Contract Marriage with My Boss Ch. 2

Contract Marriage with My Boss - Chapter 2

Posted by Simran Ansari • Mar 15, 2025 05:26 PM

सुहानी उन पेपरों पर साइन करने ही वाली थी कि पीछे से देवांश ने आवाज़ लगाई, "रुको! फिर भी एक बार सब कुछ पढ़ तो लो। तुम्हारा यह लापरवाह बर्ताव और क्लम्ज़ी बिहेवियर शादी के बाद मेरे घर में नहीं चलेगा। सबके सामने हमें असल पति-पत्नी की तरह बर्ताव करना होगा, और वो सब कुछ इसमें मेंशन है।"

"या व्हाटएवर..." सुहानी ने उसी लापरवाही से कहा और अनिच्छा से कॉन्ट्रैक्ट मैरिज के पेपर्स पर नज़र डाली। उसकी नज़र एक लाइन पर पड़ी जिसमें साफ़-साफ़ लिखा था कि "आपका राठौर परिवार और आपका पति की किसी भी प्रॉपर्टी पर कोई लीगल हक नहीं होगा।"

वह लाइन पढ़ते ही सुहानी के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कुराहट आ गई। उसने देवांश की तरफ देखा, लेकिन देवांश को इस बारे में कोई आईडिया नहीं था। यह एक सामान्य शर्त थी, जो इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट मैरिज के पेपर्स में आगे जाकर किसी भी तरह के झंझट से बचने के लिए होती है। देवांश ने यह शर्त स्पेशली ऐड नहीं करवाई थी, इसलिए उसने इस पर इतना ध्यान नहीं दिया। उसे समझ नहीं आया कि सुहानी उसे इस तरह क्यों देख रही है।

वो लाइन पढ़ते हुए सुहानी ने उसकी ओर देखकर कहा, "आपने बोला था कि मैं सिर्फ़ आप पर भरोसा कर सकता हूँ, इसीलिए आप मुझसे हेल्प ले रहे हैं। और यह तो दिख रहा है कि कितना भरोसा है, तभी तो ऐसी कंडीशन लिखी हुई हैं।"

उसकी बात पर देवांश कन्फ्यूज़ होकर बोला, "कौन सी कंडीशन है ऐसी, जिसे पढ़कर तुम्हें इतना बुरा लग गया? इसीलिए तो बोल रहा था कि एक बार पढ़ लो।"

सुहानी ने ताना मारते हुए कहा, "हाँ, पढ़ लिया। और इससे ज़्यादा पढ़ने की कोई ज़रूरत नहीं है। वैसे भी एग्ज़ाम नहीं देना है यह पढ़कर..."

उसकी बात सुनकर देवांश ने बेबसी से सिर हिलाया। वह उसे अच्छी तरह जानता था। सुहानी को कुछ भी समझाना या अपने तरीके से करने के लिए कहना पत्थर पर सिर मारने के बराबर था। इसलिए उसने आगे कुछ नहीं कहा। सुहानी ने पहले उन पेपर्स पर साइन कर दिया। कुछ सोचते हुए देवांश ने भी पेन उठाया, अपनी आँखें कसकर बंद की, फिर खोली और ठंडी साँस छोड़ते हुए पेपर्स पर साइन कर दिया।

उसके बाद, गवाह के तौर पर सुहानी के साथ आई निकिता ने भी साइन किया, और देवांश के साथ खड़े उसके असिस्टेंट ने भी साइन किया।

उन दोनों के साइन होते ही वहाँ खड़ा वकील जल्दी से पेपर्स समेटकर फ़ाइल में रखने लगा, जैसे ये पेपर उसकी जान से ज़्यादा ज़रूरी हों।

"ओके! सो हो गया कॉन्ट्रैक्ट अब..." सुहानी ने किसी बड़ी प्रॉब्लम से बाहर निकलती हुई राहत की साँस ली। लेकिन उसे नहीं पता था कि इस कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करके उसने प्रॉब्लम खत्म नहीं, बल्कि शुरू की है अपने लिए... और देवांश के चेहरे पर आई तिरछी मुस्कुराहट यह साफ़ बता रही थी।

लेकिन जैसे ही सुहानी ने उसकी तरफ देखा, उसके चेहरे की मुस्कुराहट गायब हो गई। एकदम सीधा चेहरा बनाते हुए देवांश ने कहा, "कल सुबह रेडी रहना। अपने सारे सामान और जो कुछ भी लेना हो, मैं उसके साथ कल हम साथ में मेरे घर चलेंगे। समझ गई ना? और थोड़े ढंग के कपड़े पहन लेना। मेरा मतलब है, ऑफिस वियर पहनकर मत आना।"

सुहानी ने सीधे जवाब दिया, "हाँ, ठीक है। शादी का जोड़ा भेज देना, जो भेजोगे ना, मैं वही पहन लूँगी।"

उसकी बात सुनकर सभी – असिस्टेंट, वकील और निकिता – हैरानी से सुहानी की तरफ देखने लगे। वह देवांश से जरा भी नहीं डर रही थी। कॉन्ट्रैक्ट साइन हुए अभी दो मिनट ही हुए होंगे कि उसने उसके नाम के आगे 'सर' लगाना भी छोड़ दिया था और एकदम नॉर्मल उससे बात कर रही थी। वह पहले भी उससे नहीं डरती थी, क्योंकि देवांश ने शायद कभी कोशिश भी नहीं की उसे डराने की। वह उसके साथ भी उसी तरह पेश आता था जैसे सभी के साथ, लेकिन सुहानी इस बात को इतना इम्पोर्टेन्ट नहीं देती थी।

उसे लगता था कि सबके बीच अपने आपको ऊँचा और अलग दिखाने के लिए ही देवांश ऐसा करता है। वह इतने दिनों से उसके ऑफिस में सेक्रेटरी की पोजीशन पर काम कर रही थी, लेकिन सुहानी ने कभी भी इस बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखा।

देवांश आगे कुछ भी सुनना नहीं चाहता था, खासकर उन सारे लोगों के सामने। इसलिए वह गुस्से में अपने दाँत पीसते हुए बोला, "मुझे नहीं पता था इतनी ख्वाहिश है तुम्हें मेरा भेजा हुआ शादी का जोड़ा पहनने की..."

"ख्वाहिश माय फुट... अभी मैं इतनी हेल्पलेस ना होती तो कभी इस कॉन्ट्रैक्ट पर साइन भी ना करती। लेकिन क्या कर सकती हूँ? अभी हालात ही ऐसे हैं। वैसे हालात तो हमेशा ही मेरे खिलाफ़ रहते हैं।" सुहानी ने यह बातें मन ही मन बोलीं और देवांश की तरफ़ घूरती रही। लेकिन जैसे ही उसने उसकी तरफ़ देखा, सुहानी इधर-उधर देखने लगी।

देवांश ने अपने सनग्लासेस लगाए और आगे बढ़ते हुए बोला, "चाहो तो कल सुबह तक यहाँ रुक सकती हो। कल मैं तुम्हें लेने के लिए यहाँ आ जाऊँगा। और हाँ, कल ऑफिस आने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उसी टाइम हमें घर जाना है।"

इतना बोलते हुए देवांश ने होटल रूम के कार्ड वहीं मेज़ पर रख दिए।

उसकी बात पर सुहानी ने धीरे से सिर हिलाया। देवांश बिना कुछ बोले तेज़ कदमों से बाहर निकल गया। उसके पीछे वकील, उसका असिस्टेंट और बॉडीगार्ड भी निकल गए। उनके जाते ही दरवाज़े के बंद होने की आवाज़ आई।

निकिता और सुहानी ने उस तरफ़ देखा। जब दोनों को कन्फर्म हो गया कि वह सब चले गए हैं, तो सुहानी टेंशन में अपना सिर पकड़ते हुए वहाँ बैठ गई।

उसे इस तरह देखकर निकिता बोली, "अब ऐसे सिर पकड़कर बैठने से कुछ नहीं होने वाला। जो होना था वह तो हो गया, अब आगे के बारे में सोचो। और वैसे मुझे तो लगता है सर तुम्हें पसंद करते हैं, नहीं तो और कोई उनके सामने इतना बोलता ना तो..."

सुहानी ने अपनी आँखें घुमाते हुए कहा, "हाँ... हाँ तो फाँसी चढ़ा देता ना वो DSR उसे... कम ऑन निकिता, तुम लोग ना कुछ ज़्यादा ही डरते हो उससे। बस इसीलिए उसका खौफ़ इतना ज़्यादा फैला हुआ है तुम लोगों में। कौन सा खा जाएगा वो तुम लोगों को?"

निकिता ने डरे हुए चेहरे के साथ कहा, "अरे उसका बस चले तो खा ही जाएगा सबको। देखता तो ऐसे ही है। आँखों देखी है तूने उसकी इतनी खतरनाक और ऊपर से वो डेंजरस डार्क औरा। और वैसे भी हम लोगों को कोई शौक नहीं है तेरी तरह से मुसीबत मोल लेने का..."

सुहानी ने बुरा मुँह बनाकर कहा, "हाँ, जैसे मैं तो बड़े शौक से कर रही हूँ ना ये।"

निकिता ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, "अब शौक से हो, मजबूरी से या ज़बरदस्ती से, लेकिन अपने पैर पर कुल्हाड़ी तो तूने मार ही दी है। अब कुछ नहीं हो सकता।"

सुहानी ने मायूसी से कहा, "हाँ... हाँ पता है मुझे। जानबूझकर ही मैंने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है शायद। और मैं तुझसे बस यह पूछ रही हूँ, वहाँ घर से सामान लेकर आने में हेल्प कर देगी क्या?"

निकिता ने सिर हिलाकर कहा, "हाँ, चलो अब इतनी मदद कर दी है तो थोड़ी सी और सही। वैसे सच में तेरा यहाँ पर ही रुकने का इरादा है क्या?"

चारों तरफ़ नज़र घुमाते हुए, होटल रूम को देखते हुए सुहानी ने कहा, "और क्या... अब इतना महँगा लग्ज़रीअस रूम उस DSR ने बुक किया है कल तक के लिए तो मैं क्यों जाऊँ? मैं उस जगह पर बेवजह के ताने और बातें सुनने के लिए... और वैसे भी वो चाची से कल मेरी लड़ाई हो गई थी तो चाची ने मुझे घर से निकल जाने के लिए भी बोला था। और इसीलिए तो मुझे इस कॉन्ट्रैक्ट शिट के लिए हाँ बोलना पड़ा।"

सुहानी ने निकिता को पूरी बात बताई। यह बोलते हुए वह थोड़ी एक्साइटेड लग रही थी।

To Be Continued

क्या लगता है आप लोगों को, क्यों की है सुहानी ने देवांश से यह कॉन्ट्रैक्ट मैरिज? और देवांश क्या सच में उसे पसंद करता है? और क्यों वह यह सब कुछ कर रहा है? आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरी स्टोरी। और पसंद आए तो follow और कमेंट भी ज़रूर कर लेना, क्योंकि आगे यह स्टोरी बहुत ही इंटरेस्टिंग होने वाली है!

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