मेरी इनायत Ch. 2

इंतकाल

Posted by unicorngirl ✔️ • Jun 07, 2025 09:30 AM

पारस की बात सुनकर रियाज की आंखें छोटी हो जाती है और वो कहता है “तो क्या इस साल हमारा टर्नओवर ट्रिलियन में नहीं आया है?”

जी नहीं बॉस दरअसल हमारा टर्नओवर ट्रिलियन होने में सिर्फ 20 मिलियंस ही कम रह गए थे।

रियाज पारस की बात बहुत ध्यान से सुन रहा था और फिर उसने कुछ सोचते हुए कहा “ठीक है अगर इस बार हमारा टर्नओवर ट्रिलियन में नहीं आया है और उसकी वजह से हमें होटल ग्रीन स्टार में इनविटेशन नहीं मिला है तो, इस ग्रीन स्टार को ब्लैक स्टार में कन्वर्ट कर दो और वो भी कुछ इस तरीके से की लोगों को पता चलना चाहिए कि, समंदर में रहकर शार्क से दुश्मनी नहीं करते हैं।

कल के न्यूज़ पेपर में मुझे एक हैडलाइन चाहिए जिसमें, लिखा होगा कि रातों-रात होटल ग्रीन स्टार दिवालिया हो गया है और अगर ऐसा नही हो पाया तो अपने लिए दूसरी जॉब सर्च कर लेना!”

पारस जल्दी से सर हा मे हिलाता है और कहता है “जी बॉस हो जाएगा!”

इसके बाद पारस अपने डायरी में कुछ चेक करते हुए कहता है “बॉस एक और बात है जो आपसे कहनी थी?”

रियाज ने अपनी कुर्सी पर सिर टिकाया और अपनी आंखें बंद करते हुए कहा “पारस तुम मेरे भरोसेमंद आदमी हो, इसका मतलब ये नहीं है कि, तुम मेरी बीवी वाली हरकत करोगे। जो भी बात है तुमसे एक बार में नहीं कहीं जाती है क्या?”

सॉरी बॉस लेकिन बात ये है कि, हमारे अकाउंट डिपार्मेंट मैं जो सबसे सीनियर अकाउंटेंट थे mr मुर्तजा अली.. आज सुबह उनका इंतकाल हो गया है!”

व्हाट? रियाज चौक कर सीधा बैठ जाता है।

उसे इस खबर से थोड़ा धक्का लगा था और वो हैरान नजरों से पारस को देख कर कहता है “क्या बकवास कर रहे हो? उनकी डेथ कैसे हो सकती है? और अचानक से उन्हें क्या हो गया था? वो तो काफी समय से ऑफिस भी नहीं आ रहे हैं और फिर अचानक से उनकी मौत की खबर …?”

पारस ने हा मे सिर हिलाते हुए कहा “जी बॉस दरअसल पिछले 15 दिनों से वो ऑफिस नहीं आ रहे हैं, वो अपने होमटाउन पर है ,मुंबई के पास पालघर मैं उनका घर है। जहाँ उनकी वाइफ और एक बेटी रहती है। पिछले कुछ टाइम से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। इस वजह से ऑफिस नहीं आ पा रहे थे, अपने घर पर ही थे लेकिन आज सुबह डॉक्टर ने उन्हें डेथ डिक्लेयर कर दिया था!”

रियाज अपनी आंखें बंद कर लेता है और अपने दोनों हाथों को सामने की तरफ उंगलियों को फसाते हुए टेबल पर रख लेता है।

वो थोड़ी परेशानी के साथ कहता है “वो हमारे यहां पर काफी पुराने एम्पलाई थे। जब दादाजी ने मुझे ये कंपनी हैंडोवर करी थी। तभी वो यहां पर मौजूद थे। उनकी ईमानदारी पर शक नहीं किया जा सकता था। उनकी मौत का सुनकर बहुत अफसोस हुआ मुझे। तुम एक काम करो, किसी एंप्लॉय को उनके घर पर भेजो और देखो की उनकी बीवी और बच्चों को कोई मदद की जरूरत तो नहीं है और अगर हुई तो उनकी थोड़ी मदद करवा देना!”

पारस ने हा मे सिर हिलाते हुए कहा “बॉस वो तो मैं करवा दूंगा लेकिन एक और बात है जो आपको बताना जरूरी है?”

रियाज घूरते हुए पारस को देख कर कहता है “मैंने गलत नहीं कहा था तुम सच में मेरी बीवी बनते जा रहे हो। एक के बाद एक बात बताओगे एक साथ नहीं कह सकते हो? अब बोलो!”

वो दरअसल mr मुर्तजा ने पिछले महीने हमारी कंपनी से 20 लाख का लोन लिया था और वो पैसे उन्होंने चुकाई नहीं है। कंपनी उनसे कोई सवाल करती या, फिर उनसे पैसा वापस मांगती तो उससे पहले ही उनका इंतकाल हो गया है!”

रियाज गुस्से में भड़कते हुए कहता है “सिर्फ 20 लाख के लिए तुम किसी मरे हुए इंसान के साथ सौदेबाजी कर रहे हो? दफा हो जाओ पारस यहां से!”

अपने बॉस की डांट सुनकर पारस वहां से निकल जाता है और रियाज अपनी कुर्सी पर बैठकर अपनी आंखें बंद करते हुए मन में कहता है “खुदा आप की रूह को जन्नत दे!”

वही दुसरी तरफ,पालघर की छोटे से मोहल्ले में...

गली के किनारे पर एक जनाजे को सजाया गया था।

अब्बू अब उठ जाइए ना अब्बू.. अम्मी अब्बू से कहिए ना वो अब उठ जाए?”

वो लड़की जो इस वक्त अपने अब्बू के शरीर से लिपटकर रो रही थी। उसने मुड़कर अपनी मां को देखते हुए कहा “जो खुद इस समय सदमे में दिखा रही थी!”

नहीं अब्बू आप मुझे छोड़कर नहीं जा सकते हैं, मैं आपके बिना कैसे रहूंगी। वो लड़की अपने पिता के शरीर से लिपटकर दहाड़े लगा लगाकर रो रही थी। उसकी सिसकियां किसी का भी दिल कांपने पर मजबूर कर देती और उसकी आंसू किसी को भी रुला सकते थे। अपने पिता के खोने के गम में वो लड़की अपने पिता से लिपटकर बेहिसाब रोई जा रही थी।

कुछ रिश्तेदार आगे आते हैं और कहते हैं.. “जनाजा उठाने का समय आ गया है!”

उस लड़की ने जैसे ही ये सुना वो अपने पिता से और लिपट जाती है और बिल्कुल उसे कस के जकड़ लेती है। जैसे वो उसे छोड़ना ही नहीं चाहती हो।

कुछ औरते ने आकर उस लड़की को जबरदस्ती पीछे की तरफ खींचा और रिश्तेदार आगे आते हैं, वो सब लोग जनाजे को उठाते हैं और उसे कंधा देने ही वाले होते हैं कि, वो लड़की और उसकी मां दोनों जनाजे पर लेट जाती है, जैसे उसे जान ही नहीं देंगे।

लेकिन औरतों ने और रिश्तेदारों ने आकर उन मां बेटी को संभाला। रिश्तेदार जनाजे को लेकर आगे बढ़ रहे थे और वो दोनों बस अपनी हताशा भरी आंखों से रोते हुए सिर्फ अपने पिता को अंतिम विदाई दे सकते थे।

मिट्टी करने के बाद कब्रिस्तान से सारे रिश्तेदार वापस आ गए थे और सब लोग उस घर के आंगन में बैठकर बातें कर रहे थे कि, आगे क्या करना है।

एक रिश्तेदार ने कहा “बताओ भाई आजकल तो जीवन का कोई भरोसा ही नहीं है, अभी पिछले महीने की ही तो बात है, ईद पर आया था मुर्तजा, भाभी और बच्चों से मिलने के लिए। उसके बाद अचानक से तबीयत और फिर हालत इतनी बिगड़ती चली गई है, की आज सुबह ही अल्लाह को प्यारे हो गए!”

तभी एक औरत कहती हैं “बाकी सब तो ठीक है, भाभी जी को तो फिर भी सब संभाल लेंगे पर बेचारी इनायत की हालत तो किसी से देखी ही नहीं जा रही है। वो अपने अब्बू से बहुत प्यार करती थी। अभी तो उसकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई है और इतनी कम उम्र में पिता का साया सर से उठ गया है!”

तो क्या होगा आगे और कैसे होगी इनायत की रियाज़ से मुलाकात..?

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