Golden trap of billionaire Ch. 2

Golden trap of billionaire - Chapter 2

Posted by Jahnavi Sharma • Mar 18, 2025 01:42 PM

दीवा अपने पापा के डूबते बिजनेस को फिर से खड़ा करने के इरादे से अपने बॉयफ्रेंड रक्षित दीवान के साथ क्लब में एक बिजनेसमैन के साथ मीटिंग के लिए आई थी। वहां एक डिनर होने वाला था, जो दीवा ने होस्ट किया था। दीवा नहीं जानती थी कि उसकी ड्रिंक में उसके बॉयफ्रेंड ने ड्रग्स मिला दिए हैं। दीवा के लिए ये एक डील थी लेकिन रक्षित ने उसे बिजनेसमैन चिराग सिंह को बेच दिया था। इस क्लब में एक और बिजनेसमैन आर्यांश कपूर की नजर दीवा पर पड़ी।

इन सब से अनजान दीवा डिनर से पहले बाथरूम में आई थी। बाथरूम में आने के बाद उसने आईने में अपने चेहरे को देखा तो उसका चेहरा लाल हो गया था और उसे सब कुछ घूमता हुआ नजर आ रहा था।

दीवा ने अपने मुंह पर पानी डाला और धीमी आवाज में कहा, “लगता है ड्रिंक चेंज हो गई होगी, तभी मेरे साथ ऐसा हो रहा है। रक्षित ऐसा कभी नहीं करेगा। मुझे लेमन जूस पीना होगा, तभी अब सब ठीक होगा।” दीवा रक्षित पर आंख मूंदकर यकीन करती थी, शायद यही वजह थी वो बिना सोचे समझे यहां आ गई थी।

दीवा का सिर चकरा रहा था, फिर भी वो खुद को संभालते हुए बाहर की तरफ जा रही थी। दीवा ने कुछ ही कदम आगे बढ़ाए थे कि वो एक अनजान आदमी की चेस्ट से ज्यादा टकराई। दीवा का चेहरा नीचे की तरफ था लेकिन उसकी गहरी काली आंखें उसे इंटेंसिटी से देख रही थी।

“आई एम रियली सॉरी मिस्टर, मेरा ध्यान नहीं था।” दीवा ने सिर पकड़कर लड़खड़ाती आवाज में कहा।

दीवा ने देखा तक नहीं कि वो किससे टकराई है, वो बस वापस बाहर जाने लगी तभी किसी ने उसे पकड़ कर खींच लिया। उस शख्स ने उसे दीवार पर लगा दिया था, दीवा कुछ समझ पाती उससे पहले उस शख्स ने उसे कंधे पर उठा लिया था। दीवा को चक्कर आ रहे थे तो उसने उसे रेसिस्ट भी नहीं किया।

वहीं दूसरी तरफ रक्षित, मिस्टर सिंह के साथ में उनके बुक किए हुए रूम में था, जहां दोनों शराब पी रहे थे। रक्षित आज बहुत खुश था क्योंकि उसने आज दीवा को अपनी बातों में बहला ही लिया था।

शराब पीते हुए मिस्टर सिंह ने रक्षित की तरफ देखकर कहा, “तुम मुझसे भी बड़े कमीने हो। चार साल तक एक लड़की को डेट किया, वो भी इतनी खूबसूरत लड़की को और उसे हाथ तक नहीं लगाया और अब तुम उसे मुझे सौंपने जा रहे हो।”

“क्या फर्क पड़ता है मिस्टर सिंह। वैसे भी जवान आदमी को लड़की की कमी नहीं होती है। वो चली गई तो और कोई आ ही जाएगी।” रक्षित बेशर्मी से मुस्कुरा कर बोला।

मिस्टर सिंह ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया और फिर एक पेपर उसके सामने रखते हुए कहा, “कॉन्ट्रैक्ट मैंने तैयार करवा लिया है। एक बार फिर से मैं तुमसे पूछना चाहता हूं कि सच में तुम दोनों के बीच में कभी कुछ नहीं हुआ ना? तुम मेरा टेस्ट जानते ही हो।”

“आप भी ना बहुत शक करते हो, मुझे अच्छे से पता है आपको कैसी लड़कियां पसंद है। आपको अभी मेरी बात पर यकीन नहीं आ रहा होगा लेकिन सुबह आपकी सारी शिकायत मिट जाएगी।” रक्षित ने जवाब दिया।

रक्षित ने तिरछी निगाहों से मिस्टर सिंह की तरफ देखा और कॉन्ट्रैक्ट उठाने की कोशिश की लेकिन मिस्टर सिंह ने उसे अपने हाथ में कस कर पकड़ लिया था।

“कॉन्ट्रैक्ट भी अब बाद में ही मिलेगा।” मिस्टर सिंह ने भौहें उठाकर कहा।

रक्षित के पास अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था। उसने सिर हिलाया और फिर वहां से उठते हुए बोला, “ठीक है फिर आज रात के लिए गुड लक, उम्मीद है कि आज की रात यादगार होगी।”

मिस्टर सिंह उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया, रक्षित वहां से चला गया था। उसके जाते ही मिस्टर सिंह ने कहा, “नवीन गोयंका ने कभी नहीं सोचा होगा कि उसका इतना भरोसेमंद और काबिल मैनेजर उसके पैर काट रहा है। उसकी बेटी को पटा रखा था, तो कंपनी तो इसी के पास आनी थी, फिर ये सब करने की क्या जरूरत थी। ऊपर से लड़की को भी बेच दिया? खैर मुझे क्या... अब आ भी जाओ दीवा गोयंका, मुझसे इंतजार नहीं हो रहा है।”

दीवा का इंतजार करते हुए मिस्टर सिंह ने कुछ गोलियां खाई, जो आज रात उनके लिए मददगार साबित होने वाली थी और फिर उसके आने का इंतजार करने लगा।

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रात काफी हो चुकी थी और बाहर हल्की हल्की बारिश भी हो रही थी। इन सबके बीच क्लब के एक वीआईपी रूम में कमरे में सारी लाइट्स चालू थी। रात के अंधेरे में भी उस कमरे में दिन जैसा उजाला था।

कमरे के फर्श पर चारों तरफ कपड़े बिखरे हुए थे और बेड पर एक लड़का और लड़की एक दूसरे से लिपटे हुए थे। दोनो के ही शरीर पर कपड़े नही थे।

वो आर्यांश कपूर था और बेड पर उसके नीचे दीवा सोई हुई थी। वो पूरी तरह होश में नहीं थी, लेकिन जो भी हो रहा था, उसे महसूस कर सकती थी। दीवा नशे में इतनी मदहोश थी, कि इस वक्त वो उसका पूरा साथ दे रही थी।

मुंबई का मोस्ट एलिजिबल बैचलर, जो दिखने में इतना हैंडसम और परफेक्ट था, कि हर लड़की उसे पाना चाहती थी, वो इस वक्त दीवा गोयंका के साथ बेड पर अपनी हसरते पूरी कर रहा था।

अचानक किस ब्रेक करके आर्यांश ने अपनी गहरी काली आंखों से दीवा की तरफ देखा। उसकी आंखों में प्यार के बजाय कुछ और ही था, एक जुनून, नफरत या यूं कहें दीवा को खत्म करने की एक जिद, या शायद वो उसे हासिल करना चाहता था।बेड पर भले ही दीवा हो, लेकिन आर्यांश के दिमाग में कोई और थी।

अगले ही पल वो अपने ख्यालों से बाहर आया और फिर से दीवा पर टूट पड़ा। देर रात तक उस कमरे में दीवा की सिसकियां गूंज रही थी।

बाहर बारिश तेज होने लगी थी और कमरे का माहौल उस हिसाब से और भी रोमेंटिक था।

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अगली सुबह काफी देर तक दीवा उस बेड पर लेटी रही। जब उसकी आंख खुली तो उसका सिर बहुत भारी हो रहा था। दीवा के पूरे शरीर में, खासकर पैरों में इतना दर्द हो रहा था कि वो हिल भी नहीं पा रही थी।

दीवा ने अधखुली आंखों से इधर-उधर देखा। ऐसे लग रहा था कि वो आदमी अभी भी उसके पास है। उसकी वो गहरी काली आंखें दीवा कभी नहीं भूल सकती थी।

दीवा ने अपनी आंखें बंद करके याद करने की कोशिश की तो उसे थोड़ा बहुत याद आ रहा था और इसी के साथ उसकी आंखें नम होने लगी। वो समझ गई थी कि कल रात उसके साथ क्या हुआ था। जो भी उस कमरे में था, वो उस शख्स से पहली बार मिली थी। उसे पहली बार महसूस किया था।

दीवा ने जल्दी से आंखें खोली तो वहां कमरे में कोई नहीं था। अचानक दीवा की नजर बैठ की दूसरी तरफ गई तो वहां बेड साइड पर पांच सौ के नोट की चार गड्डियां रखी थी।

दीवा ने उन्हें देखकर कड़वाहट से कहा, “तो ये कीमत लगाई है उसने मेरी।”

अचानक ही दीवा ने अपनी मुठ्ठियां कसकर बंद कर ली और जोर-जोर से रोने लगी। उसे नहीं समझ आ रहा था कि कल रात उसके साथ बेड पर कौन था, पर हां उसका धुंधला सा चेहरा अभी भी उसके दिमाग में ताजा था और अगर वो एक बार फिर से उसे देखती तो जरूर उसे पहचान लेती।

फिलहाल तो एक ही रात ने दीवा की जिंदगी बदल कर रह गई थी। किसी ने धोखे से उसके साथ रिलेशन बनाए, तो अब उसकी इंसल्ट करने के लिए एक कीमत लगा कर गया था।

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पढ़कर रेटिंग और कमेंट कर दीजियेगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं क्या लगता है, दीवा कभी आर्यांश को ढूंढ पाएगी? या आर्यांश खुद उसे फिर अपने करीब लेकर आएगा।

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