Badle Ki Nafrat - Chapter 2
वह आदमी उम्र में उससे बहुत ज़्यादा बड़ा था, और महिलाओं के मामले में तो हद से ज्यादा बुरा। उसके ऊपर रेप के कई केस थे, और वह रोज़ किसी न किसी लड़की के साथ सोता था।
उसने कायरा पर भी अपनी गंदी नज़र डालने की कोशिश की थी, लेकिन कायरा हर बार उसे नज़रअंदाज़ कर देती थी। अब उसी के परिवार वाले उसे उसी दलदल में धकेल रहे थे।
यामिनी ने सख्त आवाज़ में कायरा से कहा, “ जल्दी तैयार हो जाओ जड़ा ड्रामे मत दिखाओ ” और बिना एक पल रुके वहाँ से चली गई।
कमरे में बस कायरा रह गई कायरा, जो ठहरी मासूम… दिल से डरी हुई।
उसने काँपते हुए खुद से बोला — “ मुझे … मुझे ये शादी करने में बहुत डर लग रहा है। वो आदमी मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लगता … मुझे ही कुछ करना होगा। मैं उस जैसे इंसान के साथ नहीं रह रहूंगी, उसे देखते ही मुझे बहुत डर लगता है।
न - नहीं … मैं ये नहीं कर सकती, मैं शादी नहीं कर सकती … नहीं। ”
इतना कहकर उसने अपने आस - पास नज़र दौड़ाई, और तभी उसकी नजर कमरे के कोने में बने एक बड़े से विंडो पर पड़ी।
कायरा ने अपने आँसू पोंछे, और एक गहरी साँस ली, और धीरे से बोली — “ हे भोलेनाथ … कोशिश हम करेंगे, कृपया हमें यहाँ से बाहर निकलने में मदद कीजिए । ”
यह कहकर वह तेज़ कदमों से उस विंडो की तरफ गई। उसने नीचे झाँका तो देखा कि वह की ऊँचाई थोड़ी सी जड़ा थी। उस ऊंचाई से उसे इतना डर नहीं लगा जितना डर उसे इस शादी से लग रहा था।
बिना एक पल की देरी किए वह कूद गई। गिरते समय उसे चोट लगी, घुटना छिल गया, हाथ भी छिल गया— पर उसने उसकी जरा भी परवाह नहीं की।
दर्द को नज़र अंदाज़ करते हुए वह जल्दी - जल्दी इधर - उधर देखने लगी, और मौका मिलते ही बैक गेट का इस्तेमाल कर
वहाँ से भाग गई।
फ्लैशबैक एंड,
कायरा को देखते हुए उस आदव की आँखें खतरनाक हो जाती हैं। फिर वह झुककर अपनी गहरी आवाज़ में कायरा के कान में कहता है, " Welcome to the hell, मिस कायरा जिंदल।
इतना कहकर आदव ने बिना एक पल गंवाए कायरा को अपनी बाँहों में उठा लिया। लेकिन जैसे ही उन गुंडों ने किसी ताकतवर शख़्स को लड़की को गोद में उठाकर ले जाते देखा, वे घबराकर आगे आ गए।
“ रुको! उस लड़की को हमारे हवाले कर दो ” उनमें से एक गुंडा चिल्लाया।
उनकी आवाज़ आदव के कानों तक पहुँची तो उसने बिना पीछे मुड़े, ठंडी और खतरनाक आवाज़ में कहा — “ ये मेरी है। इसलिए दूर रहो … क्योंकि आदव रघुवंशी बर्दाश्त नहीं करता कि कोई उसकी चीज़ पर नज़र भी उठाए।.”
वह आगे बढ़ ही रहा था कि गुंडों में से एक ने काँपते हुए कहा— “ पर … पर अगर हमने इस लड़की को मालिक को नहीं सौंपा तो वो हमें मार देगा .….”
आदव इस बार एकदम से पलटा, उसकी आँखों में ऐसी दहशत थी कि गुंडों की रूह काँप गई।
आदव उनसे बेहद कोल्ड वॉइस में बोला — “ तो मर जाओ।।”
ये कहकर उसने वापस से मुड़ कर अपने कदम कार की तरफ बढ़ा दिया और कायरा को कार में लाकर बैठाया और खुद भी बैठ गया ।
उसके कार में बैठते ही कार तेज़ी से वहाँ से निकल गई। बाकी कारें भी कुछ ही देर में हवा हो गईं।
इधर पीछे खड़े गुंडों की तो साँसें तक अटक चुकी थीं। तभी उनमें से एक का फोन अचानक बज उठा। स्क्रीन पर दिख रहा नाम देखकर उसके हाथ काँपने लगे। डरते - डरते उसने फोन उठाया—
“ जी … म - मालिक … ”
दूसरी तरफ से गरजती आवाज़ आई — “ मिली वो लड़की ?।”
गुंडे ने डर के मारे अपना थूक निगलते हुए कहा — “ माफ़ कर दीजिए मालिक … उस लड़की को कोई बहुत पावरफुल आदमी उठा कर अपने साथ ले गया। ”
उधर से गुस्से से भरी दहाड़ आई — “ बेअक़्लो ! तुमसे एक लड़की नहीं Sambhali गई ? पता है मैंने उस लड़की को पूरे पचास लाख में खरीदा था — ”
बात पूरी होने से पहले ही फोन कट गया।
दूसरी तरफ,
कार में कायरा को होश आने लगा … वो धीरे - धीरे करके अपनी आँखें खोलने लगी।
तभी —
उसे एहसास हुआ कि वो किसी कार में है। उसने उठते ही चिल्लाना शुरू कर दिया। उसी वक्त आदव ने गन निकाल कर सीधा कायरा की तरफ पॉइंट की और बोला — “ चुप, एकदम चुप … वरना तेरे बाप को ऊपर पहुँचा दूँगा। राघव जिंदल सुबह का सूरज नहीं देख पाएगा, समझी ? ”
उसके मुँह से अपने पापा का नाम सुनते ही, और उसकी गुस्से भरी आवाज़ सुनकर, कायरा की तो हालत खराब होने लगी। वो काँपती आवाज़ में बोली — “ न - नहीं … प्लीज़, मेरे पापा को कुछ मत करिएगा। आप जो बोलेंगे मैं वो सब करूँगी। ”
उसके अंदर का डर देखकर आदव के चेहरे पर एक ईविल स्माइल आ गई। तभी अचानक गाड़ी रुकी।
आदव तुरंत गाड़ी से उतरा और दूसरी साइड जाकर दरवाज़ा खोलकर, उसने कायरा का हाथ पकड़ लिया और ज़ोर से खींच कर उसे बाहर निकाल लिया।
कायरा के हाथ में बहुत दर्द होने लगा था।
आदव ने इतनी ज़ोर से उसका हाथ पकड़ा था कि उसकी चूड़ियाँ टूट गई थीं और वो चूड़ियाँ उसे चुभने लगीं। उसके आँसू बहने लगे।
वो काँपती आवाज़ में बोली — “ छोड़िए … मुझे दर्द हो रहा है, प्लीज़ छोड़िए। कहाँ ले जा रहे हैं आप मुझे ? ”
लेकिन आदव तो जैसे कुछ सुन ही नहीं पा रहा था। वो उसे खींचते हुए मंदिर की तरफ ले जाने लगा।
वहाँ पहुँचकर कायरा ने देखा — एक पंडित जी बैठे थे, और उनके सिर पर एक बॉडीगार्ड गन ताने खड़ा था।
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