इश्क़ का सौदागर - Chapter 2
राजू ने जल्दी से दरवाजा खोला। "रिहान ने आरिफ को गाड़ी में बिठाया," और गाड़ी लेकर अस्पताल की ओर निकल गया। थोड़ी देर बाद कार अस्पताल के बाहर रुकी। रिहान जल्दी से कार से बाहर आया। उसने अपने पिता को बाहर निकालकर अस्पताल के अंदर ले जा भाग लगाया। डॉक्टर रिहान को देखकर जल्दी से उसके पास आए। उन्होंने आरिफ को स्ट्रेचर पर लिटाया और वहाँ से उसे ऑपरेशन रूम में ले गए।
दो घंटे बाद डॉक्टर ऑपरेशन रूम से बाहर आए। रिहान, जो परेशानी से ऑपरेशन रूम के बाहर चक्कर लगा रहा था, डॉक्टर को देखकर जल्दी से उनके पास गया।
"मेरे पिता कैसे हैं? वो ठीक तो हैं ना?"
डॉक्टर रिहान को देखकर मुस्कुराकर बोले, "ठीक हैं सर। आपने उन्हें सही वक्त पर लाया था। अगर थोड़ी और देर हो जाती, तो शायद हम उन्हें बचा नहीं पाते।"
रिहान ने डॉक्टर का हाथ पकड़ लिया।
"बकवास बंद करो अपनी! अगर दोबारा मेरे पिता के लिए अपने मुँह से ऐसी बकवास निकली, तो जान ले लूँगा तुम्हारी!"
डॉक्टर रिहान का गुस्सा देखकर घबराते हुए बोले, "सॉरी सर। आप उनसे थोड़ी देर बाद मिल सकते हैं।"
डॉक्टर की बात सुनकर रिहान ने डॉक्टर को छोड़ दिया और जल्दी से वहाँ से निकल गया।
रिहान परेशानी से अपने पिता के कमरे के बाहर खड़ा था, उन्हें देख रहा था। थोड़ी देर बाद आरिफ को होश आया। एक नर्स आरिफ के कमरे से बाहर आई और रिहान को देखकर बोली, "सर को होश आ गया है। अब मिल सकते हैं।"
उस नर्स की बात सुनकर एक औरत, जो वहाँ बैठी रो रही थी, जल्दी से खड़ी हुई और आरिफ के पास चली गई। वह उनके पास बैठकर उनका हाथ पकड़ लिया। आरिफ ने अपनी आँखें खोलीं, उस औरत को देखकर बोले, "तुम क्यों रो रही हो? इतनी जल्दी मैं नहीं जाने वाला, बेगम।"
आरिफ की बात सुनकर वह औरत अपने आँसू पोछते हुए बोली, "आप बहुत बुरे हैं! आपने मुझे डरा दिया। ऐसा कोई करता है क्या? आपकी लड़ाई बेटे से थी, लेकिन आपने मुझे क्यों दुख दिया?"
आरिफ अपनी पत्नी की बात सुनकर मुस्कुराकर बोले, "क्योंकि मैंने सोचा तुम जब मुझे इतना परेशान करती हो, तो मैं भी तुम्हें थोड़ा सा परेशान करूँ।"
वह औरत आरिफ की बात सुनकर रूठते हुए बोली, "आप बहुत बुरे हैं! मुझे आपसे बात नहीं करनी।"
आरिफ अपनी पत्नी की बात सुनकर मुस्कुराने लगे। इतने में कमरे का गेट खुला और रिहान अंदर आया। आरिफ ने एक नज़र रिहान को देखकर अपनी नज़र उससे हटाई और दूसरी तरफ मुँह कर लिया। रिहान अपने पिता को मुँह फेरते देख उनके पास आया। उनके पास खड़ा होकर बोला, "आप अब कैसे हैं?"
"तुम्हें इससे क्या? मैं मरूँ या जीऊँ, तुम्हें इससे फ़र्क नहीं पड़ता, तो अब क्यों पूछ रहे हो? चल क्यों नहीं गए यहाँ से?"
रिहान अपने पिता की बात सुनकर अपनी आँखों में नमी लाते हुए बोला, "आप क्या कह रहे हैं? मैं आपको इस हालत में छोड़कर कैसे जा सकता हूँ? मैं मानता हूँ, मैं आपकी कोई बात नहीं मानता, झगड़ा करता रहता हूँ, लेकिन मैं आप दोनों से बहुत प्यार करता हूँ। आप दोनों को खोना नहीं चाहता।"
आरिफ रिहान की बात सुनकर रिहान की तरफ देखा और बोला, "तो फिर मेरी बात मान क्यों नहीं लेते? मेरी खुशी के लिए ही तुम उससे शादी कर लो। बहुत अच्छी लड़की है वो।"
"ठीक है, मैं शादी करने को तैयार हूँ, लेकिन पहले आप वादा कीजिए कि आप मुझे और माँ को छोड़कर कभी नहीं जाएँगे।"
रिहान की बात सुनकर आरिफ मुस्कुराते हुए बोले, "कभी नहीं! अगर तुम मेरी बात मान लेते हो, तो फिर मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़कर जाऊँगा।"
रिहान मुस्कुराकर बोला, "ठीक है। जैसा आप चाहें।" यह कहकर रिहान वहाँ से चला गया। आरिफ रिहान को जाता देख खुश होकर बोला, "मैं आज बहुत खुश हूँ! मुझे नहीं पता था कि मैं बीमार हो जाऊँगा तो मेरा बेटा मेरी बात मान लेगा। अगर पता होता, तो मैं पहले ही बीमार हो जाता।"
आरिफ की पत्नी आरिफ की बात सुनकर आरिफ के हाथ पर मारते हुए बोली, "शट अप! आप कैसे बात कर रहे हैं? दोबारा ऐसा कुछ मत करना, वरना मैं आपसे बहुत नाराज़ हो जाऊँगी।"
"ठीक है मेरी बेगम, नहीं करूँगा। अभी गुस्सा छोड़ो और मुझे जल्दी से ऊपर लेकर चलो।"