Devil husband - Chapter 3
"हम्मम ठीक है, जाओ!" और "हाँ, मैं घर जा रहा हूँ!" इतना बोलकर रुद्रा वहाँ से चला गया। शाम से रात हो गई थी। रुद्रा घर आ गया था। उसने देखा तो घर पर एकदम शांति थी। उसने हॉल में एक नज़र देखा और रूम में आ गया। उसकी नज़र रूम के बेड पर गई जहाँ रूही अभी भी आराम से सो रही थी।
रुद्रा ने एक नज़र उसे देखा और अपना कोट उतारकर टेबल पर रख दिया, और अपनी टाई की नॉट निकालने लगा। वह रूही के करीब गया और उसके पास रखे पानी के जग को उसके ऊपर डाल दिया।
अचानक पानी से रूही की आँख खुल गई। उसकी नज़र रुद्रा पर चली गई।
"मेरे होते हुए तुम इतना आराम से कैसे सो सकती हो? मतलब, पति ऑफिस से घर आया है और उसकी वाइफ आराम से सो रही है?" रुद्रा ने कहा।
रूही ने बात सुनकर मुँह दूसरी साइड कर लिया।
रुद्रा — "उसका मुँह पकड़ कर खाना यहाँ लेकर आओ!"
रूही जल्दी उठकर नीचे आई और रुद्रा के लिए खाना लेकर रूम में वापस आ गई।
रूही ने खाने की प्लेट रखी और एक साइड बैठ गई। रुद्रा ने उसे देखा और कहा, "तुमने खा लिया..?"
रूही — "हाँ, मुझे भूख लगी थी तो मैंने खा लिया।"
रुद्रा ने थोड़ी देर में डिनर किया और बेड पर आ गया। उसने अपना लैपटॉप खोला और काम करने लगा।
जैसे ही रूही बेड पर आकर सोई, रुद्रा के हाथ उसकी कमर पर आ गए। रूही जल्दी से बैठ गई। रुद्रा ने उसका हाथ पकड़ा और बालकनी में निकाल दिया।
"प्लीज, मुझे अंदर आने दो," रूही ने रुद्रा को देखते हुए कहा।
रुद्रा — "ये तुम्हारी जगह है। तुम मेरे कभी बराबर नहीं होगी, समझी?" इतना बोलकर रुद्रा अपने बेड पर आकर सो गया। रूही चुपचाप बालकनी में लगी चेयर पर आकर बैठ गई।
अगली सुबह...
रुद्रा रोज़ की तरह जल्दी उठ गया था। उसने उठते ही पहले अपने बगल में देखा और बेड से खड़ा होकर अपनी रोज़ की दिनचर्या के काम करने लगा। थोड़ी देर में सुबह हो गई थी और सूरज की सीधी किरणें रूही के चेहरे पर गिर रही थीं। सूरज की तेज किरणों से रूही ने अपनी आँखें खोल लीं।
रूही जल्दी से उठी और रूम के अंदर आने को हुई तो उसने देखा रुद्रा ने गेट अभी भी लगाया हुआ था। रूही चुपचाप वापस वहीं बैठ गई और कुछ सोचने लगी। उसने चेयर पर पैर रखे और अपने हाथ टिकाकर मन में सोचने लगी — "मुझे नहीं मालूम था शादी ऐसी होती है। पति ऐसा भी हो सकता है। एक गलतफहमी से सब बर्बाद कर दिया तुमने रुद्र। अब तो सिर्फ़ नफ़रत है मुझे तुमसे और हमारी नफ़रत तुम्हारे लिए कभी कम नहीं होगी। हमें तो ये भी नहीं पता ये नफ़रत क्या अंजाम लेगी!" रूही ये सब सोच ही रही थी कि अचानक ही बालकनी का गेट खुला और रुद्रा अंदर आ गया।
रुद्रा को देखकर रूही ने कुछ नहीं कहा, बल्कि अपना मुँह दूसरी साइड कर लिया।
रुद्रा ने रूही की ऐसी हरकत देखी और मुस्कुराते हुए कहा, "क्या वाइफी अपने पति को देखकर ऐसे करती है क्या?"
रूही ने रुद्र की बात सुनी और उसकी ओर देखकर कहा, "पति? वो भी तुम? तुम्हारे जैसे पति नहीं होते मिस्टर ओब्रॉय, और मैं तो भगवान से यही बोलूँगी कि भगवान तुम्हारे जैसा पति किसी को न दे!"
रुद्रा ने रूही के मुँह से ये सुना तो उसने उसका हाथ पकड़कर मरोड़ते हुए कहा, "अभी तो तुमने कुछ नहीं देखा है। तो अपने पति से इतनी नफ़रत और जब मैं कुछ करूँगा तो कितनी नफ़रत करोगी तुम?"
रूही ने रुद्रा से हाथ छुड़ाते हुए कहा, "तुम कुछ नहीं कर सकते।"
रुद्रा ने उसको पकड़कर खींचा और उसके ब्लाउज़ की डोर खोलते हुए कहा, "अभी तो तुम्हारा सरनेम पता करके ये सब कर दिया मैंने, तो सोचो जिस दिन तुम्हारे बारे में मुझे पूरा सच पता लगा, उस दिन मैं तुम्हारे साथ क्या करूँगा ये तुम तो क्या मैं भी इसका अंदाज़ा नहीं लगा सकता। इशिका राठौड़।"
रूही ने उससे छूटने की कोशिश करते हुए कहा, "इशिका नहीं है मेरा नाम। रही है, रही शर्मा।" इतना बोल वो अपने एक हाथ से रुद्रा को मार रही थी, लेकिन उस पत्थर जैसे बॉडी पर रूही के हाथों से कोई फ़र्क नहीं हो रहा था।
"छोड़ो मुझे, समझे!" इतना बोल रूही ने जोर से अपने हाथों से रुद्रा को धक्का मारा जिससे रुद्रा अचानक गिरते-गिरते बचा।
रुद्रा ने उसे घूरकर देखा और उसके पास आते हुए कहा, "तुम्हारी इतनी हिम्मत कि रुद्रांश ओब्रॉय को धक्का दोगी?" इतना बोल उसने रूही को कमर से पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठों से किस करने लगा।
रुद्रा रूही को डीप किस कर रहा था, और रूही अपने हाथ-पैरों को झटपटा रही थी।
कुछ मिनटों बाद जब रुद्रा अलग हुआ तो दोनों की साँसें फूल रही थीं और रूही के होंठों से खून भी आ रहा था। रूही ने अपने होंठों पर हाथ लगाए और कहा, "बस यही है ना तुम आदमियों का काम? मिल गया सुकून, निकल गया गुस्सा। तुम जैसे लोग इंसान हो ही नहीं सकते।" इतना बोल रूही वहाँ से अंदर गई और वॉर्डरोब से कपड़े लेकर वाशरूम चली गई।
रुद्रा ने एक नज़र उसे देखा और वहाँ से चला गया और किसी को फ़ोन करने लगा। रुद्रा ने सामने से फ़ोन उठाते ही कहा, "जो मैंने बोला था वो काम हुआ?"
सामने से साहिल की आवाज़ आई, "नहीं, अभी कुछ पता नहीं चला पर मैं कोशिश कर रहा हूँ तो जल्दी पता लग ही जाएगा।"
रुद्रा ने गुस्से से कहा, "और ये काम कब होगा साहिल? मुझे ये सब जल्दी चाहिए, समझे तुम?"
साहिल ने रुद्रांश को गुस्से में देखकर कहा, "मैं कोशिश कर रहा हूँ रुद्रांश।"
रुद्रा ने फ़ोन रखा और नीचे आकर बैठ गया। उसने कॉफी पी और नाश्ते की टेबल पर बैठ गया।
काकी ने रुद्रांश को देखा और कहा, "रात को लेट आया था बेटा।"
रुद्रा ने काकी की बात सुनी और कहा, "हाँ काकी।"
काकी ने रुद्रांश को देखते हुए वापस से पूछा, "खाना खा लिया था तुमने?"
रुद्रा ने पेपर पढ़ते हुए कहा, "हाँ, मैंने खा लिया था!"
काकी ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, "पर बिटिया ने नहीं खाया। वो तो तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी। उसने कल सुबह से कुछ नहीं खाया था।"
रुद्रा ने सुना तो उसे बहुत गुस्सा आया, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर में रूही कुर्ती और प्लाज़ो पहने नीचे आई और काकी के पैर छू लिए।
रूही ने टेबल पर बैठते हुए कहा, "गुड मॉर्निंग काकी!"
काकी ने रूही को सर पर हाथ रखते हुए कहा, "गुड मॉर्निंग बिटिया, कैसी हो?"
रूही ने कहा, "मैं अच्छी हूँ!"
काकी ने रूही को देखा और कहा, "चलो नाश्ता कर लो!"
रूही ने उनकी बात सुनकर कहा, "मेरा मन नहीं है। आप कीजिए।" इतना बोल रूही जैसे ही जाने को हुई, रुद्रा की आवाज़ उसके कानों में आई, "चुपचाप बैठकर नाश्ता करो, समझी!"
रूही ने एक नज़र उसे देखा और कहा, "मुझे नहीं करना, समझे आप?" इतना बोल रूही बिना कुछ बोले और सुने रूम में वापस चली गई।
काकी ने रुद्रांश को देखा और कहा, "इसे क्या हुआ बेटा? कोई झगड़ा हुआ है तो माना ले बेटा, बहुत प्यारी बच्ची है!"
रुद्रा ने काकी को देखा और कहा, "आप जाइए, आराम कीजिए!"
रुद्रा को ऐसे कोई किसी काम के लिए मना नहीं करता था। रुद्रा को बहुत ज़्यादा गुस्सा आ रहा था। उसने टेबल से प्लेट में खाना रखा और किचन में जाकर थोड़ी देर में वापस बाहर आया और रूम में चला गया। उसने रूही को देखा जो जमीन पर बैठी हुई थी, की तभी रूही के सामने रुद्रा का हाथ आया जिस पर एक बाइट लिया हुआ था।
रूही ने देखा तो उसे बहुत अजीब लगा, लेकिन उसने अपना मुँह दूसरी ओर फेर लिया।
रुद्रा ने उसकी ये हरकत देखते हुए कहा, "मुझसे गुस्सा हो ना, तो खाने पर क्यों निकालती हो? खाना खा लो, तुमने वैसे भी कल से कुछ नहीं खाया ना?"
रूही एकटक उसे देख रही थी और उसने जैसे ही बोलने के लिए मुँह खोला, तभी रुद्र उसके मुँह में खाने का निवाला डाल दिया।
रूही ने जैसे ही उसे खाया, उसकी आँखों से झर-झर आँसू आने लगे। उसका पूरा चेहरा लाल हो गया था। उसने प... प... पा... नी,,,, पानी, आह... उसकी आवाज़ उसका बिलकुल साथ नहीं दे रही थी।
रुद्रा ने उसके मुँह में एक और बाइट डालते हुए कहा, "चुपचाप खाओ, समझी? तुम्हें पूरा खाना है और किसी की इतनी हिम्मत नहीं है कि वो रुद्रांश ओब्रॉय को माना कर सके।" इतना बोल वो रूही को ज़बरदस्ती मुँह में ठूस रहा था।
रूही की हालत बहुत ज़्यादा खराब हो चुकी थी। उसने अपना गला दोनों हाथों से पकड़ा हुआ था। उसने जल्दी से टेबल से जैसे ही पानी उठाना चाहा, उससे पहले ही रुद्रा ने उसे ले लिया।