Bedardi se Ishq Ch. 2

Bedardi se Ishq - Chapter 2

Posted by Shadow Author 24 • Aug 04, 2025 06:58 PM

रात के 12:00 बज गए थे , जब एक फ्लैट के सामने आकर एक गाड़ी रुकी और उसमें से अवनी बाहर निकली .. उसने फ्लैट को देखा दो माले ये फ्लैट बेहद खूबसूरत था , जिसकी नेम प्लेट पर ध्रुव रायचंद लिखा हुआ था , ये देख अवनी ने एक गहरी सांस ली और अपने कदम अंदर की तरफ बढ़ा दिए ... घर के मेंन दरवाजे पर आकर उसने अपने पर्स में से एक चाबी निकाली और दरवाजा खोलकर घर के अंदर चली गई!

कुछ वक्त बाद अवनी ड्रेसिंग मिरर के सामने खड़े होकर अपनी ज्वेलरी निकाल रही थी , रह रह कर उसके कानों में उन्हीं लोगों की आवाज गूंज रही थी जो पार्टी में उसका मजाक उड़ा रहे थे , उसके शरीर पर और उसके चेहरे पर टिप्पणियां कर रहे थे , जिससे न चाहते हुए भी मिरर के जरिए उसकी नजर खुद के अक्स पर चली गई।

ठीक ही तो कह रहे थे धूप के दोस्त और उसके एम्पलाइज कहां ध्रुव लंबा चौड़ा गठिले बदन वाला गोरे रंग का एक बेहद हैंडसम लड़का , एकदम लड़कियों के ख्वाबों के राजकुमार जैसा ... जिसे हर लड़की पाना चाहे और कहां वो सांवली रंगत की , ऊपर से उसका 90 किलो का भारी भरकम शरीर ना चेहरा अच्छा और ना शरीर तो कौन ही उसे पसंद करेगा और कौन ही उसे ध्रुव के साथ देखना चाहेगा , ध्रुव के साथ तो वाकई में तारा की जोड़ी जमती है ... शायद इसी वजह से ध्रुव भी उसकी जगह तारा को पसंद करता है , यही सब सोचते हुए उसके होठों पर एक खुद का मजाक उड़ाने जैसी मुस्कुराहट आ गई , वो आईने के सामने से उठकर कवर्ड की तरफ गई और उसमें से एक नाइटी निकाल कर बाथरूम में चली गई।

थोड़ी देर बाद वो बाहर निकाल कर आई , उसने अपने बालों का जुड़ा बनाया और फिर सीढ़ियां उतरकर नीचे हॉल से होते हुए किचन में चली गई , उसने अपने लिए कॉफी बनाने की सोची , तो उसे याद आया आज सुबह ही उसकी काॅफी खत्म हो चुकी है , उसने गहरी सांस ली और फिर खुद के लिए गैस पर चाय चढ़ा दी , चाय बनाते हुए उसकी नजर पूरे हाॅल में इधर-उधर घूमने लगी , इस पूरे फ्लैट में वो अकेली रहती थी , अकेली कहां ध्रुव भी तो रहता था उसके साथ वो बात अलग थी , कि वो घर कभी-कभी ही आता था और आता भी था , तो अपने अलग कमरे में रहता था । जिससे दोनों की बात तो दूर सामना भी महीना में एक बार मुश्किल से हो पता था।  उसे अवनी से कोई फर्क ही नहीं पड़ता था उसके लिए अवनी का कोई वजूद ही नहीं था , उसके लिए वो ऐसी थी जैसे वो गलती से मार्केट से घर में सजाने वाला कोई शोपीस उठा लाया हो , और उसके बाद उसकी जरूरत न पड़ने पर घर के किसी कोने में उसे यूं ही फेंक दिया हो।

ये सब सोचते हुए अवनी का दिल भरी होने लगा , आंसू की दो बूंद आंखों से निकाल कर उसके गालों पर बहकर आ गई। जिन्हें उसने बड़ी सफाई से पौछ लिया। उसने अपने लिए कप में चाय ली और फिर उसे लेकर ऊपर अपने कमरे की ओर बढ़ गई।

थोड़ी देर बाद वो अपने कमरे में खिड़की के पास लगी चेयर पर बैठी हुई थी और बाहर आसमान में निकले हुए चांद को देखकर ठंडी हवा महसूस करते हुए अपनी चाय पी रही थी।

चाय पीते हुए उसके होठों पर मुस्कुराहट थी , क्योंकि उसके जहन में उसके बीते हुए दिनों की यादें चल रही थी , जब उसकी मां जिंदा थी , कितना सही था उसका परिवार उसके मां , पापा , एक छोटा भाई , सब कुछ अच्छा चल रहा था। उसके मां पापा टॉप के बिजनेसमैन थे , दोनों एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे और बिजनेस को साथ में संभालते थे। लेकिन फिर एक एक्सीडेंट में उसकी मां चल बसी और सब कुछ बिखर गया। 16 साल की उम्र में उसने अपनी मां को खो दिया। लोगों की बातों में आकर उसके पापा ने दूसरी शादी कर ली , दूसरी मां तो आई , पर अपनी दूसरी बेटी के साथ , जो हमेशा दूसरी मां बनकर ही रही , दोनों बहन भाइयों को कभी मां का प्यार ना दे सकी ... उनकी संगत में उसके पापा का बिहेवियर भी उसके प्रति पूरी तरह से बदल गया , जो पिता कभी उसकी मां के सामनें उसे जान से ज्यादा चाहता था अब वो उसे एक फुटी आंख भी नहीं देख सकता था , वही उसकी सौतेली बहन सोनाक्षी वो अब उनकी जान बन गई थी , जिसे देखे बगैर उनकी सुबह भी नहीं होती थी।

वही उसके पापा को अपनी तरफ और अपनी बेटी की तरफ हद से ज्यादा झुकता देख माया यानी कि उसकी सौतेली मां की तो जैसे खुशियों का कोई ठिकाना ही नहीं रहा , उन्होंने बात-बात पर अवनी को उसके भारी भरकम शरीर के लिए ताना देना शुरू कर दिया , उसे हद से ज्यादा परेशान करने लगी , खाने के लिए भी उसे परेशान करने लगी , उसे उसका मनपसंद का खाना छोड़ सिंपल सादा खाना दिया जाता और जब अवनी इस बात की शिकायत अपने पापा से करती , तो वो भी उसे ही डांटते उसे ही वजन घटाने को कहते , जोकि इंपॉसिबल था दरअसल अवनी का वजन बचपन से ही ऐसा था उसकी मां भी शुरुआत से हेल्दी थी , साथ ही उसके पापा भी शुरुआत से भारी भरकम शरीर के थे , उनकी पूरी फैमिली भी ऐसी थी , इसी वजह से अब इसे जींस कहें या कुछ और अवनी शुरुआत से ही ऐसी थी , उसने बहुत बार खुद का वजन घटाने की कोशिश की थी , लेकिन कभी कोई रिजल्ट नहीं निकला उल्टा अवनी को दो-तीन बार हाॅस्पिटल में एडमिट होना पड़ा , इसके बाद उसकी मां ने कभी उसे इस तरह की कोशिश नहीं करने दी क्योंकि वो अवनी से अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती थी , लेकिन अब जब उसकी मां नहीं थी तो शायद उसकी जिंदगी नरक से भी बत्थर हो गई थी।

यही सब सोचते हुए उसका मन बहुत भारी हो गया , उसे घुटन होने लगी , तो वो बालकनी का दरवाजा खोलकर बाहर निकल आई , उसने सामने देखते हुए अपनी आंखें बंद की , फिर अपने शरीर को ढीला छोड़ते हुए हाथों को पूरी तरह से फैला कर खड़ी हो गई , और लंबी सांस लेने लगी। ये तरीका उसने अपनी मां से सीखा था , जब कभी भी तुम्हें घुटन महसूस हो , खुद को अकेला महसूस करो , तो अकेले में अपनी आंखें बंद कर अपने हाथों को फैला कर खड़ी हो जाना , फिर शांति से खुद को महसूस करना , तुम्हारा अकेलापन पल भर में दूर हो जाएगा ... तुम्हें ऐसा लगेगा जैसे कोई है जो तुम्हें गले लगा कर खड़ा है , कोई है जो तुम्हें थामे हुए खड़ा है , क्योंकि उस वक्त बेसक तुम्हारे पास कोई मौजूद न हो , लेकिन उस वक्त तुम अकेली होकर भी अकेली नहीं होओगी , उस वक्त तुम खुद से मिलोगी , अपने वजूद से मिलोगी।

और सच में अब ऐसा करने से अवनी को बहुत अच्छा महसूस होता था , जब कभी भी उसे घुटन महसूस होती थी अकेलापन महसूस होता था, वो ऐसा ही करती थी पिछले कुछ सालों से जैसी उसकी जिंदगी थी , तब से उसने इस तरीके को न जाने कितनी बार अपनाया था  .. जिससे उसे सुकून और राहत दोनों मिलते थे!

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