The Force Marriage Contract Ch. 1

The Force marriage contract - Chapter 1

Posted by S✨ Sood • Aug 24, 2025 03:30 PM

कमरा अँधेरे में डूबा हुआ था। बाहर से आती हल्की पीली रोशनी खिड़की की सलाख़ों से होकर फ़र्श पर पड़ रही थी। हवा में भारीपन था—जैसे कोई तूफ़ान भीतर ही भीतर उठने वाला हो।

वह लड़की को खींचता हुआ कमरे में लाया। उसकी कलाई इतनी कसकर पकड़ रखी थी कि जैसे लोहे की जकड़ हो। लड़की बार-बार छुड़ाने की कोशिश करती रही, मगर उसकी ताक़त के सामने बेबस थी।

“छोड़ो मुझे…!” उसकी आवाज़ कांपी।

उसने कोई जवाब नहीं दिया। बस दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया और उसे दीवार से धक्का देकर टकरा दिया। उसका सिर हल्के से दीवार से लगा और वह दर्द से कराह उठी। आँखों से आँसू झरने लगे।

उसने उसके दोनों हाथ पकड़कर ऊपर की तरफ़ दबा दिए। उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

“तुम सोचती हो भाग पाओगी मुझसे?” उसकी आवाज़ ठंडी और भारी थी।

वह काँप रही थी। उसका सीना तेज़ी से उठ-गिर रहा था।

अचानक उसने उसका गाल पकड़कर चेहरा अपनी तरफ़ घुमा लिया। उसकी उँगलियाँ इतनी कसकर धंसी थीं कि चेहरा लाल पड़ गया।

“देखो मेरी आँखों में!” उसने गरजकर कहा।

वह डर के मारे आँखें बंद करने लगी, मगर उसने झटके से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। दर्द से उसकी चीख़ निकल गई।

“मत छुओ मुझे… प्लीज़…” वह रो पड़ी।

लेकिन उसकी विनती उसके कानों तक पहुँची ही नहीं। उसने उसका चेहरा और करीब ला दिया। उसकी साँसें उसके चेहरे पर उतर रही थीं। लड़की ने चेहरा मोड़ने की कोशिश की, मगर उसने ठोड़ी पकड़कर ज़बरदस्ती उसका चेहरा अपनी तरफ़ किया।

उसके होठ उसकी त्वचा को छूकर निकल गए। वह सिहर उठी। डर से उसका पूरा बदन कांप गया। उसने जितनी भी कोशिश की, उसका शरीर उस कैद से छूट न सका।

उसने उसके हाथों को और कसकर दीवार पर दबा दिया और उसके करीब झुक आया। उसके सीने से टकराती उसकी साँसें और नज़दीकी उसे घुटन देने लगीं।

उसकी आँखों से आँसू बहते रहे। वह लगातार विरोध करती रही, पाँव मारती रही, मगर उसकी पकड़ और भी सख़्त होती चली गई।

अचानक उसने उसके गाल पर थप्पड़ मारा। उसकी चीख़ गूँज गई कमरे में। वह हिल गई। चेहरा जलने लगा, मगर उसने हिम्मत करके फिर धक्का देने की कोशिश की।

“तुम्हारा ये विरोध मुझे और भड़काता है,” उसने उसके कान के पास झुककर कहा। उसकी आवाज़ ठंडी लेकिन ज़हरीली थी।

उसने उसे बिस्तर की तरफ़ धकेल दिया। वह गिरते-गिरते सँभली, मगर उसने तुरंत उसके ऊपर झुककर फिर पकड़ लिया। उसके बालों को खींचा, उसकी कलाई को इतनी ज़ोर से मरोड़ा कि उसकी आँखों से दर्द के आँसू बह निकले।

वह कराह उठी—“मत करो… प्लीज़…”

लेकिन उसकी आँखों में जैसे कोई दया बाकी ही नहीं थी। वह उसके करीब झुकता चला गया। उसके होठ उसके चेहरे को छूते गए, उसकी गर्दन को पकड़कर उसने और पास खींच लिया। लड़की पूरी ताक़त से धक्का देने लगी, मगर उसकी कोशिशें नाकाम होती रहीं।

उसका शरीर जैसे उसके बंधन में कैद हो गया था।

हर बार जब उसने विरोध किया, उसने और भी ज़ोर से पकड़ा। कभी कलाई कसकर दबाई, कभी कंधों को जोर से पकड़ा, कभी बाल खींचे। हर हरकत में दर्द था और साथ ही जबरदस्ती की नज़दीकी।

उसके चेहरे पर अब सिर्फ आँसू थे। आँखों में डर और असहायता साफ़ झलक रही थी। मगर उसके भीतर कहीं एक चिंगारी थी—कि यह सब सहने के बाद भी वह टूटी नहीं है।

वह उसके बेहद करीब आकर बोला, “याद रखना, चाहे तुम कितना भी विरोध करो… तुम मेरी हो और मेरी ही रहोगी।”

उसने आँखें कसकर बंद कर लीं। दिल में दर्द था, आत्मा रो रही थी। मगर उसके भीतर कहीं एक आवाज़ कह रही थी—ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है…

कमरा उस रात उसकी चीख़ों, उसके आँसुओं और उसके विरोध का गवाह बना रहा।

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