My Five Crule dangerous hubbys - Chapter 1
दी फाईव माफिया डाॅन
आँख खुली तो कुछ दिखा नहीं।
न धुंध थी, न रोशनी… बस दर्द था।
और लोहे की उस कुर्सी की ठंडक, जिस पर पीठ पिछले दो घंटों से बंधी हुई थी।
कोई पूछ नहीं रहा था, कोई जवाब नहीं माँग रहा था।
सिर्फ मारा जा रहा था।
पहले छाती पर मुक्के पड़े थे—धीरे, गहरे।
फिर पेट में घूसे—बिना किसी हड़बड़ी के, जैसे किसी आदत की तरह।
और फिर एक लंबा ब्रेक।
पानी की एक बूंद नहीं।
फिर वही दोबारा।
सिर्फ रफ्तार और ताकत बदलती रही।
उसके चेहरे से अब पहचान मिट चुकी थी।
नाक एक ओर मुड़ी हुई थी। होठों से खून बहते हुए गर्दन तक पहुँच चुका था।
एक आँख अब खुलती नहीं थी।
अचानक एक भारी दरवाज़ा चरमराया।
अंदर घुसी दो आदमी।
एक के हाथ में टॉर्च, दूसरी के हाथ में काली पट्टी।
किसी ने कोई बात नहीं की।
बाँहें खोल दी गईं।
पैर से जंजीर हटाई गई।
सिर्फ ज़रूरत भर की साँस बाकी थी, लेकिन इतना दम था कि उसने खुद को खड़ा कर लिया।
काली पट्टी आंखों पर बांधी गई।
अब शरीर बढ़ रहा था – किसी सुरंग में, किसी दूसरी दिशा की ओर।
कदमों की आवाज़ बदल गई थी।
लोहे की आवाज़ से अब संगमरमर की आवाज़ में तब्दील।
हर कदम जैसे एक और रहस्य की परत खोलता जा रहा हो।
सड़क नहीं, रास्ता नहीं—यह कोई प्रवेशद्वार था।
और इसके दूसरी ओर मौत हाथ फैलाए बैठी थी।
पट्टी हटाई गई।
वो अब एक अजीबोगरीब कमरे के बीच में था।
दिवारें ऊँची थीं, गहरे लकड़ी के पैनलों से बनीं।
छत से झूमर लटक रहे थे – सोने जैसे, लेकिन ठंडे।
फर्श काले पत्थर का था – उस पर धूल का नामोनिशान नहीं।
कमरे के उस पार – पाँच ऊँची कुर्सियाँ थीं।
हर कुर्सी पर बैठी थी एक आदमी—चेहरे धुँधले, बस एक शारीरिक "हाज़िरी" महसूस होती थी।
न नाम, न संवाद…
बस मौजूदगी।
मौजूदगी जो दिल की धड़कन धीमी कर दे।
घायल आदमी को धक्का देकर फ़र्श पर गिराया गया।
उसके मुँह से कराह भी नहीं निकली।
अब दर्द की भी आदत हो चुकी थी।
कोई नहीं बोला।
लेकिन खामोशी में भी कुछ तय हो रहा था।
अचानक सबसे दायीं ओर बैठा हुआ वह व्यक्ति—जो सबसे शांत दिखता था—अपनी उंगलियाँ घुमाने लगा।
बीच वाले आदमी ने अपने घुटनों पर झुकी हथेली से बस हवा में हल्का सा इशारा किया।
तुरंत दो लोग पीछे से आए।
एक ने पीछे से पकड़ लिया।
दूसरे ने एक छोटी सी स्टील की पिन उसकी गर्दन में चुभो दी।
एक ठंडी सनसनाहट दौड़ी रीढ़ में।
उसके शरीर ने झटका खाया।
एक और इशारा हुआ।
इस बार बायीं ओर बैठे आदमी ने सिर थोड़ा झुकाया।
एक और आदमी आगे बढ़ा, उसके हाथ में एक पतली, लचीली रॉड थी—सिरों पर रबर की कोटिंग।
उसने रॉड उठाई—और उसके घुटनों के नीचे मारा।
कड़क।
हड्डी टूटी।
मुँह से चीख निकली—दबी हुई।
एक और वार—पेट पर।
तीसरी बार, हाथों पर।
रॉड फिर दीवार पर टिक गई।
कोई हिला नहीं। कोई बोला नहीं।
तभी बीच वाले आदमी ने अपनी उँगली उठाई—ऊपर से नीचे।
बिलकुल सीधे, जैसे कोई गिलोटीन का आदेश दे रहा हो।
तीन लोग अंदर आए।
उनमें से एक के पास एक छोटा, काला ब्रीफकेस था।
दूसरे ने उसके सामने एक ऊँची सी काँच की कैबिनेट खींची।
कैबिनेट के भीतर कुछ नहीं दिख रहा था।
फिर उस ब्रीफकेस को खोला गया।
भीतर रखी थी—एक चमकदार चिप।
उस चिप को उस आदमी की गर्दन पर फिक्स किया गया।
कुछ सेकंड… कुछ हलचल… और फिर — सब शांत।
घायल आदमी की सांसें रुक चुकी थीं।
उसकी आँखें खुली थीं।
चेहरे पर वही खून की रेखा थी।
मगर अब दिल नहीं धड़कता था।
कमरे में एक और इशारा हुआ।
दो लोग आए, शव को घसीटते हुए बाहर ले गए।
कहीं से धीमे स्वर में एक वायलिन की आवाज़ आई।
बहुत हल्की… मगर भीतर उतर जाने वाली।
पाँचों आदमी अपनी-अपनी कुर्सी से उठे।
उनमें से किसी ने न चेहरा दिखाया, न शब्द कहे।
लेकिन मौत का काम पूरा हुआ था।
दरबार बंद हुआ।
लाश अब भी वहीं पड़ी है।
कमरा पहले जितना ठंडा है, अब उससे कहीं ज़्यादा सन्नाटा है।
पाँचों कुर्सियाँ अब रौशनी में हैं।
पाँच चेहरे।
पाँच काले कोट।
और एक अंधेरा जो इनकी आत्मा से रिसता है।
विशवा “द ब्रेन” (उम्र: 30)
कोट: स्लिम फिट चारकोल ग्रे सूट, ब्लड-रेड टाई, पॉकेट स्क्वायर में सोने का पिन।
चेहरा: शांत, कटार जैसी आँखें, हल्की दाढ़ी – सर्जिकल परफेक्शन।
वायस: धीमी, ठंडी, और दो शब्दों में फैसला देने वाली।
विवेक ने घड़ी पर समय देखा, फिर मृत शरीर पर निगाह डाली।
“3 मिनट 14 सेकंड,” वह बोला, “मैंने कहा था 3 मिनट से ज़्यादा नहीं लगना चाहिए था।”
फिर टेबल से एक नीले फोल्डर को निकाला, “इसकी जगह अब एक और नाम आया है। अगली बार टाइमिंग गलत हुई तो मरने वाला अपना ही होगा।”
उसकी मुस्कान वैसी थी जैसे डॉक्टर ऑपरेशन के बाद हाथ धोता है।
कबीर “द हिटर” (उम्र: 28)
कोट: चमकदार ब्लैक सूट, कॉलर उठी हुई, टाई नहीं – बस ब्लैक शर्ट के टॉप बटन खुले।
चेहरा: आंख पर हल्का कट का पुराना निशान, जबड़ा सख्त और मुट्ठी हमेशा हल्के कंपकंपाती।
वायस: विस्फोट के ठीक पहले की ख़ामोशी।
रफ़्तार ने कोट की जेब से रिवॉल्वर निकाली, बिना देखे ज़मीन की तरफ एक गोली चलाई — धमाका गूंजा।
“जिस दिन मेरी बंदूक बोलेगी, कानून दिमाग़ नहीं पूछेगा — बस खून गिरेगा।”
फिर कंधे झटककर बोला, “मैंने इसे घसीट कर लाया था… अब अगला लाश नहीं लाऊँगा — उसका पूरा कुनबा लाऊँगा।”
विक्राल “द साइलेंट डेथ” (उम्र: 26)
कोट: सिल्क ब्लैक टक्सीडो, बिना बटन, अंदर ब्लड-ब्लू शर्ट — ग्लव्स अब भी हाथ में।
चेहरा: निर्विकार, जैसे कोई शरीर में आत्मा ही नहीं।
वायस: साँप की साँस जैसी — धीमी, लेकिन मारक।
ज़हर शव के पास बैठा, झुक कर उसके कान के पास बोला —
“मैंने इसकी नसों में ज़हर मिलाया… अब तू सोया है। पर तेरे घर वाले उठते वक्त कांपेंगे।”
फिर पीछे मुड़कर बोला,
“मैं कभी चिल्लाता नहीं। मैं बस धीरे-धीरे मारता हूँ… क्योंकि तड़प, गूँज से ज़्यादा तेज़ होती है।”
रनधीर “द फाइनेंसर” (उम्र: 25)
कोट: सिल्वर ग्रे अरमानी, बटन क्लोज्ड, पॉकेट में एक स्टील-पेन और एक जला हुआ पासपोर्ट।
चेहरा: हल्की मुस्कान, लेकिन ठंड जैसी ठोस, कंपकंपाती आँखें।
वायस: जैसे बैंक का नोट — खामोश, मगर दबाव से भारी।
हवाला अपने टैबलेट को देखता रहा।
“इस एक आदमी ने मेरे पाँच चैनल ब्लॉक किए। अब उसकी पत्नी के नाम पर जीवन बीमा की रकम मैंने क्लेम की है… और उसके बेटे के नाम से लॉन्ग टर्म डेब्ट खोल दिया है।”
वह धीरे से मुस्कराया —
“मुझे खून से नहीं, मुनाफे से भूख लगती है।”
मरण “द ब्लडबॉय” (उम्र: 22)
कोट: डार्क ब्लड-रेड लाइनिंग वाला ब्लैक कोट, बिना टाई, कॉलर पर ‘666’ एम्ब्रॉयडर्ड।
चेहरा: मासूम, लेकिन पलक झपकते ही शिकारी।
वायस: जैसे कोई बच्चा कहानी सुना रहा हो — डरावनी।
काज़ी ने कोट के अंदर से एक छोटा ब्लेड निकाला, जैसे कोई पेन हो।
फिर शव के गाल पर हल्की कटिंग की और बोला —
“मैं खेलने देता अगर तुम चिल्लाते… पर तुम डर के मारे पहले ही मर गए।”
वह हँसा — “मैं रुकता नहीं — मौत भी मुझे छूकर डरती है।”
कमरे में फिर एक सन्नाटा… लेकिन अब यह शांति नहीं, एक घुटता हुआ डर है।
पाँच चेहरे, और पाँच अलग नर्क।
ये भाई अब किसी “माफ़िया” का नाम नहीं हैं —
ये हैं उस व्यवस्था के वायरस, जिसे कानून पकड़ नहीं सकता… और जुर्म समझ नहीं सकता।
हर एक, एक हथियार है। और ये हथियार अब चल पड़े हैं।
“शैतानों की शाही रात”
स्थान: अंडरवर्ल्ड का सबसे गोपनीय क्लब — INFERNO
समय: रात 11:33 — जब अंधेरे को भी डर लगने लगे।
INFERNO कोई आम क्लब नहीं था। यह ज़मीन के नीचे 27 फीट नीचे बसा एक गुप्त महल था, जिसे सिर्फ़ वही जानते थे जिनकी साँसें क़ीमती नहीं, ख़तरनाक थीं। वहाँ दीवारें चांदी की थीं, लेकिन आवाज़ें खून की। वहाँ हर शराब की बोतल से ज़्यादा कीमत उस इंसान की जान की थी जिसने उसे छुआ।
उस रात क्लब में अंडरवर्ल्ड के बड़े चेहरे मौजूद थे — हथियार तस्कर, ड्रग लॉर्ड, फर्जी पासपोर्ट के किंग, और ब्लैकमेलिंग से करोड़ों कमाने वाले बिज़नेसमैन।
शोर धीमा था, लेकिन नज़रें तेज़।
सब एक ही सवाल का इंतज़ार कर रहे थे:
"क्या आज वो पाँचों आएंगे?"
फिर, जैसे समय खुद थम गया — दरवाज़े खुले।
और हवा का तापमान अचानक एक डिग्री गिर गया।
पहली परछाईं: विशवा “द ब्रेन” की एंट्री
विशवा सबसे पहले दाखिल हुआ — जैसे कोई CEO नहीं, एक तानाशाह हो।
कोट: सियाह रंग का स्लिम फिट टक्सीडो, कॉलर के पास सफ़ेद कढ़ाई में एक शब्द — "Control".
चेहरा: चुप, लेकिन नज़रों में गणना — जैसे हर इंसान की प्राइस टैग उसके माथे पर दिख रही हो।
उसके पीछे एक सहायक चल रहा था, हाथ में स्टेनलेस स्टील का एक एक्टिवेटेड ब्रीफ़केस — जिसमें ज़हरीले दस्तावेज़ थे। वो जिस किसी पर मुस्कराता, वो अपनी जगह से थोड़ा और सीधा बैठ जाता — जैसे अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा हो।
विशवा ने बार के सामने जाकर सिर्फ़ इतना कहा —
"Whiskey neat. Without fear."
दूसरा तूफ़ान: कबीर “द हिटर” की धमाकेदार एंट्री
दरवाज़े दोबारा खुले, इस बार जैसे बिजली गिरी हो।
कबीर अंदर घुसा — कोट-पैंट में, लेकिन उसकी चाल में हिंसा का नाच था।
कोट: ग्रे शेड में स्किन टाइट ब्लेज़र, अंदर सिल्वर टीशर्ट जो बॉडी से चिपकी हुई थी।
बाल: बिखरे हुए, जैसे किसी की खींचाई के बाद सीधा आया हो।
उसने आते ही एक टेबल की बॉटल उठा ली और बोला —
"मुझे पीने की ज़रूरत नहीं, मैं खुद नशा हूँ।"
फिर कैमरे की तरह क्लब के लोगों पर नज़र दौड़ाई —
"तुम सब बैठे हो, मैं आया — खड़े हो जाओ।"
कुछ सेकंड में चार चेयरें खाली हो गईं — कबीर ने वहीं बैठकर अपने बूट्स टेबल पर रख दिए।
तीसरा सन्नाटा: विक्राल “द साइलेंट डेथ”
क्लब की लाइट कुछ सेकंड के लिए धीमी हुई। और जैसे अंधेरे से एक शैतान निकलता हो — ज़हर प्रकट हुआ।
कोट: midnight blue velvet suit, अंदर blood red शर्ट। उसकी टाई नहीं थी — बस एक पतली काली चेन जो गर्दन से सीने तक जाती थी।
आँखें: नशीली, लेकिन उनकी गहराई में मौत तैरती थी।
वो चुपचाप चला, जैसे हर कदम किसी की सांस रोक देता हो।
लोग रास्ता बना रहे थे — किसी ने उसके पास से होकर गुजरने की हिम्मत नहीं की।
उसने एक खाली कुर्सी ली, और पास बैठे आदमी की सिगार लेकर बस इतना कहा —
"तुम्हारे फेफड़े पहले ही मर चुके हैं — अब सिगार मेरी हुई।"
चौथी चाल: रनधीर “द फाइनेंसर” की ग्लैम एंट्री
लिफ्ट से नहीं — बल्कि ग्लास एलिवेटर से नीचे उतरा हवाला। उसकी एंट्री किसी क्रिप्टो किंग जैसी थी, लेकिन उसकी मुस्कराहट में वैसी ही क्रूरता छिपी थी।
कोट: सफेद बेस पर ग्रे चेक्स वाला three-piece suit, अंदर सिल्क वाइन कलर शर्ट।
हाथ में: एक IPad Pro और दूसरी जेब से झाँकते ब्लैक क्रेडिट कार्ड्स — नकली नामों से।
उसने आते ही क्लब के कैमरों को हेक कर दिया — अब वो जहाँ गया, स्क्रीन पर उसकी छवि दिखने लगी।
उसने माइक उठाया —
"मैं ही वो हूँ जिसके पैसों से तुम सब जिंदा हो… और अब मैं देखता हूँ कौन कितने में बिकेगा।"
पांचवां कहर: मरण “द ब्लडबॉय” की थ्रिलर एंट्री
आख़िरी दरवाज़ा जैसे किसी कब्र से खुला — धुआं फैला, और उससे निकला काज़ी।
कोट: ब्लैक लेदर कोट, अंदर स्लिम फिट शर्ट जिस पर खून के निशान जानबूझकर रखे गए थे।
चेहरा: मासूम, लेकिन आँखें ऐसी जैसे किसी का गला काटने के बाद सुकून मिला हो।
उसके साथ 2 बॉडीज़ अंदर लाए गए — कवर में।
उसने डांस फ्लोर के बीच जाकर कवर हटाया — दोनों उस गैंग से थे जो इन पाँच भाइयों से दुश्मनी रखते थे।
मरण ने चुपचाप कहा —
"गिफ्ट लाया हूँ… पार्टी की जान बढ़ाने के लिए।"
पाँचों साथ — और हवा में झुनझुनी फैल गई।
INFERNO अब एक महज़ क्लब नहीं — बलि का मंच बन चुका था।
संगीत धीमा, लेकिन तनाव गाढ़ा।
इन पाँचों भाइयों ने अपना विशेष Sapphire Table लिया — बीच क्लब में, गोल मेज़, जिसके नीचे एक सीक्रेट लिफ्ट थी — अगर फौरन भागना हो तो।
विशवा बीच में बैठा, कबीर उसके दाएँ, विक्राल बाएँ। रनधीर उसकी पीछे की सीट पर, और मरण टेबल पर अपने सिस्टम्स चालू करके।
फ्लोर पर खड़े सब लोग अब शिकार या सौदा बन चुके थे।
विशवा ने चुपचाप फाइल खोली —
"Target #47. इंडो-बेल्जियम लॉबी से उठा। आज उसे भी देखना है…"
कबीर मुस्कराया — "लाओ उसका चेहरा।"
विक्राल ने टैब पर क्लिक किया — एक लड़की की तस्वीर दिखी।
सब चुप हो गए।
रनधीर बुदबुदाया — "इस बार दिल लग जाएगा शायद…"
मरण हँसा — "या खून…"
और फिर, म्यूज़िक तेज़ हो गया।
पाँचों उठे, जैसे अपने-अपने तरीकों से पार्टी को चलाने।
विक्राल डांस फ्लोर पर घुसा — जैसे भीड़ में शिकार देख रहा हो।
रनधीर VIP सेक्शन में गया — डील्स पक्की करने।
विशवा एक बूढ़े माफिया के पास बैठा — उसकी मौत लिखने।
मरण बार में जाकर ब्लेड से बर्फ़ काटने लगा — जैसे किसी की गर्दन…
विशवा ऊपर वाली गैलरी में गया — सबको एक साथ देखने।
ये कोई आम रात नहीं थी। ये एक संदेश थी।
“हम पाँचों अब छुपे नहीं हैं — हम सत्ता हैं।”