अगर मैंने अपने पिता से वह फालतू का वादा नहीं किया होता तो शायद यह सब सुनकर मुझे तकलीफ नहीं होती और ना ही मुझे गुस्सा आता, लेकिन इस वक्त मेरे पति ने जो भी मुझसे कहा था वह सीधे-सीधे मेरे सपनों को लगने वाला एक धक्का था, एक ऐसी धक्का जिसने मेरे सपनों को बस दूर ही नहीं धकेला बल्कि उन्हें चकनाचूर भी कर दिया।

अगर मेरा पति ही मुझ में किसी तरह की दिलचस्पी नहीं लेगा, अगर मेरे पति का पहले से ही किसी के साथ अफेयर है और वह उस लड़की से पिछले 4 सालों से जुड़ा हुआ है, तो फिर मैं कैसे अपने पति के साथ मिलकर 1 साल के अंदर अंदर एक बच्चा पैदा करूंगी। यहां पर तो यह भी नहीं है मैं किसी और के साथ किसी तरह का नाजायज रिश्ता बना कर एक बच्चे को पैदा कर लूं, क्योंकि मुझे अपने पति का ही बच्चा चाहिए था, उस पति का जिससे मैंने कानूनी तौर पर शादी की है।

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