बेपनाह प्यार है (Complete) Ch. 3

बेपनाह प्यार है - Chapter 3

Posted by Mamta Meena • May 08, 2026 04:21 PM

राधिका का हंसता खेलता परिवार था उसकी दादी उसकी मां पापा और एक बुआ जो उसके पापा से 4 साल छोटी थी,,,,,,

उसके पापा कुम्हार थे वह मटकिया आदि बनाने का काम करते थे उसकी मां दादी और बुआ भी उसका सहयोग करती थी,,,,,,

जब राधिका 2 साल की थी तो 1 दिन उसकी मां के सीने में तेज दर्द हुआ,,,,,,

यह देखकर सब घबरा गए तब तक उसके पापा उसे शहर डॉक्टर के पास ले गए लेकिन बहुत देर हो चुकी थी राधिका की मां राधिका को छोड़कर भगवान को प्यारी हो गई,,,,,,

तब राधिका की मां की मौत के बाद सब लोग गहरे सदमे में आ गए थे,,,,,,

फिर भी उन लोगों ने राधिका के लिए अपने आप को संभाला राधिका कि बुआ और दादी और पापा सब उसका अच्छे से ख्याल रखते थे,,,,,,

बही राधिका की खुशी के लिए  उसे सौतेली मां का दर्द ना देखना पड़े इसलिए उसके पापा ने दूसरी शादी नहीं की,,,,,

लेकिन जब राधिका 5 साल की थी तब एक दिन अचानक उसकी बुआ कहीं चली गई,,,,,,

जब उसकी बुआ दों दिनों तक वापस नहीं लौटी तो उसकी दादी और पापा दोनों परेशान हो उठे,,,,,,

अब तो गांव के लोग भी राधिका की बुआ के बारे में तरह-तरह की बातें कर रहे थे,,,,,,

तब उस वक्त राधिका के कुछ समझ में नहीं आ रहा था लोग राधिका की बुआ के बारे में उल्टी-सीधी बातें कर रहे थे कि उसकी वह बुआ किसी के साथ घर छोड़ कर भाग गई है,,,,,

बही राधिका की बुआ के जाने के 2 दिन बाद राधिका के पापा भी कहीं चले गए राधिका और उसकी दादी काफी परेशान हो गई,,,,,,

बही मासूम राधिका भी अपने पापा और बुआ  को याद कर रो पड़ती थी,,,,,

फिर 1 दिन किसी ने राधिका की दादी को आकर बताया कि उनके खेत के पास राधिका के पापा की लाश पड़ी है,,,,,,

तब यह  सुनकर राधिका की दादी रोती चिल्लाती खेत की तरफ दौड़ गई,,,,,

उसने जाकर देखा कि उसके खेत पर जहां लोगों ने बताया था वहां पर राधिका के पापा की लाश पड़ी हुई थी उसके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान थे,,,,,,

तब राधिका अपने पापा को देख कर रो पड़ी और बोली उठिए ना बाबोसा आपको क्या हुआ,,,,,,

वही राधिका की दादी अपने बेटे और राधिका के पिता को की लाश को देखकर दहाड़े मार कर रो पड़ी और नीचे जमीन पर गिर गई तब गांव की औरतों ने उसे संभाला,,,,,,

वहीं धीरे-धीरे अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई, गांव के लोग आपस में उल्टी-सीधी बातें कर रहे थे,,,,,,

अब कोई राधिका की बुआ के ऊपर उंगली उठा रहा था कह रहा था कि अरे वह बदचलन किसी के साथ भाग गई जब यह विचारा उसे ढूंढने गया तो अपने आशिक के साथ मिलकर इसे ही मार दिया,,,,,,

तो वहीं कुछ लोग कह रहे थे हो सकता है कि किसी जंगली जानवर ने इसे मार दिया हो,,,,,,

बही कोई कह रहा था हो सकता है या किसी के साथ इसकी जातीय दुश्मनी हो इसलिए कोई इसे मार कर पटक गया हो,,,,

तब अपने पापा की लाश को देखकर राधिका और उसकी दादी का रो रो कर बुरा हाल था,,,,,,

अब राधिका के पापा की मौत सबके लिए एक पहेली बन चुकी थी उसकी मौत का कारण किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,,,,

बही अब गांव वालों की मदद से राधिका के पापा का अंतिम संस्कार कर दिया गया,,,,,,

बही राधिका की दादी पूरी तरह टूट चुकी थी राधिका की तो दुनिया जैसे उजड़ चुकी थी,,,,,,

लेकिन उसकी दादी ने राधिका के लिए अपने आप को संभाला उसने कभी भी राधिका को मां और पापा किसी की कमी महसूस नहीं होने दी,,,,,

बही अब राधिका की दादी थोड़े बहुत जो उनके पास खेत थे उनमें इस उम्र में भी अकेली अनाज पैदा करती थी और वही खाली वक्त में मटकिया और बाकी के मिट्टी के बर्तन आदि बनाने का काम करती,,,,,

वह बस राधिका को अच्छी जिंदगी देना चाहती थी उसने राधिका को कभी किसी भी चीज की कमी महसूस होने नहीं दी,,,,,,

बही राधिका की दादी के लिए तो राधिका ही उसकी दुनिया थी वही राधिका के लिए अपनी दादी ही सबकुछ थी दोनों दादी पोती ही एक दूसरे की दुनिया एक दूसरे के सुख दुख की साथी थी,,,,,,,

जब राधिका पांचवी क्लास में थी तो उसका सिलेक्शन शहर के नवोदय विद्यालय में हो गया था उसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसकी दादी ने उसे वहां पढ़ने भेज दिया,,,,,

बही शुरू से ही राधिका पढ़ने में बहुत तेज थी और वह पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी हमेशा पहला स्थान प्राप्त करती थी,,,,,

राधिका जब अपनी दादी के पास कभी गांव जाती तो वह जब भी अपनी बुआ के बारे में बात करने की कोशिश करती तो  उसकी दादी की आंखें जलजला आती और वह गुस्से में उठकर वहां से चली जाती,,,,,,

जिसकी वजह से राधिका कभी अपनी दादी से इस बारे में बात ही नहीं करती वह नहीं चाहती थी कि उस की वजह से उसकी दादी को कोई तकलीफ पहुंचे,,,,,,

बही नवोदय विद्यालय में 12वीं क्लास उत्तीर्ण करने के बाद राधिका ने उसी शहर की नामी-गिरामी कॉलेज में अपने अच्छे अंकों के आधार पर प्रवेश लिया,,,,,

उसी कॉलेज में पूरब से उसकी मुलाकात हुई क्योंकि पूरब भी उसी कॉलेज में पढ़ता था,,,,,,,

पूरब भी राधिका के गांव के ही सबसे अमीर और इज्जत दार वीरेंद्र प्रताप का छोटा भाई था,,,,,,,

बही ठाकुर विरेंद्र प्रताप उस इलाके के जाने हुए रईस आदमी थे उसका रुतबा आसपास के गांवों में था,,,,,

ठाकुर वीरेंद्र प्रताप पूरब के सौतेले भाई थे वह पूरब से लगभग 25 साल बड़े थे,,,,,,

पूरब के पिता की मृत्यु हुई थी तब वह अपनी मां के गर्भ में था बही उसे जन्म देते ही उसकी मां भी भगवान को प्यारी हो गई थी,,,,,

तब तक ठाकुर विरेंद्र प्रताप ने किसी कारणवश शादी नहीं की थी,,,,,,,

अब पूरब अपने भैया और अपनी बड़ी बहन इंद्रावती के साथ रहता था,,,,,,

बही इंद्रावती जो पूरब और वीरेंद्र दोनों से ही बड़ी थी और पूरब की सौतेली बहन थी,,,,,,

इंद्रावती अपने पति दुष्यंत के साथ पूरब और वीरेंद्र प्रताप के साथ उसी हवेली में रहती थी,,,,,

क्योंकि पूरब की मां की मृत्यु के बाद  उसने ही पूरब को संभाला था,,,,,,बही इंद्रावती के दो बेटे जय और किशन थे,,,,,,

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