एक ट्रांसजेंडर की आपबीती - Chapter 1
शिवन्या के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे उसकी सिसकियां उस बंद कमरे में गूंज रही थी ,कमरे में चारों तरफ सामान अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ था,,,,,
साथ में ही शराब की खाली पड़ी बोतले सिगरेट की आती दुर्गंध सबके बीच बैठी हुई शिवन्या अपनी किस्मत को कोस रही थी,,,,,
उसने उठकर सामने लगे आईने में जब अपना चेहरा देखा तो उसे अपने आप से नफरत आने लगी जिस चेहरे को देखकर वह कभी इठला उठती थी आज उसी चेहरे पर उसे नफरत आ रही थी,,,,,
उसने जल्दी से अपनी मांग में लगे सिंदूर को पोंछा और फूट-फूट कर रोने लगी, गले में पड़े मंगलसूत्र को उसने हाथों से खींचकर तोड़कर कर एक तरफ से फेंक दिया और हाथ में पहने चूड़ियों को दीवार के दे मारा उसके हाथ में चूड़ी टूटने से चोट लग गई और खून में बहने लगा, लेकिन वह इन सबसे बेखबर रोए जा रही थी,,,,,
वह धम्म से वही जमीन पर बैठ गई, उसकी आंखों के सामने अपने अतीत के पन्ने खुलने लगे और वह अपने अतीत में खो गई,,,,,
शिवन्या जिसका नाम कभी शिव हुआ करता था, एक बड़े भाई एक बहन से छोटा शिव रामविलास की सबसे छोटी और तीसरी संतान थी,,,,
सबसे छोटा होने के कारण सब उस को अपने दिलो जान से चाहते थे और उसका बहुत प्यार से रखते थे, शिव देखने में भी बहुत ज्यादा सुंदर था,,,,,
शिव के पापा रामविलास शहर के जाने-माने वकील थे वही उसकी मां प्रेरणा देवी एक कुशल ग्रहणी जिसने अपने घर के साथ-साथ अपने बच्चों को भी अच्छे से संभाला था उनकी अच्छे से परवरिश की थी, अच्छे बुरे का फरक समझाया था,,,,
शिव के सबसे बड़े भाई का नाम विष्णु, बहन का नाम सावित्री था,,,,
जैसे-जैसे शिव बड़ा हो रहा था उसे महसूस होने लगा कि उसका शरीर तो एक मर्द का है लेकिन आत्मा एक औरत की है,,,,,
वह बचपन से ही अपनी बहन के कपड़े पहना करता अपनी मम्मी के सिंगार में से काजल बिंदी लगाया करता, बचपन में तो कोई भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता क्योंकि सब उसे बचपन में उसका बाल मन समझकर हंसकर टाल देते थे,,,,,
लेकिन जैसे-जैसे शिव बड़ा होता जा रहा था उसकी आदत में कोई बदलाव होने की बजाएं आदत और बढ़ रही थी वह जब अपनी दीदी के कपड़े छुपकर पहनता, सिंगार से सज सबरता था,,,,,
जब कोई उसे कोई उसे देख लेता तो उसे डांट लगती थी, लेकिन उसके घर वालों ने महसूस किया कि शिव को हमेशा लड़कियों की तरह रहने का शौक है और वह लड़कियों की तरह ही लड़कों की तरफ आकर्षित होती है,,,,,
शिव के घरवालों को अच्छे से समझ में आ चुका था कि भगवान ने शिव को शरीर तो एक मर्द का दे दिया लेकिन आत्मा औरत की दे दी,,,,
अब उन लोगों को शिव की चिंता सताने लगी, अब उन्हें इस बात की भी चिंता होने लगी थी कि अगर लोगों को शिव की इस आदत के बारे में पता चलेगा तो उनकी कितनी बदनामी होगी , लोग उन पर कीचड़ उछालेंगे, उनका मजाक बनाएंगे उनके खानदान की सारी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी,,,,
वे लोग उस पर हमेशा निगरानी रखने लगे, शिव के मम्मी पापा ने शिव को काफी डांटना डराया धमकाया कि वह कभी भी लोगों के सामने कुछ ऐसा ना करें जिससे उसकी इज्जत पर आंच आ जाए,,,,
वह एक मर्द है पुरुष है और एक पुरुष की तरह ही रहे ना कि एक औरत की तरह लेकिन शिव को अपने माता-पिता की यह बात नागवार गुजरती,,,,
अपने माता पिता के बार बार डांटने धमकाने की वजह से शिव अपने घर में चाहते हुए भी, ना लड़कियों के कपड़े पहन सकता था, ना लड़कियों की तरह सज संवर सकता था, वह अंदर ही अंदर घुट रहा था,,,,,
शिव का एक बचपन का दोस्त था केशव जो उनके घर से कुछ ही दूरी पर रहता था केशव के पिता किसी खून के सिलसिले में जेल में जा चुके थे और उसकी माता अपने किसी प्रेमी के साथ भागकर केशव को लेकर इस शहर में आई थी,,,,,
केशव का सोतेला बाप हमेशा दारू पीकर पड़ा रहता, वही उसकी मां धीरे-धीरे बीमार रहने लगी और 1 दिन उसकी मौत हो गई,,,,,
केशव और उसके सौतेले बाप में बिल्कुल भी नहीं बनती थी अपने माता-पिता की गलत आदतों के प्रभाव के कारण केशव को भी काफी बुरी आदतें लग चुकी थी और वह के एक नंबर का अय्याशी बदमाश बन गया था,,,,
उसने बचपन से ही शिव के साथ दोस्ती का नाटक इसलिए किया था क्योंकि शिव एक काफी जाने-माने अमीर घराने से था, जिससे वह शिव के पैसों पर ऐश कर सके,,,,,
जब धीरे-धीरे उसे शिव के बारे में पता चला तो उसने शिव के साथ झूठी हमदर्दी दिखाना शुरू कर दिया क्योंकि वह किसी भी तरह से शिव से केवल पैसे वसूलना चाहता था,,,,
जब शिव अपने घर परिवार में अपनी इच्छा पूरी नहीं कर पाता, तब बह केशव साथ उसके घर आ जाता क्योंकि उसके घर में कोई नहीं रहता,,,,
उसका शराबी सौतेला बाप तो घर से बाहर सड़क पर या किसी के कचरे के ढेर पर शराब पीकर पड़ा रहता था या फिर कभी घर भी आता तो घर के एक कोने में शराब पीकर पड़ा रहता था,,,,
केशव के घर आकर शिव उसे रुपया देकर बाजार से लड़कियों के कपड़े और साज श्रृंगार का सामान मंगवा लेता और खूब सज सबरकर तैयार होता,,,,
केशव शिव की इसी मजबूरी का फायदा उठा था और वह शिव की लड़की रूप में बढ़ा चढ़ाकर तारीफें करता और पीठ पीछे उसे शिव कि उस आदत हालत पर हंसी आती, बह मन ही मन उसका मजाक बनाता था,,,,,
शिव का रोज स्कूल केसब के साथ जाना आना और उसके घर खेलने के बहाने जाकर लड़की बनकर घूमना उसकी आदत थी,,,,
पहले तो शिव के मम्मी पापा ने काफी कोशिश की कि वह केसब से दूर रहे,,,,
लेकिन शिव केसब से दूर रहना ही नहीं चाहता था, बह अपने भाई बहनों से भी बातें नहीं करता था,,,,
फिर शिव के माता पिता ने सोचा कि शिव सबसे कटा कटा रहता है चलो केसब के रूप में उसे एक अच्छा दोस्त मिल गया यह अच्छा ही तो है बे लोग अब इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, उन्हें नहीं पता था शिव खेलने के बहाने जाकर केशव के घर जाकर क्या करता है,,,,,