इश्क़ का सौदागर - Chapter 3
दो दिन बाद आज रेहान की शादी थी। आरिफ ने शादी धूमधाम से नहीं, बल्कि साधारण तरीके से करवाई थी।
आरिफ तैयार होकर रेहान के कमरे में आया। उसने देखा, रेहान और उसका दोस्त बातें कर रहे थे। आरिफ ने उन दोनों को देखकर कहा, "यह क्या? तुम दोनों बातें करने में लगे हो? चलो जल्दी, वहाँ पर सब हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे।"
"और तुम दोनों हर वक्त साथ रहते हो, तब भी तुम्हारी बातें खत्म नहीं होतीं?"
"रेहान, डैड, आप क्यों परेशान हो रहे हैं? हम अभी आ रहे हैं। आप चलिए।"
"आरिफ, नहीं। तुम अभी मेरे साथ चलो, वरना बहुत टाइम लगाओगे।"
"रेहान, मैंने कहा ना डैड, आप चलिए। बस दो मिनट में आता हूँ।"
आरिफ ने रेहान की बात सुनकर कहा, "ठीक है। सिर्फ़ दो मिनट, समझे?"
रेहान मुस्कुराते हुए बोला, "ओके, डैड। समझ गया। आप जाइए, मैं थोड़ी देर में आता हूँ।"
आरिफ मुस्कुराते हुए वहाँ से चला गया। रेहान ने अपने दोस्त की तरफ़ देखा और बोला, "ऐसे क्या देख रहा है? ज़्यादा ही हैंडसम लग रहा हूँ क्या?"
रेहान का दोस्त बोला, "हाँ, लग रहा है। लेकिन तू ऐसा क्यों कर रहा है? जब तू शादी नहीं करना चाहता, तो अपने डैड की खुशी के लिए उसे लड़की की ज़िंदगी क्यों बर्बाद करने जा रहा है? जब तुझे शादी नहीं करनी, तो मना कर दे ना।"
रेहान ने अपना कोट का कॉलर सही करते हुए अपने दोस्त की तरफ़ मुड़ा और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला, "तुझे पता है, आजाद, मैं अपने डैड-मॉम से कितना प्यार करता हूँ। हाँ, मानता हूँ, मैं लड़ाई-झगड़ा करता हूँ और उनकी कोई बात नहीं मानता, लेकिन मैं उनको कोई तकलीफ नहीं देना चाहता। मुझे शादी नहीं करनी। यह शादी बस अपने डैड की खुशी के लिए कर रहा हूँ। और रही उस लड़की की बात, जिससे शादी हो रही है, वो मेरे लिए कुछ भी नहीं होगी; न वाइफ़, और न ही दोस्त।"
"वो मेरे लिए बस खेलने की एक गुड़िया होगी, जिससे मैं कुछ दिन खेलूँगा और फिर छोड़ दूँगा।"
आजाद रेहान की बात सुनकर परेशानी से बोला, "यह क्या बकवास कर रहा है? वो कोई खेलने के लिए गुड़िया नहीं, जीती-जागती एक लड़की है।"
रेहान आजाद की बात सुनकर अपने चेहरे पर डेविल स्माइल लाकर बोला, "देख भाई, लड़कियाँ जो होती हैं ना, वो बस मन बहलाने के लिए होती हैं, शादी करने के लिए नहीं। और वैसे भी, आजकल ऐसी लड़कियाँ कहाँ हैं जो अपने पति के अलावा किसी और मर्द को नहीं देखतीं? और वैसे ही वो लड़की होगी।"
"आजाद, तू क्या कहना चाहता है? तेरा मतलब क्या है?"
"रेहान, मेरा मतलब यह है कि आजकल की लड़कियाँ पैसों के लिए कुछ भी कर सकती हैं, चाहे वो शादीशुदा हों।"
आजाद रेहान को घूरते हुए बोला, "तुझे कभी मिला है किसी अच्छी लड़की से? जो तू ऐसा बोल रहा है?"
आजाद की बात सुनकर रेहान मुस्कुराकर बोला, "अफ़सोस भाई, ऐसी रोज़ मैं दस लड़कियों से मिलता हूँ जो मेरे साथ सोने के लिए मरती हैं, शादीशुदा होते हुए भी दूसरे मर्दों के साथ रहती हैं। इसलिए मुझे शादी में कोई इंटरेस्ट नहीं है। मेरे लिए शादी सिर्फ़ एक खेल है। कुछ दिन उसके साथ खेलूँगा और फिर उसे तलाक दे दूँगा।"
आजाद बोला, "यह तो सही नहीं है रेहान। तू ऐसे उस लड़की की ज़िंदगी बर्बाद नहीं कर सकता।"
रेहान आजाद की बात सुनकर हँसते हुए बोला, "मैं क्या उसकी ज़िंदगी बर्बाद करूँगा? वो तो खुश हो जाएगी मुझे जैसे हैंडसम लड़के को अपना पति बनाकर। और एक लड़की को क्या चाहिए? पैसा और हैंडसम लड़का, वो उसे मिल रहा है।"