Pehla nasha Ch. 1

Pehla nasha - Chapter 1

Posted by kj..queen of worlds • Apr 05, 2025 10:07 AM

राजकोट में, सुबह के दस बजे, रोम पैराडाइस कॉलेज की कैंटीन में एक मेज़ पर पाँच लोग बैठे थे; दो लड़कियाँ और तीन लड़के। एक लड़का खा रहा था, दूसरा मोबाइल पर व्यस्त था, और बाकी तीन आपस में बातें कर रहे थे।

तभी खा रहे लड़के ने कहा, "यार, तुम तो बोल रहे थे कि आज नए स्टूडेंट्स आने वाले थे। भाई, कहाँ हैं वो?"

एक लड़की ने जवाब दिया, "बिल्कुल सही कहा आपने कबीर, भाई देखिए ना, कब से इस वंश से यही पूछ रही हूँ मैं, बट ये है कि कुछ बोल ही नहीं रहा है।"

ये है आशु, सबसे छोटी, बस कुछ महीनों का ही अंतर है। इसकी एक ही कमज़ोरी है—खाना। अगर इसे खाना नहीं मिला, तो इससे आपको भगवान ही बचा सकता है। बाकी आपको आगे पता चल जाएगा।

कबीर ने अपना खाना ख़त्म करते हुए वंश की तरफ देखा और कहा, "क्यूँ भाई वंश, बेचारी आशु को क्यों तंग कर रहा है?"

ये है कबीर कपूर, एकदम कूल हीरो टाइप। आप इन्हें हमारी कहानी का दूसरा हीरो मान सकते हैं। बाकी का इनके बारे में आगे पता चल जाएगा।

इस पर वंश बोला, "कबीर, मुझे तो क्या, किसी को भी नहीं पता है कि आज कौन नए स्टूडेंट आने वाले हैं।"

ये है वंश रायज़ादा, बेचारा थोड़ा भोला है। इसे हर दूसरे दिन किसी भी लड़की से प्यार हो जाता है; वो भी सच्चा वाला।

वो अभी बोल ही रहा था कि पीछे से एक लड़के की आवाज़ आई, "क्या यहाँ रावण मर गया है, और तू बोल रहा है राम जी आए या नहीं।"

इतना बोलकर वो वंश के पास खाली कुर्सी पर बैठ गया।

उसके इतना बोलते ही वंश झुँझला गया। लेकिन इससे पहले कि वो कुछ बोलता, जो लड़की काफी देर से चुप थी, वो बोली, "What do you mean अभी? तुम्हारे कहने का क्या मतलब है?"

ये है वर्तीका, वंश की जुड़वाँ बहन, ढाई मिनट छोटी।

इस पर अभी ने उस लड़की की तरफ देखकर कहा, "वो वर्तीका जी, हमारे कहने का ये मतलब है कि वो दोनों भोकाल—I mean new students—आ चुकी हैं।"

और ये है हमारे अभी खन्ना भैया, आशु के चाचा जी के बेटे, बनारस के वासी और गंगा मैया के पुजारी। बाकी का आगे पता चल जाएगा।

इस पर वंश बोला, "मतलब दोनों लड़कियाँ हैं?"

अभी: "अबे लड़कियाँ नहीं, बवाल बोल, बवाल!"

वो अभी ये बोल ही रहा था कि उसकी नज़र अपने सामने बैठी, उसे घूर रही वर्तीका पर गई।

तो वो अपनी बात संभालते हुए बोला, "हैवो… मेरा मतलब है कि वो दोनों ने तो कॉलेज के पहले ही दिन आते ही भोकाल मचा दिया। सुना है किसी की गाड़ी ठोक डाली है। बाकी गंगा घाट की कसम, गाड़ी का राम नाम सत्य कर दिया है।"

तभी जो लड़का इतनी देर से चुपचाप अपने मोबाइल पर कुछ कर रहा था, वो बोला, "लेट्स गो एंड वॉच। चलो चल कर देखते हैं।"

ये है राज महेश्वरी। इनका मानना है कि हंसने पर टैक्स लगता है, मतलब कभी-कभी ही हँसते हैं। राज और कबीर बचपन के दोस्त हैं। बाकी का आगे पता चल जाएगा। आप इसे हमारी कहानी का हीरो मान सकते हैं, आपकी मर्ज़ी।

राज इतना बोलकर उठा और चलने लगा। उसके पीछे-पीछे बाकी भी चलने लगे, लेकिन इस बात पर किसी का ध्यान नहीं गया कि दो लोग उनके पीछे नहीं आ रहे हैं।

वहीं, पार्किंग एरिया में…

दो लड़कियाँ अपनी जीप में बैठी थीं। एक लड़की पैसेंजर सीट पर शांति से अपनी किताब पढ़ रही थी, और दूसरी, जो ड्राइविंग सीट पर बैठी थी, कुछ बड़बड़ा रही थी।

ड्राइविंग सीट पर बैठी लड़की बोली, "हे भगवान, हम क्या करें? एक तो पहला दिन कॉलेज का, ऊपर से लेट, और यही बाकी रह गया था—गाड़ी ठोक डाली हमने! और दूसरा, ये हमारी ना-कार दोस्त कियारा, ये नहीं कि दोस्त मुसीबत में है तो उसकी मदद करे!"

फिर ऊपर देखते हुए, "हे मुरलीधर, अब आप ही का सहारा बचा है। अपनी इस तुच्छ भक्तों को बचा लो, बचा लो!"

इतना बोलकर रुहाना मुँह बना लेती है। ये है हमारी झरना, जब देखो तब कोई ना कोई कांड करती रहती है, और इस पर बचाती है उसकी दोस्त कियारा। आप इसे हमारी कहानी की मुख्य नायिका भी समझ सकते हैं। बाकी का इसके बारे में आगे तो हम जान ही लेंगे।

तभी वहाँ पहुँच जाते हैं राज और उसकी मंडली। राज पार्किंग का नज़ारा देखता है; फिर उसकी आँखें गुस्से से लाल हो जाती हैं। वो जल्दी से झरना की गाड़ी की तरफ़ जाता है, उसे खींचकर नीचे उतारता है, और जिस गाड़ी को झरना ने टक्कर मारी थी, उसके पास ले जाता है और बोलता है, "यू इडियट! ये क्या किया तुमने? पता भी है ये मेरी फ़ेवरेट कार थी, और इसकी क्या हालत बना दी तुमने? दिखता नहीं है क्या, खड़ी हुई गाड़ी को भी ठोक देती हो।"

राज बस गुस्से से बोले जा रहा था, और झरना उसे देख रही थी। अगर अभी राज की जगह कोई और होता, तो पता नहीं झरना क्या ही कर देती, लेकिन अभी तो उसके दिमाग में बस एक ही गाना चल रहा था— "पहली नज़र में ये क्या कर दिया, मुझसे मुझको जुदा कर दिया।"

बस वैसे ही देखे जा रही थी, और राज उसे सुनाए जा रहा था।

कियारा अपना सर उठाकर देखती है। वो हैरान थी कि "क्यों उसकी दोस्त अभी तक भड़की क्यों नहीं? वरना तो हमेशा गुस्सा तो उसके नाक पर रहता है।"

जैसे ही उसने सामने देखा, वो समझ गई—दोस्त गई काम से। वो फिर से अपनी किताब पर ध्यान देने लगी।

अभी राज झरना को बोल ही रहा था कि तभी वहाँ सोनिया आ जाती है और राज के हाथ से झरना के हाथ को छुड़ाते हुए खुद की तरफ़ खींच लेती है और बोलती है, "राज, तुम रहने दो। मैं इन जैसी लड़कियों को बहुत अच्छे से जानती हूँ। ये सिर्फ़ तुम्हारा अटेंशन पाने के लिए ये सब कर रही है। इससे तो मैं अभी सबक सिखाती हूँ।"

वो इतना बोलकर झरना की तरफ़ एक कदम बढ़ाती है। अब भाई, झरना तो अपने ही खयालों में गुम थी, तो उसने कुछ नहीं बोला। लेकिन तभी पीछे से आवाज़ आती है, "हिम्मत भी मत करना, दूर रहो झरना से।"

सभी उस आवाज़ की तरफ़ देखने लगते हैं।

किसकी आवाज़ थी ये?

कौन बचा रहा था झरना को?

आगे की कहानी अगले एपिसोड में। अगर पहला एपिसोड पसंद आया हो तो कमेंट ज़रूर करना।

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