लव इज लव (एक अनोखी शादी) Ch. 2

लव इज लव (एक अनोखी शादी) - Chapter 2

Posted by Sarvam • Jun 19, 2025 02:47 PM

चंद्रकला गायकवाड और मैथिली जाधव अपने जमाने की पक्की सहेलियां थी । शादी के बाद भी उनकी दोस्ती पहले की तरह ही बनी रही । जिसका नतीजा था दोनो परिवार एक दूसरे से सालो से जुड़े हुए थे ।

चंद्रकला के दो बेटे है , देवराज और आदिनाथ । देवराज की पत्नी हेतवी और दो बच्चे अस्मिता और दत्ता । अस्मिता की शादी हो चुकी है । अपने पति प्रणय के साथ वो गायकवाड़ निवास में ही रहती है ।

वही आदिनाथ की पत्नी पवित्रा और उनकी दो जुड़वा बेटियां है , युतिका और अविका ।

दूसरी तरफ मैथिली के दो बच्चे है, बेटा अंकुश और बेटी अनिता । अंकुश की पत्नी दर्शना और उनके दो बच्चे मानव और मृदुला ।

अनिता के भी दो बेटे है , अथर्व और उज्वल । उज्वल अपनी बाइस साल की उम्र से देश के बाहर रह रहा था ।

एक साल पहले ही मैथिली का स्वर्गवास हो गया। उनकी आखिरी इच्छा थी दोनो परिवार में दोस्ती से गहरा रिश्ता बने । जब वो अपने आखिरी समय में थी तभी दत्ता और मृदुला की सगाई उनकी आंखों के सामने कर दी गई । हालाकि दोनो से ही उनकी हामी नहीं ली गई ।

चंद्रकला ने अपनी सहेली की आखिरी इच्छा का मान रखते हुए पहले श्राद्ध के फौरन बाद शादी का मुहूर्त निकाल लिया ।

उस मैरिज हॉल के अंदर इस समय मौत सा सन्नाटा छाया हुआ था । कोई भी इंसान बाहर नही जा पाया क्युकी एकलव्य मुख्य दरवाजे पर ही खड़ा था । दत्ता का ऐसे चले जाना इस बात का सबूत था आज किसी भी हालत में शादी होकर ही रहनी थी । इसी का कारण था दत्ता के पिता देवराज गायकवाड़ आराम से हाथ में ज्यूस का ग्लास पकड़े उसे पिए जा रहे थे ।

वही मानव परेशानी में बाहर टहल रहा था । उसकी आंखे रोने के कारण लाल हो चुकी थी । अपनी बहन मृदुला के अलावा वो वेधा को काफी बार फोन कर चुका था । मृदुला का फोन तो शुरू से बंद ही था लेकिन अब वेधा का भी बंद हो गया । मानव ने अपना सर पकड़ लिया । हालाकि दत्ता ने कभी उस पर अपना गुस्सा दिखाया नही था , लेकिन इसका ये मतलब नही मानव को पता ना हो दत्ता बाकी सबके लिए कैसा था । अपना खानदान उसके लिए प्रथम स्थान पर आता था ऐसे में जो दत्ता ने कहा वो करने के अलावा जो नही कहा वो भी कर सकता था ।

इसी बीच उसके कानो में कुछ गाड़ियों की आवाज सुनाई पड़ने लगी । मानव की धड़कने तेज हो गई । और अगले ही पल उसके ठीक सामने दत्ता की गाड़ी आकर रूकी । किसी के बाहर आने का मानव इंतजार करने लगा । दरवाजा खुला और मानव ने अपने कुर्ते को मुट्ठियों में भींच लिया । दत्ता के चेहरे पर सर्द भाव थे । उसके हाथ और कुर्ते पर खून लगा हुआ था । मानव के कदम लड़खड़ाने लगे जैसे उनमें जान ही ना बची हो ।

इसी बीच दत्ता ने आकर उसका हाथ पकड़ लिया और सर्द आवाज में कहा "चलो , शादी करते है । तुम्हारी बहन तो हाथ ना लगी ।"

वेधा जो दत्ता के पीछे ही बाहर आया था उसने हैरानी से दत्ता को देख अपना गला तर कर लिया । ये लड़का झूठ बोलने में माहिर था ।

दत्ता की बात कानो में पड़ने के लिए मानव होश में भी तो होना चाहिए था । उसकी नजरे उस खून पर अटक गई जो मृदुला का होने के चांसेस कही ज्यादा थे । दत्ता ने मानव को खींचा तो किसी बेजान लाश की तरह मानव उसके साथ चला जाने लगा ।

दत्ता को लौटा देख हॉल में फुसफुसाहट होना शुरू हो गई । इसी बीच सबके मुंह खुले रह गए जब दत्ता शादी के मंडप में मानव को अपने साथ लेकर बैठा ।

मानव की मां दर्शना ने मुंह पर हाथ रख लिया तो वही दत्ता की मां हेतवि आंखे बड़ी कर बोली "दत्ता क्या कर रहे हो तुम ?"

"शादी कर रहा हु आई । आप लोगो की परम इच्छा थी ना जाधव परिवार से रिश्ता जोड़ने की ? आपकी इच्छा का मान रखते हुए उसे पूरा कर रहा हु ।" दत्ता की बोलते हुए नजरे चंद्रकला पर थी जो बाकी सबकी तरह अभी भी सामने चल रही बातो को समझने की कोशिश में थी ।

हेतवी ने कहा "दत्ता ये कोई मजाक नही है । चलो घर चलते है बेटे ।"

"मै आपको मजाक के मूड में दिख रहा हु इस समय ?" दत्ता गुस्से में चिल्लाया तो हेतवी चुप होकर एक कदम पीछे हट गई । उसके गुस्से के आगे फिर किसी के कुछ कहने की ताकत नहीं थी ।

मानव के पिता अंकुश ने आगे आकर कुछ कहना चाहा लेकिन तभी दर्शना को गन प्वाइंट पर लेते हुए एकलव्य बोला "कुछ समय तो आप बिल्कुल शांत रहिए जाधव साहब । वरना आपकी पत्नी हमेशा के लिए शांत हो सकती है ।"

दत्ता ने सीधे पंडित जी की तरफ देखा जो हैरान परेशान हो चुके थे । दत्ता बोला "ज्यादा समय नही है । जो करना है करो और शादी करवाओ।"

"लेकिन ,,,,!" पंडित ने कहना चाहा ।

"तेरा लेकिन , किंतु, परंतु कुछ नही सुनना मुझे ।" दत्ता ने अपनी बंदूक निकाल कर सामने रखी तो पंडित जी के मुंह से मंत्र अपने आप ही निकलना शुरू हो गए ।

वेधा ने सर हिला दिया । मंगलसूत्र रखे हुए थाम में उसने एक अंगूठी रख दी । जिसे दत्ता ने लेकर मानव की उंगली में पहना दिया । अगले ही मिनट उसने खड़े होकर मानव का बाजू पकड़ उठा लिया । फेरे लेने के लिए उसने अपना कदम आगे बढ़ाना चाहा लेकिन उसी समय मानव की आंखो के आगे अंधेरा छा गया और वो नीचे गिरने लगा ।

दर्शना ने मुंह पर हाथ रख रोना शुरू कर दिया । लगभग पूरा शहर इस अनोखी को शादी को देख रहा था जिसमे दत्ता मानव को बाहों में लिए फेरे ले रहा था ।

रात का दूसरा पहर शुरू हो चुका था जब दत्ता मानव को गोद में लिए गायकवाड़ निवास के दरवाजे पर खड़ा था । दत्ता के पीछे जहा उसके सभी दोस्त, जीजा प्रणय और एक बहन युतिका खड़ी थी । तो वही दत्ता का बाकी परिवार घर के अंदर था ।

हेतवी दरवाजे पर खड़ी देवराज पर गुस्सा जाहिर कर रही थी क्युकी दत्ता से कुछ कहने की उसमे हिम्मत नही थी भले ही वो उसका सगा बेटा हो । चंद्रकला अंदर बैठी हुई थी । अविका को उसकी मां पवित्रा ने ऊपर कमरे में भेज दिया और अब वो युतिका को चुपचाप ऊपर जाने का इशारा कर रही थी । आदिनाथ अपनी मां के पास बैठा उन्हें संभाल रहा था । और अस्मिता अपने मां के चुप होते ही उन्हे गुस्सा करने के लिए बढ़ावा दे रही थी ।

दत्ता ने सभी बातो से परेशान होकर कहा "आई घरात येऊ की नको मी?" (आई घर में आऊ की नही मै ?")

"नही ! मेरे घर में कदम नही रखना अगर ये लड़का तेरे साथ होगा ?" हेतवी की लाल आंखे दत्ता की तरफ घूमी ।

दत्ता ने सर हिलाकर अपने कदम पीछे लेने चाहे । जिसे देख देवराज की आंखे बड़ी हो गई । जिस शख्स ने पूरे समय एक शब्द भी नहीं बोला उसने अब जाकर कहा "हेतवी बस ! उसे अंदर आने दो । बाकी बाते तुम बाद में कर लेना ।"

"अब तक चुप रहे ना आप ? अब भी चुप रहिए । इस लड़के ने हमेशा अपनी मनमानी की है और एक शब्द से भी मैने उसे रोका या टोका नही । उसी का नतीजा है जो इसने आज ये हरकत कर दी । पूरा शहर और रिश्तेदार थूक कर गए है हमारे मुंह पर । अगर इसे उस परिवार को सबक ही सिखाना था तो कुछ और कर देता ?" हेतवी का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा । उसकी आंखो से आंसू भी लगातार बह रहे थे ।

"मेरे ससुराल वाले भी मोजूद थे वहा । क्या इज्जत रह गई उनके सामने ?" अस्मिता ने कहा तो प्रणय ने उसे घूर कर देखा । ससुराल का मुंह भी देखा है उसने शादी के बाद से ?

"सुन लो मेरी कान खोलकर । अगर ये दोनो साथ इस घर में आए तो मैं यहां से चली जाऊंगी ।" हेतवी ने कहा तो देवराज का जबड़ा कस गया ।

किसी के आगे कुछ भी कहने से पहले दत्ता मानव को लेकर दरवाजे से ही पलट कर चल पड़ा था ।

युतिका ने कहा "काकू , जा रहे है भाऊ ।"

"तो जाने दे ना ? पहली बार थोड़ी ही कही जा रहा है ? सर से भूत उतरेगा तो लौट कर इथेच येनार । तू अंदर जा , छोटो को ज्यादा नाक नही घुसानी चाहिए हर जगह ।" अस्मिता ने उसे डाट लगाई तो यूतिका का सर झुक गया ।

दत्ता के दोस्त भी पलट कर चले गए । देवराज ने दत्ता के पीछे जाना चाहा तो हेतवी रुंधे गले से बोली "अपने परिवार को छोड़कर आपको चुना था मैंने । पूरा जीवन आपकी मर्जी का खयाल किया है । अगर आज आप मेरे फैसले में मेरे साथ खड़े नही हो पाए तो मेरी जिंदगी यही खत्म हो जाएगी ।"

देवराज की सांसे तेज हो गई । एक नजर हेतवी को देख वो तेजी से घर के अंदर चले गए । अस्मिता ने फौरन हेतवी को संभाल लिया ।

बाहर खड़े प्रणय ने युतिका से कहा "अंदर जाओ तुम । मै देख कर आया उसे ।"

"गरज नाही आपको कही जाने की ।", अस्मिता ने जैसे ही उसकी बात सुनी उसे आंखे दिखा कर कहा ।

"सगा भाई है वो तेरा अस्मी!" प्रणय ने कहा ।

"मेरा सगा भाई झंडे गाड़ कर आया है आज । उसकी आरती तो उतारनी होगी ना मुझे ?" अस्मिता ने दात पीसकर कहा ।

प्रणय ने ठंडी सांस छोड़ी । अस्मिता से बात करना और दीवार पर सर मार लेना एक जैसा था ।

मानव की आंखे खुली तो वो खुदको हवा में महसूस कर रहा था । उसके कानो वेधा की आवाज पड़ रही जिसने अभी अभी वो कमरा दत्ता के लिए खोल दिया था ।

वेधा ने लाइट जलाई तो दत्ता मानव को लेकर अंदर चला गया । मानव ने हिलना शुरू कर दिया तब जाकर दत्ता ने देखा उसे होश आ चुका था ।

दत्ता ने उसे नीचे रखा और कुछ कहने ही वाला था कि एक जोरदार तमाचा उसके गाल पर पड़ा । वेधा दरवाजे से टकराते हुए बच गया । वही मैक्स और छोटा ने दरवाजे से बाहर अपने कदम पीछे कर लिए ।

खुदको संभालते हुए वेधा ने बाहर निकलना चाहा की छोटा ने पानी का जग उसके हाथ में थमा दिया "अंदर रख दो ना भाऊ ।"

"तू ,,, तू जा !" वेधा की जबान साथ नही दे रही थी ।

"आपका घर है ये ।" मैक्स ने कहा ।

"आज तो मुझे मेरे ही घर में डर लग रहा है ।" वेधा ने पानी का जग लेकर दरवाजे के पास लगी टेबल पर रखा और फौरन बाहर निकल दरवाजा बाहर से बंद कर लिया ।

दिल पर हाथ रख वो बोला "लगता है आज पड़ोसी के घर जाकर सोना पड़ेगा । अब ये अंदर लड़े मरे, मै देखने नही आ रहा ।"

"डर क्यू रहे हो ? मानव को थोड़ी ही कुछ करेंगे भाऊ ?" मैक्स ने कहा ।

"वो मानव को कुछ नही करेगा । लेकिन मानव पर आया गुस्सा किसी और पर जरूर निकलेगा । मुझे बकरा नही बनना । हटो सामने से ।" उनके बीच से जगह बनाते हुए वेधा बाहर भागा । मैक्स और छोटा ने एक दूसरे को देखा । तभी एक ओर थप्पड़ की आवाज उनके कान में पड़ी ।

गिरते पड़ते दोनो जान बचाकर बाहर भागे ।

आगे जानने के लिए कहानी से जुड़े रहे ।

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