Vampire king's forced bride - Chapter 3
सारा की शादी तय हो गई थी, लेकिन उसे तमोवर की महारानी के तौर पर तैयार करना भी ज़रूरी था। इसके लिए महाराज वचन ने उसके लिए एक गवर्नेंस का इंतज़ाम किया था, वह एक बुजुर्ग महिला थी। सारा का बिल्कुल मन नहीं था, फिर भी उसे जबरदस्ती ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। जब उस बुजुर्ग महिला ने सारा को देखा, तो उसे यही लगा कि वह लड़की एक दिन भी उनके आगे नहीं टिक पाएगी।
उसके बाद वह बुजुर्ग महिला सारा को वैम्पायर के बारे में बताने लगी। जैसा बाकी लोग कहते थे, वे उनसे काफ़ी अलग होते थे। वैम्पायर को खून पीना पसंद होता था, खासकर अपनी पत्नी का। यह सुनते ही सारा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी।
सारा के चेहरे का उड़ा हुआ रंग देखकर उस बुजुर्ग महिला ने कहा, "उन्हें खून के अलावा और भी चीज़ें पसंद हैं, जैसे खूबसूरत लड़कियाँ, खूबसूरत कपड़े, लेकिन वह कपड़े, जिनमें ज़्यादा से ज़्यादा शरीर दिखता हो। उन्हें अच्छा लगता है जब उनकी औरत उनकी हर बात मानती है। वह तेज़ आवाज़ में बात करना और ज़िद को बर्दाश्त नहीं करते हैं। सबसे पहले मैं तुम्हें उनके रहने-सहने और खाने-पीने के तौर-तरीके सिखाऊँगी।"
उसी दिन से सारा की ट्रेनिंग शुरू हो गई थी। उसे खास यही सिखाया गया था कि उसे हर वक्त खूबसूरत लगना है, वरना वह कभी भी अपने पति का भोजन बन सकती थी। हालाँकि ट्रेनिंग के दौरान वह ज़्यादातर डर कर ही रहती थी और वह दिन आ ही गया था जब सारा का जन्मदिन था। उस दिन वह व्यस्क घोषित कर दी गई और उसी दिन उसकी शादी थी।
शादी से पहले जब वह तैयार होने के लिए जा रही थी, तब उसका पिता उससे मिलने के लिए आया। वचन ने सारा के कंधे को सहलाते हुए शांति से कहा, "तुम्हें खुद पर गर्व होना चाहिए क्योंकि तुम हमारे साम्राज्य में सुरक्षा लेकर आ रही हो। आज तक हम उनके खतरे के साए में जी रहे थे, लेकिन अब वह खुद हमारी रक्षा करेंगे।"
जवाब में बस सारा मुस्कुरा कर रह गई थी। उसके बाद वह हिना के साथ मुख्य महल में तैयार होने के लिए गई। वहाँ उसने अपने सौतेले भाई-बहनों को देखा। उसने कभी नहीं सोचा था कि उन सब के साथ उसकी पहली मुलाकात इस तरह होगी। उन सब की आँखों में उपहास के भाव थे।
सारा के चेहरे पर नर्वसनेस देखकर हिना ने हल्के तरीके से कहा, "अगर तुम इसी तरह परेशान होती रही तो शादी में बदसूरत लगोगी।"
"मुझे समझ नहीं आ रहा मैं उसका सामना कैसे करूँगी। क्या मैं तुम्हें अपने साथ ले जा सकती हूँ?" सारा ने अपनी बाजुओं को आपस में रगड़ते हुए कहा।
उसके बाद सारा को तैयार करने के लिए ले जाया गया। वह उनके रीति-रिवाज़ के हिसाब से गहरे लाल रंग के इवनिंग गाउन में थी, जिसका ब्राइडल वेल काफ़ी लंबा था। उसे पहनने के लिए असली हीरे के गहने दिए गए थे। उसके बालों को सजाने के लिए सोने और हीरो से सजी हुई क्लिप लगाई गई थी। सारा बहुत खूबसूरत लग रही थी।
ऐसा नहीं था कि वही सिर्फ़ खूबसूरत लग रही थी। कहा जाता था कि वैम्पायर भी दिखने में बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन उनका स्वभाव बहुत रहस्यमई होता था। वे आसानी से किसी से मिलते नहीं थे। लोगों को यही गलतफहमी थी, वैंपायर्स खूंखार होते है। किसी ने उन्हें ठीक से देखा नहीं था, तो उनके लिए वो बदसूरत खून पीने वाले प्राणी थे।
आज सारा के साथ-साथ बहुत से लोग आरंभ को पहली बार देखने का सोच रहे थे, लेकिन वह तो अपनी शादी तक में नहीं आया था और उसने अपनी तलवार भिजवा दी थी।
"आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं, राजकुमारी।" उसे तैयार करने के बाद दासी ने कहा।
सारा ने एक नज़र खुद को आईने में देखा। वह खूबसूरत लग रही थी, लेकिन फिर भी उसके चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी। एक राजकुमारी होने के तौर पर उसे हमेशा इतनी ही देखभाल और बाकी सब चीज़ें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन उसने एक दासी की तरह अपनी ज़िंदगी बिताई थी।
"अब तो मुस्कुरा दो। एक राजकुमारी के चेहरे पर इस तरह चिंता अच्छी नहीं लगती, खासकर उस दिन जब उसकी शादी होने वाली हो।" हिना ने उसकी पीठ सहला कर कहा।
सारा की आँखों में आँसू आ गए थे, जिसे देखकर उसे सजा रही नौकरानी ने जल्दी से पूछा, "क्या मैंने कोई कमी रख दी? आपको मेरा काम पसंद नहीं आया?"
"सब ठीक है।" सारा ने जबरदस्ती मुस्कुरा कर जवाब दिया। उसे अजीब लग रहा था। ना जाने क्यों उस अनजान औरत को उसकी फ़िक्र हो रही थी, लेकिन फिर भी सारा आज आख़िरी बार इतने सारे इंसानों के बीच घिरी हुई थी। उसके बाद तो उसे वैम्पायर के साथ ही रहना था।
सारा कुर्सी से उठ चुकी थी। गवर्नेंस उसके पास आई और बोली, "विवाह का समय हो रहा है, आपको चलना चाहिए।"
"लेकिन पिताजी कहाँ हैं? क्या वह मुझे लेने के लिए नहीं आए?" सारा ने भारी आवाज़ में पूछा।
रस्म के मुताबिक एक पिता ही अपनी बेटी को दुल्हन बनने के बाद दूल्हे के पास लेकर जाता था, लेकिन उसके पिता ने तो इतनी फ़ॉर्मेलिटी करना भी ज़रूरी नहीं समझा।
"वह शादी में मेहमानों को देखने में व्यस्त हैं, आपको वहीं पर मिलेंगे।" गवर्नेंस ने जवाब दिया और फिर सारा का हाथ पकड़ कर उसे ले जाने लगी।
सारा के पीछे काफ़ी सारी दासियाँ उसकी ड्रेस को संभालते हुए पीछे-पीछे आ रही थीं। जल्द ही सारा वेटिंग हॉल में पहुँच चुकी थी। यह वही दिन था जब सारा की शादी हो रही थी और अचानक सारा पुरानी यादों में खो गई थी। यहाँ आने पर सारा को पता चला कि आरंभ ने वहाँ खुद आने के बजाय अपनी तलवार को शादी के लिए भेज दिया था।
उन सब की नज़रें सारा का मज़ाक उड़ा रही थीं। सारा ने अपनी ड्रेस का कोना पकड़ा और मन ही मन कहा, "वैम्पायर कहीं का, मर क्यों नहीं जाता! लेकिन वो तो मर नहीं सकता। अपनी ही शादी को भला कौन मिस करता है? बेवकूफ़ वैम्पायर।"
अपने चेहरे पर मुस्कुराहट ओढ़े सारा मन ही मन आरंभ को गालियाँ दे रही थी। गवर्नेंस की ट्रेनिंग ने उसे थोड़ा स्ट्रांग कर दिया था। वह जानती थी कि वह मरने वाली है, लेकिन फिर भी वह एक इज़्ज़त की मौत मारना डिजर्व करती थी।
इस बीच किंग वचन सारा के पास आए और उसका माथा चूमकर कहा, "तुम एक अच्छी रानी बनोगी और मेरी यही कामना है कि तुम एक खुशहाल जीवन जियो।"
सारा को मन ही मन उनके आशीर्वाद पर हँसी आ रही थी। उसे मौत के मुँह में धकेल कर वह एक खुशहाल ज़िंदगी जीने का आशीर्वाद दे रहे थे। वह रानी थी, लेकिन उसका कोई अधिकार नहीं था। जल्द ही उसे विदा करने की तैयारी की जाने लगी। उसके भाई-बहन उसे देखकर बातें कर रहे थे।
"चलो शर्त लगाते हैं, यह कितने दिन तक जिंदा रह पाएगी?" सारा की सबसे बड़ी बहन ने कहा।
"कितने दिन? मुझे तो नहीं लगता कि यह महल भी पहुँच पाएगी। उससे पहले ही रास्ते में कोई ना कोई इसे मार देगा। देखना, यह अपने पति तक को नहीं देख पाएगी।" दूसरी बहन तिरछा मुस्कुराते हुए बोली।
"मुझे तो इस की किस्मत पर अफ़सोस हो रहा है। जो भी हो, हमारी सौतली बहन खूबसूरत है, और उसे एक बदसूरत खून पीने वाला प्राणी कुछ ही देर में खा जाएगा।" उसका भाई बोला।
"चलो जो भी हो, एक रात के लिए यह काफ़ी है।" उसके दूसरे भाई ने कहा।
सारा जब वहाँ से जा रही थी, तब उनकी बातें उसके कानों में पड़ रही थीं। क्या भाई-बहन ऐसे होते हैं? वे तो उसके मरने पर शर्त लगा रहे थे। सारा उन्हें चिल्ला कर कहना चाहती थी, वो कोई रेस का घोड़ा नहीं है, जो वो उस पर दाव लगा रहे थे।
जल्द ही सारा रथ के पास आ गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी परी कथा में आ गई हो। इतनी सुंदर चीज तो वहीं पर होती थी। सिर्फ़ एक शादी और एक रात के तमाशे के लिए इतना खूबसूरत रथ भेजा गया था, जिसके ऊपर हीरे-जवाहरात जड़े हुए थे।
उन सब की आँखों में सारा के लिए दया का भाव था। ऐसा लग रहा था कि अब वे वापस उसे कभी नहीं देख पाएँगे और अगले दो-तीन दिनों में उसके मरने की ख़बर भी आ जाएगी। बड़े भारी मन से सारा रथ के अंदर जाकर बैठ गई थी। जैसे ही वह रथ उसके साम्राज्य की सीमा के पार जा रहा था, सारा का दिल बैठा जा रहा था।
एक लंबी यात्रा करने के बाद वह तमोवर की सीमा में पहुँच चुकी थी। वह इलाका ठंडा था और चारों तरफ़ पेड़-पौधे बर्फ़ से ढके हुए थे। ठंड के मारे सारा खुद में ही सिमटने लगी थी। जल्द ही वह एक सफ़ेद महल के आगे खड़े थे। एक शानदार महल, जिसके बारे में सारा ने परियों की किताबों में देखा था।
जैसे ही उनका कारवां महल के पास आया, बैंड बाजे बजने शुरू हो गए। सारा को ऐसा लग रहा था जैसे वे उसकी मौत का मातम मना रहे हों।
उसके स्वागत में कुछ दास-दासियाँ आगे आए और वह उसके रथ से बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहे थे। उनकी तरफ़ देखकर सारा ने मन ही मन कहा, "नहीं, मैं बाहर नहीं जाऊँगी। अगर मैं बाहर गई तो वे मुझे मार देंगे।"
मरना तो उसे वैसे भी था, लेकिन सारा आख़िरी साँस तक मुक़ाबला करना चाहती थी और उसने यही सोचा था कि वह रथ से बाहर नहीं निकलेगी।
°°°°°°°°°°°°°°°°
Comment After reading, please follow me for future updates.