मेरी इनायत Ch. 3

हुस्न का जादू

Posted by unicorngirl ✔️ • Jun 07, 2025 09:34 AM

एक बहुत बड़ा लग्जरियस पेंटहाउस में.. रियाज सोफे पर बैठा हुआ था। उसकी एक हाथ में ड्रिंक का ग्लास था, तो दूसरे हाथ में एक जलती हुई सिगरेट।

वो अपने लैपटॉप पर सामने चढ़ती और उतरती शेयर मार्केट सीट को देख रहा था। तभी उसके दरवाजे पर दस्तक होती है। रियाज टेबल पर रखा हुआ रिमोट उठाता है और डोर ओपन करता है।

डोर पर एक लड़की खड़ी थी। जिसने रेड कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी। वो लड़की अदाओं के साथ अंदर आती है और रियाज के सामने आकर खड़ी हो जाती है।

रियाज को पता था कि ये लड़की कौन है और उसके चेहरे पर एक डेविल स्माइल आती है। उसने हाथ बढ़ाकर सबसे पहले लैपटॉप बंद किया और फिर अपने दोनों हाथों को सोफे पर फैलाते हुए उस लड़की को देखकर कहा “तो आज का खूबसूरत नगीना तुम हो?”

उस लड़की के चेहरे पर भी एक मिस्टीरियस मुस्कान थी। उसने अपना shrug कमरे के कोने में फेंकते हुए अपने ड्रेस की स्ट्रिप्स कंधे से नीचे गिरा दी। वो लड़की अदाओं से चलते हुए रियाज के पास आती है और उसके सामने टेबल पर बैठ जाती है, लेकिन उसके बैठने का अंदाज बहुत ही वाहियात था।

वो लड़की रियाज को देख कर कहती है “मुझे किसी ने बताया है कि, आप खूबसूरत चीजों के शौकीन हैं? अगर ऐसी बात है तो मैंने सोचा क्यों ना आपको अपनी खूबसूरती का एक छोटा सा जलवा दिखाया जाए?”

रियाज के चेहरे पर एक डेविल स्माइल थी और उसने उस लड़की को ऊपर से लेकर के नीचे तक देखते हुए कहा “तुम खूबसूरत हो नो डाउट लेकिन इतनी भी नहीं हो कि, तुम्हारा जादू मुझ पर चल सके?”

उस लड़की ने अपना एक हाथ रियाज के सीने पर रखते हुए उसकी आंखों में देख कर कहा “तुम मुझे एक मौका तो दो?”

दिया मौका…. रियाज ने ये कहने के साथ ही उस लड़की को कमर से पकड़कर उठा लिया और अगली ही पल उसे ले जाकर बेड पर पटक दिया। सुबह तक उस कमरे से सिर्फ कराहने की ही आवाज आ रही थी जो, ये बता रही थी कि, रियाज कितना वाइल्ड था।

अगली सुबह ..

रियाज बाथरूम से बाहर आता है और उसकी नजर बेड पर सो रही उस लड़की पड़ जाती है। वो सो रही थी या, बेहोश थी ये बता पाना मुश्किल था। रियाज ने कल रात उसकी इतनी बुरी हालत की थी कि, वो लड़की पुरा ही बेहोश हो गई थी।

रियाज एक ब्लैंक चेक निकालता है और उसमें साइन करके उस लड़की के सिरहने रख देता है।

वो उस लड़की को देखते हुए धीरे से कहता है.... “तुम खूबसूरत होने के साथ-साथ नाजुक भी बहुत हो!”

रियाज होटल के कमरे से बाहर निकलता है और अपनी गाड़ी में बैठकर घर की तरफ चल देता है। पूरे रास्ते उसके सिगरेट का सिलसिला फिर से चालू हो गया था। वो सिगरेट का इतना बड़ा एडिक्ट था कि, एक दिन में एक पैकेट उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी।

रियाज वापस अपने ऑफिस आता है और अपने केबिन में जाकर फिर से अपना काम शुरू करने लगता है। एक दिन भी ऐसा नहीं था जब रियाज ऑफिस नहीं आया था। उसकी कंपनी का टर्नओवर उसके लिए बहुत मायने रखता था। वो हमेशा अपनी कंपनी को नंबर वन पोजीशन पर रखने के लिए मेहनत करता था।

लेकिन इसके अलावा इसका एक दूसरा साइड भी है जो, रियाज मलिक का नहीं बल्कि मालिक का है। उसके इल्लीगल वर्ल्ड के जितने भी लोग हैं वो उसे मालिक कहते हैं क्योंकि, वो सब उसके गुलाम है। एक बात जो रियाज को हमेशा से पता थी वो ये थी कि, अगर तुम हार नहीं सकते हो तो तुम हार जाओगे। इसीलिए लड़ना ही जिंदगी का पहला रूल है क्योंकि, अगर तुम शिकार नहीं करोगे तो सामने वाला तुम्हारा शिकार कर लेगा।

वहीं दूसरी तरफ,

इनायत के घर पर. शोक मनाने आए मेहमान रात में चले गए थे। बस घर के लोग ही रुके हुए थे। इनायत की अम्मी गहरी सदमे में थी और वो खुद को संभाल भी नहीं पा रही थी। यही हाल कुछ इनायत का भी था। इनायत ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। वो कल से ही किसी से नहीं मिली थी और ना ही रात में उसने कुछ खाया था। वो इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रही थी कि अब उसके अब्बू नहीं रहे।

इनायत अपने अम्मी और अब्बू से बहुत प्यार करती है। उस के लिए वही दोनों उसकी पूरी दुनिया है। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो लोग गरीब हैं, वो लोग एक साथ हैं और एक दूसरे से प्यार करते हैं, इनायत के लिए यही काफी था।

इनायत अपने अम्मी और अब्बू को दुनिया की सारी खुशियां देना चाहती थी और अपने पिता के अचानक से गुजर जाने के बाद इनायत इतने गहरे सदमे में चली गई थी। वो भी उनके साथ ही चली जाना चाहती थी। इनायत सबसे ज्यादा अपने पिता से जुड़ी हुई थी।

इनायत का परिवार एक साधारण से मोहल्ले में रहता था। जहां पर लोगों की ज्यादा महत्वाकांक्षाएं नहीं थी। उसके पिता घर से दूर एक दूसरे शहर में काम करते थे, पर हर रविवार वो छुट्टी वाले दिन अपने घर पर ही बिताया करते थे। उनके लिए उनकी बेटी ही उनकी सबसे बड़ी दौलत थी। इनायत के अब्बू ने उसे हमेशा ही स्वाभिमान से रहना सिखाया है। जब भी इनायत को स्कूल में कोई ट्रॉफी मिलती या, फिर कॉलेज में स्कॉलरशिप उसके अब्बू हमेशा उसके सराहना करते थे।

इनायत के अब्बू का ये मानना था कि बेटियां भी वो सारे काम कर सकती है जो, एक बेटा कर सकता है, बस बेटियों को उड़ाने के लिए पंख देना चाहिए। वो अपनी जिम्मेदारियां अच्छी तरह से समझती है, बस उनके ऊपर पाबंदी न लगे।

इनायत अपने अब्बू की इन्हीं सब बातों को याद करते हुए रोए जा रही थी। कुछ मीठी यादें जो, उसने अपने पिता के साथ बनाई थी, वो उन यादों में खोई हुई थी और हमेशा उन्हें यादों में रहना चाहती थी।

इनायत सिसकियां लेते हुए अपने अब्बू को याद कर रही थी और सिर्फ रोए जा रही थी। उसका चेहरा पूरा लाल पड़ गया था और उसके होंठ भी सुर्ख हो गए थे, उसका रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था, पर वो इस समय अकेले रहना चाहती थी। इसीलिए उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया था।

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