पिंजर : अ केज ऑफ इविल डिजायर्स Ch. 2

पिंजर : अ केज ऑफ इविल डिजायर्स - Chapter 2

Posted by Jahnavi Sharma • May 25, 2026 09:10 AM

इस वक्त श्रीवास्तव हाउस के आंगन में रोहिताश और गरिमा की इकलौती बेटी पंछी की लाश पड़ी हुई थी। उसके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। दो महीने पहले सगाई के दिन ही पंछी अचानक से गायब हो गई थी और पुलिस को आज उसकी लाश मिली थी। इस खबर से रोहिताश और गरिमा बुरी तरह टूट गए थे; साथ ही पंछी के मंगेतर श्रव्य की भी हालत बहुत खराब थी। सारे रिश्तेदार, पड़ोसी और जिसे भी इस खबर के बारे में पता था, वह पंछी की मौत से हैरान था; इतनी कम उम्र में उसने दुनिया को छोड़ दिया था।

अंतिम संस्कार से पहले अंतिम विधि की तैयारी शुरू हो चुकी थी कि तभी भीड़ में से पंछी निकल कर आई। अपने घर के आगे इतनी भीड़ देखकर वह चौंक गई थी; वह कुछ सोचने-समझने की हालत में नहीं थी, बस कुछ भी करके उसे अपने घर जाना था। अपने सामने एक लाश और अपनी ही फोटो पर हार चढ़ा देखकर पंछी को एक झटका-सा लगा, पर अगले ही पल वह वहीं पर बेहोश होकर गिर चुकी थी।

“पंछी... पंछी... मेरी पंछी जिंदा है! देखिए, पंछी सही-सलामत है; मैंने कहा था यह लाश हमारी पंछी की नहीं है।” गरिमा रोते हुए जल्दी से पंछी की तरफ बढ़ने लगी।

श्रव्य और रोहिताश भी पंछी को संभालने के लिए आगे आए, लेकिन बाकी लोग अजीब नजरों से उसे देख रहे थे। कुछ देर पहले उन्हें पंछी के मरने का अफसोस हो रहा था, तो अब वहाँ भीड़ में फुसफुसाहट शुरू हो चुकी थी। वह फुसफुसाहट इस बात की नहीं थी कि पंछी जिंदा है, बल्कि वहाँ बात पंछी की हालत की हो रही थी। जिस हालत में पंछी वापस लौटी थी, वह उसके पिछले दो महीने की तकलीफ के बारे में गवाही दे रही थी।

उसके कपड़े अच्छी हालत में नहीं थे। उसने एक जेंट्स कुर्ता पहना हुआ था, जो कि उसके घुटनों से कुछ लंबा आ रहा था। उस कुर्ते की एक बाँह फटकर उसके कंधे से नीचे लटकी हुई थी, तो शरीर सैकड़ों जख्मों से भरा हुआ था। ठीक से उसकी आँख भी नहीं खुल पा रही थी। इतना सब कुछ बताने के लिए काफी था कि पिछले दो महीने में उसके साथ क्या हुआ होगा।

“इससे अच्छा ना आती तो सही रहता। इसके मरने का दुख सहन करना ज्यादा बेहतर होता बजाय इसकी यह हालत देखने के; समाज में कोई इज्जत नहीं रही।” भीड़ में से किसी के फुसफुसाने की आवाज आई।

“हमें तो पहले ही शक था, जब यह अपनी ही सगाई के दिन गायब हो गई थी। बेवजह श्रीवास्तव जी इतना दुख मना रहे थे। इससे अच्छा होता कि यह लाश इसी लड़की की होती।”

यह सब आवाजें रोहिताश के कानों में पड़ रही थीं और गुस्से से उनका चेहरा लाल हो गया था। उन्होंने भीड़ की तरफ देखा और तेज आवाज में कहा, “बस, बहुत हो गया तमाशा! चले जाइए यहाँ से और आगे से किसी के यहाँ दुख मनाने जाने का दिखावा मत कीजिएगा। हमारे लिए इतना काफी है कि हमारी बेटी जिंदा है।”

रोहिताश के चिल्लाने पर भीड़ धीरे-धीरे वहाँ से छँटने लगी थी। जो लोग पंछी के मरने का दुख मनाने आए थे, वह आज उसके जिंदा होने पर अफसोस मना रहे थे। कोई वहाँ नहीं बचा था जो सच में उनके इस दुख में उन्हें आश्वासन दे सके; रोहिताश और गरिमा के अलावा सिर्फ श्रव्य वहाँ पर बैठा हुआ था।

“क्या हो गया है हमारी बच्ची को? यह आँखें क्यों नहीं खोल रही है?” गरिमा ने रोते हुए रोहिताश की तरफ देखकर पूछा।

“सब ठीक है। बस एक बात याद रखो कि आज हमारी पंछी हमारे साथ है, यही हमारे लिए काफी है। तुम्हें दूसरों की बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।” रोहिताश ने गरिमा को समझाया, क्योंकि वह जानते थे कि आसपास के लोगों की बातों का गरिमा पर किस हद तक असर होता था।

श्रव्य पंछी के चेहरे की तरफ देख रहा था। उसने पानी के कुछ छींटे मारकर उसे होश में लाने की कोशिश भी की, उसे पानी भी पिलाना चाहा, पर पंछी ठीक से होश में नहीं थी।

“आई थिंक हमें पंछी को अस्पताल लेकर चलना चाहिए पापा, और साथ में पुलिस को भी कॉल करना चाहिए।” श्रव्य ने रोहिताश की तरफ देखकर कहा।

रोहिताश ने जवाब में हल्के से सिर हिला दिया था। जिस तरह सुबह पहले पुलिस की गाड़ी और एंबुलेंस आई थी, ठीक उसी तरह शाम के वक्त एंबुलेंस उनके घर के आगे खड़ी थी और वह लोग पंछी को अस्पताल लेकर जा रहे थे; पुलिस को भी बुला लिया गया था।

पंछी की मिसिंग रिपोर्ट दो महीने पहले लिखाई गई थी। इस केस को हैंडल करने वाले इंस्पेक्टर निशांत चतुर्वेदी वहाँ पर पहुँच चुके थे। पंछी का अंदर चेकअप किया जा रहा था। आते ही इंस्पेक्टर चतुर्वेदी रोहिताश के पास गया और गंभीर आवाज में बोला, “क्या पंछी ने कुछ बताया? सुबह मेरी गुप्ता से बात हुई थी और उसने कहा था कि आपने लाश की शिनाख्त पंछी के तौर पर की है। कोई तो जरूर है जो नहीं चाहता था कि पंछी वापस आपके पास पहुँचे, तभी यह डेड बॉडी का ड्रामा हुआ। पहले मुझे यह सिंपल मिसिंग केस लग रहा था, पर अब इसके पीछे काफी कुछ और नजर आ रहा है।”

“मुझे भी यही लग रहा है। मुझे समझ नहीं आ रहा आखिर कौन हो सकता है। हमारी तो किसी से दुश्मनी तक नहीं है; हम लोग हमेशा से बहुत ही सिंपल लाइफ बिताते आए हैं। ऊपर से पंछी तो पिछले कुछ सालों से मुंबई में ही रह रही थी।” रोहिताश ने हैरानी भरे लहजे में कहा; वह खुद समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर पंछी को इस हाल में पहुँचाने वाला कौन हो सकता था।

उनकी बात सुनकर निशांत ने श्रव्य की तरफ देखा। वह दोनों साथ ही पढ़ते थे और ऊपर से उन दोनों की शादी भी होने वाली थी। वैसे तो पंछी के गायब होने के बाद से ही पुलिस पंछी से जुड़े हर एक पहलू के बारे में जान चुकी थी। भले ही प्रोफेसर श्रीवास्तव एक साधारण इंसान रहे हों, लेकिन यह एक हाई-प्रोफाइल केस था; केस मीडिया की नजरों में आ गया था।

श्रव्य उनकी शकभरी निगाहों को अच्छे से समझ रहा था। जबसे पंछी गायब हुई, उसके बाद उससे भी काफी सवाल-जवाब किए गए थे।

श्रव्य ने हल्के से सिर हिलाया और कहा, “पंछी को यूनिवर्सिटी में हर कोई पसंद करता था। वह सबसे अच्छे से बात करती थी और मुझे नहीं लगता कि कोई सीनियर्स में भी उसे नापसंद करता होगा। उसकी आज तक किसी से कोई बहस नहीं हुई।”

“पंछी की जैसी हालत मुझे रिपोर्ट की गई है, उसके बाद यही लगता है कि यह किसी तरह की रिवेंज का मामला है। तुम श्योर हो कि उसका कोई दुश्मन नहीं है? या कोई वन-साइड लव्हर?” इंस्पेक्टर ने दोबारा पूछा, जिस पर श्रव्य ने ना में सिर हिला दिया था।

“फिर कौन हो सकता है जिसने पंछी को इस हाल में पहुँचाया होगा? अब तो पंछी ही इस सवाल का जवाब दे सकती है और हमें उसके होश में आने का इंतजार करना होगा।” निशांत ने चिंतित स्वर में कहा।

हर किसी को पंछी के होश में आने का इंतजार था, खासकर इंस्पेक्टर निशांत को। जैसे ही निशांत की बात खत्म हुई, वहाँ पर एक सख्त आवाज गूँजी—

“लेकिन हम आपको इंतजार करने जितना वक्त नहीं देते हैं, इंस्पेक्टर! अगर आपने इस केस के पीछे की रियल क्रिमिनल को नहीं पकड़ा, तो अपने सस्पेंशन की तैयारी कीजिए।”

वह आवाज सुनते ही निशांत तुरंत अलर्ट पोजीशन में आ गया था और उसे देखकर जल्दी से सैल्यूट किया। वह कोई और नहीं, अद्वैत सिंह ठाकुर था—ऋषिकेश का विधायक, जिसकी वजह से पंछी का केस एक हाई-प्रोफाइल केस बन गया था।

“सर, हम कोशिश कर रहे हैं।” निशांत ने धीमी आवाज में कहा।

“जब पंछी गायब हुई थी, तब हमने आपकी कोशिशें देख ली हैं। पिछले दो महीने से आप कोशिश कर रहे थे और फिर एक अननोन डेड बॉडी लाकर श्रीवास्तव हाउस में रख दी और हमें किसी ने कॉल करना भी जरूरी नहीं समझा! थैंक गॉड कि पंछी जिंदा है, वरना आज आपकी नौकरी का आखिरी दिन था; और इसी के साथ आपको एक और मौका मिलता है, इंस्पेक्टर। पंछी को किडनैप करने वाले और उसकी इस हालत के पीछे जिम्मेदार शख्स को हम जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं।” अद्वैत ने सख्त आवाज में कहा।

इंस्पेक्टर ने पलकें झपकाते हुए हाँ में सिर हिला दिया था। अद्वैत ने एक नजर रोहिताश और श्रव्य की तरफ देखा और फिर सीधे अपने कदम पंछी के कमरे की तरफ बढ़ा दिए थे। श्रीवास्तव फैमिली तक को अंदर जाने की इजाजत नहीं थी, लेकिन अद्वैत को रोकने वाला कोई नहीं था। वहाँ का मेडिकल स्टाफ तो क्या, खुद रोहिताश और श्रव्य की भी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अद्वैत को मना कर सकें।

कुछ ही मिनट में अद्वैत पंछी के सामने था। डॉक्टर उसके आते ही पंछी से थोड़ा दूर हो गए थे। वह बेहोशी की हालत में थी। उसे इस हाल में देखकर अद्वैत को झटका-सा लगा; वह कुछ कदम लड़खड़ाकर पीछे हो गया और उसकी आँखों में नमी उतर आई थी।

“हम वादा करते हैं, आपका यह हाल करने वाले को खुद हम अपने हाथों से मौत के घाट उतारेंगे, पंछी।” अद्वैत ने दाँत भींचते हुए मन ही मन कहा; उसके चेहरे के भाव बेहद सर्द हो गए थे।

सिर्फ अद्वैत ही वहाँ नहीं पहुँचा था, उसके पीछे-पीछे मीडिया भी उस कमरे के आगे खड़ी थी और इस वक्त पंछी जिस हालत में वहाँ पहुँची थी, उसकी खबर सब तक पहुँच गई थी।

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थैंक्स कि आपने पहले पार्ट पर इतना अच्छा रिस्पांस दिया। उम्मीद है कि इस भाग पर भी आप उतने ही एक्टिव रहेंगे और पढ़कर समीक्षा करेंगे।

आखिर क्यों अद्वैत सिंह ठाकुर पंछी की मदद कर रहा है? क्या मामला उतना ही सिंपल है, जितना दिखाई दे रहा है या इसके पीछे छुपी है कोई बड़ी कहानी.. जानने के लिए पढ़ते रहिए।

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