H0t Casanova lover - Chapter 2 ( होटल रूम इंटीमेसी 2)
### **होटल रूम – वही रात**
लड़का अब लड़की के ऊपर झुका हुआ था। उसकी साँसें और भी गर्म हो चुकी थीं।
उसने अपनी हथेली से लड़की के सीने को पकड़ा, जैसे वो उन्हें अपनी पकड़ में कैद कर लेना चाहता हो।
**लड़की:** (हल्की कराह के साथ)
*"ज़रा नर्मी से… या फिर बिल्कुल भी नहीं।"*
उसके शब्द सुनकर लड़के के होंठ सीधे उसकी छाती पर उतर आए।
पहले हल्की-हल्की किस, फिर जीभ से गोलाई बनाते हुए — और फिर तेज़ी से उसने उन्हें अपने होंठों के बीच ले लिया।
लड़की का बदन अचानक तन गया। उसके हाथ अपने आप लड़के के बालों में जा धँसे।
**लड़का:** (उसकी त्वचा पर फुसफुसाते हुए)
*"तुम्हारा स्वाद… मुझे और गहरा खींच रहा है।"*
वो अब रुकने वाला नहीं था। कभी दाहिने, कभी बाएँ — उसके होंठ और दाँत लगातार लड़की के ब्रेस्ट्स पर खेल रहे थे।
कभी हल्की बाइट, कभी तेज़ खींचाव, तो कभी लंबा चूसना — हर बार लड़की की आवाज़ और ऊँची हो जाती।
लड़की अब खुद उसे और पास दबा रही थी। उसकी उँगलियाँ लड़के की पीठ में खरोंच छोड़ रही थीं।
**लड़की:** (आँखें बंद करके)
*"और तेज़… छोड़ना मत…"*
उसके शब्दों के साथ ही लड़के ने एक हाथ से उसकी कमर थामी और दूसरे से उसके सीने को ऊपर उठाकर और गहराई से अपने मुँह में भर लिया।
अब कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और लड़की की सिसकियों की आवाज़ थी।
बिस्तर की सिल्क शीट्स उनकी हर हरकत पर और सिकुड़ रही थीं।
लड़का हर बार ऊपर उठता और फिर दुबारा उसके ब्रेस्ट्स पर टूट पड़ता — जैसे प्यासा हो, और यही उसका नशा हो।
लड़का लगातार उसके ब्रेस्ट्स पर झुका हुआ था। हर बार उसके होंठों और दाँतों की हरकत पर लड़की का बदन काँप जाता।
उसकी आवाज़ें अब दब नहीं रही थीं। वो पूरी तरह खुल चुकी थी।
**लड़की:** (हांफते हुए)
*"अगर तुमने अब भी मुझे अधूरा छोड़ा… तो मैं तुम्हें छोड़ूँगी नहीं।"*
लड़का हल्का-सा मुस्कुराया और उसके होंठों से ऊपर उठते हुए सीधे उसकी गर्दन पर आ गया।
उसकी जीभ गर्दन से कंधे तक सरकती चली गई। लड़की बेकाबू होकर उसके बाल खींचने लगी।
उसने अचानक उसकी दोनों कलाई पकड़कर सिर के ऊपर दबा दीं। अब वो पूरी तरह उसके नीचे थी।
लड़के की आँखों में वही प्यास थी — और उसके अगले ही मूवमेंट ने उस प्यास को हकीकत में बदल दिया।
वो धीरे-धीरे उसकी जाँघों के बीच सरक आया। लड़की का दिल तेजी से धड़कने लगा।
उसकी साँसें और आवाज़ें मिल चुकी थीं।
अगले ही पल उसने एक गहरी साँस के साथ **फिर से उसमें प्रवेश किया**।
लड़की का पूरा बदन बिस्तर पर तन गया, उसकी चीख दबकर उसके काँधे में समा गई।
अब हर धक्का और भी गहरा, और भी तेज़ था।
लड़का लगातार उसकी आँखों में देख रहा था, और लड़की उसकी पीठ पर नाखून गड़ाए बिना रह नहीं पा रही थी।
**लड़की:** (कराहते हुए)
*"और… और तेज़… मुझे रोकना मत…"*
उसके शब्दों के साथ ही लड़के ने अपनी रफ़्तार और बढ़ा दी।
बिस्तर की मढ़ी हुई लकड़ियाँ जोर-जोर से आवाज़ करने लगीं।
लड़की के पैर उसकी कमर के चारों ओर कस चुके थे।
वो अब हर बार और गहराई में डूब रहे थे —
जैसे दोनों एक-दूसरे के अंदर खुद को पूरा खो देना चाहते हों।
लड़की के होंठ कभी चीख में खुलते, कभी उसकी छाती पर दब जाते।
उसके गाल लाल हो चुके थे, पसीना उसके पूरे बदन पर चमक रहा था।
**लड़का:** (तेज साँसों में)
*"तुम्हें इस पल की कीमत कभी भूल नहीं पाएगी…"*
**लड़की:** (आँखें बंद कर)
*"ये पल… मेरे लिए बस मौत जैसा मीठा नशा है।"*
अब उनके बीच कोई रुकावट नहीं थी।
हर हरकत और भी उग्र, और भी गहरी होती जा रही थी।
कमरा उनकी कराहों और साँसों से भर चुका था।