अनवांटेड सीइओ वाइफ - Chapter 3
आरव और रिया की ज़िंदगी अब बदल चुकी थी।
जहाँ पहले चुप्पी और ठंडापन था, अब वहाँ हँसी और अपनापन था।
आरव ऑफिस से जल्दी आने लगा, रिया उसके लिए नए-नए व्यंजन बनाने लगी।
रिया ने सोचा—
"अब शायद मेरी ज़िंदगी भी किसी फ़िल्मी कहानी जैसी हो सकती है… जहाँ अंत हमेशा खुशियों से होता है।"
लेकिन तक़दीर ने एक बार फिर करवट ली।
आरव का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी था — करण मेहता, एक चालाक और निर्दयी बिज़नेसमैन।
उसे आरव और रिया की शादी कभी हज़म नहीं हुई थी।
उसने मीडिया में अफ़वाहें फैलानी शुरू कर दीं—
कि रिया ने आरव से शादी सिर्फ़ दौलत और कंपनी बचाने के लिए की है।
यहाँ तक कि उसने नकली सबूत भी तैयार कर दिए, जिनमें दिखाया गया कि रिया गुपचुप करण से मिलती है।
एक शाम करण ने आरव को तस्वीरें भेजीं —
रिया, कॉफ़ी शॉप में करण से मिल रही थी।
(सच यह था कि करण ने खुद बहाने से रिया को बुलाया था, ताकि चाल चल सके।)
आरव ने जब तस्वीरें देखीं, उसका दिल सिहर गया।
उसके भीतर का पुराना डर और अविश्वास फिर जाग उठा।
रिया जब घर लौटी तो उसने देखा कि आरव की आँखों में गुस्सा और ठंडापन है।
“तुम… करण से क्यों मिली?”
उसकी आवाज़ काँप रही थी, जैसे दिल टूटने वाला हो।
रिया हैरान रह गई।
“क्या? मैं… मैं तो बस… उसने कहा था कि किसी चैरिटी प्रोजेक्ट पर बात करनी है…”
लेकिन आरव ने बीच में ही कहा—
“बस! मुझे और बहाने मत दो।
शायद करण सही कह रहा था… ये शादी भी तुम्हारे लिए सिर्फ़ सौदा थी।”
रिया की आँखों में आँसू भर आए।
“आरव… तुम मुझ पर भरोसा नहीं कर सकते? इतने दिन की मेरी सच्चाई, मेरी परवाह… सब झूठ लगती है तुम्हें?”
आरव चुप रहा।
उसका दिल रिया पर विश्वास करना चाहता था, लेकिन दिमाग़ बार-बार धोखे की कहानियाँ सुना रहा था।
उस रात दोनों एक ही छत के नीचे होकर भी हजारों मील दूर हो गए।
रिया ने अपने कमरे में बैठकर आँसुओं में लिखा—
"अगर मेरा प्यार सच्चा है… तो मुझे खुद अपने रिश्ते को बचाना होगा।
मैं करण की चाल को बेनक़ाब करके रहूँगी।"
करण की धमकी
रिया ने करण को फोन मिलाया।
उसकी आवाज़ ठंडी लेकिन दृढ़ थी—
“तुम्हारी ये गंदी चाल मैं यूँ ही नहीं छोड़ूँगी।”
करण हँस पड़ा—
“ओह प्रिय, तुम्हें लगता है कि कोई तुम्हारी बात पर यकीन करेगा?
आरव तो पहले ही तुम्हें शक की नज़र से देख रहा है।
अगर तुमने ज़्यादा शोर मचाया, तो मैं ऐसे सबूत पेश कर दूँगा कि दुनिया भी तुम्हें लालची औरत मान लेगी।”
रिया के सीने में आग जल उठी।
लेकिन उसके चेहरे पर डर नहीं, संकल्प था।
रिया ने चुपचाप करण की चालों का पता लगाना शुरू किया।
उसने पुराने कर्मचारियों से बातें कीं, उसकी कंपनी के अकाउंट्स की कॉपियाँ देखीं।
धीरे-धीरे सच सामने आने लगा—
करण न सिर्फ़ धोखेबाज़ था, बल्कि आरव की कंपनी को बर्बाद करने के लिए अवैध सौदे भी कर रहा था।
रिया ने सारे सबूत एक पेन ड्राइव में इकट्ठा कर लिए।
लेकिन ये काम आसान नहीं था।
करण के लोग हर जगह उसकी निगरानी कर रहे थे।
एक रात जब रिया करण के ऑफिस से निकल रही थी, तो उसके गुंडों ने रास्ता रोका।
“मैडम, बहुत जासूसी हो गई। अब घर बैठिए।”
रिया डर से काँप गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं खोई।
“हटो मेरे रास्ते से!”
गुंडे पास बढ़े ही थे कि अचानक वहाँ गाड़ी आकर रुकी—
आरव की गाड़ी।
वो बाहर निकला, उसकी आँखों में आग थी।
उसने गुंडों को धक्का दिया और रिया को अपनी बाँहों में खींच लिया।
“हिम्मत कैसे हुई मेरी पत्नी को छूने की?”
गुंडे भाग गए।
रिया काँपती हुई बोली—
“आरव… मैंने करण की साज़िश के सबूत जुटाए हैं। वो हमें तोड़ना चाहता था।”
आरव स्तब्ध रह गया।
उसने रिया की आँखों में सच्चाई देखी।
उसकी अपनी नज़रों से शर्म टपक पड़ी—
“रिया… मैं तुम्हारे प्यार पर शक करके… कितना बड़ा पाप कर बैठा।”
रिया की आँखों से आँसू बहे, लेकिन उसने धीरे से कहा—
“प्यार में शक ज़हर होता है, आरव।
अगर हम साथ हैं, तो हमें हर हाल में एक-दूसरे पर विश्वास करना होगा।”
आरव ने उसके हाथ थामकर कहा—
“मुझे माफ़ कर दो, रिया।
अब चाहे जो भी हो, मैं तुम्हें और हमारे रिश्ते को कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
अगले दिन आरव और रिया ने मिलकर करण की साज़िश सबके सामने रख दी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत दिखाए गए, और करण को गिरफ्तार कर लिया गया।
मीडिया वही सवाल कर रही थी—
“क्या अब ये रिश्ता सिर्फ़ बिज़नेस डील है या सच्चा प्यार?”
आरव ने सबके सामने रिया का हाथ थाम लिया और कहा—
“ये रिश्ता अब मेरी ज़िंदगी है।”
करण के जेल जाने के बाद, आरव और रिया की ज़िंदगी में जैसे कोई तूफ़ान थम गया हो।
पहली बार, दोनों ने बिना किसी डर या शक के चैन की साँस ली।
सुबह जब धूप खिड़की से कमरे में उतरी, तो रिया ने देखा—
आरव सोते हुए भी उसका हाथ थामे हुए था।
उसके चेहरे पर पहली बार मासूम मुस्कान थी।
रिया ने मन ही मन सोचा—
"काश ये लम्हा कभी ख़त्म न हो।"
इस रिश्ते को सिर्फ़ मजबूरी मानती थीं, अब रिया को सीने से लगाकर बोलीं—
“तुम्हारे जैसे बहादुर और सच्चे दिल की लड़की ही इस घर की बहू बनने लायक थी।”
रिया की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
अब उसे पहली बार लगा कि यह घर सचमुच उसका है।
शाम को आरव ने रिया को शहर की सबसे ऊँची इमारत की छत पर बुलाया।
हवा चल रही थी, आसमान में चाँद खिल रहा था।
आरव धीरे से बोला—
“रिया, जब ये शादी हुई थी, मैं इसे बोझ समझता था।
लेकिन आज… ये शादी मेरी सबसे बड़ी दौलत है।
क्या तुम… मुझे फिर से अपना पति मानकर, अपने दिल से स्वीकार करोगी?”
रिया मुस्कुराई, उसकी आँखें नम थीं।
“आरव… मेरे दिल ने तो कब का तुम्हें अपना लिया था।”
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया।
चाँदनी रात उनकी मोहब्बत की गवाह बन गई।
कुछ हफ़्तों बाद, जब सब कुछ सँभल चुका था, रिया ने डॉक्टर से चेकअप करवाया।
वो घर लौटी तो उसके हाथ में एक रिपोर्ट थी।
दिल धड़क रहा था… होंठों पर हल्की मुस्कान थी।
रिपोर्ट देखकर उसके होठों से सिर्फ़ एक शब्द निकला—
“आरव…”
आरव ने हैरानी से पूछा—
“क्या हुआ?”
रिया ने उसकी हथेली में रिपोर्ट रख दी।
उसमें साफ़ लिखा था—
“प्रेग्नेंसी पॉज़िटिव”।
आरव की आँखों में आँसू आ गए।
उसने रिया को अपनी बाँहों में भर लिया—
“ये हमारी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफ़ा है।” (9)
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