तलाश - ए - इश्क Ch. 1

तलाश - ए - इश्क - Chapter 1

Posted by Divya yadav • Oct 05, 2025 06:03 PM

एक क्लब के बाहर बेहद भीड़ थी और उस क्लब को पुलिस ने पूरी तरह से घेर रखा था। वहाँ भीड़ में मीडिया के लोग भी थे। पर पुलिस के कारण वो क्लब के अंदर जाने में नाकाम थे।

"यहाँ इतनी भीड़ क्यों है?" भीड़ में मौजूद एक आदमी ने माँझरा जानने की कोशिश की।

"मुझे खुद नहीं पता! मैं तो खुद अभी यहाँ आया हूँ।" उस आदमी ने जवाब दिया और सामने की तरफ देखने लगा। तभी उनकी बातें सुन रहे तीसरे आदमी ने कहा। "यहाँ किसी का कत्ल हुआ है! सुना है वो बहुत बड़े बाप की औलाद है। इसलिए तो इतनी पुलिस है।" उस आदमी की बात सुनकर बहुत लोगो ने उसे घेर लिया। मानों उसे ही सारी जानकारी है और अब वो सब कुछ जान ही लेंगे।

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अगली रात,

रात का समय,

एक आलीशान से रूम की बालकनी में अंधेरा छाया हुआ था और रूम में रौशनी फैली हुई थी। इतनी रौशनी के बाद भी रूम में कोई नहीं था। पर अंधेरे में डूबे हुए उस बालकनी में एक शख्स खड़ा था।

सांवला सा वो लड़का जिसपर चाँद अपनी रोशनी बिखेर रहा था। वो अलग ही आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। बाल उसके माथे पर बेतरतीब से बिखरे थे जो उस पर बखूबी जच रहे थे। उसने ब्लू फूल स्लीव्स वाली टी सर्ट पहनी हुई थी, जिसकी स्लीव्स उस लड़के ने फोल्ड कर के चढ़ा रखी थी। उसकी कलाई में सिल्वर कलर का कड़ा था जिस पर एन लिखा हुआ था। बालकनी की रेलिंग पर ही उसका फोन रखा हुआ था। उसी पल उसके फोन की स्क्रीन जल उठी। शायद कोई नोटिफिकेशन था। उसके फोन की वॉल पर एक बेहद खूबसूरत सी लड़की की पिक्चर लगी हुई थी। जिसकी सिर्फ आँखें ही दिख रही थी। गहरी और भूरी आँखें जिनमें कोई भी डूब जाए।

वो लड़का अपनी बालकनी की रेलिंग से टिका एकटक आसमान में मौजूद आधे चाँद को देख रहा था। उसने फोन पर कोई ध्यान नहीं दिया।

"कहाँ हो तुम प्रिया?" उस लड़के ने आसमान में मौजूद चाँद को देखते हुए कहा। जिसमें उसे उस लड़की का अक्श दिखाई दे रहा था। मासूम सी मुस्कुराहट और प्यारा सा चेहरा।

"निक! हमें अभी मुंबई के लिए निकलना है।" पीछे से आते हुए एक लड़के ने कहा। जो लगभग उसी की उम्र का ही था।

"गाड़ी निकालो।" निक ने उस लड़के से कहा और अपना फोन ले कर वो रूम से बाहर निकल गया। उसके पीछे वो लड़का भी तेजी से किसी को फोन करते हुए निकला।

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रात का समय,

अनजान जगह,

एक छोटे से बन्द पड़े कमरे में एक लड़की कुर्सी में बेहोश पड़ी थी। उसके हाथ बुरी तरह से बंधे हुए थे और पैर भी। उसके सामने एक लड़का उसे घूरते हुए सिगरेट के कश ले रहा था।

गोरा रंग और अट्रैक्टिव लुक लिए वो लड़का ठीक ठाक दिख रहा था पर उसके गाल पर अजीब सा कट का निशान था। जो उसे खतरनाक लुक दे रहा था। वो अपने सामने मौजूद उस लड़की को बुरी तरह घूर रहा था।

सामने बैठी लड़की का चेहरा ठीक से दिख नहीं रहा था। क्योंकि उसके आधे बाल उसके चेहरे पर बिखरे हुए थे। पर फिर भी उसकी पर्सनाल्टी बेहद अट्रैक्टिव थी।

वो लड़का उस लड़की को घूर ही रहा था। तभी उस लड़की की बॉडी ने हरकत की और धीरे से उस लड़की ने अपनी आँखें खोली। पर जैसे ही उसकी नज़र सामने बैठे शख्स पर पड़ी। उसने झट से अपनी पूरी आँखें खोल ली और सीधी होते हुए बोली। "त..... तुम?" कहते हुए उसकी नज़र खुद पर गई।

"तुम मुझे यहाँ क्यों लाये! और! और..... तुमने मुझे बांध क्यों रखा है?" उस लड़की ने गुस्से में वापस से उस लड़के की तरफ देखते हुए कहा।

"रिलैक्स स्वीटहार्ट! अच्छा लगा जान कर! की तुम अब तक मुझे भूली नहीं हो और ना ही भूल सकती हो। क्योंकि मैं ऐसा होने दूंगा ही नहीं।" उस लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर उसने सामने बंधी लड़की की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ही था कि इतने में ही उस लड़की ने अपना चेहरा फेरते हुए कहा। "हाथ मत लगाना मुझे!"

"ओह्ह! अकड़ कम नहीं हुई अब तक प्रिया बेबी की।" कह कर वो लड़का मुस्कुराने लगा और अपनी जगह से उठ कर लड़की के पास आ गया। इससे पहले प्रिया कुछ समझती उस लड़के ने झटके से उसे उसके बालों से पकड़ लिया और बोला। "तुम बहुत अच्छी तरह से जानती हो तुमने क्या किया है। अब तो तुम भूल ही जाओ की तुम अहीर के जहर से बच सकती हो।"

"लिव मि! मैंने कुछ नहीं किया! सुना तुमने! कुछ नहीं किया है मैंने, ये सब मिहिर की गलती थी।" प्रिया ने गुस्से में कहा।

"अच्छा! उसे जान से मारने के बाद भी तुम्हारी इतनी हिम्मत की तुम कह सको! की तुमने कुछ नहीं किया।" इतना कहते ही अहीर ने प्रिया के बालों को झटके से छोड़ दिया।

प्रिया ने कस के अपनी आँखें भींच ली।

अहीर गुस्से से वहाँ से चला गया। प्रिया छटपटाते हुए खुद को रस्सियों से छुड़ाने की कोशिश करने लगी पर छुड़ा नहीं पाई।

बाहर आते ही अहीर ने एक आदमी से कहा। "इसे और ज्यादा हाई डोज़ दो। ये अब, तब तक होश में नहीं आनी चाहिए जब तक हम इंडिया से बाहर ना निकल जाएं।" सामने वाले आदमी ने हाँ में अपनी गर्दन हिला दी।

अंदर मौजूद प्रिया ने अहीर की बात सुन ली और उसने उसी पल चिल्लाते हुए कहा। "मैंने मिहिर को नहीं मारा है।" पर अहीर ने प्रिया की बात सुन कर भी अनसुनी कर दी।

"कहाँ हो तुम निक! प्लीज़ हेल्प मि।" प्रिया ने खुद से ही कहा और उसकी आँखों से आँसु बह कर गालो पर लुढ़क आये।

अगले ही पल एक आदमी अंदर आया। प्रिया की आँखें हैरानी से बड़ी हो गई। क्योंकि उस आदमी के हाथ में इंजेक्शन था।

"नहीं!" प्रिया चीख पड़ी। पर उस आदमी को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा। उसने आगे बढ़ कर प्रिया की बाह पर इंजेक्शन लगा दिया।

"Congratulations मिसेस ओबोरॉय यु आर प्रेग्नेंट।" ये आवाज़ अचानक प्रिया के कानों में गूँजी और उसी के साथ प्रिया बेहोश हो गई।

वो आदमी वहाँ से चला गया और अब वहाँ बस प्रिया ही रह गई थी। जिसे कोई होश नहीं था।

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"वो वहिं मिलेगा ना, अनीष?" निक ने गाड़ी ड्राइव कर रहे अपने असिस्टेंड अनीष से कहा तो अनीष ने अपनी गर्दन हिलाते हुए कहा। "यस सर! वो वहाँ किसी की तलाश में गया है। शायद उसे मारने।" अनीष ने कहा तो निक ने कुछ सोचते हुए कहा। "किसके पीछे गया है वो?"

"राधिक चौहान के पीछे सर।" असिस्टेंड मनीष ने कहा तो निक अपना लैपटॉप ले कर बैठ गया।

To be continue:-

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