❤️𝙈𝙤𝙝𝙖𝙗𝙗𝙖𝙩𝙚𝙞𝙣❤️- Chapter 2
श्री गणेशाय नः🙏
रश्मि के कहते ही अधीरा कमरे से बाहर जाने के लिए मूड जाती है ,
वही रश्मि अपने हाथ में लिए काफी को देख रहीं थीं......... तभी कुछ सोच कर उसके चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ जाती हैं ......
और वो अधीरा को रोकते हुए कहती हैं __
अधीरा रुक ,
उसके रोकने अधीरा रुक जाती है ,
वो पीछे मुड़ती है और बोली __जी दी ,
ये काफ़ी तूने बनाईं हैं मेरे लिए न....
जिसपर अधीरा मासूमियत से अपना सिर हाँ में हिलती है .....
उसकी मासूमियत पर रश्मि शैतानीयत से मुस्कुराई और बोली
फिर तो टेस्ट करना पड़ेगा न कि कैसा बना है , कही इसमें चीनी ज्यादा हो गई तो ,
उसकी इस बात पर अधीरा उसे नासमझी से देखती है ...उसे रश्मि की बात समझ आई ,
कॉफी टेस्ट पर , क्यों ? वो तो रोज ही उसके हाथ की बनी काफ़ी पीती है , फिर टेस्ट क्यों करना? क्या उसे नहीं पता अधीरा उसकी कॉफी में कितने चम्मच चीनी डालती है ,
रश्मि काफ़ी का एक सिप लेती है और कहती है __..... ह्म्म अच्छा है , लेकिन आज मजा नहीं आया ,
(तिरछी मुस्कान के साथ बोली _ लेकिन अब आयेगा मजा.....
मासूम अधीरा रश्मि को अपनी मासूमियत से देख रही थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि रश्मि अखिर करना क्या चाहतीं है......... वो तो बस मासूमियत से उसे देख रहीं थीं .....
तभी कानो में रश्मि की आवाज़ आयी जो अपनी मम्मी कामिनी को बुला रही थी......
अगले ही पल रूम कामिनी आयी और रश्मि से बोली. __......क्या हुआ रश्मि बेटा , तूने मुझे एसे क्यूँ बुलाया
(अधीरा को देखते हुए _कही इसने फिर तुझे कुछ नुकसान तो नहीं पहुंचाया ........
उसकी बात सुनकर रश्मि अपने मगरमच्छ के आँसू बहते हुए कहा
हाँ मम्मी इसने फ़िर से मुझे हर्ट करना चाहा.......जानबूझकर मेरे लिए ज्यादा गर्म काफ़ी लेके आयी....... ताकि जब मै उसे पीयू तो मेरा मुंह जल जाये और मैं बदसूरत दिखने लगू ,
इतना कहकर वो अपने मगरमच्छ वाले ऑंसु बहा कर रोने लगी .........
वहीं ही अधीरा ने रश्मि की बात सुनी तो उसकी ऑंखे शॉक की वजह से बड़ी हो गयी और वो डर की वज़ह से बुरी तरह कापने लगी थी उसके आँखों से ऑंसू बहनें लगे थे क्योंकि उसे पता था कामिनी अब उसे छोड़ेगी नहीं जरूर उसे कोई बहुत बड़ी सजा देगी .......
वही कामिनी ने अपनी प्यारी रश्मि कि बात सुनी उसे अधीरा पर बेहद गुस्सा आया वो सांप की फुफकारते हुए अधीरा की तरफ बढ़ जाती ,
कामिनी को अपने पास आता देख अधीरा और बुरी तरह कापने लगी और उसके आँखों से और तेजी से बहने लगे थे
वो रोते हुए उससे बोली. __न नहीं ..हम... हम... हमने कु ....कुछ ..नह.. नहीं ..किया ..झू ...झूठ
डर की वज़ह उससे ठीक बोला नहीं जा रहा था ,
अधीरा को खुद से इतना डरते देख कामिनी के होंठों पर तिरछी मुस्कान आ गयी यही तो वो चाहतीं थीं....
कामिनी अधीरा के पास आई उसके बालों को पकड़ते हुए बोली
मुझे बहुत अच्छे से पता हैं.....तूने क्या किया है क्या नहीं...... मैं तुझे क्या बेवकूफ़ लगती हूँ ......जो तेरी बात पर यकीन कर लूँगी ......लगता है तू कल रात की मार भूल गयीं हैं ....इसलिए सुबह होते ही तूने फिर से अपनी हरकतें चालू कर दी ....पर तुझे और तेरी हरकतों को कैसे काबु में रखना है मुझे बहुत अच्छे से पता है.....
इतना कहकर उसने अधीरा के हाथ को आगे किया और गर्म काफ़ी उसके हाथ पर गिरा दि जैसे अधीरा के हाथ पर गर्म काफ़ी गिरा रूम में उसकी एक दर्दनाक चीख़ निकल गयी .........
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अभी अधीरा किचन में थी औऱ कामिनी ने उसके जिस हाथ को गर्म काफ़ी से जलाया था उसने उस हाथ को ठंडे पानी के बाउल में डाला हुआ था ..
थोड़ी देर बाद जब उसने अपना निकाला तो उसका छोटा सा हाथ पूरा लाल हो गया था ठंडे पानी से भी उसे ज्यादा आराम नहीं मिला था उसे अभी भी अपने हाथ में बेहद जलन मेहसूस हो रहीं थीं जिसकी वजह से उसकी हरी आँखों में फिर से आँसू भर आए और जलद आँसू उसके गोरे गालों पर बह गये....
और वो सिसकते हुए बोली. ___बहुत जल रहा है मम्मा !...
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दूसरी तरफ
एक बहुत ही खूबसूरत व्हाइट कलर का विला था , जिसके आस पास काफी सारे बॉडीगार्ड्स अपने हाथों में बड़ी बड़ी बंदूकें लेकर खड़े थे , जो उस विला की रखवाली के लिए थे , विला काफी एकड़ में फैला हुआ था ,और वो इतना खूबसूरत था कि दूर से ही उसकी खूबसूरती दिखाई देती थी ,
उसी विला के मास्टर बेडरूम जो काफी बड़ा और लग्जरियसt था जिसका इंटिरियर एकदम यूनिक था , उसी मास्टर बेडरूम में मौजूद साइज बेड पर एक शख्स सोया हुआ था उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था और उसके चेहरे पर बैचेनी साफ दिख रही थी अचानक ही वो शख्स झटके से उठ कर बैठ गया वो बहुत लंबी-लंबी सांसे ले रहा था थोड़ी देर बाद जब उसकी सांसे नार्मल हुए तो उसने बेड पास मौजूद टेबल पर रखा पानी का ग्लास और अपने मुँह से लगा कर एक ही झटके से पूरा ग्लास खाली कर दिया और खाली ग्लास टेबल पर रख दिया पानी पीने के बाद भी उस शख्स की बैचेनी खत्म नहीं हो रहीं थीं....
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वो शख़्स खुद से बोला ___...मुझे इतनी बेचैनी क्यों हो रहा हैं ......कहीं मेरा कोई अपना तकलीफ़ में तो नही........
तभी उसके आँख से एक कतरा आंसू बह कर उसके गाल पर लुढ़क गया अगले ही पल उसका हाथ अपने दिल पर चला गया जो इस वक़्त तेजी से धड़क रहा था .....
अचानक उसके मुँह से निकला.... जान
वो शख्स बेड से उठकर अलमीरा के पास आया उसने अलमीरा को खोला उसमें से एक रेड कलर का बॉक्स निकाला उसने उस रेड बॉक्स को खोला उसमें एक झुमके की जोड़ी थी उसने उनमे से एक झुमका निकाला और उस झुमके को देखते हुए बोला__
. बस कुछ वक़्त और इंतज़ार करलो मेरी जान..... उसके बाद तुम मेरे पास मेरी बाहों में होगी..... जनता हूँ बहुत दर्द में हो तुम .......ये जो मुझे इतनी बेचैनी हो रहीं हैं..... मेरा दिल जो इतनी तेजी से धङक रहा है ......ये इस बात का सबूत है कि मेरी जान दर्द में है.... एक बार तुम मुझे मिल जाओ..... फिर में तुम तक कोई दर्द कोई तकलीफ पहुचने नहीं दूँगा.... हमेशा तुम्हें अपनी बाहों में महफ़ूज़ रखूँगा ये तुमसे एकांश सिंह राजपूत का वादा है मेरी जान .....
इतना कह कर एकांश ने सच्ची शिद्दत से उस झुमके को चूम लिया जैसे वो झुमका न होकर उसके जान के होंठ हो ......
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