Psychopath lover Ch. 3

Psychopath lover - Chapter 3

Posted by destiny ✨✨ • Apr 19, 2025 06:58 AM

ओह! तो आप ज़ारा बिरला हैं जिन्हें यहाँ नया नियुक्त किया गया है, एक मनोचिकित्सक के तौर पर।

रिसेप्शनिस्ट की बात सुन ज़ारा ने मुस्कुराते हुए सिर हिला दिया।

तभी उस रिसेप्शनिस्ट ने ज़ारा से कुछ दस्तावेज़ लिए और उसे एक आईडी कार्ड देते हुए बोली—

"ओके देन। बेस्ट ऑफ़ लक ज़ारा: द साइकोलॉजिस्ट ।।

और हाँ, मिसेज़ मेहरा का केबिन लेफ्ट साइड में है, आप वहाँ चली जाइए।"

ज़ारा ने धन्यवाद कहते हुए आईडी कार्ड लिया और अपने कदम मिसेज़ मेहरा की ओर बढ़ा दिए। वहीं वो रिसेप्शनिस्ट कम्प्यूटर में देखते हुए बोली—

"सुनिए ज़ारा। अभी डॉ मेहरा एक मरीज़ के साथ हैं तो आप वेट..." बोलते हुए रिसेप्शनिस्ट नज़र उठाकर देखती है तो ज़ारा जा चुकी थी।

ज़ारा एक केबिन के सामने खड़ी हुई थी। उसने एक गहरी साँस ली और दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। ज़ारा ने हल्का सा दरवाज़ा खोलकर देखा तो सामने कुर्सी पर एक महिला बैठी हुई थी, जिसने साड़ी के ऊपर डॉक्टर कोट पहन रखा था और उसकी नज़रें फ़ाइल में गड़ी हुई थीं।

ज़ारा उस महिला को देखकर इतनी खुश हो गई कि उसने बिना इधर-उधर ध्यान दिए सीधा जाकर उस महिला के गले लग गई। और—

"मैम... मैम!" चिल्लाते हुए उन्हें खुशी से गले लगा लिया। वहीं वो महिला अचानक किसी के गले लगने से चोंक गई और उनके हाथ से फ़ाइल छूटकर नीचे गिर गई।

ज़ारा उनसे अलग होकर खुशी से तेज आवाज़ में—

"मैम, आई एम सो ग्लैड टू सी यू। फ़ाइनली, मैं आपसे तीन साल बाद मिल रही हूँ।"

कंधे उचकाते हुए—"मुझे तो लगा था कि मैं आपसे कभी नहीं मिलूँगी... लेकिन अब तो मैं यहीं आपके साथ, आपके अंडर काम करने वाली हूँ। ओह माय गॉड! आई एम सो... सो हैप्पी।" बोलते हुए ज़ारा के चेहरे पर खुशी साफ़ नज़र आ रही थी।

वहीं वो महिला, जो कि सिद्धि मेहरा थीं, वो चोंकते हुए अब तक अपनी कुर्सी से खड़ी हो चुकी थीं। उन्होंने हैरान होकर कहा—

"ज़ारा तुम... तुम यहाँ? तुम यहाँ क्या कर रही हो? तुम यहाँ कैसे आई?"

इस वक़्त मिसेज़ मेहरा के चेहरे पर ज़ारा को देखकर कोई खुशी नज़र नहीं आ रही थी, बल्कि एक घबराहट नज़र आ रही थी। उनकी नज़रें ज़ारा के ठीक पीछे थीं जहाँ सोफ़े पर एक शख़्स एक पैर पर दूसरा पैर रखे बैठा हुआ था। उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं। उसके एक हाथ में रबर की बॉल थी जिसे वो अपने नाखूनों से खरोंच रहा था और दूसरा हाथ उसने अजीब तरह से अपने सिर पर टिकाया हुआ था। उसे देखकर लग रहा था जैसे उस शख़्स को बहुत गुस्सा आ रहा है।

वहीं ज़ारा ने अपनी खुशी में ध्यान ही नहीं दिया कि इस वक़्त उस केबिन का तापमान गिर चुका है। वो तो अपनी ही एक्साइटमेंट में बोले जा रही थी—

"क्या मैम। आप भूल गईं क्या कि मुझे एक मनोचिकित्सक के तौर पर यहाँ इस हॉस्पिटल में नियुक्त किया गया है... और आज मुझे ज्वाइन करना था, लेकिन उससे भी ज़्यादा एक्साइटमेंट तो मुझे आपसे मिलने की थी इसलिए मैं पहले सीधा यहीं आ गई।

मैं आपको बता नहीं सकती मैम कि आज मैं कितनी खुश हूँ। आई कैन्ट बिलीव दिस कि मैं अपनी फ़ेवरिट प्रोफ़ेसर और आइडियल मिसेज़ सिद्धि मेहरा के अंडर काम करूँगी। ओह माय गॉड! आई एम सो हैप्पी। ओह माय गॉड!" एक्साइटमेंट में चिल्लाते हुए ज़ारा ज़ोर-ज़ोर से घूमने लगी। वहीं मिसेज़ मेहरा ज़ारा से कुछ कहने या उसे रोकने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन ज़ारा ने उन्हें नोटिस नहीं किया।

ज़ारा घूम रही थी कि तभी उसका पैर एकदम से फिसल गया और वो धड़ाम से गिर गई। गिरने के डर से ज़ारा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन तभी उसे फील हुआ कि वो किसी के ऊपर गिरी है और उस शख़्स ने उसे बाहों में थामा हुआ है।

वो गिरी नहीं है, ये फील कर ज़ारा ने एक चैन की साँस ली और उस शख़्स को "थैंक्स" कहते हुए उठने की कोशिश करने लगी।

लेकिन उस शख़्स ने ज़ारा को नहीं छोड़ा, बल्कि उसकी कमर को और भी कसकर पकड़ लिया। वो शख़्स जो अभी तक ज़ारा के यूँ केबिन में आ जाने से गुस्से में था, उसकी नज़रें एकटक ज़ारा पर टिकी हुई थीं। इसी के साथ ही उसका गुस्सा अपने आप गायब हो गया और उसकी आँखों में अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। लेकिन जो भी था, ये एक्सप्रेशन सॉफ्ट तो बिल्कुल नहीं थे।

जब उस शख़्स ने ज़ारा को नहीं छोड़ा तो "छोड़ो मुझे!" कहते हुए ज़ारा ने नज़र उठाकर उस शख़्स की तरफ़ देखा। तो सोफ़े पर एक 27-28 साल का लड़का, जिसकी काली आँखें और भौंहों के ऊपर एक कट था, वो अपनी अजीब नज़रों से ज़ारा को ही एकटक देख रहा था।

उसकी काली आँखों को देख ज़ारा के दिल में डर की एक लहर दौड़ गई। लेकिन ज़ारा इसे इग्नोर करती है और—

"अब छोड़ो भी मुझे! या ऐसे ही पकड़कर रखने का इरादा है?" बोलते हुए उठने की कोशिश करती है।

ज़ारा की बात सुनकर उस शख़्स के चेहरे पर एक ईविल स्माइल आ जाती है और वो उसे छोड़ते हुए धीरे से—"पकड़कर नहीं, कैद करने का, तुम्हें कैद करने का इरादा है अपनी कैद में।"

"कुछ कहा तुमने?" ज़ारा ने खड़े होकर अपने बाल ठीक करते हुए पूछा।

"डॉल..." उस शख़्स ने ज़ारा को देखते हुए कहा।

"क्या?"

"डॉल, यू आर डॉल।" वो शख़्स ज़ारा की तरफ़ ऊँगली कर बोला।

तभी ज़ारा हँसकर—"डॉल नहीं, ज़ारा, ज़ारा बिरला।" बोल ज़ारा अपना हाथ आगे करती है।

"नो, ओनली डॉल।" उस शख़्स ने अजीब नज़रों से ज़ारा को देखते हुए सर्द आवाज़ में कहा। ज़ारा उसकी सर्द आवाज़ सुन कुछ पल तो डर से सिहर जाती है और उसे हैरानी से देखने लगती है।

"क्या? क्या मतलब?" ज़ारा अपनी हकलायी आवाज़ में।

वो शख़्स ज़ारा की हैरानी को भाँपकर खुद को नॉर्मल करते हुए हँसकर—

"हह... मेरा मतलब कि तुम डॉल हो... आई मीन डॉल जैसी दिखती हो।

बाय द वे, माइसेल्फ़ वंश, वंश राय... (एक पल कुछ सोचता है) आह, वंश।" कहते हुए ज़ारा से हाथ मिलाता है।

"ओह। फिर ठीक है..."

"एंड वंश, आई एम ज़ारा, नाइस टू मीट यू।" अपना सिर झटक ज़ारा अब एक स्माइल के साथ वंश से हाथ मिलाते हुए बोलती है।

वंश ज़ारा को देखते हुए उसका हाथ सहला रहा होता है और मन ही मन—

"आज से ज़ारा नहीं, डॉल हो तुम, मेरी डॉल, वंश की लिटिल इनोसेंट डॉल।" अजीब तरह से बुदबुदाता है।

वहीं मिसेज़ मेहरा जो वहीं थीं, उनके दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी ये सब कुछ देख। उनके माथे पर पसीना आ चुका था। वो मन ही मन—

"ओह नो! पता नहीं इस वंश के दिमाग में क्या चल रहा है। कहीं ज़ारा इसका नया टारगेट तो नहीं... नो, नो ऐसा नहीं हो सकता। अगर ऐसा हुआ तो ज़ारा तुम बहुत बड़ी मुसीबत में फँसने वाली हो।

और फिर तुम्हें वंश से कोई नहीं बचा सकता। कोई भी नहीं... नो, नो, नो। मुझे ज़ारा को वंश की नज़रों से दूर करना होगा।"

फिर ज़ारा को देखते हुए कड़क आवाज़ में—

"ज़ारा तुम यहाँ क्या कर रही हो? तुममें इतने भी मैनर्स नहीं हैं कि किसी के केबिन में ऐसे ही बिना उसकी परमिशन लिए नहीं जाते हैं... डोंट यू नो दैट?"

ज़ारा मिसेज़ मेहरा की कड़क आवाज़ सुन अपना सिर झुका लेती है और—"सॉरी मैम... वो मैं आपसे मिलने के लिए इतनी एक्साइटेड थी कि मुझसे वेट ही नहीं हुआ... मैंने डोर नॉक भी किया था पर कोई रिस्पांस नहीं आया तो मैं बिना परमिशन के अंदर आ गई।" ज़ारा धीमी आवाज़ में कहती है।

"शट अप ज़ारा... तुम अब कोई छोटी बच्ची नहीं हो जो ऐसी हरकतें करो... तुम्हें देखना चाहिए था कि मैं अभी पेशेंट के साथ हूँ। और मिल लिया ना मुझसे, अब जाओ यहाँ से। जाकर वेटिंग रूम में वेट करो। आती हूँ मैं थोड़ी देर में।" मिसेज़ मेहरा ज़ारा को डाँटते हुए कहती हैं।

तभी मिसेज़ मेहरा को खुद पर किसी की तेज नज़रें फील होती हैं। वो वंश की तरफ़ देखती हैं तो वंश उन्हें गुस्से से घूर रहा था। ये देख मिसेज़ मेहरा फिर चुप हो जाती हैं।

वहीं—"सॉरी मैम, दिस वोंट हैपन अगेन।" कहते हुए ज़ारा बाहर जाने के लिए कदम बढ़ाती है।

तभी ज़ारा को फील होता है कि उसका हाथ किसी की गिरफ्त में है। ज़ारा मुड़कर देखती है तो वंश ने ज़ारा का हाथ काफ़ी टाइटली पकड़ रखा था। उसकी नज़रें नीचे ज़ारा के हाथ पर झुकी हुई थीं। ज़ारा अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन वंश उसका हाथ नहीं छोड़ता।

ज़ारा धीरे से—"वंश, लीव माई हैंड।"

वंश नज़रें उठा ज़ारा को देखता है और "वेट" कहते हुए मिसेज़ मेहरा को अपनी गुस्से भरी नज़रों से घूरने लगता है। तभी अचानक ही अपने एक्सप्रेशन्स एकदम से नॉर्मल कर के सॉफ्ट आवाज़ में—

"इट्स ओके डॉ मेहरा। इट्स नॉट अ बिग डील।

ज़ारा को यहाँ रहने दीजिए। ज़ारा के यहाँ रुकने से मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। आई हैव नो प्रॉब्लम।

एंड आई एम श्योर आपको भी कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, अदरवाइज़..." बोल वंश चुप हो जाता है और गुस्से भरी नज़रों से डॉ मेहरा को देखने लगता है।

ज़ारा हैरानी से वंश को देखती है जिससे वंश अपने गुस्से को दबाकर—

"अदरवाइज़ मैं ही यहाँ से चला जाऊँगा क्योंकि अब डॉल, आई मीन ज़ारा तो सैड होते हुए अच्छी लगेगी नहीं। राइट डॉ मेहरा?"

वंश की तीखी नज़रें खुद पर महसूस कर डॉ मेहरा के रौंगटे खड़े हो जाते हैं और वो हाँ में सिर हिला देती हैं।

डॉक्टर को हाँ में सिर हिलाता देख ज़ारा के चेहरे पर एक बहुत प्यारी सी स्माइल आ जाती है।

वहीं वंश अपनी गर्दन टेढ़ी करते हुए ज़ारा को देखता है और खुद से ही कहता है—

"ये मासूमियत, ये इनोसेंस, सब कुछ एक फरेब है, पर तुम में कुछ अलग है डॉल। तुम्हारी ये इनोसेंस तुम्हारी तरह ही प्योर है जो मुझे अट्रैक्ट कर रही है।

मज़ा आएगा डॉल, तुम्हें तोड़ने में। बहुत मज़ा आएगा। पर उससे पहले तुम्हें ट्रैप करना होगा डॉल, तुम्हें खुद पर विश्वास दिलाना होगा। तभी तो तुम मेरी कैद में आओगी।"

खुद से कह वंश अजीब तरीके से मुस्कुरा देता है।

वहीं डॉ मेहरा वंश के हर एक एक्सप्रेशन को नोटिस कर रही थीं।

"ज़ारा बहुत गलत वक़्त पर आ गई तुम।" पता नहीं अब क्या होगा?

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