बंधन -एक समझौता - Chapter 1 शादी या समझौता
एक साधारण से घर में पली बड़ी बंधन शर्मा की शादी उसके माता-पिता ने एक अपर मिडिल क्लास फैमिली में कर दी ...!! बंधन में बचपन से अपने परिवार में शादी के नाम पर समझौते और जिम्मेदारियां ही देखी थी जहां पर दो लोग सिर्फ जिम्मेदारियां की वजह से एक दूसरे के साथ है ना कि प्यार की वजह से...!! अपनी माता-पिता के चार बच्चों मे बंधन चौथे नंबर पर आती थी , जिनकी तीन बेटियां और एक बेटा था ...!! बंधन के माता-पिता को बंधन से कुछ खास लगाव नहीं था क्योंकि वह इस दुनिया में उनकी खुद की गलती की वजह से आई थी वरना वह कभी चौथा बच्चा करना ही नहीं चाहते थे जब उनके तीसरी औलाद एक बेटा हो गया था । इसी वजह से वह हमेशा शांत ही रहती थी । अपनी बहनों के कपड़े पहनना उनकी किताबें यूज करना... मतलब उसे आज तक सब कुछ उनका उतरा हुआ ही मिला था । जब उसकी बड़ी बहनों का किसी चीज से मन भर जाता तो वह चीज बंधन के हिस्से आ जाती थी । 1 साल में केवल दिवाली पर उसे नए कपड़े मिलते थे लेकिन बंधन ने कभी शिकायत करना सही नहीं समझा ... इसलिए जब उसके माता-पिता ने उसकी शादी उसके ग्रेजुएशन करते ही एक दूसरे शर्मा परिवार में कर दी । बंधन को ऐसा लगता था कि वह अपने परिवार पर एक बोझ है और अब वह बोझ किसी दूसरे परिवार पर डाल दिया गया हैं लेकिन बंधन ने तो कभी विरोध करना सीखा ही नहीं .....!!
बंधन की शादी आहिल शर्मा से हुई है जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर है और उसकी महीने की तनख्वाह 120000 और उसके परिवार ने दहेज की मांग भी नहीं रखी और यही कारण था कि उसके माता-पिता ने शादी करने में कोई भी ढिल नहीं की ...!!
बाकी बातें आगे कहानी में चलते हुए करेंगे .....
पूरा कमरा रंग बिरंगी फूलों से सजा था और उसमें खामोशी से एक लड़की बेड पर बैठी थी । अभी कुछ पल पहले उसके कुछ सपने टूटे थे लेकिन बंधन को उनके टूटने का कोई दुख नहीं था क्योंकि सपने देखना तो उसने वक्त के साथ बहुत पहले ही छोड़ दिया था अब तो वह सिर्फ जी रही थी ... वह भी बीना किसी ख्वाहिश के ...
अहिल कुछ देर पहले ही रुम में आया था और उसे आराम से सोने के लिए कहकर एक कंबल उठाये छत पर चला गया उसने अपने लहंगे को संभालते हुए कमरे की खिड़की की तरफ कदम बढ़ा दिये और बाहर देखने लगे .... बाहर आसपास बहुत सारे घर थे और हर घर के आगे एक छोटा सा गार्डन .... अहिल के घर के आगे भी था जिसमें बहुत सारे फूल लगे थे और उनके बीच ही एक झूला .......!!
फिर एकाएक ही उसकी नजरे चांद पर चली गयी और उसके मुंह से शब्द निकलने लगे -
शायद इस रिश्ते का अंजाम हमें पहले से पता था इसलिए भी हमने इसे चुना ..... हमें अहिल जी से शिक़ायत बिल्कुल भी नहीं हैं क्योंकि उन्होंने पहले ही कहां था कि वो हमसे शादी सिर्फ अपनी मां के कहने पर कर रहे हैं । दुःख हुआ था एक पल के लिए कि फिर हम किसी पर बोझ बन गये ... लेकिन दिल में एक ठंडक सी उतरी , जब उन्होंने कहां कि उनके दिल में कोई नहीं हैं । हम कभी भी उनसे यह पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाते कि उनके दिल में कोई और हैं क्या ? शादी के लिए मना करने की हिम्मत.... हममें नहीं थी कि क्योंकि आज तक हमसे कोई भी फैसला लेने से पहले किसी ने अपनी राय रखने ही नहीं दी लेकिन दुःख भी नहीं हुआ.... क्योंकि उनकी आंखों में एक सच्चाई थी। उनकी मां से पता चला कि पहले अहिल जी की सगाई हो गयी थी लेकिन लड़की ने हमपर दहेज का केस लगा दिया था क्योंकि उसे किसी और लड़के से प्यार था ।
एक पल के लिए दिल में डर बैठ गया लेकिन वो हमारे मामा जी के जानकार थे तो खुद को समझा लिया ।
दूसरों से क्या शिकायत जब हमारे परिवार को ही हमारी चिंता नहीं बस अपना हर फर्ज निभाना चाहते हैं क्योंकि प्यार और इंसानियत की उम्मीद लगाना हमनें बहुत पहले छोड़ दिया ।
इसके बाद उसे अपना दिल हल्का महसूस हुआ तो वह गहने उतारने लगी । सभी गहनों को संभालकर अलमारी में रखने के बाद , उसने कपड़े बदले और एक सिंपल सी साड़ी पहनकर ... सोने के लिए बिस्तर पर चली गयी ।
...............
सुबह का समय ...
छ: बजे
बंधन ने नहाने के बाद , एक लाल कलर की साड़ी पहनी और फिर बाल झाड़ते हुए खिड़की के सामने खड़ी हो गयी । सूरज हल्का सा बाहर आने लगा था ।
तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी तो उसने फटाफट मांग में सिंदूर भरकर सिर पर पल्लू लेते हुए दरवाजे की तरफ चली गयी । उसने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने अहिल खड़ा था । उसने , अहिल को हैरानी से देखा और फिर नासमझी में - आप ........!!
अहिल ने बीना किसी भाव के - हां मैं , यह मेरा भी कमरा हैं तो आ सकता हूं ।
बंधन हैरानी से साइड में हटते हुए - जी ...... !!
अहिल अंदर आते हुए - आप घर में किसी को बताना मत कि रात को मैं कमरे में नहीं था .... मां परेशान होगी ।
इतना कहकर , वह अपने कपड़े लिए बाथरुम में चला गया और बंधन बस उसे हैरानी से देखती रह गयी । जो एक पल में सारी बातें कहकर बाथरुम में घूस गया था ।
उसने भी बालों को कंघी करी और बिंदी लगाकर नीचे की तरफ बढ़ गयी । उसने अभी तक बाहर हाॅल से अपने कमरे तक का ही सफर तय किया था .....जो पहले फ्लोर पर था और वह सीढियां उतरते हुए ग्राउंड फ्लोर पर हाॅल में आ गयी ।
हाॅल में बिल्कुल सन्नाटा था और वह बस नासमझी से इधर-उधर देख रही थी । उसे क्या पता था कि इस घर में सात बजे से पहले कोई नहीं उठता सिर्फ अहिल को छोड़कर...!! उसने चारों तरफ देखा तो पूरा हाॅल , शादी के कामों की वजह से बिखरा पड़ा था और बिना एक पल भी सोच उसने हाॅल की सफाई करनी शुरू कर दी । वह एक एक सामान को उठाकर उनकी सही जगह रख रही थी और साथ ही उसने डस्टिंग भी करनी शुरू कर दी ...... आधे घंटे में उसने पूरा हाॅल चमका दिया था और फिर हाॅल के साइड में बने मंदिर में चली गयी और जैसे ही उसने मंदिर को देखा तो उसकी आंखें वहीं पर टिक गयी और उसकी आंखों में नमी के साथ खुशी भी छलक आयी ।
जारी हैं ...........