Badle Ki Nafrat Ch. 3

Badle Ki Nafrat - Chapter 3

Posted by Akanksha Rajput • Sep 01, 2025 03:55 PM

लेकिन आदव तो जैसे कुछ सुन ही नहीं पा रहा था। वो उसे खींचते हुए मंदिर की तरफ ले जाने लगा।

वहाँ पहुँचकर कायरा ने देखा — एक पंडित जी बैठे थे, और उनके सिर पर एक बॉडीगार्ड गन ताने खड़ा था।

आदव जैसे ही वहाँ पहुँचा … वो पंडित जी से बोला — “ शुरू करो शादी। ”

ये सुनकर कायरा की साँस ही अटक गई। वो बोली — “ किसकी शादी ? कैसी शादी ? ”

आदव बोला — “ तुम्हारी और मेरी शादी, प्यारी होने वाली बीवी। ”

ये सुनकर कायरा बोली — “ नहीं … प्लीज़ ऐसा मत कीजिए। ”

पर आदव उसकी एक नहीं मानता। वो उसे खींचकर मंडप पर ले जाकर बैठा देता है, फिर सख़्त आवाज़ में कहता है — “ अगर अपने बाप को सही-सलामत देखना चाहती हो, तो चुपचाप बैठ जाओ … वरना पूरे खानदान को ख़त्म कर दूँगा। ”

कायरा उसकी बात सुनती है … आज वो पूरी तरह टूट चुकी थी। चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी। उसने मन ही मन कहा — " भोलेनाथ जी … ये सब क्या हो रहा है ? अब तो आप ही मेरी रक्षा करिए। ”

पंडित जी मंत्र पढ़ना शुरू कर चुके थे। कुछ देर बाद वो बोले — “ आप दोनों फेरों के लिए खड़े हो जाइए। ”

पंडित जी के बोलते ही आदव खड़ा हो गया … पर कायरा वैसे ही बैठी रही, जैसे किसी ख़याल में गुम हो।

आदव ने उसका हाथ पकड़कर ज़ोर से खींचा और उसे खड़ा किया। फिर दोनों ने फेरे लिए।

कुछ देर बाद जब दोनों बैठ गए, तभी पंडित जी बोले — “ वधु की माँग में सिंदूर भरिए। ”

तभी —

आदव ने सिंदूर उठाया और कायरा की माँग में भर दिया। इसके साथ ही कायरा के रुके हुए आँसू बहने लगे।

फिर पंडित जी बोले — “ अब वधु को मंगलसूत्र पहनाइए। ”

आदव ने वहीं से मंगलसूत्र उठाया और कायरा के गले में बाँध दिया।

पंडित जी बोले — “ शादी संपन्न हुई। आज से आप दोनों पति - पत्नी हैं। ”

आदव उठकर कायरा का हाथ पकड़कर गाड़ी की तरफ बढ़ा और दरवाज़ा खोलकर उसे अंदर धक्का दे दिया।

अचानक हुए इस धक्के से उसकी कमर में दर्द हुआ, उसे हल्की चोट लग गई, और उसके मुँह से एक हल्की “ आह … ” निकल गई।

आदव गाड़ी में बैठ गया। ड्राइवर ने पूछा — “ सर, कहाँ जाना है ? ”

आदव ने कुछ कहा और ड्राइवर ने गाड़ी चला दी। आदेश पर ड्राइवर ने गाड़ी का पार्टीशन ऑन कर दिया। कायरा डरी - सहमी सी बैठी थी। उसे आदव से बहुत डर लग रहा था।

आदव ने एक नज़र कायरा को देखा और उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। अचानक हुए इस एक्शन से कायरा संभल नहीं पाई और आदव की गोद में गिर पड़ी।

उसका खींचना इतना स्ट्रॉन्ग था कि वो खुद को संभाल भी नहीं पाई और उसकी गोद में आ गिरी, लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वो आदव की गोद में है वो जल्दी से उठने लगी। हड़बड़ाहट में उसका दुपट्टा, जो उसके सीने पर था, नीचे गिर गया।

उसका ब्लाउज बहुत डीप नेक का था। वो और जल्दी से उठने लगी। आदव ने गुस्से में उसके बाल पकड़ लिए जिससे कायरा की एक “ आह … ” निकल गई।

उसने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं। आँसू उसके गालों पर बह रहे थे।

आदव गुस्से से उसके चेहरे को देख रहा था। उसने बहुत ध्यान से उसे देखा — गोरा रंग, आँसुओं से भीगी आँखें, काँपते हुए पिंक होंठ, मासूम सा चेहरा, तभी उसकी नज़र उसके सीने पर गई … दुपट्टा हटने की वजह से उसकी क्लीवेज थोड़ी दिख रही थी।

आदव ने तुरंत अपनी नज़र हटाकर उसके चेहरे पर टिका दी।

कायरा की आँखें अभी भी बंद थीं।

वो मन ही मन बोला — “ वैसे राघव जिंदल, कुछ भी कहो … बेटी बड़ी कमाल है। पर अब तुम्हारी ये बेटी … मेरी बीवी है। ”

फिर धीमे पर ठंडे गुस्से में बोला — “ अब मैं तुम्हें बताऊँगा दर्द किसे कहते हैं। मैं तुम्हारी बेटी को इतना तड़पाऊँगा … इतना तड़पाऊँगा … कि तुम सोच भी नहीं सकते, और जब वो तड़पेगी, तब तुम्हें समझ आएगा कि दूसरों को दुख पहुँचाने का नतीज़ा क्या होता है। ”

इतना कहकर उसने कायरा को ज़ोर से दूसरी तरफ धक्का दे दिया।

रघुवंशी मेंशन,

डार्क ब्लू और व्हाइट कलर से बना यह बड़ा सा मेंशन किसी रॉयल पैलेस से भी ज़्यादा खूबसूरत लग रहा था। कई एकड़ में फैला हुआ मेंशन के आगे बीचो - बीच एक फाउंटेन बना हुआ था, जिसमें दो बहुत खूबसूरत परियाँ सफ़ेद पत्थर से बनी हुई थीं।

वहीं बड़े - बड़े पेड़ लगे थे और गार्डन में ऐसे फूल खिले हुए थे जो शायद ही कहीं और आसानी से मिलते हों।

आदव की गाड़ी जैसे ही रघुवंशी मेंशन के बाहर आकर रुकती है, आदव तुरंत गाड़ी से उतरता है और दूसरी साइड जाकर कायरा का हाथ पकड़कर उसे बाहर निकालता है। फिर बड़े से गार्डन से होते हुए मेंशन के अंदर ले जाने लगता है।

अब तक सुबह हो चुकी थी। वो उसे खींचकर ले जा रहा था…

जिस वजह से कायरा के पैरों में दर्द हो रहा था, क्योंकि वो बहुत तेज़ कदमों के साथ उसे खींचकर चला रहा था।

जैसे ही वो मेंशन के मेन दरवाज़े पर पहुँचा, तभी उसके कानों में एक आवाज़ पड़ी।

आदव ने सामने देखा — एक 66 साल की औरत धीमे कदमों से उसकी ओर आ रही थीं। उन्हें देखते ही आदव के गुस्से वाले एक्सप्रेशन नॉर्मल हो गए और उसने सिर झुकाकर कहा —

“ दादी … आप। ”

वो औरत थीं — कमीनी रघुवंशी, आदव की दादी।

उन्होंने दोनों को देखकर थोड़ा गुस्से में कहा — “ ये सब क्या है, आदव ? आपने शादी कर ली … और वो भी बिना बताए ? ”

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