जबरदस्ती की शादी - Chapter 1
Mumbai, रात 8 बजे
अग्रवाल भवन
" जब वो हम से शादी नहीं करना चाहते हैं तो क्यों हमे जबरदस्ती उनके गले बांध रहे हो आप लोग"
एक 19 साल की लड़की अपने सामने खड़े अपने मा बाप से रोते हुए सवाल कर रही थी!
" आप तो मुझ से बहुत प्यार करती है ना!! तो फिर क्यों जीते जी मारना चाहती है?"
वो लड़की बच्चों की तरह रोते हुए बोली
" शांत हो जाओ आशी बच्चे हम तुम्हारे भले के लिए ही कर रहे हैं तक्षक दिल का बुरा नहीं है बस थोड़ा शख्त मिजाज का है"
आशी की मां रूपाली ने कहा ओर फिर उसके पिता कर्मवीर जी ने अपनी पत्नी की बात आगे बढ़ाते हुए कहा
" ओर हमारी गुड़िया रानी तो इतनी प्यारी है कि किसी के भी दिल मै अपनी जगह बना ले!"
आप दोनों सच बोल रहे हो ना
आशी ने मासूमियत से अपनी गालों पर आए आंसू पोंछते हुए कहा तो रूपाली ने तुरंत उसे अपनी गले से लगाते हुए कहा
" हां मेरा बच्चा मैं बिल्कुल सच बोल रही हूं भला हम तुम्हारा बुरा क्यों चाहेंगे "
इस वक्त आशी ने दुल्हन का लीवाज पहन रखा था जिसमें वह स्वर्ग से आई कोई अप्सरा लग रही थी उसकी मोती जैसी नीली आंखें और उन पर घनी पलके गालों पर छाई लाली और चेरी जैसे होठ ऐसे लग रहा था भगवान ने बड़ी फुर्सत से तराशा था उसे
रूपाली जी ने आशी को बेड पर बैठाया और उसका touch up करने लगी क्योंकि रोने के कारण उसका make अप खराब हो गया था
कुछ देर बाद
बारात आ गई है रूपाली दी!
रूपाली जी की देवरानी स्वरा ने कहा...
आशी ने एक नजर स्वरा को देखा ओर फिर उठ कर उनके गले लगते हुए बोली
" बहुत डर लग रहा है चाची जी!"
स्वरा ने आशी की पीठ सहलाते हुए कहा
" कुछ नहीं होगा बच्चे सब ठीक होगा आगे तुम्हे बहुत खुश रखेगा तुम्हारा होने वाला पति बस शर्त एक है कि तुम भी उसे खुश रखो!"
आशी ने हा मै सर हिलाया तो रूपाली जी ने कहा
रो मत फिर से मेक अप खराब हो जाएगा
ओर स्वरा तुम ले आना इसे मै जा रही हु बाहर मेहमानों का welcome भी करना है ना...
Marrige hall..
कर्मवीर जी ओर राजवीर जी ( चाचा जी) मिल कर मेहमानों का welcome कर रहे थे और उन्ही के पास राजवीर जी के बेटा " साहिल खड़ा था जिसकी उम्र 18 साल है!"
रूपाली जी भी उनके पास आकर सबका welcome करने लगी
तक्षक अंदर आकर गुस्से में सोफे पर बैठा और अपने फोन मै बिजी हो गया उसे ये सब बहुत अजीब लग रहा था... उसे अपनी लाइफ मै शादी नहीं करनी चाहती ओर उसके घर वाले उसके पीछे हाथ धो कर पड़े थे
" महिमा रायजादा" तक्षक की मां
" धर्मेश रायजादा" तक्षक के पिता
" हर्ष रायजादा " तक्षक का छोटा भाई...
हर्ष बहुत ज्यादा एक्साइटेड लग रहा था अपने बड़े भाई की शादी को लेकर..
महिमा जी भी काफी हद तक खुश थी उनके बेटे की ज़िंदगी मै भी खुशियां आएंगी...
थोड़ी देर बाद
मंडप सज चुका था और शादी की विधियां शुरू हो गई
स्वरा जी आशी को लेकर आई और तक्षक के बगल में मंडप मै बैठा दिया
आशी का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी नज़रे बार बार अपने पास बैठे तक्षक की तरफ उठ रही थी जो उसे नजर भर के भी नहीं देख रहा था...
देखते ही देखते शादी की सारी विधियां सम्पन्न हो गई..
ओर तक्षक और आशी दोनों ने सब बड़ों के एक एक कर के आशीर्वाद लिए...
आशी ने एक नजर भर के अपने पूरे घर को देखा जिसमें उसने हंसते खेलते हुए पूरा बचपन गुजारा था...
यह सोचकर कि अब वो यहां से जा रही है आशि की आंखें नम हो चुकी थी..
साहिल ने आगे बढ़कर आशि को गले लगा लिया हंसी ने उसके बाल सहलाते हुए कहा बहुत याद आएगी मुझे तुम्हारी...
साहिल ने भी भरे गले से कहा
मुझे भी दी...!
ओर दोनों बहन भाई एक साथ रो पड़े...
रूपाली जी और कर्मवीर जी दोनों अपनी गुड़िया को बहुत प्यार करते थे उनके आंसु भी उनके गालों पर आ चुके थे
तक्षक ने अपनी रिस्ट वॉच को देखते हुए कहा कब तक यह फैमिली ड्रामा झेलना पड़ेगा हमें...
हर्ष ने उसका कंधा पढ़ते हुए कहा
" भाई क्या बोल रहे हो! चुप हो जाओ.. हे कोई ड्रामा नहीं है.. वो अपना घर छोड़ रही है अपने घर वाले छोड़ रही है और आपको ड्रामा लग रहा है?"
सीरियसली... !!!
Look at her कितनी छोटी है वो अपने mumma papa के बगैर रहने का सोच कर रोना तो आएगा ना उसे...
तक्षक ने एक नजर बोरियत से आशी को देखा...
to be continued thank you so much for reading this novel...