Pehla nasha - Chapter 2
सब उस आवाज़ की ओर देख रहे थे। वहाँ उन्हें एक लड़की दिखाई दी। वह कोई और नहीं, कियारा थी। वह धीरे-धीरे चलकर सोनिया के पास आई।
कियारा ने व्हाइट कलर का स्लीवलैस टी-शर्ट, प्लाज़ो पैंट और लॉन्ग कोट पहना हुआ था।
झरना ने भी ठीक वैसा ही कपड़े पहना हुआ था। दोनों एकदम मिलती-जुलती लग रही थीं। बस इतना फर्क था कि कियारा ने पोनीटेल बना रखा था और चश्मा लगाया हुआ था। उसमें वह बहुत प्यारी लग रही थी। झरना ने अपने बाल खुले छोड़ रखे थे, और वह भी बहुत सुंदर लग रही थी।
कियारा ने एक झटके से सोनिया के हाथ पकड़कर उसे दूसरी ओर धक्का दिया। इससे सोनिया झरना से दूर हो गई। झरना अभी भी अपने खयालों में खोई हुई थी।
कियारा ने धीरे से झरना से कहा, "अब अपने खयालों की दुनिया से उठ भी जा, वरना तेरा जनाज़ा निकल जाएगा।"
झरना तुरंत अपने खयालों से बाहर आ गई और इधर-उधर देखने लगी।
फिर उसने कियारा का हाथ पकड़कर खुशी से कहा, "अरे यार, पता है? मुझे तुझसे पहली नज़र में प्यार हो गया। अब बता क्या करूँ मैं? अरे, तू क्या बताएगी? तुझे थोड़ी ना पता होता। काश, यार, कोई भाई होता तो मुझे सपोर्ट करता। पता नहीं मॉम-डैड मानेंगी भी या नहीं।"
फिर थोड़े कूल अंदाज़ में, "मान जाएँगी यार, बच्चे हो जाएँगे, शादी हो जाएगी तो।"
वह खुद ही बात बढ़ाती हुई राज की ओर देख रही थी। उसे यह तक पता नहीं था कि आस-पास के लोग उसकी बातें सुन रहे हैं।
खैर, फिर कियारा को ही बोलना पड़ा, "अरे-अरे, रुक जा! मेरी बुलेट ट्रेन से पहले जिससे शादी करनी है, उसका मामला भी तो सुलझा ले।"
इस पर झरना बोली, "अरे, उसमें क्या है? गाड़ी का खर्चा। अब उनकी गाड़ी, मेरी गाड़ी, मेरी गाड़ी, उनकी गाड़ी... सब सेम ही हुआ ना? फिर क्या टेंशन लेने का? अपुन का तो एक ही फंडा है, टेंशन लेने का नहीं, सिर्फ़ देने का।"
वहीं सोनिया गुस्से से कियारा की ओर बढ़ी, तभी झरना ने उसके दोनों हाथ पकड़कर उसे अपनी कमर से लगा लिया और बोली, "दूर रहो! बड़ों के बीच में नहीं बोलते, समझे?"
इतना बोलकर उसने सोनिया को धक्का दे दिया। सोनिया जमीन पर गिर गई।
वहीं कुछ लोग यह सब देखकर इसका वीडियो बना रहे थे। कई लोगों की सोनिया या उसकी मेकअप की दुकान से दुश्मनी थी।
वंश और आशु हैरानी से यह सब देख रहे थे। फिर वे दोनों एक-दूसरे की ओर देखने लगे, फिर कबीर की ओर, जो अपनी दुनिया में कहीं खोया हुआ था।
वंश बोला, "अरे कबीर भाई, कहाँ खो गए? अरे उठ जाओ! सुबह हो गई! अरे उठो! चाँद मामा चले गए, सूरज चाचा आ गए! अरे जल्दी उठो!"
वंश के इतना बोलने पर भी कबीर को कुछ फर्क नहीं पड़ा, लेकिन आशु की हँसी निकल गई। वह हँसते हुए बोली, "अरे वंश, यह क्या बोल रहे हो? सुबह तो कब की हो गई! अभी तो 11:00 बजने को हैं।"
वंश बोला, "और क्या करूँ? देखना, कबीर भाई खड़े-खड़े सो गए।"
आशु बोली, "मोटा किसको बोला? तू और कबीर भाई जो भी करें, तुझे उससे क्या?"
वे दोनों झगड़ ही रहे थे कि तभी कबीर अपने सपनों की दुनिया से वापस हकीकत में आया और उन दोनों की ओर देखते हुए बोला, "क्या कर रहे हो यार? यह मैं लव स्टोरी बनाने जा रहा था और तुमने वॉर स्टोरी शुरू कर दी?"
उसकी यह बात सुनकर वंश और आशु उसकी ओर देखकर एक साथ बोले, "लव स्टोरी? किसकी लव स्टोरी? कौन सी लव स्टोरी?"
कबीर कियारा की ओर देखकर बोला, "अरे यार, मेरी लव स्टोरी! पहली नज़र का पहला प्यार हो गया। तुम्हारे भाई को यार हो गया।"
कबीर फिर उन दोनों की ओर देखकर बोला, "अर्ज़ किया है..."
"गौर फरमाइएगा—"
इस पर वंश और आशु एक साथ बोले, "नहीं, बिल्कुल भी।" फिर एक-दूसरे को देखने लगे।
तभी कबीर बोला, "उन्हें देखा नहीं था उस नज़र से, लेकिन वह नज़र में आए और दिल के रास्ते दिल में बस गए।"
फिर खुद ही बोला, "वाह! वाह! वाह! वाह!"
आशु और वंश हैरानी से कबीर की ओर देख रहे थे। फिर वे दोनों भी धीरे-धीरे बोले, "वाह! वाह! वाह! कैसे हो ये?"
कबीर बोला, "क्यों? अच्छे थे ना? मेरी शायरी, बिल्कुल मेरी स्वीटहार्ट कियारा की तरह।"
वंश बोला, "हाँ यार, यह कैसे हो गया? आज पहली बार तूने कोई बेकार सा, घटिया सा, सड़ा हुआ डायलॉग नहीं मारा, बल्कि तूने अच्छी शायरी सुनाई है। वाकई काबिले-तारीफ़ है।"
इस पर कबीर बोला, "तू तारीफ़ कर रहा है या बेइज़्ज़ती? कुछ समझ नहीं आया।"
इस पर आशु हँसने लगी और वंश बोला, "वैसे सच कहूँ, समझ तो मुझे भी नहीं आया।"
इतना बोलकर वह भी हँसने लगा। कबीर का मुँह बन गया।
वहीं दूसरी ओर, सोनिया के पास उसकी दो चाटुकार टीना और मीना पहुँच चुकी थीं। दोनों कॉलेज में अपनी धाक जमाने के लिए सोनिया की चापलूसी करती रहती थीं।
राज शांति से सब देख रहा था। तभी टीना और मीना ने सोनिया को उठाया और झरना से कहने लगीं, "तुम्हें पता भी है तुमने किसको गिराया है? याद रखना, यह सोनिया है, इस कॉलेज के शेयरहोल्डर की बेटी! यह चाहे तो तुम्हें कॉलेज से भी निकलवा सकती है खड़े-खड़े! याद रखना!"
मीना भी बोली, "हाँ, याद रखना! सोनिया से पंगा महँगा पड़ेगा!"
सबको लगा कि अब झरना और कियारा डर जाएँगी और हार मान लेंगी। राज भी नहीं देखना चाहता था कि अब झरना और कियारा क्या करेंगी।
लेकिन झरना और कियारा का रिएक्शन बिलकुल सामान्य था। वे दोनों न तो टेंशन में लग रही थीं और न ही गुस्से में। झरना तो एकदम कूल मूड में थी, वह बस मुस्कुरा रही थी।
फिर वह आगे बढ़कर सोनिया के पास गई और बोली, "हेलो! तुमने क्या कहा था? तुम मेरे जैसे मिडिल क्लास लड़कियों को अच्छे से जानती हो, लेकिन सच कहूँ, मैं तो तुम जैसी मेकअप की दुकान को बिलकुल भी नहीं जानती, और जानना भी नहीं चाहती।"
सोनिया गुस्से में बोली, "मैं तुम्हें छोड़ूँगी नहीं! अभी के अभी तुम्हें कॉलेज से निकलवा दूँगी, समझे? अभी के अभी!"
झरना बोली, "अरे यार, तुम समझाती बहुत हो! मैं बहुत समझदार हूँ, मुझे समझाने की ज़रूरत नहीं है। और जो उखाड़ना है उखाड़ लो, क्योंकि मैं तो यहाँ से हिलने वाली नहीं हूँ। जाओगी तो तुम यार, वह भी उल्टे पाँव।"
फिर कियारा ने अपने सर को ना में हिलाते हुए मन में कहा, "यह लड़की भी ना! कभी नहीं सुधरेगी! कुछ भी कर डालती है, कुछ भी बोल डालती है, और फिर संभालना मुझे पड़ता है। चल बेटा कियारा, लग जा काम पर।"
इतना बोलकर उसने अपना फ़ोन निकाला और किनारे जाकर किसी से बात करने लगी। उसने ऑर्डर दिया और थोड़ी देर में झरना के पास आ गई।
झरना अपने पूरे अंदाज़ में बोली, "तो बेटा, क्या बोल रही थी तुम?"
फिर कियारा की ओर देखती है तो कियारा अपनी पलकें झपका देती है।
झरना अपना बोलना जारी रखती है, "हमें कॉलेज से निकलवाओगी बेटा, याद रखना! यह तुम्हारा आखिरी दिन है कॉलेज का! इसके बाद तुम्हें यह खुले मैदान देखने तक को नसीब नहीं होगा! आखिरी बार देख लो बेटा, इसे आखिरी बार!"
इतना बोलकर वह एक इमोशनल सीन की तरह ड्रामा करने लगी।
सब बहुत कन्फ़्यूज़ थे कि अब वह क्या कह रही है। तभी सोनिया के फ़ोन पर किसी का कॉल आया।
आखिर किसका कॉल आया होगा?
सोनिया और कियारा ने किसे फोन किया था?
और झरना और कियारा तो एक सामान्य परिवार से हैं, तो उनके पास इतना कनेक्शन तो नहीं हो सकता, है ना?
यह जानने के लिए बने रहिए मेरे साथ हमारी कहानी में। अलविदा दोस्तों!