Contract Marriage with My Boss Ch. 1

Contract Marriage with My Boss - Chapter 1

Posted by Simran Ansari • Mar 15, 2025 05:26 PM

"हे सुहानी!! यहां पर खड़े होकर क्या सोच रही हो? चलो... अब सोचने का टाइम नहीं है क्योंकि डिसीजन तो तुमने पहले ही ले लिया है ना?" एक बहुत ही बड़ी सी बिल्डिंग के मेन गेट पर कुछ सोचती हुई, एकदम खोई हुई सी खड़ी एक लड़की के कंधे पर पीछे से दूसरी लड़की ने हाथ रखते हुए कहा।

तो उसका ध्यान उस लड़की की तरफ हुआ और उसने कहा, "हां निकिता! चल रही हूं मैं। कौन सा मना कर रही हूं? वैसे मना कर भी नहीं सकती हूं। कोई और ऑप्शन भी कहां है मेरे पास..."

आखिरी सेंटेंस उस लड़की ने बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा। उसने एकदम नॉर्मल ऑफिस वियर, कैजुअल कपड़े पहने हुए थे और उसके साथ वाली लड़की के कपड़े भी कुछ वैसे ही थे। उन दोनों लड़कियों की उम्र लगभग बराबर की लग रही थी और वे दोनों ही देखने में 22-23 साल से ज्यादा की नहीं लग रही थीं।

लेकिन निकिता देखने में नॉर्मल थी जबकि सुहानी दिखने में काफी सुंदर थी। उसका वह गोल चेहरा, छोटी सी नाक और सबसे ज्यादा तो उसकी बड़ी-बड़ी खूबसूरत भूरी आंखें, जिनमें ना जाने कितने इमोशन नज़र आते थे। और वह ज्यादातर मुस्कुराती ही रहती थी हर सिचुएशन में, जिससे वह और भी प्यारी लगती थी।

लेकिन आज उसके चेहरे से वह मुस्कुराहट गायब थी और वह थोड़ी परेशान लग रही थी। उसके माथे पर बल पड़े हुए थे, लेकिन परेशान से ज्यादा वह किसी बात को लेकर कंफ्यूज लग रही थी, शायद अपने उसी डिसीजन को लेकर जो कि उसने अभी लिया था।

उसके पीछे वाली लड़की भी थोड़ी सीरियस ही नज़र आ रही थी। और वे दोनों ही उस जगह से थोड़ा सा आगे बढ़ीं। तभी एक ब्लैक चमचमाती मर्सिडीज कार एकदम उनके सामने आकर रुकी और उसका दरवाजा खुला।

अपने सामने आकर रुकी उस कार को देखकर उन दोनों लड़कियों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर निकिता ने सुहानी की तरफ देखकर धीरे से अपना सिर हिलाया। और एक गहरी सांस छोड़ती हुई सुहानी उस कार के खुले हुए दरवाजे के अंदर चली गई। और फिर उसके बैठने के बाद निकिता भी उसके साथ ही उस कार की बैक सीट पर बैठ गई।

कुछ देर बाद;

वह दोनों लड़कियां एक प्राइवेट होटल रूम में बड़े से काउच पर बैठी हुई थीं। और वह रूम काफी ज्यादा लग्जरियस लग रहा था, जो कि किसी भी नॉर्मल होटल रूम के हिसाब से काफी ज्यादा बड़ा था। और काउच पर बैठी हुई वे दोनों लड़कियां थोड़ी एक्साइटमेंट से इधर-उधर देखकर वहां की सारी चीजें नोटिस कर रही थीं।

तभी सुहानी ने धीमी आवाज में निकिता से पूछा,

"यार निकि! हम दोनों सही जगह पर तो आए हैं ना?"

निकिता ने भी उसकी बात का जवाब देते हुए कहा,

"हां, अब वो बॉडीगार्ड यहां पर ही छोड़ कर गया है हमें, तो सही जगह ही होगी। कौन सा हम खुद से आए हैं? सब कुछ उसकी ऑर्डर से ही हो रहा होगा ना।"

उसकी बात पर एग्री करते हुए सुहानी ने भी धीरे से हां में अपना सिर हिलाया। और वह शायद कुछ और बोलने ही वाली थी कि तभी बाहर की तरफ से उस रूम का दरवाजा खुला।

दरवाजे खुलने की आवाज सुनकर उन दोनों ने एक साथ अपना सिर घुमाकर दरवाजे की तरफ देखा और उन्हें दरवाजे से अंदर आते हुए चार लोग नज़र आए।

जिनमें से सबसे आगे जो लड़का था, वह दिखने में बहुत ही ज्यादा हैंडसम लग रहा था। उसकी उम्र यही कोई 25-26 साल ही लग रही थी।

उसने डार्क ब्लू कलर का काफी महंगा दिखने वाला डिजाइनर थ्री पीस सूट पहना हुआ था, और ब्लू कोट और वास्कोट के अंदर उसने वाइट शर्ट पहनी हुई थी जिसके ऊपर की दो बटन खुले थे। वह लड़का हैंडसम के साथ-साथ बहुत ज्यादा हॉट भी लग रहा था अपने लुक में, लेकिन उसके चेहरे पर कोई भी एक्सप्रेशन नहीं था और वह बहुत ही ज्यादा सीरियस लग रहा था किसी बात को लेकर... वह शहर के सबसे बड़े और जाने-माने बिल्डर्स में से एक था, देवांश सिंह राठौर, और बहुत ही जल्द राठौर इंडस्ट्रीज का होने वाला मालिक भी...

इसके अलावा उसके साथ एक और आदमी था जिसने एकदम फॉर्मल कपड़े पहने हुए थे, हाथ में दो मोबाइल फ़ोन और कुछ सामान था। उसके पीछे एक और आदमी था जो कि देखने में वकील लग रहा था क्योंकि उसने वकील की तरह ही काला कोट पहना हुआ था और वह काफी प्रोफेशनल भी लग रहा था। और उन तीनों के पीछे एक काफी लंबा-चौड़ा सा दिखने वाला आदमी था जिसने ग्रे-ब्लैक कलर की ड्रेस जैसे कपड़े पहने हुए थे और वह दिखने में एक बॉडीगार्ड लग रहा था।

वह बॉडीगार्ड वहीं दरवाजे के पास रुक गया और बाकी तीन लोग आगे आ गए थे। और उन तीनों को देखते हुए निकिता और सुहानी दोनों एकदम ही अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गईं।

दोनों लड़कियों की इस तरह से उठकर खड़े होने पर देवांश ने एक नज़र उन दोनों की तरफ देखी और फिर सामने वाले सिंगल सोफे पर अपने लेग क्रॉस करके एकदम किसी राजा वाले एटीट्यूड में वहां पर बैठ गया। उसका औरा बहुत ही ज्यादा स्ट्रांग था और उसकी आंखों में एक गहराई नज़र आ रही थी क्योंकि उसकी आंखें एकदम डार्क ब्लैक कलर की थीं।

"बस एटीट्यूड में कमी ना आए कभी... मिस्टर एटीट्यूड किंग!" उसका एटीट्यूड देखकर सुहानी ने अपने मुंह में ही बुदबुदाते हुए कहा।

सुहानी ने यह बात भले ही धीमी आवाज में कही, लेकिन उसके बगल में ही खड़ी निकिता को यह बात सुनाई दे गई। तो उसने हल्के से सुहानी को कोहनी मारते हुए कहा,

"चुप कर यार! मरवाएगी क्या?"

निकिता के इस तरह से डांटने पर सुहानी ने उसकी तरफ मुंह बनाकर देखा और वह कुछ बोलने ही वाली थी कि तभी सामने बैठे उस लड़के ने उन दोनों को जैसे ऑर्डर देते हुए कहा,

"Just sit down you both! वैसे अभी थोड़ा टाइम लगेगा प्रोसीजर में, लेकिन तुम लोग खड़ी क्यों हो गई? इतनी जल्दी है क्या तुम दोनों को यहां से जाने की?"

उस लड़के की बात सुनकर निकिता तो चुपचाप बैठ गई, लेकिन सुहानी से अब चुप नहीं रहा गया और वह कुछ कदम आगे आते हुए बोली,

"कौन सा प्रोसीजर सर? और हम यहां पर क्या कर रहे हैं? हमें तो कोर्ट में होना चाहिए ना? आखिर रजिस्टर्ड मैरिज वहां से ही तो होती है।"

उसकी बात सुनकर पीछे बैठी निकिता ने अपने सिर पर हाथ मारा, जबकि सामने बैठे उस लड़के के चेहरे पर एक हल्की सी तिरछी मुस्कुराहट आ गई!

देवांश ने उसी तरह एकदम एटीट्यूड में कहा,

"कुछ ज्यादा ही पता है तुम्हें शायद मिस सुहानी, लेकिन हमारी कोई रियल कोर्ट मैरिज नहीं हो रही। हमें बस घर में सब से यह बताना है कि हमारी रजिस्टर्ड मैरिज हुई है, जबकि असल में हमारी कॉन्ट्रैक्ट मैरिज हो रही है। यह एक मैरिज कांट्रैक्ट है, just remember this, और चुपचाप साइन करो यहां पर..."

देवांश ने अपने सामने टेबल पर रखी खुली हुई उस फ़ाइल की तरफ इशारा करते हुए कहा,

"ठीक है, तुम्हें जो समझना है समझो, लेकिन अभी पहले चुपचाप पेपर्स पर साइन कर दो क्योंकि इस बारे में हमारी बात पहले ही हो चुकी है, तो अभी डिले करने का कोई मतलब नहीं बनता।"

उसके साथ आया हुआ वह वकील भी वहां पर ही खड़ा था और उसने ही वह सारे पेपर्स ओपन करके टेबल पर रखे थे।

उसकी बात सुनकर सुहानी ने कन्फ्यूजन से बड़बड़ाते हुए कहा,

"फर्क ही क्या होता है दोनों में? मेरे लिए तो दोनों ही एक जैसे हैं।"

इतना बोलते हुए सुहानी अपनी जगह से वहां टेबल की तरफ बढ़ गई जहां पर सारे पेपर रखे हुए थे।

उसकी बात सुनकर वकील ने जवाब दिया,

"बहुत बड़ा फर्क होता है मैडम! रजिस्ट्रेशन मैरिज में कोई शर्त नहीं होती और आपका रिश्ता एकदम असल पति-पत्नी की तरह ही होता है, जैसे कि नॉर्मल फेरे वाली शादी में। लेकिन कांट्रैक्ट मैरिज में सब कुछ टर्म एंड कंडीशन पर टिका होता है, जो कि आप दोनों को ही माननी होगी, जो कुछ इसमें लिखा है।"

सुहानी ने बहुत ही लापरवाही से कहा,

"हां, ठीक है ठीक है। मुझे पता है। मेरी इस बारे में बात हो गई है सर से और वैसे भी मैं मैनेज कर लूंगी।"

इतना बोलकर सुहानी ने वहां पर रखा हुआ पेन अपने हाथ में उठा लिया साइन करने के लिए...

वह साइन करने ही वाली थी कि पीछे से देवांश ने एक तरह से उसे वार्निंग देते हुए कहा,

"रुको! फिर भी एक बार सब कुछ पढ़ तो लो क्योंकि तुम्हारा यह क्लम्ज़ी बिहेवियर और लापरवाही शादी के बाद वहां पर मेरे घर में नहीं चलेगा क्योंकि सबके सामने हमें असल पति-पत्नी की तरह ही बर्ताव करना होगा और वह सब कुछ इसमें मेंशन है।"

To Be Continued...

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