His Revenge's Mistress - Chapter 2
उसने अपनी पलकों को कसकर बंद कर लिया, जैसे उन शब्दों को अपने दिमाग से निकाल देना चाहती हो… मगर वो आवाज़ बार - बार लौट आती थी। उसकी आँखें फिर से नम हो गईं।
मानसी जल्दी - जल्दी कदमों से कॉरिडोर पार करती हुई लिफ्ट की तरफ बढ़ गई। उसकी चाल में घबराहट साफ झलक रही थी। जैसे वो उस मंज़िल से जितनी जल्दी हो सके दूर हो जाना चाहती हो। लिफ्ट का बटन दबाते हुए उसके हाथ हल्के - हल्के काँप रहे थे। कुछ ही सेकंड बाद लिफ्ट का दरवाज़ा खुला और वो तुरंत अंदर चली गई।
कुछ ही पलों में लिफ्ट नीचे पहुँच गई। मानसी ऑफिस बिल्डिंग से बाहर निकल गई।
दूसरी तरफ,
उधर उसी समय टॉप फ्लोर पर बने उस विशाल केबिन में सब कुछ फिर से शांत हो चुका था। समर अपनी चेयर पर आराम से बैठा था। उसके सामने लैपटॉप खुला हुआ था और स्क्रीन पर एक फाइल चल रही थी। उसकी हेज़ल आँखें स्क्रीन पर चल रही लाइनों को बेहद ध्यान से पढ़ रही थीं।
तभी अचानक केबिन के दरवाज़े पर हल्की -।सी नॉक हुई। समर की नज़रें स्क्रीन से हटे बिना ही उसके होंठ हल्के से हिले— “ Come in. ”
दरवाज़ा खुला और अंदर उसका असिस्टेंट वंश आया। उसके हाथ में एक फाइल थी। वह नपे -।तुले कदमों से टेबल के पास आया और फाइल समर के सामने रख दी।
“ Sir… वैसे तो मैं आपको मिस मानसी के बारे में बेसिक जानकारी पहले ही दे चुका हु, ” उसने शांत स्वर में कहा, “ लेकिन इसमें उनकी फैमिली, फ्रेंड्स, पढ़ाई… और भी डिटेल्स है जो आपको जाननी थी। ”
समर की नज़र अभी भी लैपटॉप स्क्रीन पर थी। उसने बिना ऊपर देखे बस हल्का - सा सिर हिलाया — “ Okay. ”
वंश समझ गया कि अब उसे और कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है। वह मुड़ा और केबिन से बाहर चला गया।
दरवाज़ा बंद होते ही केबिन में फिर वही सन्नाटा लौट आया। समर ने लैपटॉप पर फाइल का आखिरी पेज पढ़ा, फिर कुछ टाइप किया और एक छोटा - सा मेल सेंड कर दिया। अगले ही पल उसने लैपटॉप बंद कर दिया। स्क्रीन की रोशनी बुझते ही उसकी नज़र धीरे - धीरे टेबल पर रखी उस फाइल पर गई, जो अभी - अभी वंश छोड़कर गया था।
समर ने हाथ बढ़ाकर फाइल उठाई और शांत भाव से उसे खोल दिया। पहले ही पेज पर उसकी नज़र ठहर गई पहले ही पेज पर उसकी नज़र ठहर गई —
फाइल के पहले पन्ने पर एक पासपोर्ट साइज में एक लड़की की बेहद प्यारी और मासूम - सी फोटो थी। भूरी आँखें, हल्की - सी मुस्कान और चेहरे पर ऐसी सादगी, जो पहली नज़र में ही ध्यान खींच ले। फोटो के ठीक नीचे साफ अक्षरों में उसकी डिटेल्स लिखी हुई थीं —
Name : Mansi Mittal
Age : 21 Years
Height : 5 Feet 3 Inches
समर की हेज़ल आँखें कुछ पल उसी फोटो पर ठहर गईं। उसकी उंगलियाँ फाइल के कोने पर टिकी थीं, जबकि उसकी नज़र धीरे - धीरे नीचे लिखी जानकारी पढ़ने लगी।
Family Details :
मानसी मित्तल अपने परिवार में सबसे बड़ी थी। उसके परिवार में उसकी माँ, एक छोटी बहन और एक छोटा भाई था। उसके पिता की मौत करीब एक साल पहले एक गंभीर बीमारी की वजह से हो चुकी थी। उसकी छोटी बहन की उम्र 17 साल थी… जबकि उसका छोटा भाई 15 साल का था। दोनों अभी अपनी पढ़ाई कर रहे थे और घर की हर छोटी - बड़ी ज़रूरत के लिए कहीं न कहीं मानसी पर ही निर्भर थे।
समर की नज़र अब फाइल के अगले हिस्से पर टिक गई।
मानसी BBA की स्टूडेंट थी। पढ़ाई के साथ - साथ वह Raichand Business & Development Industries ( RBD ) में अपनी इंटर्नशिप कर रही थी। यह वही कंपनी थी जिसे शहर के बिज़नेस वर्ल्ड में एक अलग पहचान दिलाई थी — देव रायचंद ने जो उसका बड़ा भाई और Raichand Business & Development Industries का मालिक था।
उसने फाइल के बाकी पन्ने भी शांत भाव से पढ़े। उसमें मानसी की पढ़ाई, उसकी इंटर्नशिप और उसकी साधारण - सी ज़िंदगी के बारे में छोटी - छोटी जानकारियाँ लिखी थीं। सब पढ़ने के बाद समर की नज़र एक बार फिर उस फोटो पर गई। वह कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।
फिर उसने बिना कोई भाव दिखाए फाइल बंद कर दी और उसे टेबल पर रख दिया। केबिन में फिर से वही खामोशी फैल गई।
दूसरी तरफ …
कुछ देर बाद मानसी एक टैक्सी से उतरी। उसने पैसे दिए और धीरे-धीरे सामने की छोटी - सी गली की तरफ बढ़ गई। गली के आखिर में एक साधारण - सा घर था। मानसी दरवाज़े के सामने कुछ पल खड़ी रही, जैसे खुद को संभाल रही हो। फिर उसने दरवाज़ा खोला और अंदर आ गई।
दरवाजा खुलने की आवाज सुन एक औरत किचन से बाहर आई। उस औरत ने जैसे ही सामने मानसी को देखा वो बोलीं —
“ अरे बेटा … आज तुम इतनी जल्दी आ गई ? ”
मानसी ने खुद को बिल्कुल सामान्य दिखाने की कोशिश की। होंठों पर हल्की-सी मुस्कान लाकर बोली — “ हाँ मम्मी … ”
वह पास रखी कुर्सी पर बैठ गई और बोली — “ मम्मी … प्यास लगी है, पानी ला दीजिए। ”
उसकी माँ तुरंत किचन में गईं और उसके लिए पानी ले आईं। गिलास देते हुए वह उसके पास ही बैठ गईं। मानसी ने एक ही साँस में पूरा पानी पी लिया। उसे ऐसे पानी पीते देख उसकी माँ ने हल्की चिंता से पूछा — “ क्या हुआ बेटा ? तेरी तबीयत तो ठीक है ना ? ”
मानसी ने तुरंत सिर हिलाया, “ हाँ मम्मी … मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक है। ”
फिर उसने जैसे अचानक खुश होने का नाटक करते हुए कहा — “ मम्मी … मेरी जॉब लग गई है। बीस हजार रुपये सैलरी है। ”
यह सुनते ही उसकी माँ के चेहरे पर खुशी चमक उठी, “ क्या… सच में बेटा ? ”
उन्होंने तुरंत उसे अपने सीने से लगा लिया। कुछ पल बाद नम आँखों से उससे अलग होकर उसके गाल पर हाथ फेरते हुए बोलीं — “ तेरे पापा के जाने के बाद… बस तू ही तो हमारा सहारा है। ”
मानसी ने उनकी तरफ देखते हुए हल्की मुस्कान के साथ कहा— “ मम्मी … अब आपको किसी चीज़ की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। मैं हर महीने आपको पैसे भेजती रहूँगी। ”
उसकी यह बात सुनकर उसकी माँ थोड़ी उलझन में पड़ गईं।
वो उसे गौर से देखते हुए बोलीं — “ भेजती रहोगी … मतलब ? ”
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Hey my lovely readers ❤️
उम्मीद है आपको आज का पार्ट पसंद आया होगा। अब सवाल ये है कि मानसी अपनी मम्मी को क्या जवाब देगी? क्या वो सच बताएगी या सब कुछ अपने दिल में ही छुपा लेगी?
आगे क्या होने वाला है और मानसी की ज़िंदगी किस मोड़ पर जाने वाली है, ये जानने के लिए पढ़ते रहिए His Revenge's Mistress… और अपना प्यार और सपोर्ट कमेंट के जरिए ज़रूर दीजिए।