नाजायज (Complete) Ch. 1

नाजायज - Chapter 1

Posted by Mamta Meena • Apr 10, 2026 10:37 PM

नाजायज एक ऐसा शब्द है जिसके साथ भी जुड़ जाता है उसकी मौत के बाद भी उसके नाम से अलग नहीं हो पाता,,,,,,

इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,

जिस किसी के नाम के साथ हैं शब्द जुड़ जाता है उसकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो जाती है हर कदम पर लोगों के ताने उनकी घृणा उसे चैन से जीने नहीं देते,,,,,,

ऐसी ही एक कहानी है कनिका की जिसके जन्म से ही उसके नाम के साथ जुड़ा हुआ है नाजायज शब्द,,,,,,

इस शब्द की आड़ में उसकी सारी खुशियां उसके सपने उसकी भावनाएं जैसे कई दबकर रह गए हैं,,,,,,

बचपन से लेकर आज तक इस शब्द ने उसकी हर खुशी को छीन लिया उसके हर सपने को उससे दूर कर दिया लोगों के ताने उनकी घृणा उनकी नफरत कितना कुछ नहीं सहन करना पड़ा कनिका को,,,,,,

यह नहीं की इसे सिर्फ कनिका को ही तकलीफ हुई इससे भी ज्यादा तकलीफ हुई उसकी मां नंदिता को,,,,,,

यह कहानी है कनिका और उसकी मां नंदिता की दोनों मां बेटी एक दूसरे की दुनिया है एक दूसरे की सुख दुख की साथी एक दूसरे की हमदर्द और एक दूसरी का सब कुछ,,,,,,,

लेकिन लोगों की नफरत और लोगों के तानों ने जैसे दोनों मां बेटी की सारी खुशियों को छीन लिया है,,,,,

अब लोगों की बातों का उनके दिलो-दिमाग पर इस तरह जख्म पड़ चुका है कि उसकी तकलीफ हर पल तड़पाती रहती है,,,,,,

जहां लोग कनिका को नाजायज तो बही उसकी मां को बदचलन के नाम से जानते हैं,,,,,,

अब तो गांव में रहने वाला हर व्यक्ति यहां तक कि खुद नंदिता के पति सास ससुर और उसकी खुद की बड़ी बेटी श्वेता भी उसे इसी नाम से जानते हैं,,,,,,

जैसे सभी लोग उनका असली नाम तो भूल ही चुके हैं नंदिता बदचलन और कनिका लोगों के लिए नाजायज बन गई है,,,,,,,

क्या नंदिता एक बदचलन औरत है क्या कनिका अपनी मां की एक नाजायज औलाद है यह सब कुछ जानने के लिए आपको जुड़ा रहना होगा मेरी इस रचना नाजायज के साथ,,,,,,

जिससे आपके हर सवाल का जवाब आपको मिलेगा मेरी यह रचना समाज की ऐसी कई अच्छी बुरी सच्चाइयों से आपको रूबरू कराएगी जो अधिकतर छुपी हुई रहती है,,,,,,

आखिर मेरी इस कहानी को लिखने का उद्देश्य और इसके पीछे की सारी सच्चाई क्या है यह जानने के लिए पढ़िए मेरी इस रचना को,,,,,

राजस्थान का एक छोटा सा गांव है रामपुरा उसी गांव के बाहरी इलाके खेतों की तरफ एक पहाड़ी की तलहटी में बनें कच्चे पक्के घर में रहती है नंदिता और उसकी बेटी कनिका,,,,,,,

कनिका जो दसवीं क्लास में पढ़ रही है और रामपुरा के सरकारी स्कूल में पढ़ती है वह रोज पैदल ही अपने गांव के बीचो-बीच बने हुए स्कूल में पढ़ने के लिए जाती है और पैदल ही घर वापस लौटती है,,,,,,,

वही उसकी मां नंदिता अपने हाथों से तरह-तरह के आचार मंगोड़ी और पापड़ बना कर अकेले ही गांव से शहर जाने वाली बस में बैठकर शहर बेचने के लिए जाती है,,,,,,,

उसने शहर में कुछ दुकान ही निश्चित कर रखी है जिन पर बह अपना सामान बेचकर वापस शाम को गांव लौटने वाली बस से लौट आती है,,,,,,

नंदिता द्वारा बनाई गई मंगोड़ी पापड़ आचार को सभी बहुत पसंद करते हैं,,,,,,

लेकिन शहर के दुकानदार नंदिता की गरीबी और उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर बहुत कम कीमत में नंदिता से उन्हें खरीदते हैं,,,,,,

जिसकी वजह से नंदिता बड़ी मेहनत से इतना कमा पाती है कि उसका और उसकी बेटी का गुजारा हो सके,,,,,,

लेकिन नंदिता का एक ही सपना है कि उसकी बेटी कनिका पढ़ लिख कर एक मुकाम हासिल करें,,,,,,,

इसलिए बह अपनी बेटी को हर प्रकार की खुशी देने की पूरी कोशिश करती है,,,,,,

वही कनिका भी अपनी मां की मेहनत और उसकी तकलीफ को समझती है,,,,,,,

इसलिए वह भी बेवजह किसी भी चीज की जिद अपनी मां से कभी नहीं करती और समय मिलने पर अपनी मां के कामों में हाथ बटाती है और दिन रात मेहनत करके पढ़ाई करती है,,,,,,,

कनिका ने बचपन से लेकर आज तक हर क्लास में प्रथम स्थान प्राप्त किया है जो कि नंदिता के लिए एक तरह की गर्व बात है,,,,,,

दोनों मां बेटी गांव से दूर उस पहाड़ी की तलहटी में बने छोटे से घर में जैसे तैसे अपना जीवन यापन करती है,,,,,,

लेकिन उनकी जिंदगी में जैसे शांति नाम की तो कोई चीज ही नहीं है,,,,,

क्योंकि राह आते जाते लोग तरह-तरह के उल्टे सीधे तानों से उन्हें परेशान करते हैं,,,,,

नंदिता जब भी अपने द्वारा बनाई गई खाद्य सामग्री को बेचने के लिए शहर के लिए रवाना होती है तो कहीं लोगों की उल्टी-सीधी बातें उनके कमेंट हमेशा उसे सुनने सुनने पड़ते हैं,,,,,

कई लोग तो उसके साथ छेड़खानी तक करने की कोशिश करते हैं लेकिन नंदिता के गुस्से के आगे बे उसे छू भी नहीं पाते,,,,,,

वही कनिका जब भी स्कूल जाने के लिए घर से निकलती है तो रास्ते आते जाते गांव के कुछ मनचले और आवारा किस्म के लड़कों की उल्टी सीधी बातें गंदे गंदे शब्दों उसे सुनने के लिए मिलते हैं,,,,,,

जो उसे काफी तकलीफ पहुंचाते हैं बह हर बार अपनी मां से इस बारे में बात करती है लेकिन नंदिता अपनी बेटी को तसल्ली देने के सिवा कुछ नहीं कर पाती,,,,,,

नंदिता को अपनी बेटी को देखकर उसी काफी चिंता होने लगती है कि कहीं किसी दिन कनिका के साथ कुछ गलत ना हो जाए,,,,,,

यह सोचते हुए उसका मन करता है कि वह अपनी बेटी को लेकर यहां से कहीं दूर चली जाए लेकिन बह जाएगी भी तो कहां,,,,,,

क्योंकि इस दुनिया में कदम कदम पर हवस के भूखे भेड़िए बैठे रहते हैं,,,,,,

वैसे तो रामपुरा गांव में भी ऐसे कई आवारा किस्म के इंसान थे जो नंदिता और कनिका दोनों मां बेटी का नाजायज फायदा उठाना चाहते थे उनकी इज्जत के साथ खेलना चाहते थे,,,,,

लेकिन सब लोगों को डर है नंदिता के ससुर धर्मवीर का जो कि उस गांव के सरपंच है और एक उच्च घराने से संबंधित है,,,,,,,

यह बात अलग है कि नंदिता के पति सास-ससुर कोई भी उससे किसी तरह का रिश्ता नहीं रखता सब लोग उनसे नफरत करते हैं,,,,,,

लेकिन फिर भी गांव के लोगों के मन में आज भी एक डर है कि कहीं कनिका और उसकी मां के साथ किसी तरह की छेड़खानी करने से उन पर कोई मुश्किल आ जाए,,,,,,

इसलिए धर्म सिंह के डर की वजह से कोई उन दोनों मां बेटी से चाहते हुए भी उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता था,,,,,,

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