Badle Ki Nafrat - Chapter 1
आदव रघुवंशी नाम ही काफी हैं उसका, यह बताने के लिए कि वो किस तरह का इंसान हैं। सख्त, गुस्सैल, निर्दयी और भीतर से पत्थर दिल जैसा ठंडा।
वही दूसरी तरफ थी मासूम सी कायरा एक साधारण, मध्यम वर्ग की लड़की, जिसकी दुनिया अभी भी मासूमियत से भरी थी।
कायरा, केवल 18 साल की थी, नाज़ुक और खूबसूरत सी लड़की, उसके लंबे सुनहरे बाल, उसकी बड़ी - बड़ी पलकें, उसकी आंखें किसी को भी रोकने की कशिश रखती थी। उसका गोरा रंग और मासूमियत भरी अदा ने उसे और भी प्यारा बनाती थी।
उसकी पतली कमर, हाइट लगभग पाँच फ़ुट एक तरह का नाज़ुक संतुलन जिसे देखकर कोई भी उसे देख ठहर जाए।
उस रात जंगल में अंधेरा थोड़ा ज़्यादा था, चाँद बादलों में छुपा था और हवा में घबराहट की एक अजीब सी सिहरन तैर रही थी।
उसी घुलते अँधेरों में, लाल जोड़े में लिपटी एक लड़की अपनी जान बचाने के लिए भाग रही थी। उसके पीछे हट्टे - कट्टे गुंडों की आवाज़ें बार - बार गूंज रही थीं, उनके ठहाके, क्लैम्प और धमकियाँ।
कायरा के कदम तेज़ थे, पर राह नहीं दिख रही थी; हर कदम के साथ उसकी थकान भी बढ़ती जा रही थी।
उसने अपने सीने में दबती हुई सांसों के साथ खुद से बोला , “ बस थोड़ी देर … फिर कोई मुझे नहीं पकड़ पाएगा। ”
पर किस्मत का खेल कुछ और ही था। जैसे ही वह सड़क की तरफ पहुँची, उसके पीछे भाग रहे गुंडों ने पीछे से चिल्लाया, “ पकड़ो उसे वरना मालिक हमें जिंदा नहीं छोड़ेंगे ! ”
कायरा ने वो आवाज सुन आखिरी ताकत से अपने कदम की रफ्तार को बढ़ाया, पर लाल लहंगे ने उसके कदमों को भारी कर दिया। एक मोड़ पर उसके पैर फिसले और वह ज़मीन पर गिर पड़ी।
ज़मीन पर गिरते ही उसके सामने कारों का एक लंबा काफिला आकर रुका, हेडलाइट्स की तेज़ रोशनी उसके बंद होते पलको से टकराई … और उसके बाद सब धुंधला पड़ गया। कायरा बेहोश हो चुकी थी।
उन कारों में से पहले कुछ बॉडीगार्ड्स उतरें उनमें से एक बॉडीगार्ड ने पीछे वाली कार का दरवाज़ा खोला।
कार का दरवाजा खुलते ही उसमें से एक रौबदार शख्स उतरा, नाम " आदव रघुवंशी " उसकी उम्र 27 साल, हाईट 6 फुट,
8 पेक ऐब्स, परफेक्ट बॉडी, किलर लुक, चेहरे पर कोई इमोशंस नहीं, उसकी नीली आँखें ठंडी और गहरी, जैसे किसी पुराने दर्द को समेटे हुए हों।
वो धीरे से कायरा के पास आकर घुटनों के बल बैठ गया। बदलो में से अब चंद थोड़ा दिखने लगा और उस चाँद की रौशनी में कायरा का आधा चेहरा ही आदव को दिख रहा था। आदव की नीली आँखें उस चाँद की रौशनी में चमक रही थीं, और उन आँखों में एक गहराई थी। थोड़ी देर कायरा को देखने के बाद अचानक से उसकी आँखें सर्द हो गयी।
कौन थी यह कायरा ? और किस वजह से आदव की आँखों में उसे देखते ही ठण्ड उतर आई ?
फ्लैशबैक , ( कुछ वक्त पहले ) —
मुंबई में रात समय में एक विशाल मेंशन की दीवारें रोशनी और सजावट से जगमगा रही थीं, जैसे किसी राजसी शादी की तैयारी हो रही हो। मेन गेट पर सुनहरे अक्षरों में लिखा था — “ जिंदल पैलेस । ”
अंदर मंडप सज चुका था पंडित मंत्रों की लय में कुछ शब्द गूंज रहे थे। दूल्हा मंडप पर सेहरे से ढका हुआ बैठा था उसके सेहरे की वजह से उसका चेहरा तो नहीं दिख रहा था, पर उम्र का अंदाज़ साफ़ पता चल रहा था, उसकी उम्र लगभग 44 - 45 साल की होगी।
वहीँ, उस मेंशन के एक कमरे में, लाल जोड़े में बैठी एक लड़की मिरर के सामने बैठ कर लगातार रोए जा रही थी। उसके आँसू पलकों से टपककर उसके गले तक आ रहे थे, पर उसके पास कोई सहारा नहीं था। उसके लहंगे की सिलवटें उसके हाथों में मजबूर - सी पँसी थीं ।
तभी कमरे में एक कठोर स्वर ने प्रवेश किया — एक अधेड़ औरत की आवाज़, जिसमें स्नेह कम और आदेश ज़्यादा था। उसने कहा, “ कायरा, ऐसे रोने से कुछ नहीं बदल जाएगा। तुम्हें मिस्टर खुराना से शादी करनी ही होगी। अगर तुम इनकार करोगी … तो समझ लो, तुम्हारा इस घर में कोई वजूद नहीं रहेगा। ”
उस आदेश में धमकी थी और उस धमकी में एक ठहराव —ऐसा ठहराव जो किसी के पूरे जीवन का नक्शा बदल देता है।
शायद उसी रात, उस लड़की की दुनिया के सारे किनारे कटकर अलग हो गए थे।
यह लड़की और कोई नहीं, कायरा जिंदल थी, जो " राघव जिंदल " और " मधु जिंदल " की बेटी थी। आज उसकी शादी हों रही थी, या ये कहे कि उसके साथ एक जबरजस्ती हो रही थी।
जो औरत कायरा के सामने थी, वो उसकी पापा की दूसरी पत्नी यानी उसकी स्टेप मॉम, " मिसेस यामिनी " जिंदल थी। मिस्टर " राघव जिंदल " ने " मधु जी " को डिवोर्स देकर यामिनी जी से शादी कर ली थी।
जिसके कुछ समय बाद ही मधु जी का देहांत हो गया था।कायरा रोते हुए यामिनी जी से बोली, " आप ऐसे कैसे कर सकती हैं ?
मैं कैसे जियूँगी उस गंदे आदमी के साथ ? " दरअसल, कायरा की शादी उसके परिवार वालों ने बिजनेस के लिए एक अमीर बिग्डेल आदमी से तय की थी।
वह आदमी उम्र में उससे बहुत ज़्यादा बड़ा था, और महिलाओं के मामले में तो हद से ज्यादा बुरा। उसके ऊपर रेप के कई केस थे, और वह रोज़ किसी न किसी लड़की के साथ सोता था।
उसने कायरा पर भी अपनी गंदी नज़र डालने की कोशिश की थी, लेकिन कायरा हर बार उसे नज़रअंदाज़ कर देती थी। अब उसी के परिवार वाले उसे उसी दलदल में धकेल रहे थे।
यामिनी ने सख्त आवाज़ में कायरा से कहा, “ जल्दी तैयार हो जाओ जड़ा ड्रामे मत दिखाओ ” और बिना एक पल रुके वहाँ से चली गई।
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