एक ट्रांसजेंडर की आपबीती - Chapter 2
धीरे-धीरे समय गुजरा शिव और केसब बढ़े हुए हुआ अब ब लोग अपने स्कूल के पढ़ाई कर कॉलेज में आ चुके थे लेकिन शिवा का केसब के घर आना जाना बंद नहीं हुआ था,,,,,
घर पर शिव ऐसी कोई हरकत नहीं करता जिससे उसके घरवालों को उस पर शक हो, इसलिए उसके घर वाले अब शिव की ज्यादा चिंता नहीं करते थे,,,,
उन्हें लगा कि शिव में धीरे-धीरे बदलाव आ गया है और वह लड़कों की तरह रहना सीख गया है,,,
केसब के घर शिव लड़कियों की तरह तैयार होकर बाहर घूमने निकल जाता, लड़की के रूप में उसे कोई पहचान भी नहीं पाता था,,,,
लड़की के रूप में घूमने फिरने से शिव को काफी खुशी महसूस होती, जब केसब के कुछ दोस्त लड़की के रूप में शिव को नहीं पहचान पाते थे और केसब से उसके बारे में पूछते,,,,
तब केशव उसे अपनी गर्लफ्रेंड बताता सब लोग केशव की बात सुनकर हैरान रह जाते थे कि आखिर इतनी सुंदर लड़की इस जैसे काले कलूट की गर्लफ्रेंड कैसे बन गई और बे लोग लड़की बने शिव को रिझाने की कोशिश करते थे,,,,
शिव को भी उन सब के साथ बातचीत कर बहुत अच्छा लगता था, लड़कों द्वारा शिवा की खूबसूरती की तारीफ करना उसे घूरना शिव को बहुत अच्छा लगता था,,,,
एक दिन शिवा के पापा ने घर लौटते समय लड़की के रूप में शिव को केसब के साथ देख लिया और उसे पहचान गए,,,
उस वक्त तो उसने बदनामी के डर से कुछ नहीं कहा लेकिन जब शाम को शिव केसव के घर से वापस आया तो उसने उसे जमकर डांट लगाई,,,,
यहां तक कि उसके गाल पर एक दो तीन तमाचे भी रख दिए और उसे घर से बाहर जाने के लिए मना कर दी गई,,,,
जिससे वह काफी गुस्सा हो गया, जैसे तैसे कर शिवा की मम्मी ने बात संभाली, लेकिन कहते हैं ना कि आखिर सच्चाई कब तक छुप सकती है एक ना एक दिन तो उसे बाहर आना ही होता है,,,,,
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे शिव के पापा लड़की रूप में उसे केसब के साथ बाजार में घूमते हुए देख लेते हैं और घर आकर उसे काफी डांट लगाते हैं और उसे घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी जाती है,,,,,
घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगने से शिव को बहुत दुख होता है उसका मन करता कि वह घर से बाहर निकले फिर केसब के साथ लड़की बनकर बाहर खुली हवा में सांस ले अपनी जिंदगी जिए, लेकिन वह अपने घर वालों के आगे मजबूर था,,,,
एक लड़की की तरह वह भी केसब से प्यार करने लगा था उसके घर वालों ने जब उस पर पाबंदी लगाई तो उसकी हालत उस प्रेमिका की तरह हो गई जो अपने प्रियतम से बिछड़ कर एक-एक पल उसकी याद में तड़पती है,,,,
अब शिव को अपने पिता फिल्म के विलेन पिता की तरह नजर आने लगे जो एक हीरोइन को अपने हीरो से मिलने से रोकते हैं,,,,,
उधर केशव का शिव से साथ छूट गया तो उसे रुपयों की कमी महसूस होने लगी क्योंकि शिव के साथ रहते रहते उसके ठाट भी उझे हो गए थे और उसके शौक महंगे थे उसके साथ घूमना फिरना होटल में खाना खाना शराब पीना आदि उसकी आदतों में शुमार हो चुका था,,,,
अब शिव के बिना केशब के पास पैसे जो नहीं थे अब वह किसी भी तरह शिव से मिलना चाहता था, एक दिन जब वह शिव से मिलने उसके घर गया तो शिव के पापा ने उसे काफी भला बुरा कहा गाली गलौज दी धक्के मार कर घर से भगा दिया,,,,,
केशव को आए देखकर शिव ने उससे मिलने की काफी कोशिश की वह काफी रोया लेकिन उसके घर वालों ने उसे उससे मिलने नहीं दिया,,,,
अपनी बेज्जती होने से केशव काफी गुस्से में हो गया और अब वह उन लोगों को सबक सिखाने के बारे में सोचने लगा,,,,
उसने रास्ते में राह चलते कुछ राहगीरों की धोखे से जेब काटी और उन रुपयों से अपने दोस्तों के साथ शराब पीने लगा, जब वह काफी शराब पी चुका था,,,,
तब उसका एक दोस्त बोला अरे यार केसव रहने दो और कितने पिएगा, लेकिन केशव की आंखों के सामने तो बार-बार शिव के पापा द्वारा की गई उसकी बेइज्जती याद आ रही थी,,,,,
तब दूसरा दोस्त बोला अरे लगता है इसकी महबूबा गर्लफ्रेंड इसे छोड़ कर चली गई है इसी गम में ही पीता है पहले तो इससे चिपकी रहती थी लेकिन कुछ दिनो से इसके साथ दिखाई नहीं दे रही है,,,,,,
तभी तीसरा दोस्त बोला अरे आखिर में कहां वह रूप परी और कहां यह काला कलूटा यह कहकर उसने केशव का मजाक बनाया,,,,
तब केशव को गुस्सा आने लगा और उसने जोर से शराब की खाली बोतल को जमीन पर दे मारा और गुस्से में बोला अरे काय की महबूबा और काई की गर्लफ्रेंड गर्लफ्रेंड और महबूबा तो लड़कियां होती है वह हिजड़ा नहीं,,,,
यह सुनकर उसके दोस्त हैरान रह गए और उसकी तरफ हैरानी से देखने लगे,,,,,
तब केसब शराब के नशे में बोला कोई मेरी महबूबा महबूबा नहीं है वह तो लड़का है मेरा मतलब हिजड़ा,, अरे वही हमारा जिगरी दोस्त है शिव है,,,,,
शिव का नाम सुनकर सब दोस्त हैरान रह गए, तब केसब बोला हां यार वह शिव साला हिजड़ा है हिजड़ा,,,,
बचपन से ही साले के घर वाले उसे तो वहां उसके मन की करने नहीं देते इसलिए साला बचपन से ही मेरे घर आकर लड़कियों की तरह सज संवर कर मेरे साथ घूमने निकल जाता और तुम सब साले बेवकूफ उसे लड़की समझकर उसे रिझाने की कोशिश करते उसके आसपास घूमने की कोशिश करते,,,,,,
यह कह कर केसब जोर से हंसा तब उसका दोस्त बोला लेकिन तुम तो उसे अपनी गर्लफ्रेंड बताते थे,,,,
तब केशव बोला हां यार बताता था था क्योंकि मेरा स्वार्थ जो था उसकी इस सच्चाई को लोगों से छुपाने के लिए और उसे अपनी गर्लफ्रेंड बना कर बाहर घुमाने के लिए मुझे पैसे जो मिलते थे, मैं उस साले के पैसों पर बचपन से ही ऐश कर रहा था यहां तक कि उस साले हिजड़े से पैसे के लिए ही मैंने यह कहकर अपने प्यार का इजहार किया कि वह बहुत सुंदर है और मैं उससे प्यार करता हूं और वह साला बेवकूफ हिजड़ा उसे प्यार समझ बैठा,,,,,
यह कहकर केशव जोर से हंसा और फिर वह गुस्से में बोला लेकिन उस साले के घर वालों ने एक दिन उसे मेरे साथ देख लिया और उसे घर से बाहर निकलने पर मना कर दिया,,,,
ऐसे कैसे मैं उस सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को छोड़ सकता था मैं उसके घर गया और उसे मिलने बुलाया तो उस साले हिजड़े के उस बुड्ढे बाप ने मुझे काफी भला बुरा कहां, गाली गलौज की और धक्के मरवा कर घर से बाहर निकलवा दिया,,,,,
उस साले बुड्ढे को तो मैं छोडूंगा नहीं,,,, यह कह कर के केशव गुस्से में एक और शराब की बोतल उठाई और शराब पीने लगा,,,,