Rise of the Bold Mom - Chapter 1
अहमदाबाद के एक छोटे से हॉस्पिटल में बेड पर एक लड़की जिसकी उम्र लगभग 17 या 18 साल लग रही थी। वो दर्द से तड़प रही थी। उसके पास में एक बूढ़ा कपल खड़ा जो उसे ही देख रहा था।
वो लड़की दिखने में काली और थोड़ी मोटी लग रही थी। उसका चेहरा आधा जला हुआ था। अगर रात को कोई उसे देखे तो डर जाए डॉक्टर उसे जल्दी से ऑपरेशन थिएटर में ले जा रहे थे।
"ना.नानी मां आह.मैं.मैं.मैं सच कह रही हूँ। मुझे नहीं पता मैं प. प्रेगनेंट कैसे के.कैसे हुई ? मेरी.मैं मेरी कोई गलती नहीं है। मेरा यकीन. की.कीजिए।" वो लड़की अपना फूला हुआ पेट पकड़ कर दर्द से करहाते हुए अपने सामने खड़ी औरत जो उसकी नानी थी उन्हे कहने लगी। बोलते वक्त लगातार उसकी आंखो से आंसू बेह रहे थे।
वो कुछ ही देर में बेहोश हो गई। कुछ घंटों बाद उसे जब होश आया तो उसने देखा की कोई आदमी उसका बच्चा ले कर जा रहा था। वो अपनी पूरी ताकत लगा कर अपने पास रखी मेडिकल की इकवेमेंट ट्रे फेक कर उस आदमी को मारती है। कुछ गिरने की आवाज़ सुन कर नानी का अंदर आई। जैसे ही वो अंदर आई तो उन्होंने देखा की बेड पर सोई लड़की उस आदमी से अपने बच्चे को छीनने की कोशिश कर रही थी।
नानी मां को देख वो आदमी वहां से उनको धक्का दे कर चला गया। नानी मां उस लड़की के पास गई और उसे बैठाया।
"नानी मां ये सब क्या है ? आप कहा थे और ये कोन था ? जो मुझसे मेरा बच्चा छीनने आया था और नाना जी कहा है?" उस लड़की ने अपनी आंखों में आंसू लिए अपनी नानी मां को बोली।
" निरव्या तुम्हे अब अपना बच्चा अपने नाना जी को सौंप देना चाहिए। तुम्हारे मामा नहीं चाहते की तुम इस कलंक के साथ जियो।" नानी मां उस बच्चे को घूरते हुए बोली।
"ये आप क्या कह रही है ? नानी मां आप भी एक मां हो ना आप ऐसा कैसे बोल सकती हो ? नहीं मैं अपना बच्चा किसी को नहीं दूंगी।" इतना बोल निरव्या वहां से जल्दी से भाग जाति है अपने बच्चे को ले कर।
नानी मां जल्दी से नाना जी को बोलती है की निरव्या वहां से भाग गई है।
"तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ? सुनीता तुम एक लड़की पर नजर नहीं रख पाई ? पहले उसकी मां भाग गई और इसे यहां हमारे सर पर थोप गई। ये भी अपने मां बाप की तरह निकली हमारा नाक कटा दिया।" विजेंद्र राठौड़ ने अपनी पत्नी से कहा और वहां से चले गए।
हॉपिटल से बड़ी मुश्किल से निरव्या बाहर निकलती है। जैसे ही वो बाहर निकली वो एक लड़के से टकरा गई। जैसे ही उसका चेहरा निरव्या के सामने आया निरव्या वहीं जम गई। ये वहीं चेहरा था जिसे निरव्या अपने हर सपने में देखना चाहती थी।
विराट वालिया एक ऐसा लड़का जो उसके लिए उसकी दुनिया से कम नहीं था। उसके लिए निरव्या जान भी दे सकती थी। वो हमेशा ही विराट के आगे पीछे घूमती रहती। ये बात सभी को पता थी की निरव्या विराट को कितना चाहती है। निरव्या एक खुश मिजाज़ लड़की थी। मस्ती खोर जो मन में वो मुंह पर ऐसा ही अंदाज था उसका। हालाकि उसे देखने से कोई पसंद नहीं किया था। पर इस बात को कभी उसने दिल पर नहीं लिया था। लोगों की गिरी हुई नजरे और बाते कभी उसके कॉन्फिडेंस को गिरा नहीं सका।
"तुम भाग रही हो?" विराट ने अपनी ठंडी आवाज़ में कहा।
निरव्या के हाथ पर ठंडे हो गए।
"ह. हा.न ना में तो वो.।" निरव्या को लगा उसके गले से कोई आवाज़ ही नहीं निकल रही।
"चुप ! निकल जाओ यहां से और फिर अपनी भद्दी शक्ल कभी दुबारा इस शहर में मत लाना। तुम एक धोखेबाज और केरेक्टर लेस लड़की का यहां कोई काम नहीं है, और ये लो पैसे अपने इस गंदे खून को अपने साथ ले जाना।" विराट की बेहद गुस्से से भरी आवाज़ सुन कर निरव्या की आंखो में आंसू आ गए।
विराट ने कभी उसे इस तरीके से बात नहीं की थी। भले कोई उसे पसंद ना करता हो लेकिन विराट हमेशा उसके साथ प्यार से पेश आता था। वो उसके स्कूल में जब भी आता सभी लड़कियां आहें भरने लगती। विराट निरव्या से 2 साल बड़ा था। इसलिए कॉलेज में पढ़ता था। लेकिन अनामिका को पिक करने कभी कबार आ जाया करता। दिखने में वो किसी मॉडल से कम नहीं था।
"मैंने कुछ गलत नहीं किया है। विराट मेरा यकीन."इससे पहले की निरव्या कुछ आगे बोलती विराट उसके मुंह पर पैसे मार कर वहां से चला जाता है। अभी निरव्या को उन पैसों की जरूरत थी। वो आंखो में आंसू लिए जल्दी से पैसे उठाती है और वहां से निकल जाती है।
टैक्सी में बैठ कर निरव्या अपने बच्चे को देखते हुऐ अपनी जिंदगी के बारे में सोच रही थी। उसके मां पापा उसके जन्म लेते ही उसे इसके मामा जी के घर छोड़ गए। उसकी मामी ने उसके गोरे रंग को काले परत में छिपा दिया और ना जाने क्या क्या किया,और अब उसे बिना पता चले की कोन है उसका बाप वो एक बच्चे की मां बन चुकी थी।
"भैया क्या आप मुझे प्लीज थोड़ी देर अपना फ़ोन दे सकते हो ? प्लीज़ बस एक कॉल करना है।" निरव्या ने रुआसा हो कर कहा तो टैक्सी ड्राइवर ने उसे फ़ोन दे दिया।
"हेलो टीना ध्यान से सुन मेरी बात मेरे कुछ कपड़े, मेरे सारे डॉक्यूमेंट, पासपोर्ट और एक फ़ोन एयरपोर्ट पर आधे घंटे पर ले कर आजा और एक बात का खास खयाल रखना घर पर किसी को पता ना चले समझी ना।" निरव्या ने बेचैन आवाज़ में कहा।
"अरे हाँ, हाँ बिलकुल माय डार्लिंग रीटा अभी आती हूं। फिर जाएंगे पार्टी में ओके बेबी बाय।" टीना की बात सुन कर निरव्या समझ गई की टीना के पास अभी कोई घर का मेंबर होगा इसलिए वो ऐसा बोल रही थी। कॉल काटने के बाद निरव्या अपने गोद में सोए बच्चे को गौर से देख रही थी। वो जल्द से जल्द उस जगह से निकल जाना चाहती थी। वो जानती थी की उसके बच्चे को उससे छीनने के लिए उसे नाना जी एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे थे।
कुछ देर बाद एयरपोर्ट पर पोहोच कर निरव्या डरे हुए चेहरे के साथ इधर उधर देख रही थी तभी उसे दूर से टीना दौड़ते हुए आती दिखाई दे रही थी।
"धीरे चलो दौड़ क्यू रही हो गिर गई तो गई समझो।" निरव्या ने उसे हल्के से मारते हुए कहा।
"अरे दीदी वो दादू और पापा की फौज आपको ढूंढ रही है। मेरा तो पता नहीं गई की नहीं गई लेकिन आप जल्दी निकलो वरना राम नाम सत्य है। सुनो मेरी फ्रेंड से बोल कर मैंने आपकी ऑस्ट्रेलिया की टिकिट करा दी है। अब जाओ जल्दी और हाँ मुझे भूल मत जाना और सबसे इमोर्टंट बात मेरे भांजे को मेरी बहादुरी के किस्से सुनाते रहना ओके। आखिर उसे भी तो पता चले की उसकी मासी क्या चीज़ थी।" टीना की नॉन स्टॉप बक बक सुन कर निरव्या को अब रोना आ रहा था।
उसकी छोटी बहन इस सिचवेशन में भी इतना बिंदास कैसे बोल सकती थी।
निरव्या अपनी फ्लाइट पर चेकिन कर चुकी थी अपनी सीट पर बैठने के बाद वो अपने बेटे को आराम से सुलाती है।
"बेटा मम्मा आपसे प्रोमिस करती है आपको कभी पापा की कमी होने नहीं देगी। और जिन लोगो ने आपको और आपकी मम्मा को परेशान किया है उनसे बदला जरूर लूंगी।" निरव्या की आंखे जो खुशी से भरी होती थी आज खाली खाली सी थी।
रह रह कर उसे विराट की बाते चुभ रही थी।
"किसी ने क्या खूब कहा है वक्त ए मरहम जख्म भरपाई का तू नासूर बन गया जब लगा रोग इश्क ए वफाई का।"
बोलते बोलते निरव्या की आवाज़ में नमी आ गई,वो अपना ध्यान भटकने के लिए हेडफोन लगा कर अपने बेटे के सिर पर हाथ फेरने लगी।
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