नाजायज (Complete) Ch. 3

नाजायज - Chapter 3

Posted by Mamta Meena • Apr 10, 2026 10:40 PM

तब नंदिता कुछ सोच कर उदास हो गई तो कनिका बोली क्या हुआ मां,,,,,,

तब नंदिता बोली श्वेता को भी खीरमोहन बहुत पसंद है ना,,,,,,

तब यह सुनकर कनिका बोली हां मां लेकिन दीदी तो स्कूल में मेरी तरफ देखती तक नहीं है मुझ से बात करना तो दूर,,,,,,

आखिर हमारे साथ यह सब कुछ क्यों हो रहा है भगवान किस बात की सजा दे रहा है हमें स्कूल में भी कोई ठीक तरह से मुझसे बातें भी नहीं करता,,,,,,,

तब यह सुनकर नंदिता कुछ नहीं बोली उसकी आंखों में आंसू छलक आए,,,,,,

तब कनिका बोली मां आप थक गई होगी ना बैठिए मैं आपके लिए चाय बनाकर लेकर आती हूं,,,,, यह कहकर वह उठकर अपनी मां के लिए चाय बनाने चली गई,,,,,,

फिर शाम को दोनों मां बेटी ने साथ साथ खाना खाया और सो गई,,,,,,

अगले दिन सुबह उठकर रोजाना की तरह नदी पर स्नान करके आना भगवान की पूजा अर्चना करना खाना बनाना और खाना खाकर कनिका स्कूल चली जाती,,,,,,,

तो बही नंदिता घर के कामों के साथ आचार मंगोड़ी बनाने में लग जाती क्योंकि 3 दिन के बाद उसे देने के लिए शहर जाना पड़ता था,,,,,,,

उस दिन शाम को जब कनिका घर वापस लौटी तो काफी परेशान थी,,,,,

तब उसे इतना परेशान देखकर नंदिता बोली क्या हुआ कनिका बेटा किसी ने कुछ कहा है क्या इतनी परेशान लग रही हो,,,,,,,

लेकिन कनिका ने कोई जवाब नहीं दिया बह गुस्से में  अंदर चली गई,,,,,,

तब यह देखकर नंदिता काफी परेशान हो गई और उसके पीछे पीछे ही चली गई थी,,,,,,

उसने देखा कि कनिका कमरे में खिड़की के पास खड़ी कुछ सोच रही थी उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे,,,,,,

तब नंदिता उसके कंधे पर हाथ रख कर बोली क्या हुआ बेटा किसी ने कुछ कहा है क्या,,,,,,

अगर किसी ने कुछ बोला है तो बताओ मुझे मैं अभी जाकर उसकी खबर लेती हूं,,,,,,

यह सुनकर कनिका अपनी मां की तरफ देखते हुए बोली क्या बोलोगी मां मां बताओ मुझे इस किससे बोलोगी बचपन से लेकर आज तक क्या-क्या नहीं सुनने को मिला है मुझे,,,,,,

बात-बात पर छोटे से लेकर बड़ा तक हर कोई मुझे उल्टा सीधा बोल देता है,,,,,,

आज भी राह जाते हुए एक लड़के ने मेरा रास्ता रोक लिया गंदी गंदी बातें करने लगा अपने साथ चलने के लिए कहने लगा,,,,,,

तब यह देखकर जब मैंने गुस्से में उससे रास्ता छोड़ने के लिए कहा तो दूसरा लड़का आ गया और यही बोला कि जैसी मां वैसी बेटी है और दोनों बेशर्म की तरह हंसी हंसने लगे थे,,,,,,,

यह कहते हुए कनिका ने अपनी मां की तरफ देखा और बोली मां आप सोच नहीं सकती उन लड़कों ने मुझसे क्या-क्या बोला है अरे बह तो कुछ औरतें कुएं से पानी लेकर आ रही थी,,,,,

जिस वजह से उनके डर की वजह से लड़के वहां से भाग गए कि कोई बात ना बन जाए ना,,,,,,

पता नहीं आज वह दोनों लड़के क्या करते दोनों ने शराब पी रखी थी मां,,,,,,

मैं तंग आ चुकी हूं इन सब बातों से अगर मेरे साथ कुछ गलत हो जाता ना तो इस गांव में कोई नहीं है जो मेरा साथ दे पाता इससे अच्छा तो मर जाना है,,,,, कनिका गुस्से में बोली,,,,,,

तब उसकी मां बोली नहीं बेटा ऐसा नहीं बोलते अरे कोई तेरा साथ दे या ना दे लेकिन तुम्हारी मां तुम्हारे साथ है,,,,,

तब यह सुनकर कनिका बोली आपके साथ देने से या ना देने से कुछ नहीं होने वाला मां क्या कर लेती है आप,,,,,,

आज उस घटना के बाद जैसे ही मैं स्कूल पहुंची तो मैंने देखा कि श्वेता दीदी को छोड़ने के लिए बाबोसा आएं है,,,,,,

मैं रास्ते में हुई उस घटना से इतनी ज्यादा डर चुकी थी कि भागकर बाबोसा के पास पहुंची और डरते हुए बोली बाबोसा बाबोसा,,,,,, यह कहते हुए मैंने बाबोसा का हाथ पकड़ लिया,,,,,,

उस समय पता है बाबोसा ने क्या किया स्कूल के सब लड़के लड़कियों के सामने गुस्से में अपना हाथ छुड़ा लिया और मेरे एक तरफ धक्का दे दिया,,,,,,

और मेरी तरफ गुस्से में देखते हुए कहा कि तुम नाजायज हों मेरा तुझसे या तेरी उस बदचलन मां से कोई रिश्ता नहीं है सुना तुमने,,,,,,

और खबरदार जो आज के बाद मेरे या मेरी बेटी श्वेता के आसपास भटकने की कोशिश भी की तो अब जा यहां से,,,,,,,

यह कहते हुए उसने मेरी तरफ से नफरत से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया और गुस्से में वहां से चले गए,,,,,,,,

उस समय मैं बता नहीं सकती मां की मुझ पर क्या गुजरी थी सब लोग हंस रहे थे मुझ पर,,,,,,

उस समय शर्म के मारे मुझसे सामने देखा भी नहीं जा रहा था मेरे ही खुद के बाबोसा ने मुझे धक्के देकर अपने आप से दूर कर दिया यह बात मैं समझ नहीं पा रही थी,,,,,,

उसके मुंह से अपने लिए नाजायज शब्द सुनकर मेरे पर क्या गुजरी है मैं बता नहीं सकती मां,,,,,,

आज तक लोगों के मुंह से अपनी बहन के मुंह से यह शब्द मैंने हजारों बार सुना है लेकिन आज बाबोसा के मुंह से यह सब सुनकर मुझे बहुत तकलीफ हुई है मां,,,, यह कहकर कनिका फूट-फूट कर रोने लगी,,,,,,,

तब उसे इस तरह रोते देखकर नंदिता की आंखों में आंसू आ गई और मैं उसके कंधे पर हाथ रख कर बोली हिम्मत रखो बेटा तब कनिका बोली और कितनी हिम्मत रखो मां बताओ आप

बचपन से लेकर अब तक मैंने सिर्फ आपको और मुझे जिल्लत भरी जिंदगी जीते हुए देखा है,,,,,,,

लोग आपको बदचलन नाम से तो मुझे नाजायज के नाम से जानते हैं आज मैं जानना चाहती हूं मां कि सच्चाई है इन सब के पीछे,,,,,,

जिन्हें आप मेरा परिवार कहती है जिन्हें आप मेरी बहन मेरे पिता कहते हैं आखिर क्यों बे लोग हमारी तरफ पलट कर भी नहीं देखते,,,,,

स्वेता दीदी को सब इतने प्यार से रखते हैं और मेरी तरफ देखते भी नहीं क्यों मां,,,,,,,

यह सुनकर नंदिता ने कोई जवाब नहीं दिया तब कनिका उसकी तरफ देखते हुए बोली बोलो मां क्या मैं सच में नाजायज हूं,,,,,,

तब यह सुनकर नंदिता गुस्से में बोली कनिका,,,,,,

तब कनिका बोली हां मां मैं जो बोल रही हूं वह सही बोल रही हूं क्या मैं सच में नाजायज हूं या आप बदचलन है क्या लोगों की कही हुई बातें सच तो नहीं,,,,,,,

शायद आप बदचलन है तभी तो मैं नाजायज हूं जिस वजह से आए दिन लोगों की बातें हमें सुनने के लिए मिलती है,,,,,,

और कोई हमारी तरफ पलट कर नहीं देखता ना आपके माता-पिता ना आपके ससुराल वाले आखिर क्यों,,,,,,, कनिका गुस्से में तिल मिलाते हुए बोली,,,,,,

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