Devil husband Ch. 2

Devil husband - Chapter 2

Posted by Riya Sharma • Mar 31, 2025 07:29 PM

रुहानिका ने रुद्रांश के आगे हाथ जोड़े और कहा, "प्लीज ऐसा कुछ मत करो कि तुम्हारे पास पछताने को कुछ न बचे। तुमने वैसे भी मेरी लाइफ खराब कर दी है, अब ऐसी हरकत मत करो कि पछताना पड़े!"

रुद्रांश ने रुहानिका को देखा और कहा, "अभी तो शुरुआत हुई है तुम्हारी इस बर्बादी की। तड़पोगी तुम अपनी मौत के लिए, पर मौत इतनी आसानी से तुम्हें नहीं मिलेगी।" इतना बोलकर रुद्रांश ने उसे बेड पर धक्का दे दिया।

रुद्रा के अचानक धक्का देने से रूही बेड पर गिर गई। रुद्रा ने उसके बाल पकड़े और उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। और उसे चूमने लगा।

रुद्रा के होठों पर होठ रखने से रूही ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और अपने हाथों से बेडशीट कसकर मुट्ठी में ले ली। रुद्रा थोड़ी देर बाद उससे दूर हुआ तो देखा रूही बेहोश हो चुकी थी! रुद्रा ने उसे घूरकर देखा और उठ गया। उसने रूही को एक तरफ किया और खुद बाथरूम में चला गया।

बाथरूम में आकर रुद्रा ने शॉवर ऑन किया और उसके नीचे खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद बाहर आया और बेड पर एक तरफ सो गया।

अगली सुबह, सुनहरी चमचमाती धूप सीधे रूही के चेहरे पर गिर रही थी। उसने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और कमरे को देखा। उसे रात की सारी बातें याद आ गईं। रूही ने एक नज़र खुद को देखा तो उसे कुछ अजीब लगा। उसकी सारी ज्वैलरी खुली, पूरे बेड पर गिरी हुई थी! होठों पर हल्का सा खून अभी भी था!

रूही ने एक नज़र खुद को देखा और बेड से उठकर खिड़की के पास आ गई। उसने एक नज़र कमरे पर डाली तो देखती ही रह गई। रुद्रा का कमरा बहुत प्यारा था! काफी बड़ा कमरा था, एक तरफ वॉर्डरोब, एक तरफ बाथरूम, बीचों-बीच बड़ा सा बेड, पूरे कमरे का रंग काला था! जिस पर हल्के और कॉफी कलर के पर्दे लगे हुए थे। एक तरफ बुकसेल्फ़ था। एक तरफ छोटी सी टेबल और एक काउच था। कुल मिलाकर कमरा बहुत ही प्यारा था।

रूही की आँखें एकदम लाल थीं। उसने एक हाथ से अपना लहंगा उठाया और खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर नीचे देखने लगी। नीचे गार्डन में लोग काम कर रहे थे। रूही वहीं खड़ी सब आराम से देख रही थी। उसका गोरा बदन उस लाल जोड़े में बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन उसे आज इस लाल जोड़े से नफ़रत सी हो रही थी। वह अपनी ही सोच में खोई हुई थी कि किसी के ठंडे हाथ उसकी कमर से होकर पेट पर चलने लगे। रूही अचानक होश में आई और पीछे मुड़कर देखा तो रुद्रा उसकी कमर पर हाथ रखे, उसकी पीठ पर अपना सर रखे हुए था।

रूही ने उसे देखा और कहा, "छोड़ो मुझे!"

रुद्रा ने उसकी कमर पर अपने हाथ कसते हुए कहा, "क्या, वाइफी? अब मुझे खुद से दूर भी करोगी?" उसके बोलने में एक नफ़रत, गुस्सा और एक रोब भी था। रूही ने बिना रुद्रा की ओर देखे कहा, "प्लीज छोड़िए।"

रुद्रा ने उसे पूरी तरह इग्नोर किया और अपनी गोद में उठाकर बाथरूम की ओर चला गया। रूही की आँखें वापस किसी अनहोनी के डर से एक बार को बंद हो गईं।

रुद्रा ने उसे बाथरूम में बने बाथटब में लाकर पटक दिया। अचानक ऐसे गिरने से रूही की कमर में अचानक दर्द हो गया और उसकी "आह..." निकल गई। रूही ने अपनी आँखें खोलीं तो रुद्रा की ओर देखा जो उसे गुस्से से देख रहा था।

"ये सब क्या है? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सब करने की…!!" रूही ने रुद्रा की ओर देखकर चिल्लाते हुए कहा।

रुद्रा उसकी ओर झुक कर उसके मुँह को पकड़ते हुए बोला, "हिम्मत तुमने देखी नहीं मेरी, और हाँ, जल्दी रेडी होकर नीचे आओ, समझी ना!" इतना बोलकर रुद्रा वहाँ से नीचे आ गया और सोफ़े पर बैठ गया।

"काकी, मेरी कॉफी का क्या हुआ…?" रुद्रा ने थोड़ी तेज आवाज़ में काकी को आवाज़ दी।

काकी, अपने हाथ में कॉफी लेकर आते हुए कहा, "जी बेटा, ये रही आप की कॉफी।"

रुद्रा ने "हम्म" इतना बोलकर कॉफी का कप लिया और कॉफी पीने लगा।

काकी— "वो बहू रानी नीचे नहीं आई बेटा…?"

रुद्रा— "हम्म…" और कुछ बोलता उससे पहले उसकी नज़र सीढ़ियों पर गई जहाँ से रूही अपनी साड़ी को हाथों में पकड़े नीचे आ रही थी।

काकी ने रूही को देखा तो उसके पास जाते हुए कहा, "आ जाओ बिटिया।"

रूही अभी भी डरी हुई थी! उसने अपनी गर्दन हाँ में हिलाई और काकी के साथ आ गई।

काकी— "क्या लोगी बिटिया?"

रूही— "कुछ नहीं, हम चाय नहीं पीते…"

काकी— "अच्छा, कोई ना, लेकिन ये साड़ी क्यों पकड़ी हुई है तुमने…?"

रूही ने एक नज़र रुद्रा को देखा और अपनी गर्दन नीचे करते हुए कहा, "वो हमें साड़ी पहनना नहीं आती, तो बस इसलिए…!"

काकी हँसते हुए— "अच्छा, ये बात है। रुद्रा बेटा, तुम पहना देते ना…"

रूही— "नहीं नहीं, हम खुद पहन लेंगे…"

रुद्रा— "हम्म… काकी पहना देंगी।"

काकी— "आओ बिटिया, हम पहना देते हैं…"

रूही— "हाँ, चलिए…"

रूही काकी के साथ कमरे में आ गई। काकी ने उसे साड़ी सही से पहना दी। और उसकी ओर ध्यान से देखा तो ना तो उसके माथे पर सिंदूर था, ना हाथों में दुल्हन का चूड़ा था, और ना ही गले में मंगलसूत्र।

काकी— "अरे बिटिया, तुमने मंगलसूत्र नहीं पहना, ना सिंदूर लगा रखा है और ना ही चूड़ा…"

रुद्रा दरवाजे पर खड़ा ये सब सुन रहा था। उसने काकी को देखकर कहा, "काकी, वो ये सब मेरे हाथ से पहनेगी, इसलिए…" इतना बोलकर रुद्रा मुस्कुराते हुए अंदर आ गया।

रूही फिर से डर गई थी, क्योंकि जब भी रुद्रा उसकी ओर देखकर मुस्कुराता था तो उसके दिमाग में ज़रूर कुछ न कुछ चलता था।

काकी— वहाँ से जाते हुए, "अच्छा, मैं बाद में आती हूँ, तुम पहना दो।" इतना बोलकर काकी वहाँ से चली गई!

रुद्रा ने गर्दन हाँ में हिलाई और काकी के जाते ही कमरे का दरवाज़ा लॉक किया और अंदर आ गया। उसने अपने हाथ में मंगलसूत्र लिया और रूही की ओर बढ़ गया और उसके गले में दोनों हाथों से मंगलसूत्र पहना दिया।

"मैं इसे नहीं पहनूँगी, समझे? क्योंकि मैं इस जबरदस्ती वाली शादी को नहीं मानती!" रूही ने रुद्रा पर चिल्लाते हुए कहा।

रुद्रा— उसकी ओर कदम बढ़ाते हुए, "मानना तो तुम्हें पड़ेगा, और वैसे भी ये मंगलसूत्र तुम्हारे लिए एक फाँसी का फंदा है!"

रूही— "कभी नहीं! मैं जब ये शादी मानती ही नहीं तो तुम्हारे साथ ना मैं रहने वाली हूँ और ना ही ये सब करने वाली हूँ।"

रुद्रा— सिंदूर लेते हुए, "अच्छा, मेरी इजाज़त के बिना कोई पता नहीं हिल सकता यहाँ से, और तुम जाने की बात कर रही हो… कोशिश भी मत करना, अंजाम बहुत बुरा होगा।"

इतना बोलकर रुद्रा ने उसकी मांग में सिंदूर लगा दिया। रूही को उसने खुद से थोड़ा दूर किया और आईने के सामने जाकर रेडी होने लगा। उसने आईने में देखा तो रूही अभी भी वहीं खड़ी हुई थी! उसने येलो कलर की साड़ी, डीप ब्लाउज़, रेड चूड़ियाँ, मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र, माथे पर रेड बिंदी, कमर तक आते काले बाल! मोटी-मोटी गोल आँखें, गोरा रंग, मासूम चेहरा। रुद्रा ने अपनी गर्दन झटकी और वॉर्डरोब से कपड़े लेकर बाथरूम में चला गया। थोड़ी देर में वह वापस आया और एक नज़र खुद को देखकर एक फाइल टेबल से ली और वहाँ से निकल गया।

रूही ने रुद्रा के जाते ही चैन की साँस ली और नीचे काकी के पास आ गई। सुबह से दोपहर हो गई थी! रूही ने कुछ नहीं खाया था, वह अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी! सोचते-सोचते उसकी आँख लग गई। तो वहीं रुद्रा ऑफ़िस का काम कर रहा था! यह एक अंडरवर्ल्ड डॉन के साथ-साथ मुंबई का नंबर वन बिज़नेस मैन भी था!

रुद्रा ने अपने सामने बैठे लड़के से कहा, "साहिल, मीटिंग का क्या हुआ…?"

साहिल ने रुद्रा को देखा और कहा, "सर, आज की मीटिंग मिस्टर कपूर ने तीन दिन बाद करने की बोली है।"

"हम्म… ठीक है, जाओ! और हाँ, मैं घर जा रहा हूँ!" इतना बोलकर रुद्रा वहाँ से चला गया था! शाम से रात भी हो गई थी। रुद्रा घर आ गया था। उसने देखा तो घर पर एकदम शांति थी। उसने हॉल में एक नज़र देखा और कमरे में आ गया। उसकी नज़र कमरे के बेड पर गई जहाँ रूही अभी भी आराम से सो रही थी।

रुद्रा ने एक नज़र उसे देखा और अपना कोट उतारकर टेबल पर रख दिया और अपनी टाई की नॉट निकालने लगा। वह रूही के करीब गया और उसके ऊपर रखा पानी का जग डाल दिया।

अचानक पानी से रूही की आँख खुल गई। उसकी नज़र रुद्रा पर चली गई!

to be continue…

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