बंधन -एक समझौता - Chapter 2 बंधन एक पहेली
आगे ........
बंधन ने पूरी जिंदगी में यही देखा था कि अगर परिवार के लोगों को खुश रखना हैं और खुदको , उनके गुस्से से बचाना हैं तो सारे काम बीना कहे किया जाये और इसलिए उसने अपने घर में हर काम अकेले ही किये थे और वक्त के साथ ,यह उसकी आदत बन गयी ..... इस उम्मीद में की कभी तो वो उससे , प्यार करेंगे लेकिन ऐसा तो हुआ नहीं पर बंधन घर के हर काम में जरुर पारंगत हो गयी ।
बंधन की आंखों में सामने कान्हा जी मूर्ती देखकर आंसू ही आ गये थे । आज से एक साल पहले ...
उसने तीन महिनों तक पैसे जोड़े थे क्योंकि उसे कान्हा जी कि एक खुबसूरत सी मूर्ती खरीदनी थी और आज वह बड़ा खुश थी कि आखिर कल जन्माष्टमी के लिए वह , कान्हा जी की मूर्ती खरीद ही लेंगी और उसने अपना चेहरा बांधा और निकल गयी बाजार ..... और तीन घंटे की मेहनत के बाद उसने एक खुबसूरत सी मूर्ती ढूंढ ही ली लेकिन तभी एक लड़का , उसके सामने आ गया और उससे - क्या आप यह मूर्ती , आप मुझे दे देंगी ...... बंधन ने वह मूर्ती बहुत मेहनत से ढूंढ़ी थी इसलिए जैसे ही वह गर्दन ना में हिलाने वाली थी । वह लड़का जल्दी से - देखिए मना मत कीजिए क्योंकि आज , मेरी मां का जन्मदिन हैं और मैं , उनको बेस्ट गिफ्ट देना चाहता हूं ।
अपनी मां के लिए , उसकी बातों में प्यार साफ छलक रहा था और इसलिए बंधन ने दुःखी मन से वह मूर्ति , उस लड़के की तरफ बढ़ा दी और वह लड़का उसके हाथ में पैसे रखते हुए चला गया और बंधन सिर्फ देखती रह गयी ।
बंधन मुंह पर हाथ रखते हुए - मतलब वो अहिल जी ही थे तभी उनको देखकर लग रहा था कि उनको मैंने कभी तो देखा था । उसने फटाफट मंदिर साफ किया और किचन की तरफ चली गयी । सारा किचन भी बिखरा पड़ा था और सिंक में बर्तनों का ढेर पड़ा था । सबसे पहले ... उसने किचन की सफाई करी और बर्तनों को सिंक में ही छोड़कर हाॅल में आकर घड़ी में टाइम देखा ... जिसमें सात बज गये थे लेकिन शादी की थकान की वजह से अभी तक कोई भी नहीं उठा था । उसने फिर से किचन की तरफ कदम बढ़ा दिये । तभी बाहर से घंटी बजने की आवाज आयी । वह फटाफट भागते हुए हाॅल की तरफ से मैन गेट की तरफ भागी जहां एक दूधवाला खड़ा था और उसे भी नहीं पता था कि वह शर्मा परिवार की नयी बहूं थी । वो - दीदी कुछ लाइए ना दूध देकर जाना हैं ।
बंधन खामोशी से वापिस किचन की तरफ भागी और फिर एक बड़ा डिब्बा लेकर दरवाजे पर आ गयी और दूधवाले ने उसमें तीन किलों दूध डाल दिया । जिस पर बंधन हैरानी से - इतना दूध .....।।
वह दूधवाला - वो दीदी , मैम साहब की नयी बहूं कि आज पहली रसोई होगी ना तो मैम साहब ने खीर बनवाने के लिए ज्यादा दूध मंगवाया हैं । इतना कहकर , वह निकल गया और बंधन फटाफट , दूध लेकर किचन की तरफ भागी ......!!
उसने सबसे पहले मंदिर से आरती की थाल लाकर चूल्हा पूजन की रस्म करी और फिर दूध को गैस पर चढ़ा दिया और एक एक डिब्बें का ढक्कन हटाकर , चावल चीनी और ड्राइ फ्रूट्स ढूंढने लगी ।
कुछ देर की मशक्कत के बाद आखिर उसने सारे सामान ढूंढकर स्लैब पर रखे और फिर दूध में चावल डालकर , गैस को थोड़ा धीमा किया और बर्तनों को धोने में लग गयी । सारे बर्तन धोकर और पोंछकर .... वह सबकुछ सही जगह रखने लगी ।
फिर गहरी सांस लेकर चारों तरफ घूमकर देखने के बाद - परफेक्ट .... और कुछ देर बाद वह कटे हुए ड्राइफ्रूट्स खीर पर डालते हुए - पहले कान्हा जी को भोग लगाती हूं ।
वह भोग लेकर जाने ही वाली थी कि ... उसे बाहर से आवाज आयी - सुमन आंटी .....मेरी चाय ।
यह आवाज तो अहिल जी की हैं , यह सोचते हुए वह किचन से बाहर आकर - जी ......!!
सामने सिंपल लोवर और टिशर्ट में अहिल सोफे पर बैठा था और उसके सामने एक लैपटाॅप रखा था । उसने जैसे ही कोई अनजान आवाज सुनी तो हैरानी से किचन के दरवाजे की तरह नजरें उठायी तो वहां लाल कलर की साड़ी में दोनों हाथों को बांधे और सिर पर पल्ला लिये बंधन खड़ी थी ।
अहिल को थोड़ी सी हिचकिचाहट होने लगी । जिस शख्स के सामने आने से भी वह बचने की कोशिश कर रहा था....वह इस वक्त खुदको समेटे , उसके ही सामने खड़ी थी लेकिन अब बात तो करनी ही थी ।
अहिल खुदको संभालकर - सुमन आंटी .... आपको नहीं बुलाया ।
बंधन नासमझी में - जी ..उसे सच में ही समझ नहीं आया था कि सुमन आंटी कौन थी ।
अहिल - घर की मेड़ हैं और रोज सुबह सात बजे आ जाती हैं ।
जिस पर बंधन गर्दन हिलाते हुए - वो नहीं आयी ....!! अहिल ने पहली बार , बंधन के मुंह से जी के अलावा कोई और वर्ड सुना था लेकिन इस पर ज्यादा ध्यान ना देते हुए - ओके ..
!
बंधन हिचकिचाते हुए - आपको कुछ चाहिए था । हाॅल और किचन में कुछ ज्यादा फासला नहीं था और इसलिए बंधन की धीमी और शांत आवाज भी अहिल को साफ सुनायी दे रही थी ।
अहिल ने एक पल के लिए उसे देखा और फिर - एक कप अदरक वाली चाय ...!!
बंधन गर्दन हिलाते हुए - जी अभी लाते हैं । इतना कहकर , वह वापिस किचन में घूस गयी और इधर अहिल चारों तरफ देखते हुए - यह हाॅल तो काफी बिखरा पड़ा था । मां अभी तक भी फिवर की वजह नहीं उठी हैं । यशी अभी तक भी सो रही हैं और सुमन आंटी अभी तक आयी नहीं हैं तो फिर हाॅल को साफ किसने किया फिर अचानक ही उसके मुंह से निकला - बंधन ने लेकिन .....वो यह सब क्यों करेंगी...पर उसके सिवा हाॅल में कोई और था भी तो नहीं....तो क्या , यह सबकुछ उसने किया ? वह अफसोस से अपनी आंखें बंद कर लेता हैं और एक महिनें पहले की यादों में खो जाता हैं .......... अहिल ने अपने पिताजी को साइलेंट अटैक आने की वजह से खो दिया था जब वह बाहरवी क्लास में पढ़ता था । उस वक्त , उसने सिर्फ जिंदगी को समझना शुरू किया था कि उसके और उसके परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया । सारी जिम्मेदारीया उस पर ही आ गयी ....उसकी मां तो बिल्कुल टूट चुकी थी और उसकी बहन ...वह तो सारे दिन रोती ही रहती थी । सबकुछ अहिल को ही संभालना पड़ा और इसके लिए उसने खुद को मजबूत बनाना शुरू कर दिया .... फाइनेंशियल उसके परिवार को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ी क्योंकि उसके पापा सरकारी नौकरी में थे तो उसकी मम्मी को पेंशन मिलने लगी थी लेकिन इन सब में अहिल का बचपन कहीं खो सा गया । जो बच्चा हमेशा शरारतें करता रहता था ....जिसके पैरेंट्स आये दिन आने वाली शिकायतों से परेशान रहते थे ...वो कुछ खामोश और गंभीर होता गया । उसकी मां बीमार रहने लगी थी तो अहिल को अपने ही सिटी के काॅलेज में बीटेक के लिए एडमिशन लेना पड़ा । शुरु से ही दिमाग में तेज था और अब तो उसका सारा ध्यान ...अपनी मां और बहन का ख्याल रखने में और पढ़ने में ही रहता था तो वो सबकुछ बहुत अच्छे से हैंडल करने लगा था । वक्त के साथ सब संभलने लगे थे लेकिन इन सब में अहिल कहीं खो सा गया और जब तक उसकी मां को इस बात का एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो गयी । उसे बिटेक के बाद एक अच्छी कंपनी में अच्छे पैकेज पर जाॅब मिल गयी थी और अब उसकी लाइफ में भी खुशियां आ जाये इसलिए उसकी मां , उसकी शादी करवाने पर जोर देने लगी थी । अहिल ने भी खामोशी से हांमी भर दी क्योंकि वो इन सब में अपनी मां को नहीं खो सकता था पर उसके मन में शादी को लेकर अजीब सा डर था .....जिसका किसी को अहसास तक ना था ।
अहिल की मां ने लड़कियां देखनी शुरू कर दी और अंत में उन्होंने एक मंदिर में बंधन को देखा था ... मासूम सी दिखने वाली साधारण सी लड़की, जो ज्यादा खुबसूरत तो नहीं थी लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग ही तेज था जो सबको अपने मोह पाश में बांध लें । अहिल की मां काव्या जी भी उसके मोह पाश में इस तरह बंधी की उन्होंने तय कर लिया कि उनके बेटे की बहूं तो बंधन ही बनेगी और फिर उन्होंने बंधन की फैमिली के बारे में पता लगाना शुरू कर दिया और तभी उन्हें पता चला कि बंधन के मामाजी , उनके पड़ोस में ही रहने वाला शुक्ला जी के जानकार थे तो बस उन्होंने, शुक्ला जी के जरीए , बंधन के मामाजी के कान में रिश्ते की बात डाल दी ।
जब वह अपने बेटे और बेटी के साथ बंधन के माता पिता से बंधन का हाथ मांगने गयी तो उन्होंने तो यह सुनकर ही हांमी भर दी कि उनको दहेज नहीं देना पड़ेगा और जब अहिल को बंधन से बात करने भेजा गया तो बस उसके मुंह से शब्द निकले थे कि वो अभी के लिए इस शादी के लिए तैयार नहीं था और अगर वो चाहे तो शादी के लिए इंकार कर दे । वो सिर्फ अपनी जिम्मेदारीया निभा सकता है जब और इससे ज्यादा वो उससे कोई और उम्मीद नहीं रखें।
उस वक्त बंधन की आंखों में सवाल थे और उन आंखों में आये सवाल को देखकर , उसके मुंह से अपने आप निकल गया था - कि अगर उनकी शादी होगी तो बंधन , उसकी जिंदगी में आने वालीं पहली और आखिरी लड़की होगी ।
उसे तो लगा था कि वो लड़की शादी के लिए मना कर देंगी लेकिन उसने तो हांमी भर दी और आज उसकी जिंदगी में भी शामिल हो चुकी थी ।
सबकुछ याद करते हुए अहिल की आंखें बंद थी और तभी किसी आवाज से उसकी आंखें खुली और बस फटी ही रह गयी ।
जारी हैं ........
अहिल के मन के डर को बंधन समझ पायेगी ?