रूही:Reborn my innocent ex wife - Chapter 3
इस समय दिया आंखों में शैतानियत नाच रही थी और उसकी नजर सामने बहती नदी पर गई फिर उसने अपने होठों के किनारो को तिरछा मोड़ते हुए उसे नदी की तरफ धक्का दे दिया उसके धक्का लगते ही रूही को संभालने का मौका नहीं मिला और वह रेलिंग से टकराकर नदी में जाकर गिर गई!
नदी में गिरते ही रूही का दम घुटने लगा वह पानी से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगी और मदद के लिए चिल्लाई...
"बचाओ....बचाओ...."
लेकिन उसकी मदद के लिए कोई भी नहीं आया क्योंकि सभी लोग दादाजी की शोक सभा में थे और कोई आता भी तो भी उसे नहीं बचता क्योंकि दिया कोई ना कोई साजिश कर सारा इल्जाम उसी पर लगा देती!
इस समय उसकी आंखें दिया को नफरत से देख रही थी दिया को देखते हुए वह मन ही मन कहती है",मैंने तुम्हें अपना सबसे अच्छा दोस्त समझा था लेकिन तुमने मेरे साथ विश्वासघात किया!.जिस परिवार को मैं अपना मानती थी, उन्होंने मेरा विश्वास नहीं किया जिस पति पर मैं अपनी जान छिड़कती थी, उसने भी मेरा विश्वास नहीं किया सभी ने तुम पर विश्वास किया,लेकिन मैं कसम खाती हूं अगर मुझे दोबारा जन्म मिला तो मैं तुम सबसे गिन गिन कर बदला लूंगी..अपने साथ हुए हर जुल्म का और अपने बच्चे की मौत का!"
यह सब बोलते समय उसकी आंखों में सबके लिए बेशुमार नफरत थी और वह अपनी लाल होती आंखें और कम होती सांसों के साथ अभी भी दिया को देख रही थी!
फिर धीरे-धीरे करके वह उस पानी में डूबती चली गई इसी के साथ उसे अपना शरीर हल्का होता हुआ महसूस हुआ और उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया...!
वही दिया जो किनारे पर खड़े होकर शांति से मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी"भगवान तुम्हारी आत्मा को शांति दे लेकिन तुम चिंता मत करो मैं रूद्र को कोई तकलीफ हो नहीं होने दूंगी क्योंकि तुम्हारी मौत के बाद मैं तुम्हारी जगह लूंगी और मिसेज राजपूत बन जाऊंगी!"
यह सब बोलते समय उसके चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान छाई हुई थी.....
नदी में डूबने के कुछ समय बाद रूही को लगा जैसे उसका शरीर नाव की तरह हल्का हो गया है और वह नदी की हिंसक लहरों में गोते खा रही है लेकिन फिर कुछ ही देर में उसे लगा जैसे वह एक विशाल हिमखंड या कहे एक ज्वालामुखी से जाकर टकराई उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसके शरीर में आग जल रही है..!
हालांकि उसका शरीर समय के साथ और गर्म होता जा रहा था लेकिन वह कुछ भी नहीं कर पा रही थी बल्कि वह उस ज्वालामुखी के और भी करीब होती जा रही थी अचानक उसे ऐसा लगा कि उसे हवा में जोर से उछाला गया हो वो अपनी आँखों को सही से खोल नहीं पा रहीं थी एसा लग रहा था जेसे उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा बल्कि ज्वालामुखी के साथ मिलकर बह रहा है..!
लेकिन फिर अगले ही पल उसे अपने शरीर के हिस्से निचले हिस्से में बेहिसाब गर्मी का एहसास हुआ उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके शरीर के निचले हिस्से में कोई ज्वालामुखी समा गया हो इस समय उसकी आंखें बंद थी वह फुसफुसाई...
" बहुत दर्द हो रहा है....!"
उसके शरीर के निचले हिस्से में ज्वालामुखी की तरह विस्फोट सा हो रहा था जिसे रोका नहीं जा सकता उसे लग रहा था! उसका पूरा शरीर फटकर दो हिस्सों में बट जाएगा खुद के ऊपर उसे ज्वालामुखी जैसी शक्तिशाली ताकत हावी होती हुई मेहसूस हो रहीं थीं...!
बार बार उसके मुंह से बस इतना ही निकल रहा था..
"दर्द हो रहा था..!"
"दर्द हो रहा था..!"
लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है ?क्योंकि उसे याद था दिया ने उसे नदी में धक्का दिया था और वह उसमें डूब कर मर गई थी तो फिर उसे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे वह इस समय ज्वालामुखी के पास है!
उस ज्वालामुखी ने उस पर कोई सहानुभूति नहीं दिखाई.....तभी एक जोरदार ताकत के साथ रूही ने अपने होठों पर एक वाइल्ड किस महसूस किया और फिर एक लय के साथ उसका शरीर भी उस ज्वालामुखी में समाने लगा और जल्द ही उसका दर्द गायब हो गया एक अजीब सा आनंद उसे महसूस हुआ और वह करहाने लगी.....
इसी के साथ उसे अनंत आनंद की अनुभूति हुई ....कुछ समय पहले उसके शरीर में जो ज्वालामुखी जल रहा था आखिरकार अब सब कुछ शांत हो गया.....धीरे-धीरे. रूही की आंखें खुलने लगी और उसे अपने शरीर में बेहिसाब दर्द महसूस हुआ!
उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके शरीर को बेहिसाब तरीके से चोट पहुंचाई गई हो उसका पूरा शरीर दर्द कर रहा था उसने जब आंखें खोली तो उसकी आंखों के सामने हल्का सा धुंधलापन छा गया उसने फिर से अपनी पलक झपकाई और दोबारा से अपनी आंखें खोली!
जैसे ही उसने अपनी आंखें खोली उसकी आंखों के सामने उसे छत दिखाई दी जिस पर प्राचीन काल को समर्पित कलाकृतियों की सुंदर डिजाइन बनाई गई थी उसे अचानक से खुद से याद आया यह तो वह घर है जिसे ओल्ड राजपूत मेंशन था..!
और उसकी आँखें हैरानी से बड़ी हो गई और वह अचानक उठकर बैठ गई लेकिन जैसे ही वह बैठी उसे इतना दर्द हुआ कि वह लगभग बेहोश होने की हालत में ही आ गई लेकिन फिर उसने खुद को किसी तरह संभाला !
उसी वक्त रूही की नजर अपने शरीर पर गई तो वह हैरान हो गई क्योंकि इस समय वह बिल्कुल नग्न थी उसके शरीर पर कोई भी कपड़ा नहीं था इसके साथ ही उसके सीने और कालरबोन पर नीले निशान पड़े हुए थे जो डरावने लग रहे थे..
यह सब देख कर वह हैरान रह गई तभी उसकी नजर अपने बगल में गई जहां पर कोई लेटा हुआ था यह देखकर उसकी आंखें हैरानी से फटी की फटी रह गई और वह उस इंसान को देखकर जोर से चिल्लाई और कंबल को तुरंत खींचकर अपने शरीर को छुपाने की कोशिश करने लगी !
वहीं उसकी आंखों के सामने लेटा वह नग्न आदमी बहुत ज्यादा हॉट और चार्मिंग लग रहा था जेसे ही उस आदमी के कानों में रूही की चीखने की आवाज जाती है वह अपनी आंखें खोल देता है ...जिसकी वज़ह से उनींदे आँखों वाला उसका चेहरा और भी ज्यादा आकर्षक लगने लगता है..!!
रूही तो उसके आंखें खोलते ही उसको मंत्रमुग्ध होकर देखने लगती है क्योंकि इस चेहरे को वह कभी नहीं भूल सकती चाहे उसे कितनी ही बार क्यों ना जन्म लेना पड़े क्योंकि ये आदमी कोई और नहीं बल्कि रूही का हसबैंड रुद्र राजपूत था......
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