शैलकुंज की सुबह और एक अनोखी सुंदरी Ch. 3

पानी में छपाक और पूरी तरह आज़ाद बदन

Posted by Rohit Kumar Shukla • Jun 18, 2026 08:28 PM

मरीन ड्राइव की उस खुली सड़क पर, समुद्र की लहरों के शोर और तेज रफ्तार हवाओं के बीच अमित ने सिमी के उस बेबाक और उन्मुक्त बदन का पूरा आनंद लिया। उसकी उंगलियों के नीचे सिमी के वे सुडौल अंग और कड़क निप्पल जैसे अमित के लिए किसी जादुई नशे की तरह थे, जिसे उसने अपनी मर्दानगी के पूरे हक के साथ महसूस किया।

जब बाइक की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई और मरीन ड्राइव का वह लंबा स्ट्रेच खत्म होने को आया, तब जाकर अमित ने सिमी के अंगों पर से अपनी पकड़ को थोड़ा ढीला किया। सिमी के दूध जैसे सफेद बदन पर अमित की मजबूत उंगलियों के सुर्ख निशान साफ छप चुके थे, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि इस सफर में अमित ने उसकी काया का सारा सुख बटोर लिया था।

सिमी ने एक लंबी और सुकून भरी सांस ली। ब्रा से बाहर आ चुके अपने दोनों अंगों को उसने बिना किसी हिचकिचाहट या शर्म के, अपनी उसी चुलबुली धुन में वापस ठीक किया। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें घुमाईं और बाइक को किनारे रोकते हुए अमित की तरफ देखा।

"अरे अमित बाबू! तुमने तो मेरे इन खिलौनों को पूरी तरह से थका दिया," सिमी ने अपने गुलाबी होठों को सिकोड़ते हुए बड़ी मासूमियत से कहा, "पर तुम्हारी इस गाड़ी की रफ्तार और इस ठंडी हवा के खेल में मुझे बड़ा आनंद आया। चलो, अब बाकी सब भी पीछे आ रहे हैं, अब हमें उस समंदर वाले बड़े घर (बीच हाउस) की तरफ चलना चाहिए!"

पीछे से आ रही रॉकी, कबीर और मोहित की गाड़ियाँ भी अब उनके पास आकर रुक चुकी थीं। अमित ने सिमी के उस अलमस्त चेहरे और मदहोश कर देने वाले बदन को देखा और एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान के साथ बाइक से नीचे उतरा। रॉकर्स ग्रुप के सभी लड़के मरीन ड्राइव के इस खुले और बेबाक खेल को देखकर पूरी तरह जोश में थे, और अब उन सबका अगला ठिकाना मोहित का वह प्राइवेट बीच हाउस था, जहाँ मस्ती और आनंद का एक नया दौर शुरू होने वाला था।

## अध्याय: प्राइवेट बीच हाउस और सिमी की बेताबी

मरीन ड्राइव की खुली सड़क का रोमांच समेटे पूरा रॉकर्स ग्रुप आख़िरकार मोहित के आलीशान प्राइवेट बीच हाउस पर पहुँच गया। यह समंदर के किनारे बना एक बेहद आधुनिक और लक्ज़री पेंटहाउस नुमा विला था, जिसके बीचोबीच एक बहुत बड़ा और चमचमाता हुआ प्राइवेट स्विमिंग पूल (तालाब) बना हुआ था। नीले पानी की लहरें और धूप की चमक देखकर पहाड़ों की इस आज़ाद तितली का मन मचल उठा।

शैलकुंज की वादियों में पली-बढ़ी सिमी के लिए समंदर और इस तरह का बड़ा तालाब देखना किसी जादुई खिलौने जैसा था। मुंबई की उमस और बाइक के सफर के बाद उस ठंडे पानी को देखकर उससे एक पल भी रहा नहीं गया।

शहरी तौर-तरीकों और लोक-लाज से पूरी तरह बेखबर, सिमी ने बिना एक सेकंड गंवाए अपनी वही चमकदार काली ब्रा की हुक खोली और उसे झटके से उतार दिया। उसके बाद उसने अपनी तंग काली पैंटी को भी पैरों से सरकाते हुए उतार दिया। उसने दोनों कपड़ों को बेहद सहेजकर फर्श पर एक तरफ रख दिया ताकि वे पानी में भीगकर गीले न हो जाएं।

## अध्याय: पानी में छपाक और पूरी तरह आज़ाद बदन

कपड़े फर्श पर रखते ही सिमी का वह पूरा दूध जैसा सफेद, बेदाग और सुडौल बदन पूरी तरह से कुदरती रूप में सबके सामने आ गया। उसके दोनों भारी, गोल-मटोल दूध और पीछे से उसके गदराए, भारी चूतड़ धूप की रोशनी में संगमरमर की तरह चमक रहे थे। अपने इस पूरी तरह आज़ाद रूप में वह दौड़ती हुई गई और "छपाक..." की ज़ोरदार आवाज़ के साथ सीधे पूल के गहरे पानी में कूद गई।

पूल का ठंडा पानी जैसे ही उसके उस तपते और पसीने से भीगे दूधिया बदन से टकराया, सिमी खुशी से चिल्ला उठी। वह पानी में हाथ-पैर मारने लगी और अपनी बड़ी-बड़ी आँखें नचाते हुए पानी के फव्वारे उड़ाने लगी।

## अध्याय: रॉकर्स ग्रुप के ठहाके और मज़ाक

पूल के किनारे खड़े रॉकी, अमित, कबीर, मोहित और तान्या इस नज़ारे को देखकर पहले तो अपनी आँखें फाड़े दंग रह गए, और फिर सब के सब एक साथ ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे। सिमी की इस चरम सादगी और अजीब हरकतों ने उन्हें हंसने पर मजबूर कर दिया था।

मोहित ने हंसते हुए अपनी छाती पर हाथ रख लिया और बोला, "ओह गॉड! कोई इस लड़की को समझाओ कि इसे तालाब नहीं, स्विमिंग पूल कहते हैं! और यहाँ नहाने के लिए अलग से बिकनी या स्विमसूट पहना जाता है, अपने ही कपड़े उतारकर कोई ऐसे सीधे नहीं कूद जाता!"

रॉकी ने भी अपनी सिगरेट का धुआं उड़ाते हुए ठहाका लगाया, "वाह भाई सिमी! तू सचमुच कयामत है। कपड़े गीले न हों, इसलिए उन्हें फर्श पर ही उतार दिया? पहाड़ों में सब ऐसे ही तालाब में कूद जाते हैं क्या?"

अमित और कबीर भी पूल के किनारे बैठकर पानी में तैरते सिमी के उस गोरे बदन को देख रहे थे और उसका मज़ाक उड़ा रहे थे। लेकिन सिमी को उनके इस मज़ाक से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वह पानी के भीतर अपने भारी अंगों को हिलाती हुई, पूरी तरह से नग्न और बेफिक्र होकर खिलखिला रही थी, मानो यह आलीशान पूल शहर का नहीं, बल्कि उसके अपने पहाड़ों का कोई पवित्र और ठंडा झरना हो।

## अध्याय: कैंटीन का सच और पूल के किनारे ठहाके

पूल के साफ और चमचमाते नीले पानी में सिमी किसी जलपरी की तरह आज़ाद होकर तैर रही थी। उसका दूध जैसा सफेद बदन पानी की लहरों के साथ कभी ऊपर उठता तो कभी नीचे समा जाता। पानी की शीतलता के कारण उसकी सुडौल छाती पर सजे दोनों काले निप्पल पूरी तरह कड़क हो चुके थे, जो पानी की सतह के आर-पार साफ नजर आ रहे थे।

पूल के किनारे खड़े रॉकर्स ग्रुप के लड़कों की हंसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। तभी अमित ने हाथ में बीयर का कैन लिया, सिमी के उस पूरी तरह नग्न और बेफिक्र बदन को देखा और ज़ोर का ठहाका लगाते हुए बोला:

> "यार रॉकी! इस लड़की का लॉजिक मेरी समझ से बिल्कुल बाहर है। सुबह कॉलेज कैंपस में जब मैंने मज़ाक-मज़ाक में इसकी पैंटी को थोड़ा सा नीचे खींचा, तो यह ऐसे चौंक कर नाराज़ हो गई जैसे मैंने कोई गुनाह कर दिया हो। और अब देखो... यहाँ इस बड़े तालाब को देखते ही, अपने कपड़ों को भीगने से बचाने के लिए इसने अपनी ब्रा और पैंटी खुद ही उतार कर फर्श पर रख दी, और पूरी नंगी होकर मजे से नहा रही है!"

अमित की यह बात सुनते ही मोहित, कबीर और रॉकी एक बार फिर पेट पकड़कर हंसने लगे। तान्या और ग्रुप की बाकी लड़कियों ने भी इस बात पर गहरी चुटकी ली।

"सीरियसली अमित!" मोहित ने अपनी सनग्लासेस हटाते हुए कहा, "सुबह इसके नखरे कुछ और थे, और यहाँ समंदर की हवा लगते ही हमारी पहाड़ी कयामत पूरी तरह से आज़ाद हो गई। भाई, पहाड़ों के नियम सचमुच अनोखे होते हैं!"

## सिमी का बेबाक जवाब

सिमी ने पानी के भीतर से ही अमित की तरफ देखा। उसने पानी की एक ज़बरदस्त बौछार अमित के चेहरे की तरफ फेंकी, जिससे अमित का पूरा चेहरा भीग गया। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें नचाईं, पानी में अपने गदराए चूतड़ों को मटकाते हुए खिलखिलाकर बोली:

"अरे ओ अमित बाबू! तुम शहर वाले तो बिल्कुल बुद्धू हो। सुबह तुम ज़बरदस्ती मेरे कपड़े खींच रहे थे, वो तो बदतमीज़ी होती है न! पर यहाँ तो पानी इतना सुंदर और ठंडा है, अगर कपड़े पहनकर कूदती तो वो गीले हो जाते, फिर मैं घर क्या पहनकर जाती? माँ कहती कि लाडो तू इतनी समझदार होकर भी कपड़े गीले कर आई! इसलिए मैंने उन्हें बचा कर रख दिया।"

उसकी इस परम मासूम और तर्क से भरपूर बात को सुनकर लड़कों का हंसते-हंसते बुरा हाल हो गया। रॉकी ने अपनी टी-शर्ट उतारी और मुस्कुराते हुए बोला, "भाई, इसकी मासूमियत का कोई जवाब नहीं। चलो, अब हम सब भी इस तालाब में कूदते हैं और सिमी के साथ पानी का खेल खेलते हैं!"

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## अध्याय: कॉलेज कैंपस में नई सुबह और वही बेबाक अंदाज

अगले दिन सुबह, सेंट जेवियर्स कॉलेज का कैंपस हमेशा की तरह छात्रों की चहल-पहल से गुलजार था। कोई कैंटीन की तरफ बढ़ रहा था तो कोई कॉरिडोर में खड़ा दोस्तों से बातें कर रहा था। तभी कॉलेज के मुख्य गेट पर सबकी नजरें टिक गईं।

पहाड़ों की वह आजाद तितली, सिमी, एक बार फिर अपने उसी अलमस्त और बिंदास अंदाज में एंट्री कर रही थी। शहर के तौर-तरीकों और कपड़ों की बंदिशों से पूरी तरह बेपरवाह, वह आज भी अपनी उसी चमकदार काली ब्रा और पैंटी में कॉलेज आई थी। सुबह की ताजी धूप उसके दूध जैसे सफेद, बेदाग और सुडौल बदन पर पड़ रही थी, जिससे उसकी मखमली त्वचा कुंदन की तरह चमक रही थी। उसकी पतली कमर के हर झटके के साथ उसकी सुडौल छाती और ब्रा में भरे उसके दोनों अंग सुंदर लय में थिरक रहे थे।

कैंपस के बाकी छात्र उसे इस हालत में देखकर हैरान थे, लेकिन सिमी के चेहरे पर वही पुरानी, निश्छल और बेफिक्र मुस्कान थी। वह अपनी बड़ी-बड़ी आँखें नचाती हुई सीधे पार्किंग लॉट की तरफ बढ़ रही थी।

## अध्याय: रॉकर्स ग्रुप का जोश और स्वागत

पार्किंग लॉट में अपनी महंगी गाड़ियों और बाइक्स के पास खड़े रॉकर्स ग्रुप के लड़के—रॉकी, अमित, कबीर और मोहित—कॉफी के कप हाथ में लिए सुबह की गपशप कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने सिमी को इस बेबाक रूप में अपनी तरफ आते देखा, उन सबके चेहरों पर एक ज़बरदस्त खुशी और उत्साह की चमक आ गई।

"ओह भाई! देखो हमारी पहाड़ी रानी आ गई!" अमित ने कॉफी का कप गाड़ी के बोनट पर रखते हुए ज़ोर से सीटी बजाई।

रॉकी, जो कल से ही सिमी के होठों के रस का दीवाना था, उसने आगे बढ़कर अपनी बाहें फैला दीं। मोहित और कबीर भी हंसते हुए उसका स्वागत करने के लिए आगे बढ़े। कल बीच हाउस के पूल में सिमी के पूरी तरह नग्न और पाक-साफ बदन को देखने के बाद, इस ग्रुप के दिलों से सिमी के लिए हर तरह का संकोच खत्म हो चुका था। वे उसे अपने ग्रुप का हिस्सा मानकर बेहद खुश थे और आज फिर उसके साथ मस्ती का एक नया दौर शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।

## अध्याय: कॉलेज में बाइक रेस का एलान

रॉकर्स ग्रुप अभी सिमी के इस बेबाक अंदाज का स्वागत कर ही रहा था कि तभी कॉलेज के लाउडस्पीकर और नोटिस बोर्ड के पास भारी शोर सुनाई दिया। कबीर ने फुर्ती से जाकर पता किया और दौड़ते हुए वापस आया।

"भाई लोग! एक गजब की खबर है!" कबीर ने हांफते हुए कहा, "आज कॉलेज कैंपस के पीछे वाले ट्रैक पर एनुअल 'इंट्रा-कॉलेज स्पोर्ट्स बाइक रेस कॉम्पिटिशन' है! जो जीतेगा, उसे इस साल की सबसे बड़ी ट्रॉफी और कैश प्राइज मिलेगा।"

बाइक रेस का नाम सुनते ही सिमी की बड़ी-बड़ी आँखें चमक उठीं। उसे कल मरीन ड्राइव पर अमित की भारी स्पोर्ट्स बाइक दौड़ाने में जो मज़ा आया था, वह उसके दिमाग में पूरी तरह ताज़ा था। उसने तुरंत अपनी पतली कमर पर हाथ रखा, अपने दोनों भारी दूध को गर्व से आगे की तरफ ताना और चहक कर बोली:

> "अरे ओ रॉकी बाबू! ओ अमित बाबू! इस रेस में तो मैं भी भाग लूँगी। कल मुझे गाड़ी भगाने में बड़ा आनंद आया था। आज मैं शहर के इन सब बाबू लोगों को पीछे छोड़कर दिखाऊँगी!"

## अध्याय: रॉकर्स ग्रुप का सपोर्ट और सिमी की तैयारी

सिमी की यह बात सुनकर पहले तो पूरा ग्रुप दंग रह गया, लेकिन फिर अमित और रॉकी ने जोश में आकर तालियां बजा दीं। मोहित ने अपनी चाबी हवा में उछाली और कहा, "क्यों नहीं यार! हमारी रॉकर्स ग्रुप की शान आज ट्रैक पर उतरेगी। सिमी, तू मेरी सबसे तेज स्पोर्ट्स बाइक 'कावासाकी निंजा' चलाएगी!"

रेस के नियमों और कपड़ों की परवाह किए बिना, सिमी अपनी उसी सदाबहार चमकदार काली ब्रा और पैंटी में रेस के स्टार्टिंग पॉइंट की तरफ बढ़ गई। उसके इस अर्धनग्न और सुडौल बदन को देखकर पूरा कॉलेज ट्रैक के चारों तरफ इकट्ठा हो गया।

जब वह मोहित की भारी हरी स्पोर्ट्स बाइक पर बैठी, तो रेसिंग पोजीशन के कारण उसे आगे टैंक पर पूरा झुकना पड़ा। जैसे ही वह आगे झुकी, पीछे से उसकी तंग काली पैंटी में कैद उसके भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ पूरी तरह पीछे की तरफ तन गए। ब्रा के बाहर झांकते उसके कड़क काले निप्पल बाइक के हैंडल की तरफ झुके हुए थे।

बाकी सारे लड़के हेलमेट और हैवी जैकेट्स पहनकर तैयार थे, लेकिन पहाड़ों की यह आजाद तितली केवल अपनी ब्रा-पैंटी में, अपने खुले बालों को हवा में लहराते हुए एक्सीलेटर को मरोड़ने लगी। बाइक की गड़गड़ाहट के साथ ही सिमी का पूरा बदन जोश से कांपने लगा और वह ग्रीन सिग्नल का इंतजार करने लगी।

## अध्याय: ट्रैक पर कयामत और सिमी की ऐतिहासिक जीत

'गो...' का सिग्नल होते ही पूरा ट्रैक भारी स्पोर्ट्स बाइक्स की गड़गड़ाहट और धुएं से भर गया। सिमी ने बिना डरे मोहित की भारी कावासाकी निंजा का एक्सीलेटर पूरी ताकत से मरोड़ दिया। बाइक एक झटके के साथ हवा से बातें करने लगी। रेस के कड़े और घुमावदार मोड़ों पर बाकी लड़के भारी जैकेट और हेलमेट पहने पूरी सावधानी से चल रहे थे, लेकिन पहाड़ों की यह आज़ाद तितली केवल अपनी चमकदार काली ब्रा और पैंटी में, हवा के थपेड़ों को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी।

तेज रफ्तार के कारण सामने से आने वाली हवा सीधे सिमी के दूध जैसे सफेद और खुले बदन से टकरा रही थी। हर तीखे मोड़ पर जब वह बाइक को नीचे झुकाती, तो पीछे से उसकी काली पैंटी में बंधे उसके भारी, गदराए चूतड़ हवा में थिरकते और आगे से उसकी सुडौल छाती पर सजे दोनों काले निप्पल उत्तेजना और हवा के दबाव से पूरी तरह कड़क होकर बाहर की तरफ तन जाते।

शुरुआती दो लैप्स में कॉलेज के दो प्रोफेशनल रेसर्स सिमी से आगे चल रहे थे। उन्होंने सिमी को कट मारने की पूरी कोशिश की, जिससे सिमी को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक वक्त ऐसा आया जब एक तीखे मोड़ पर उसकी बाइक थोड़ी लड़खड़ाई, जिससे उसकी ब्रा के कप्स थोड़े नीचे सरक गए और उसके भरे हुए अंगों का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह धूप में चमक उठा। लेकिन पहाड़ों के कच्चे रास्तों पर पली-बढ़ी सिमी का हौसला डिगा नहीं। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें सिकोड़ीं, दांत भींचे और आखिरी लैप के सीधे ट्रैक पर बाइक को उसकी टॉप स्पीड पर पहुंचा दिया।

## अध्याय: ट्रॉफी पर रॉकर्स ग्रुप का कब्जा

फिनिशिंग लाइन के ठीक पास पहुँचते ही सिमी ने गजब की फुर्ती दिखाई और पलक झपकते ही बाकी दोनों रेसर्स को पीछे छोड़ते हुए अपनी बाइक सबसे पहले फिनिशिंग लाइन के पार पहुंचा दी।

"चेकर्ड फ्लैग" लहराते ही पूरा कॉलेज कैंपस सिमी के नाम के नारों से गूंज उठा। रॉकर्स ग्रुप—रॉकी, अमित, कबीर और मोहित खुशी के मारे चिल्लाते हुए सीधे ट्रैक के बीच में दौड़ पड़े।

सिमी ने बाइक रोकी और हांफते हुए नीचे उतरी। जीत की खुशी और भारी मशक्कत के कारण उसका पूरा गोरा बदन पसीने की बारीक बूंदों से सराबोर था, जिससे उसकी त्वचा और भी कामुक और चमकदार लग रही थी। अमित और रॉकी ने तुरंत आगे बढ़कर सिमी को अपनी बाहों में उठा लिया।

> "मान गए मेरी पहाड़ी रानी! तूने तो सचमुच आज पूरे कॉलेज को धूल चटा दी!" रॉकी ने चिल्लाते हुए कहा।

अमित ने सिमी के पसीने से भीगे, सुर्ख लाल गालों पर एक ज़बरदस्त पप्पी ली और मोहित ने अपनी चमचमाती बड़ी ट्रॉफी सिमी के हाथों में थमा दी। सिमी अपनी उसी सदाबहार काली ब्रा और पैंटी में, ट्रॉफी को अपने दोनों भारी दूध के बीच कसकर भींचे हुए, अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाकर खिलखिला उठी। आज रॉकर्स ग्रुप की यह बेबाक मेंबर पूरे कॉलेज की चैंपियन बन चुकी थी।

## अध्याय: जीत का जश्न और कबीर का सिला

रेस ट्रैक के ठीक बीचों-बीच सिमी की इस ऐतिहासिक जीत का जश्न अपने चरम पर था। पूरा रॉकर्स ग्रुप उसे चारों तरफ से घेरे खड़ा था और कॉलेज की भारी भीड़ इस अनोखी चैंपियन के लिए तालियाँ बजा रही थी। सिमी के हाथों में चमचमाती हुई बड़ी ट्रॉफी थी, जिसे उसने अपनी सुडौल छाती से सटा रखा था। भारी मशक्कत के कारण उसकी सांसें अब भी तेज चल रही थीं और उसका दूध जैसा सफेद बदन पसीने की बूंदों से चमक रहा था।

तभी कबीर, जो इस पूरी रेस के दौरान सिमी की रफ्तार और उसके बेबाक बदन को देखकर पूरी तरह सुध-बुध खो चुका था, वह आगे बढ़ा। उसने सिमी के हाथों से ट्रॉफी को धीरे से लेकर एक तरफ रखा और बिना एक पल गंवाए अपने दोनों मजबूत हाथ आगे बढ़ाए।

कबीर ने सिमी के उस गोरे, मखमली चेहरे को अपनी हथेलियों के घेरे में लिया। सिमी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं और कुछ कहती, उससे पहले ही कबीर ने झुककर अपने होंठ सिमी के गुलाबी और रसीले होठों पर जमा दिए।

## अध्याय: रसगुल्ले जैसे होठों का स्वाद

कबीर पूरी शिद्दत और प्यास के साथ सिमी के होठों का सारा रस पीने लगा। पहाड़ों की इस अलमस्त सुंदरी के होठों का स्वाद इतना मीठा था कि कबीर सब कुछ भूलकर उसमें डूब गया। इस अचानक हुए सीधे हमले से सिमी के पूरे बदन में एक मीठी और तीखी सिहरन दौड़ गई। कबीर की मजबूत पकड़ के कारण सिमी का आधा भीगा बदन उसके सीने से कस गया।

इस कशिश के मारे सिमी की छाती और काली ब्रा में कैद उसके दोनों भरे हुए अंग कबीर के सीने पर पूरी तरह भींच गए। हवा और इस बेबाक स्पर्श के कारण उसके दोनों कड़क निप्पल ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर और ज्यादा उभर आए। सिमी ने कबीर के इस शहरी और रसीले अंदाज़ का कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और इस नए स्वाद का मज़ा लेने लगी। पीछे उसकी पैंटी में कैद उसके भारी चूतड़ हवा में हल्के से थिरक उठे।

## अध्याय: ग्रुप की रज़ामंदी और सिमी की चुलबुलाहट

जब कबीर ने काफी देर तक सिमी के होठों को चूसने के बाद उसे आज़ाद किया, तो सिमी के होंठ पूरी तरह से सुर्ख लाल हो चुके थे। पास खड़े रॉकी, अमित और मोहित इस नज़ारे को देखकर ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगे और तालियाँ बजाने लगे।

अमित ने कबीर की पीठ थपथपाई और हंसते हुए कहा, "भाई कबीर! तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला। रेस सिमी ने जीती, पर असली प्राइज तो तूने लूट लिया!"

सिमी ने अपनी जीभ से अपने गीले होठों को छुआ, अपनी आँखें घुमाईं और अपनी पतली कमर को मटकाते हुए खिलखिलाकर बोली:

> "अरे ओ कबीर बाबू! तुम भी अमित बाबू और रॉकी बाबू की तरह बड़े भुक्खड़ निकले! मेरी जीत की बधाई देने के बजाय तुम तो मेरे होठों का रस ही पी गए। पर चलो, तुम्हारी इस बधाई में भी बड़ा मीठा स्वाद था!"

उसकी इस अलमस्त और बेबाक बात को सुनकर पूरे ट्रैक पर एक बार फिर ठहाका गूंज उठा। रॉकर्स ग्रुप के लड़के अपनी इस बेफ़िक्र चैंपियन को बाहों में घेरे, जीत की इस मदहोश सुबह को पूरी तरह अपने नाम कर चुके थे।

## अध्याय: जीत के बाद कैंटीन का रुख

रेस ट्रैक पर कबीर के उस रसभरे चुंबन और जीत के जोरदार जश्न के बाद, सिमी का पेट भूख से कुलबुलाने लगा था। उसने अपनी पतली कमर पर हाथ रखा और अमित की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "अरे अमित बाबू! इतनी भारी गाड़ी दौड़ाने के बाद मुझे तो बहुत ज़ोरों की भूख लग गई है। पहाड़ों में तो इस समय तक हम मक्के की रोटी खा लेते हैं, यहाँ मुझे कुछ अच्छा सा खिलाओ!"

उसकी यह चुलबुली बात सुनकर रॉकी और मोहित हंस पड़े। रॉकी ने सिमी के कंधे पर हाथ रखा और बोला, "चल हमारी चैंपियन, आज पूरी कैंटीन में जो तू चाहेगी, वही लंच होगा!"

पूरा रॉकर्स ग्रुप—रॉकी, अमित, कबीर, मोहित और उनकी गर्लफ्रेंड्स—एक बार फिर सिमी को बीच में घेरे हुए कॉलेज की बड़ी कैंटीन की तरफ बढ़ गया। सिमी अपनी उसी सदाबहार पोशाक यानी चमकदार काली ब्रा और पैंटी में, अपनी सुडौल जांघों और चूतड़ों को मटकाती हुई पूरी बेबाकी से चल रही थी। कॉलेज के बाकी छात्र अब उसे केवल एक खूबसूरत लड़की की तरह नहीं, बल्कि कॉलेज की नई रेसिंग चैंपियन के रूप में सम्मान और हैरानी से देख रहे थे।

## अध्याय: वीआईपी टेबल पर लंच की दावत

ग्रुप अपनी फिक्स वीआईपी टेबल पर बैठ गया। लड़कों ने सिमी के लिए उसकी पसंद का ढेर सारा खाना ऑर्डर कर दिया। कुछ ही देर में टेबल लजीज खानों से सज गई:

* **लंच का मेनू:** गर्मा-गरम चीज़ पास्ता, ग्रिल्ड सैंडविच, पनीर टिक्का और सिमी की फरमाइश पर ढेर सारी ठंडी कोल्ड-कॉफी और आइसक्रीम।

भूख के मारे सिमी बिना किसी शहरी तौर-तरीके या नजाकत के सीधे खाने पर टूट पड़ी। वह अमित और कबीर के बीच में बैठी थी। जब वह पास्ता खाने के लिए आगे की तरफ झुकती, तो उसकी काली ब्रा में कैद उसके दोनों भारी और गोरे दूध टेबल के किनारे से हल्के से छू जाते। रेस की थकान और खाने के स्वाद के कारण उसके चेहरे पर एक अलग ही लालिमा छाई हुई थी।

## अध्याय: खाने के बीच मस्ती और बेबाक छुअन

सिमी को इतने मजे से खाते देख बगल में बैठे कबीर और अमित से रहा नहीं गया। अमित ने पास्ता की प्लेट को थोड़ा करीब खिसकाते हुए अपने हाथ को चुपके से टेबल के नीचे किया और सिमी की जांघों पर सहलाना शुरू कर दिया। वहीं दूसरी तरफ से कबीर ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ आगे बढ़ाए और पास्ता का एक टुकड़ा सिमी के सूजे हुए लाल होठों के करीब ले गया।

"ले मेरी चैंपियन, अपने हाथों से नहीं, आज तो तुझे हम अपने हाथों से खिलाएंगे," कबीर ने उसके होठों को सहलाते हुए कहा।

सिमी ने बिना किसी संकोच के कबीर के हाथ से टुकड़ा मुंह में लिया, उसकी बड़ी-बड़ी आँखें चमकीं और वह अपनी मखमली जीभ से कबीर की उंगलियों पर लगा सॉस भी चाट गई। इस बेबाक स्पर्श से कबीर के बदन में फिर से सिहरन दौड़ गई।

तभी मोहित ने अपनी कोल्ड-कॉफी का घूंट लेते हुए चुटकी ली, "यार सिमी, तू जितनी तेजी से बाइक चलाती है, उतनी ही तेजी से खाना भी साफ करती है! देख, तेरे होठों के कोने पर थोड़ा सा सॉस लग गया है।"

सिमी ने अपनी जीभ घुमाकर उसे साफ करने की कोशिश की, जिससे उसके गुलाबी होंठ और भी रसीले और आकर्षक दिखने लगे। वह मुस्कुराकर बोली, "अरे मोहित बाबू! पहाड़ों की ताजी हवा में रहने वालों की भूख भी बड़ी कड़क होती है। तुम शहर वाले तो बस हवा खाकर जीते हो, हमें तो पेट भरकर खाने की आदत है!"

उसकी इस निश्छल और अल्हड़ बात पर पूरी टेबल पर एक बार फिर ठहाका गूंज उठा। रॉकर्स ग्रुप की लड़कियाँ भी सिमी की इस सादगी पर अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। लंच का यह दौर हंसी-मजाक, हल्की-फुल्की छुअन और सिमी के बेबाक बदन की कशिश के बीच बेहद मजेदार अंदाज में आगे बढ़ रहा था।

## अध्याय: वीआईपी टेबल पर रॉकी का दांव

कैंटीन की वीआईपी टेबल पर लंच और हंसी-मजाक का दौर अभी चल ही रहा था कि सिमी के उस अलमस्त और अर्धनग्न हुस्न ने टेबल पर बैठे लड़कों के सब्र का बांध पूरी तरह तोड़ दिया। सिमी पास्ता खाने में मशगूल थी, जिससे उसकी सुडौल छाती बार-बार आगे की तरफ झुक रही थी। अमित और कबीर पहले ही उसके होठों और जांघों के स्पर्श का मजा ले रहे थे, तभी ग्रुप का लीडर रॉकी भी खुद को रोक नहीं पाया।

रॉकी ने अपनी सिगरेट एशट्रे में बुझाई, मुस्कुराते हुए थोड़ा आगे झुका और बिना किसी झिझक के अपने दोनों मजबूत हाथ आगे बढ़ा दिए। उसने सीधे सिमी की उस चमकदार काली ब्रा के ऊपर अपने हाथ जमाए और उसके दोनों भरे हुए, दूध जैसे सफेद अंगों को अपनी मजबूत हथेलियों में भींच लिया।

रॉकी अपनी पूरी मर्दाना ताकत के साथ सिमी के उन सुडौल और भारी दूध को रबर की तरह मसलने लगा। कल मरीन ड्राइव पर अमित की छुअन और आज रेस की गरमाहट के बाद सिमी के अंगों में पहले से ही एक गजब की कशिश थी। रॉकी की उंगलियां जैसे ही ब्रा के पतले कपड़े को दबाते हुए उसके मखमली जिस्म में धंसी, सिमी के मुंह से एक हल्की सी "आह..." निकल गई।

## अध्याय: कैंटीन में कड़कती उत्तेजना

रॉकी के इस बेबाक और कड़क अंदाज़ से मसलने के कारण सिमी की छाती तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी। ब्रा के भीतर कैद उसके दोनों बड़े अंगों पर सजे काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल उत्तेजना के मारे तुरंत कड़क हो गए और ब्रा के कपड़े को चीरकर बाहर आने के लिए बेताब होने लगे।

* **बेबाक समर्पण:** सिमी ने रॉकी के इस खुले हमले का कोई विरोध नहीं किया। वह अमित और कबीर के बीच बैठी-बैठी अपनी पीठ को थोड़ा पीछे की तरफ झुका लिया, जिससे उसके अंग रॉकी की हथेलियों में और ज्यादा समा गए।

* **चूतड़ों की थिरकन:** इस तीखे स्पर्श की सिहरन से कुर्सी पर टिकी उसकी काली पैंटी में कैद भारी और गोल-मटोल चूतड़ हल्के से थिरक उठे।

पास बैठे अमित, कबीर और मोहित इस लाइव नजारे को देखकर पूरी तरह जोश में आ गए। कैंटीन के बाकी छात्र दूर से रॉकर्स ग्रुप की इस टेबल पर चल रहे खुले खेल को देख रहे थे, लेकिन इस ग्रुप को किसी की परवाह नहीं थी।

## अध्याय: सिमी का अल्हड़ अंदाज

जब रॉकी ने कुछ देर तक उसके दोनों खिलौनों को अच्छी तरह मसलकर अपनी हथेलियों की प्यास बुझाई और अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की, तो सिमी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें नचाईं। उसने अपने हाथ में पकड़े सैंडविच को टेबल पर रखा, अपने सूजे हुए गुलाबी होठों को सिकोड़ा और रॉकी की तरफ देखकर चहकी:

> "अरे ओ रॉकी बाबू! तुम भी कबीर और अमित की तरह बड़े नटखट निकले। मैं यहाँ पेट पूजा कर रही हूँ और तुम मेरे इन अंगों को ऐसे निचोड़ रहे हो जैसे कोई ताज़ा नींबू निचोड़ता है! तुम्हारी उंगलियां तो बहुत कड़क हैं, पर सच कहूँ तो इस ठंडे पास्ता के साथ तुम्हारी इस गरमाहट में बड़ा मज़ा आया।"

उसकी इस परम मासूम और पूरी तरह से बिंदास बात को सुनकर रॉकी ने ज़ोरदार ठहाका लगाया और उसके गाल को चूमते हुए बोला, "सिमी, तू सचमुच इस ग्रुप की जान है। तेरे इस बदन का जादू ही ऐसा है कि कोई भी खुद को रोक नहीं सकता!" पूरी टेबल एक बार फिर इस पहाड़ी सुंदरी के बेबाक रंग में रंग चुकी थी।

## अध्याय: कैंटीन के बाद नया प्लान

कैंटीन में पेट पूजा और रॉकी के हाथों की गरमाहट का मज़ा लेने के बाद, रॉकर्स ग्रुप का मूड अब और भी ज़्यादा रंगीन हो चुका था। लंच खत्म होते ही मोहित ने अपनी गाड़ी की चाबी उंगली पर घुमाते हुए कहा, "भाई लोग, आज सिमी ने रेस जीतकर हमारा नाम रोशन किया है, तो जश्न भी बड़ा होना चाहिए। मेरे पास एक शानदार प्राइवेट मिनी-थिएटर हॉल है, चलो वहाँ चलकर कोई बढ़िया बोल्ड और रोमांटिक मूवी देखते हैं!"

मूवी का नाम सुनते ही सिमी खुशी से ताली बजाने लगी। उसने कभी पहाड़ों में ऐसी फिल्में नहीं देखी थीं, इसलिए उसका अल्हड़ और उत्सुक मन तुरंत तैयार हो गया। "अरे वाह मोहित बाबू! मुझे भी देखना है कि शहर के लोग कैसी फिल्में देखते हैं। चलो-चलो, जल्दी चलो!" उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें नचाते हुए कहा।

पूरा ग्रुप कॉलेज से निकला और सीधे मोहित के आलीशान प्राइवेट लक्ज़री थिएटर रूम की तरफ बढ़ गया। सिमी अपनी उसी सदाबहार पोशाक—चमकदार काली ब्रा और पैंटी में, अपनी सुडौल जांघों और गदराए चूतड़ों को मटकाती हुई लड़कों के बीच चल रही थी।

## अध्याय: डार्क रूम, बोल्ड स्क्रीन और बदन की कशिश

थिएटर रूम में दाखिल होते ही वहाँ का माहौल पूरी तरह बदल गया। कमरे में हल्की लाल और नीली डिम लाइट्स जल रही थीं, और बैठने के लिए बड़े-बड़े आलीशान मखमली सोफे (रिक्लाइनर्स) लगे हुए थे। मोहित ने स्क्रीन पर एक बेहद बोल्ड, कशिश से भरी और रोमांटिक हॉलीवुड फिल्म प्ले कर दी।

कमरे में अंधेरा होते ही स्क्रीन पर सिज़लिंग और बोल्ड सीन शुरू हो गए। सिमी को बीच वाले बड़े सोफे पर बिठाया गया, जिसके एक तरफ रॉकी और दूसरी तरफ अमित बैठ गए, जबकि कबीर और मोहित ठीक पीछे वाले सोफे पर आ गए।

* **स्क्रीन का जादू:** स्क्रीन पर जैसे ही हीरो-हीरोइन के बीच बेबाक और बोल्ड सीन शुरू हुए, सिमी की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह स्क्रीन को बेहद ध्यान से देखने लगी।

* **अमित और रॉकी की हरकत:** अंधेरे का फायदा उठाकर अमित ने अपना हाथ सिमी की नग्न और चिकनी कमर पर रख दिया, जबकि रॉकी ने अपनी उंगलियां फिर से सिमी की काली ब्रा के भीतर सरका दीं।

* **बेबाक छुअन:** फिल्म के बोल्ड दृश्यों को देखते हुए अमित ने सिमी के भारी, गदराए चूतड़ों को नीचे से सहलाना शुरू किया, जिससे सिमी के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। रॉकी ने भी उसके दोनों कड़क होते निप्पलों को अपनी उंगलियों के बीच लेकर धीरे-धीरे मरोड़ना शुरू कर दिया।

## अध्याय: सिमी का बेफ़िक्र एंजॉयमेंट

सिमी स्क्रीन पर चल रहे बोल्ड दृश्यों और अपने बदन पर हो रहे लड़कों के इन कड़क मर्दाने वारों का एक साथ मज़ा ले रही थी। वह इस पूरे माहौल में इतनी डूब गई कि उसने अपनी दोनों टांगें सोफे पर ऊपर समेट लीं, जिससे उसकी पैंटी में कैद उसके भारी अंगों का उभार अमित की जांघों से और कसकर चिपक गया।

जब फिल्म में एक बेहद तीखा और बोल्ड सीन आया, तो सिमी ने उत्तेजना और मजे में आकर अमित के कंधे पर अपना सिर रख दिया और खिलखिलाकर धीरे से चहकी:

> "अरे ओ अमित बाबू! ओ रॉकी बाबू! शहर की फिल्मों में तो लोग कपड़े पहनना ही भूल जाते हैं! पर सच कहूँ, स्क्रीन पर इन्हें देखकर और यहाँ अंधेरे में तुम्हारी इन कड़क उंगलियों का जादू महसूस करके मुझे बहुत आनंद आ रहा है। यह शहर का खेल तो पहाड़ों से भी ज़्यादा मज़ेदार है!"

उसकी इस अलमस्त और निश्छल बात को सुनकर अंधेरे कमरे में रॉकी और अमित ने उसे और करीब से भींच लिया। पूरा रॉकर्स ग्रुप सिमी के इस बेबाक अंदाज़ और बोल्ड फिल्म के इस जादुई संगम का जमकर लुत्फ़ उठा रहा था, और यह शाम उनके लिए और भी हसीन होती जा रही थी।

## अध्याय: डिम लाइट का सम्मोहन और खोई सुध-बुध

मिनी-थिएटर का माहौल अब पूरी तरह से मदहोश करने वाला हो चुका था। स्क्रीन पर चल रहे बेहद बोल्ड और रोमांटिक दृश्यों की नीली-लाल रोशनी सिमी के दूध जैसे सफेद बदन पर पड़ रही थी। सराउंड साउंड सिस्टम से गूंजती संगीत की धीमी कशिश और सोफे की मखमली छुअन के बीच सिमी स्क्रीन पर पूरी तरह खोई हुई थी। वह पहली बार शहर की इस जादुई और बेबाक दुनिया को पर्दे पर देख रही थी, जिसके कारण उसका ध्यान पूरी तरह स्क्रीन पर केंद्रित था।

सिमी इस कदर फिल्म के दृश्यों में लीन थी कि उसे इस बात का बिल्कुल अहसास नहीं हुआ कि कब रॉकी और अमित की जादुई उंगलियों ने अपना अगला दांव खेल दिया था। अमित उसकी नग्न और चिकनी कमर को सहलाते हुए धीरे-धीरे उसकी पैंटी के इलास्टिक तक पहुँच गया था, जबकि रॉकी के हाथ उसकी पीठ पर लगी ब्रा की हुक पर टिके थे।

## अध्याय: कपड़ों की विदाई और पूर्ण आज़ादी

अंधेरे और फिल्म के रोमांच का फायदा उठाते हुए रॉकी ने बड़ी सफाई से सिमी की चमकदार काली ब्रा की हुक को एक झटके में आज़ाद कर दिया। बिना कोई आवाज़ किए, ब्रा सिमी के कंधों से सरकती हुई सोफे के पीछे गिर गई। ठीक उसी पल, अमित ने नीचे से उसकी तंग काली पैंटी को भी बिना किसी ज़बरदस्ती के, बेहद मखमली अंदाज़ में उसकी सुडौल जांघों से नीचे सरका दिया।

सिमी को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके जिस्म की आखिरी बंदिशें भी फर्श पर जा गिरी हैं। जब स्क्रीन की तेज रोशनी चमकी, तब जाकर उसे अपने बदन पर हवा का एक बेहद अलग और मुकम्मल अहसास हुआ:

* **कुदरती रूप:** सिमी का पूरा दूध जैसा सफेद, भारी और सुडौल बदन अब पूरी तरह से कुदरती रूप में सोफे पर बिखरा हुआ था।

* **अंगों का उभार:** ब्रा-पैंटी के हटते ही उसके दोनों भरे हुए दूध सोफे के मखमली कपड़े पर पूरी आज़ादी से फैल गए थे, और उनके सिरे पर सजे काले निप्पल उत्तेजना के मारे हवा में पूरी तरह तने हुए थे।

## अध्याय: सिमी की अलमस्त हैरानी

जब फिल्म का एक सीन खत्म हुआ और कमरे की लाइट हल्की सी तेज हुई, तब सिमी ने अचानक नीचे देखा। अपने बदन को पूरी तरह से नग्न और बेपर्दा पाकर उसकी बड़ी-बड़ी आँखें पहले तो हैरानी से फैल गईं, और फिर उसने अपनी वही चिर-परिचित चुलबुली मुस्कान बिखेर दी।

उसने बिना किसी शर्म या संकोच के अपनी दोनों टांगों को थोड़ा और फैलाया, जिससे उसके भारी, गदराए चूतड़ अमित की जांघों पर पूरी तरह नग्न अवस्था में सट गए। वह खिलखिलाकर रॉकी और अमित की तरफ देखते हुए चहकी:

> "अरे ओ अमित बाबू! ओ रॉकी बाबू! तुम शहर वाले तो जादूगर निकले! मुझे पता ही नहीं चला कि कब तुमने मेरे इन खिलौनों के ताले खोल दिए और मेरे कपड़ों को ही गायब कर दिया! पर बिना इन कपड़ों के इस ठंडे कमरे में लेटने का मज़ा कुछ और ही है। अब तुम दोनों जो चाहो, वो खेल खेल सकते हो!"

उसकी इस परम मासूम और पूरी तरह से बिंदास बात ने सोफे पर बैठे लड़कों के भीतर के जुनून को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। पूरा रॉकर्स ग्रुप सिमी के इस मुकम्मल, आज़ाद और बेबाक हुस्न को देखकर पूरी तरह मदहोश हो गया, और अब थिएटर के भीतर मस्ती का एक नया और अलमस्त दौर शुरू होने वाला था।

## अध्याय: थिएटर में उमड़ा जुनून

मिनी-थिएटर के बंद कमरे में छाई मदहोशी अब अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। सिमी के पूरी तरह से आज़ाद, दूध जैसे सफेद और सुडौल बदन को देखकर रॉकी और अमित के भीतर का सब्र पूरी तरह टूट गया। सिमी की उस अलमस्त और बेबाक रज़ामंदी ने उनके हौसलों को पूरी तरह से खोल दिया था।

स्क्रीन की रंगीन रोशनी सिमी के मखमली जिस्म पर थिरक रही थी। तभी अमित ने आगे बढ़कर सिमी के चेहरे को अपनी दोनों हथेलियों में थाम लिया। उसने सिमी की बड़ी-बड़ी आँखों में देखा और बिना एक पल गंवाए अपने होंठ उसके गुलाबी और सूजे हुए होठों पर जमा दिए। अमित पूरी शिद्दत और प्यास के साथ सिमी के रसीले होठों का सारा रस पीने लगा, मानो वह उस पहाड़ी मिठास को पूरी तरह अपने भीतर उतार लेना चाहता हो।

## अध्याय: रस और दूध का संगम

ठीक उसी वक्त, रॉकी भी इस खेल में पीछे नहीं रहा। सिमी के अंग ब्रा के बंधनों से मुक्त होकर सोफे पर पूरी आज़ादी से उभरे हुए थे। रॉकी ने थोड़ा नीचे झुककर सिमी के एक भारी, गोल-मटोल दूध को अपनी मजबूत हथेली में भींचा और अपने मुंह को सीधे उसके तीखे, कड़क काले निप्पल पर टिका दिया।

रॉकी पूरी बेबाकी से सिमी के उस सुडौल अंग को चूसने लगा, मानो वह इस मखमली काया के हर एक कतरे का आनंद ले रहा हो। उसकी उंगलियाँ सिमी के दूसरे अंग को रबर की तरह मसल रही थीं।

* **जिस्म की सिहरन:** इस दोहरे और तीखे मर्दाने हमले के कारण सिमी के पूरे बदन में बिजली की एक ज़बरदस्त लहर दौड़ गई। अमित के मुंह के भीतर उसके होठों से एक मदहोश कर देने वाली "आह..." निकली जो बाहर नहीं आ सकी।

* **पूर्ण समर्पण:** इस तीव्र स्पर्श के सुख में डूबकर सिमी ने अपनी आँखें पूरी तरह बंद कर लीं। सोफे पर टिके उसकी पैंटी से आज़ाद भारी, गदराए और गोल-मटोल चूतड़ उत्तेजना के मारे हल्के-हल्के थिरकने लगे।

## अध्याय: मदहोशी का चरम

जब अमित और रॉकी ने काफी देर तक सिमी के होठों और अंगों का सारा सुख बटोरने के बाद अपनी पकड़ को थोड़ा ढीला किया, तो सिमी ने एक लंबी और गहरी सांस ली। उसके होंठ और उसके दूध जैसे सफेद अंग अमित और रॉकी के स्पर्श से पूरी तरह सुर्ख लाल हो चुके थे।

उसने अपनी मदहोश आँखें खोलीं, अपने बालों को झटका और अपनी उसी चुलबुली, निश्छल धुन में मुस्कुराते हुए बोली:

> "अरे ओ अमित बाबू! ओ रॉकी बाबू! तुम दोनों ने तो मिलकर मुझे पूरी तरह से निचोड़ दिया। एक तरफ से मेरे होठों का रस चला गया और दूसरी तरफ से तुमने मेरे इस खिलौने को पूरा चूस लिया! पर सच कहूँ, इस अँधेरे कमरे में तुम दोनों का यह डबल खेल मुझे बहुत भाया।"

पीछे सोफे पर बैठे कबीर और मोहित इस बेबाक नज़ारे को देखकर पूरी तरह जोश से भरे हुए थे। रॉकर्स ग्रुप का यह प्राइवेट थिएटर अब सिमी के इस पूरी तरह से आज़ाद हुस्न और लड़कों के इस कड़क जुनून की गवाही दे रहा था, जहाँ आनंद का यह सफर लगातार आगे बढ़ रहा था।

## अध्याय: वीआईपी थिएटर में आनंद का चक्र

मिनी-थिएटर के भीतर का माहौल अब पूरी तरह से बेबाक और उन्मुक्त हो चुका था। स्क्रीन पर चलती फिल्म की रंगीन रोशनी सिमी के पूरी तरह से नग्न, संगमरमर जैसे सफेद बदन पर पड़ रही थी, जिससे उसका हर एक अंग कुंदन की तरह चमक रहा था। रॉकी और अमित के तीखे स्पर्श का सुख भोगने के बाद सिमी का जिस्म अब और भी ज़्यादा गर्म और मदहोश हो चुका था। रॉकर्स ग्रुप के इस वीआईपी रूम में अब आनंद का एक नया चक्र शुरू होने वाला था।

जैसे ही रॉकी और मोहित ने सिमी के बदन से अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की, अमित और कबीर अपनी प्यास बुझाने के लिए तुरंत आगे बढ़ गए। कबीर ने बिना एक पल गंवाए सिमी के सुर्ख लाल हो चुके चेहरे को अपनी हथेलियों में लिया और उसके रसीले गुलाबी होठों पर अपने होंठ जमा दिए। वह पूरी शिद्दत के साथ सिमी के होठों का सारा रस पीने लगा।

## अध्याय: बारी-बारी से कड़क मर्दाना वार

कबीर जब सिमी के होठों के रस में डूबा हुआ था, ठीक उसी वक्त अमित ने सिमी के उन सुडौल और भारी अंगों की तरफ रुख किया जो ब्रा के बंधनों से पूरी तरह आज़ाद होकर सोफे पर फैले हुए थे। अमित ने आगे बढ़कर सिमी के एक भारी, गोल-मटोल दूध को अपने मुंह में भर लिया और उसके कड़क काले निप्पल को पूरी बेबाकी से चूसने लगा।

* **कबीर और अमित का खेल:** कबीर जहाँ सिमी के मुंह के भीतर अपनी मखमली जीभ का जादू चला रहा था, वहीं अमित उसके दूसरे अंग को अपनी उंगलियों से रबर की तरह मसलते हुए उसके जिस्म की गरमाहट को चख रहा था।

* **अमित और कबीर की अदला-बदली:** कुछ देर बाद जब कबीर ने होठों को छोड़ा, तो अमित तुरंत सिमी के होठों का रस पीने के लिए ऊपर आ गया और कबीर नीचे झुककर सिमी के उन दूध जैसे सफेद अंगों का सुख बटोरने लगा।

इस बारी-बारी से चलते तीखे और कड़क मर्दाने हमले के कारण सिमी के पूरे बदन में बिजली की लहरें दौड़ रही थीं। सोफे पर नग्न अवस्था में टिके उसके भारी, गदराए और गोल-मटोल चूतड़ उत्तेजना के मारे बार-बार थिरक उठते थे। उसकी बंद आँखों और मुंह से निकलने वाली मदहोश "उफ़्फ़..." की आवाजें थिएटर के सन्नाटे को और कामुक बना रही थीं।

## अध्याय: चारों तरफ से घिरा हुस्न

जब कबीर और अमित ने भी बारी-बारी से सिमी के होठों और अंगों का सारा आनंद निचोड़ लिया और अपनी पकड़ को हल्का किया, तो सिमी ने एक लंबी, गहरी और सुकून भरी सांस ली। उसके दोनों अंग और होंठ लड़कों की कड़क छुअन के कारण पूरी तरह से सुर्ख और उत्तेजित नजर आ रहे थे।

उसने अपनी मदहोश बड़ी-बड़ी आँखें खोलीं, अपने बिखरे बालों को समेटा और अपनी उसी चिर-परिचित अल्हड़ और बिंदास धुन में मुस्कुराते हुए चहकी:

> "अरे ओ अमित बाबू! ओ कबीर बाबू! तुम चारों तो मिलकर मेरे पीछे ही पड़ गए हो। एक जाता है तो दूसरा आ जाता है, और मेरे इन खिलौनों को छोड़ता ही नहीं! पर सच कहूँ, शहर के इस थिएटर का यह बारी-बारी वाला खेल मुझे बहुत मजेदार लगा। अब बताओ, तुम्हारी इस महफिल का अगला रंग क्या है?"

उसकी इस परम मासूम और बेबाक बात को सुनकर रॉकी, मोहित, अमित और कबीर ने एक साथ ज़ोरदार ठहाका लगाया। पूरा रॉकर्स ग्रुप इस पहाड़ी सुंदरी के मुकम्मल और आज़ाद हुस्न के घेरे में पूरी तरह से खो चुका था, जहाँ रात बढ़ने के साथ-साथ मस्ती का रंग और भी गहरा होता जा रही था।

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