बेपनाह प्यार है - Chapter 2
तब पूरब को इस तरह रोते हुए देखकर राधिका की आंखों में भी आंसू निकल आए और उसका मन किया कि वह अभी पूरब को गले से लगा ले,,,,,,,
लेकिन फिर कुछ सोचकर उसने अपने आपको काबू में किया और अपना हाथ झटके से छुड़ाते हुए बोली नहीं पूरब नहीं ऐसा कभी नहीं हो सकता,,,,,,
अगर मैं तुम्हारे साथ इस गांव को छोड़कर कही दूर चली जाऊंगी तो पता है क्या होगा तुम्हारे भैया की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी और मेरी दादी को लोग जीते जी ही ताने दे देकर मार डालेंगे,,,,,,,
और यह मैं नहीं चाहती कभी नहीं प्रेम एक पवित्र अहसास है और मैं नहीं चाहती थी हमारे किसी भी गलत कदम की वजह से लोग इस पवित्र शब्द को बदनाम करें,,,,,,,,
पूरब बस अब तुम से हाथ जोड़कर विनती है कि तुम मुझे भूल जाओ हमेशा के लिए और जहां तुम्हारे भैया चाहते हैं वही शादी कर लो,,,,
क्योंकि शायद इसी में तुम्हारे घर वालों की तुम्हारे भैया की और मेरी दादी की भलाई है इसलिए बेहतर यही होगा तुम मुझे भूल जाओं पूरब,,,,,,
यह कहते हुए राधिका की आंखों में आंसू आ गए फिर उसने अपने आंसू पोंछे और बोली पूरब देवी राधा और भगवान कृष्ण तो भगवान के अवतार थे,,,,,,,
लेकिन फिर भी राधिका आजीवन कृष्ण की ना हो सकी और उसके प्यार में तड़पती रही शायद मेरी किस्मत में भी यही लिखा है,,,,,,
शायद कृष्ण की तरह ही तुम्हारी जिंदगी में मेरा स्थान श्री राधा की तरह ही होगा कृष्ण हमेशा रुक्मणी के थे और रुकमणी के ही रहे कभी राधिका कि नहीं हो सके यह कहते हुए राधिका अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए रो पड़ी,,,,
तब यह सुनकर पूरब बोला रो मत राधिका मैं तुम्हारी आंखों में आंसू नहीं देख सकता,,,,,,,
राधिका भगवान श्री कृष्ण ने सिर्फ राधा से ही प्यार किया था चाहे उसकी शादी किसी से भी हुई हो,,,,,,
लेकिन आज भी लोग उसे राधा के नाम से ही जानते है क्योंकि कृष्ण की अनेकों रानी यां भी राधा की कमी पूरी नहीं कर सकी थी,,,,,,
भगवान कृष्ण के हृदय में हमेशा राधा का ही वास रहा इसलिए उसके पवित्र प्रेम को आज तक याद किया जाता है,,,,,,
आज भी लोग उनके पवित्र प्रेम की पूजा करते हैं उनके पवित्र प्रेम का उदाहरण देते हैं भगवान कृष्ण और राधिका,,,,,,
चाहे इस दुनिया की नजरों में एक ना हो सके लेकिन उन दोनों का ह्रदय एक था उन दोनों का प्रेम पवित्र और पावक था राधिका,,,,,,
वैसे ही राधिका मैं भी तुमसे ही प्रेम करता हूं और तुमसे ही करता रहूंगा,,,,,,,
मेरा दिल मेरी जिंदगी यह सिर्फ तुम्हारी है राधिका और किसी की नहीं मैं कभी सपने में भी किसी और के बारे में नहीं सकता राधिका,,,,,,
मेरी जिंदगी में तुम्हारा स्थान कभी कोई नहीं ले सकता कोई नहीं अगर मैं विवाह करूंगा तो सिर्फ तुमसे ही वरना किसी से नहीं,,,,,
तुम्हें मेरी होना ही होगा राधिका मेरे अलावा तुम किसी और की नहीं हो सकती बही अगर मैं तुम्हारा नहीं हो सकता ना तो और किसी का नहीं हो सकता,,,,,,
मैंने हमेशा तुमसे प्यार किया है और करता रहूंगा तुम चाहते हुए भी मुझसे दूर नहीं जा पाओगे और ना मैं तुम्हें जाने दूंगा,,,, पूरब राधिका की आंखों में देखते हुए बोला,,,,,,
तब यह सुनकर राधिका पूरब की बात बीच में ही काटते हुए बोली बस पूरब बस अब और कुछ नहीं सुनना मुझे अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो ना तो मुझे भूल जाओ,,,,
यह कहते हुए राधिका रोते हुए वहां से अपने घर जाने के लिए चली गई पूरब उसे जाते हुए देखता रहा और धम से जमीन पर बैठ गया,,,,,,
बही जब राधिका रोते हुए अपने घर आ गई और अपनी दादी को कुछ पता ना चले इसलिए अपने आंसुओं को पोंछ कर चेहरे पर झूठी मुस्कान लाते हुए अपनी दादी को आवाज लगाई,,,,
तब उसकी दादी दुर्गा देवी उसकी आवाज सुनकर अंदर से आई और बोली अरे राधिका बिटिया कहां थी इतनी देर से,,,,,,
अरे तुम्हें तो पता है ना कि शाम के बाद कोई भी घर से बाहर नहीं निकलता अरे शाम होने को आई थी मुझे तो तुम्हारी ही चिंता सताए जा रही थी,,,,
तब राधिका बोली कुछ नहीं दादी वह बस ऐसे ही वह मेरी सहेली है ना मैंना हम दोनों खेतों पर घूमने चले गई थी मन थोड़ा उदास था इसलिए राधिका ने अपने आंसू छुपाते हुए कहा,,,,
तब उसकी दादी बोली हां बिटिया अब चलो अंदर चलो और अंदर का दरवाजा अच्छे से लगा दो और रात का भोजन भी तो बनाना है,,,,
जी दादी यह कहकर राधिका अपनी दादी के साथ अंदर आ गई राधिका और उसकी दादी ने मिलकर रात का खाना बनाया,,,,,,
फिर राधिका की दादी ने राधिका को प्यार से अपने हाथों से खाना खिलाया,,,,,,
लेकिन राधिका को बिल्कुल भी भूख नहीं थी उसे बार-बार पूरब की याद सता रही थी और उसका आंसुओं से भरा चेहरा और बार-बार अपने प्यार की भीख मांगता हुआ चेहरा नजर आ रहा था,,,,,,,
लेकिन वह करें भी तो क्या करें आखिर वह भी इतनी मजबूर जो थी,,,,,,
लेकिन फिर अपनी दादी की खुशी के लिए उसने थोड़ा बहुत खाना खाया और पानी पीकर उठ खड़ी हुई ,
तब उसकी दादी बोली क्या हुआ बिटिया आज खाना भी ठीक से नहीं खाया,,,,
तब राधिका बोली अरे दादी पेट भर गया और वैसे भी मुझे इतनी भूख नहीं है आज दिन में थोड़ा ज्यादा खा लिया था,,,,, यह कहकर राधिका पानी पीकर सीधे अपने कमरे में आ गई ,,,
यह छोरी भी हद करें है यह कहकर मुस्कुराते हुए राधिका की दादी दुर्गा देवी भी बाकी का काम निपटा कर सोने के लिए राधिका के पास कमरे में आ गई,,,,,
बही राधिका दूसरी तरफ मुंह करके चादर ओढ़ के सोई हुई थी,,,,,,
तब राधिका की दादी ने उसके सिर पर हाथ फेरा और उन के पास में लेट गई और कुछ ही देर में वह गहरी नींद में सो गई,,,,,
लेकिन राधिका जो अब तक अपनी दादी को कुछ पता ना चले इसलिए सोने का नाटक कर रही थी असल तो यह था कि उसकी आंखों में आज नींद ही नहीं थी,,,,,,
उसे बार-बार पूरब की याद सता रही थी और बह उसकी याद में चुपचाप रोए जा रही थी और सब कुछ याद करते हुए वह अपने अतीत में खो गई,,,,,