पहाड़ों से माया नगरी का सफर
शैलकुंज की शांत वादियों से निकलकर सिमी की जिंदगी अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई थी, जिसकी कल्पना खुद उसने भी नहीं की थी। सिमी के पिता, जो बरसों से मुंबई की एक बड़ी कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत थे, उन्होंने सिमी के भविष्य और आगे की पढ़ाई के लिए उसका दाखिला मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े कॉलेज—'सेंट जेवियर्स इंटरनेशनल कॉलेज' में करवा दिया था।
जब पार्वती ने सिमी को यह बात बताई, तो वह खुशी से उछल पड़ी, जिससे उसकी काली ब्रा में कैद उसके दूध जैसे सफेद भरे हुए अंग हवा में ज़ोर से थिरक उठे। सिमी के लिए मुंबई जाना किसी नई दुनिया की सैर जैसा था, लेकिन उसे इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि पहाड़ों की आज़ादी और मुंबई के शहरी तौर-तरीकों में कितना बड़ा फासला है।
पहाड़ों की ठंडी हवा को पीछे छोड़, सिमी अपनी माँ के साथ मुंबई पहुँच गई। मुंबई की उमस भरी गर्मी और गाड़ियों के शोर के बीच सिमी का वही अलमस्त अंदाज बरकरार था। उसने मुंबई के घर में कदम रखते ही अपने सारे भारी कपड़े उतार फेंके और अपनी वही पसंदीदा काली ब्रा और मैचिंग पैंटी पहनकर खिड़की से समुद्र की लहरों को देखने लगी।
## अध्याय: कॉलेज कैंपस में तहलका: बेबाक एंट्री
कॉलेज का पहला दिन था। सेंट जेवियर्स कॉलेज का कैंपस छात्रों से खचाखच भरा हुआ था। शहर की आधुनिक लड़कियाँ महंगे ब्रांडेड जींस, क्रॉप टॉप और तरह-तरह के फैशन वाले कपड़ों में सज-धजकर आई थीं। हर तरफ अंग्रेजी गानों और गाड़ियों का शोर था।
तभी कॉलेज के मुख्य द्वार से सिमी ने कदम रखा। पहाड़ों की इस चुलबुली लड़की के लिए कॉलेज का कैंपस भी शैलकुंज के किसी मेले जैसा ही था। वह बिना किसी झिझक, बिना किसी लोक-लाज या सामाजिक डर के, सीधे अपनी उसी पुरानी पोशाक—चमकदार काली ब्रा और पैंटी में कैंपस के भीतर दाखिल हो गई। उसके लंबे काले बाल उसकी पीठ से होते हुए नीचे उसके चूतड़ों तक लहरा रहे थे।
जैसे ही सिमी कैंपस के मुख्य रास्ते पर बढ़ी, पूरे कॉलेज में मानो सन्नाटा पसर गया। जो छात्र कैंटीन में बैठे थे, वे खड़े हो गए। कॉरिडोर में चल रहे प्रोफेसरों की फाइलें हाथ से छूटने लगीं।
मुंबई की उमस के कारण सिमी का दूध जैसा सफेद बदन पसीने की हल्की बूंदों से चमक रहा था। इस दूधिया गोरेपन पर उसकी सुडौल छाती और ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर साफ तौर पर कड़क हो चुके उसके काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल दूर से ही हर किसी की नजरों को अपनी ओर खींच रहे थे।
जब वह अपने चुलबुले अंदाज में अपनी पतली कमर को मटकाती हुई आगे बढ़ी, तो पैंटी के भीतर दबे उसके भारी और गोल-मटोल चूतड़ों की ज़बरदस्त थिरकन ने पूरे कॉलेज के लड़कों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दीं।
> "यह कौन है? कोई इंटरनेशनल मॉडल या कोई सिरफिरी?" — कॉलेज के बास्केटबॉल कोर्ट पर खड़े लड़कों ने आपस में बुदबुदाया।
>
सिमी इन सब फुसफुसाहटों से बेखबर, अपनी आँखों में वही बच्चों वाली मासूमियत लिए मुस्कुराती हुई आगे बढ़ती रही, मानो वह कॉलेज नहीं, बल्कि पहाड़ों की किसी पगडंडी पर घूम रही हो।
## अध्याय: रॉकी से सामना और होठों का रस
कॉलेज के गलियारे में सिमी को इस रूप में घूमते देख, कॉलेज के सबसे रईस, हैंडसम और बिगड़ैल लड़के 'रॉकी' की नजर उस पर पड़ी। रॉकी कॉलेज का स्टड था, जिसके आगे-पीछे कई लड़कियाँ घूमती थीं। लेकिन सिमी का यह प्राकृतिक, बेबाक और अर्ध नग्न रूप देखकर रॉकी के होश उड़ गए। उसने आज तक ऐसी दूधिया गोरी त्वचा, ऐसे गदराए हुए सुडौल दूध और ऐसे भारी गोल चूतड़ किसी लड़की के नहीं देखे थे, जो बिना किसी बनावट के इतने कामुक लग रहे हों।
रॉकी अपने दोस्तों को पीछे छोड़कर सीधे सिमी के रास्ते में आकर खड़ा हो गया।
"हे ब्यूटीफुल! तुम किस प्लैनेट से आई हो? कॉलेज में इस तरह... ब्रा और पैंटी में?" रॉकी ने अपनी आँखों में एक गहरी कशिश छुपाते हुए पूछा।
सिमी रुकी, उसने रॉकी के स्टाइलिश कपड़ों और उसकी आँखों को देखा। उसे रॉकी की बातें मजेदार लगीं। उसने हमेशा की तरह अपने दोनों हाथ अपने भारी चूतड़ों पर रखे, जिससे पैंटी के भीतर उसके नितंबों का उभार और तीखा हो गया, और मुस्कुराते हुए बोली, "मैं पहाड़ों से आई हूँ! और इन कपड़ों में मुझे बहुत आराम मिलता है। शहर के कपड़े बहुत टाइट होते हैं!"
उसकी आवाज में बच्चों जैसी मासूमियत और होठों पर गुलाब की पंखुड़ियों जैसी लाली थी। रॉकी सिमी की इस निश्छल बेबाकी और उसके जिस्म की खुशबू से पूरी तरह सम्मोहित हो चुका था। उससे अब और सब्र नहीं हुआ।
उसने बिना कुछ सोचे, तेजी से आगे बढ़कर सिमी की पतली कमर को अपने मजबूत हाथों में जकड़ लिया। सिमी इस अचानक हुए हमले से चौंक गई, जिससे उसके भारी दूध रॉकी के सीने से पूरी तरह टकरा गए। रॉकी ने अपनी आँखें बंद कीं और सीधे अपने होंठ सिमी के गुलाबी, रसीले होठों पर रख दिए।
रॉकी ने सिमी के होठों को अपनी आगोश में ले लिया और उसके होठों का सारा मीठा रस पीने लगा। सिमी के लिए यह अहसास बिल्कुल नया और जादुई था। उसने कभी किसी पुरुष का ऐसा स्पर्श महसूस नहीं किया था। रॉकी जैसे-जैसे उसके होठों को चूस रहा था, सिमी के दूध जैसे सफेद बदन में एक तीव्र सिहरन दौड़ गई। उसकी सुडौल छाती पर मौजूद काले निप्पल ब्रा के भीतर और ज्यादा कड़क हो गए और उसके भारी, गोल-मटोल चूतड़ रॉकी की पकड़ में थोड़े और तन गए।
कैंपस के बीचोबीच, सैकड़ों छात्र-छात्राओं के सामने, रॉकी सिमी के होठों का रस पीकर उसे अपनी दीवानगी का अहसास करा रहा था, और पहाड़ों की यह अल्हड़ तितली मुंबई की इस पहली छुअन में पूरी तरह खोती जा रही थी।
## अध्याय: रॉकी की बाहें और दोस्तों का हुजूम
रॉकी ने जब सिमी के गुलाबी और रसीले होठों का आखिरी कतरा तक चूस लिया, तो उसने धीरे से अपने होंठ पीछे हटाए। सिमी की सांसें तेज चल रही थीं, और उसकी आँखों में एक अजीब सा अचरज और मासूमियत भरी मदहोशी थी। मुंबई की इस पहली, बेबाक छुअन ने उसके पहाड़ी दिल के भीतर एक नई हलचल पैदा कर दी थी। उसके दूध जैसे सफेद बदन पर पसीने की चमक और बढ़ गई थी, और काली ब्रा के भीतर कैद उसके गदराए हुए दूध उसकी तेज सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
रॉकी ने सिमी को संभलने का मौका भी नहीं दिया। उसने मुस्कुराते हुए झुककर अपने मजबूत हाथ सिमी की जांघों और उसकी पीठ के नीचे डाले, और उसे एक झटके में अपनी गोद में उठा लिया।
जब रॉकी ने उसे हवा में उठाया, तो सिमी के भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ उसकी बाहों के ऊपर पूरी तरह से फैल गए। पैंटी का तंग कपड़ा उसके नितंबों की सुडौल गोलाई को और भी मुकम्मल दिखा रहा था। सिमी ने घबराहट में अपने दोनों हाथ रॉकी के गले में डाल दिए, जिससे आगे से उसके सुडौल दूध रॉकी के चेहरे के बिल्कुल करीब आ गए। उस दूधिया बदन पर उभरे काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल ब्रा के पतले कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे।
"अरे रॉकी बाबू! यह तुम मुझे कहाँ ले जा रहे हो? मुझे नीचे उतारो, मुझे सब देख रहे हैं!" सिमी ने बच्चों की तरह मचलते हुए कहा।
रॉकी बस मुस्कुराया और उसे गोद में लिए हुए ही कैंपस के उस खास हिस्से की तरफ बढ़ गया जहाँ उसका पूरा ग्रुप बैठा था।
## अध्याय: कॉलेज का वीआईपी लाउंज और गर्लफ्रेंड्स की दाद
कैंपस के एक आलीशान और सूनसान कोने में कॉलेज के अमीर और बिगड़ैल लड़कों का एक खास वीआईपी सिटिंग एरिया था, जिसे 'द रॉकर्स ज़ोन' कहा जाता था। वहाँ रॉकी के दोस्त और उसकी कई खूबसूरत, आधुनिक गर्लफ्रेंड्स बैठी हुई थीं, जो महंगे ब्रांडेड कपड़ों में सजी थीं और कोल्ड ड्रिंक्स पी रही थीं।
जैसे ही रॉकी अपनी गोद में केवल काली ब्रा और पैंटी पहने इस दूधिया पहाड़ी सुंदरी को लेकर वहाँ पहुँचा, पूरे ग्रुप में एक शोर मच गया।
रॉकी ने सिमी को वहाँ के एक मुलायम सोफे पर धीरे से बिठा दिया। सोफे पर बैठते ही सिमी के भारी चूतड़ मखमली गद्दे में धंस गए और उसने अपने हाथ अपनी पतली कमर पर रख लिए।
रॉकी की मुख्य गर्लफ्रेंड, तान्या, जो खुद को कॉलेज की क्वीन समझती थी, उसने अपनी महंगी सनग्लासेस हटाईं और सिमी के उस बेबाक, बेदाग बदन को ऊपर से नीचे तक देखा। सिमी के सुडौल, गदराए दूध और उन पर सजे काले निप्पलों का उभार देखकर तान्या के भीतर भी जलन और तारीफ का एक मिला-जुला अहसास जागा।
तान्या खड़ी हुई, उसने रॉकी के कंधे पर हाथ रखा और ताली बजाते हुए बोली:
> "वाह रॉकी! मान गए तुम्हें! तुमने तो आज पूरे कॉलेज के सामने इस नई जंगली बिल्ली का शिकार कर लिया। इसके होठों का सारा रस इतनी जल्दी पी लिया... यू आर रियली अ रॉकस्टार!"
>
वहाँ बैठी रॉकी की बाकी गर्लफ्रेंड्स—नेहा और रिया—भी हंस पड़ीं और रॉकी की तारीफों के पुल बांधने लगीं:
"सीरियसली रॉकी, इसकी लिपस्टिक का तो नामोनिशान मिटा दिया तुमने! इसके होठों का रस चूसने का तुम्हारा स्टाइल हमेशा की तरह किलर था। एक और लड़की तुम्हारी लिस्ट में शामिल हो गई!"
## अध्याय: सिमी का चुलबुला जवाब
सिमी सोफे पर बैठी इन सब बड़ी-बड़ी लड़कियों की बातें सुन रही थी। वह 'शिकार', 'रस' और 'लिस्ट' जैसी शहरी और चालाक बातों का असली मतलब नहीं समझ पा रही थी। उसके लिए तो यह सब भी एक खेल जैसा ही था।
उसने तान्या की तरफ देखा, अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं और सोफे पर बैठे-बैठे ही चहक कर बोली:
"ऐ बड़ी दीदी! तुम रॉकी बाबू की तारीफ क्यों कर रही हो? उन्होंने तो बस मेरे होठों को छूकर कोई नया शहरी खेल खेला है। लेकिन सुनो, तुम्हारे शहर के लड़के बहुत ताकतवर होते हैं, मुझे तो लगा मैं हवा में उड़ रही हूँ!"
उसकी इस बेहद मासूम और बेबाक बात को सुनकर वहाँ खड़े सभी लड़के और लड़कियाँ पल भर के लिए सन्न रह गए। वे समझ गए कि यह कोई शहर की चालाक मॉडल नहीं है, बल्कि एक ऐसी अबोध कयामत है जो अपनी ही धुन में मस्त है। रॉकी ने सिमी की तरफ देखा और उसके दिल में इस पहाड़ी तितली के लिए एक अलग ही तरह का आकर्षण जाग उठा, जिसे वह खुद भी समझ नहीं पा रहा था।
## अध्याय: सोफे की हलचल और नया मोड़
तान्या और ग्रुप की बाकी लड़कियों की बातें सुनकर सिमी अभी मुस्कुरा ही रही थी कि सोफे के पास खड़े रॉकी के सबसे पक्के और रईस दोस्त, कबीर (जिसे सब 'के.सी.' कहते थे), की नजरें सिमी के उस बेबाक बदन पर टिक गईं। पहाड़ों की इस बेबाक सुंदरी का दूध जैसा सफेद बदन और उसकी मासूमियत देखकर कबीर से भी अब रहा नहीं गया।
कबीर ने अपनी सिगरेट का धुआं हवा में उड़ाया, एक गहरी सांस ली और सीधे उस मखमली सोफे पर सिमी के बिल्कुल बगल में आकर बैठ गया। सोफे के गद्दे कबीर के वजन से थोड़े और धंस गए, जिससे सिमी का संतुलन थोड़ा डगमगाया।
इससे पहले कि सिमी कुछ समझ पाती, कबीर ने मुस्कुराते हुए अपने मजबूत हाथ आगे बढ़ाए और सिमी की पतली कमर को पकड़कर उसे एक झटके में अपनी गोद में खींच लिया।
## गोद की गर्माहट और बदन का तनाव
जब सिमी अचानक कबीर की जांघों के ऊपर उसकी गोद में बैठी, तो उसकी पैंटी में कैद भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ कबीर के मजबूत जिस्म से पूरी तरह चिपक गए। पैंटी का तंग कपड़ा इस दबाव के कारण उसके नितंबों के बीच और ज्यादा कस गया, जिससे उसकी काया की गोलाई और भी मुकम्मल दिखने लगी।
सिमी ने खुद को संभालने के लिए कबीर के चौड़े कंधों का सहारा लिया। इस हरकत से जब वह थोड़ा पीछे की ओर झुकी, तो आगे से उसकी सुडौल छाती और काली ब्रा के कप्स में कैद उसके दोनों भरे हुए दूध हवा में तन गए। मुंबई की बढ़ती उमस और इस अचानक हुई हलचल के कारण, उसके दोनों दूध पर सजे काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर और ज्यादा कड़क और उभरे हुए नजर आने लगे।
"अरे बाबा! तुम सब शहर के लड़के कितने अजीब हो!" सिमी कबीर की गोद में थोड़ा मचलते हुए चहकी, "एक के बाद एक सब मुझे अपनी गोद में उठा लेते हैं। क्या मैं कोई खेलने वाली गुड़िया हूँ?"
## ग्रुप का शोर और रॉकी की नजर
सिमी को इस तरह अपने दोस्त कबीर की गोद में बैठते देख पूरे वीआईपी लाउंज में एक बार फिर हुटिंग और तालियों का शोर गूंज उठा।
* **दोस्तों की प्रतिक्रिया:** "वाह के.सी.! तूने तो रॉकी से भी ज्यादा फुर्ती दिखाई! रॉकी ने सिर्फ होठों का रस पिया, और तूने तो पूरी कयामत को ही अपनी गोद में समेट लिया!" ग्रुप के बाकी लड़कों ने हंसते हुए दाद दी।
* **गर्लफ्रेंड्स का अंदाज:** तान्या और नेहा ने अपनी ड्रिंक्स का ग्लास हवा में लहराया, "लगता है इस पहाड़ी तितली को शहर के तौर-तरीके बहुत जल्दी पसंद आ रहे हैं।"
रॉकी, जो अब तक मुस्कुरा रहा था, उसने जब सिमी के भारी चूतड़ों को कबीर की गोद में पूरी तरह फैले हुए देखा और उसके सुडौल अंगों का वह तीखा उभार कबीर के चेहरे के करीब पाया, तो उसकी आँखों में पल भर के लिए एक अनजानी सी जलन तैर गई।
लेकिन सिमी इन सब शहरी कशिश और लड़कों के बीच की होड़ से पूरी तरह अनजान थी। वह कबीर की गोद में बैठी अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को मटका रही थी। कबीर ने उसके दूध जैसे सफेद कंधे पर अपना हाथ रखा, जिसकी छुअन से सिमी के पूरे जिस्म में एक मीठी सिहरन दौड़ गई। वह अपनी उसी काली ब्रा और पैंटी में मुंबई के इस सबसे बड़े कॉलेज के सबसे रईस लड़कों के बीच एक जादुई पहेली बनी बैठी थी, जिसे सुलझाना किसी के बस की बात नहीं थी।
कबीर की गोद में बैठी सिमी अभी माहौल को समझने की कोशिश ही कर रही थी कि कबीर का हाथ धीरे-धीरे उसकी पीठ से सरकते हुए आगे की ओर बढ़ने लगा। सिमी का दूध जैसा सफेद बदन दीये और धूप की मिली-जुली रोशनी में पूरी तरह दमक रहा था।
कबीर ने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे सिमी के पेट से ऊपर उठाते हुए उसकी काली ब्रा के कप्स की तरफ बढ़ाना शुरू किया। जैसे ही उसके हाथ की गर्माहट सिमी के सुडौल और भरे हुए बदन से छुई, सिमी के पूरे जिस्म में एक तीव्र सिहरन दौड़ गई। ठंडे पहाड़ी इलाकों से आई सिमी के लिए शहर के लड़कों का यह लगातार और सीधा स्पर्श बिल्कुल नया था। कबीर की उंगलियों के धीमे दबाव से ब्रा के पतले कपड़े के भीतर कैद उसके अंग थोड़े और तन गए, और उन पर सजे काले अंगूर जैसे निप्पल और भी ज्यादा कड़क होकर ऊपर की तरफ उभर आए।
सिमी ने कबीर के हाथ को अपने सीने पर महसूस किया, तो उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें घुमाईं और कबीर का हाथ धीरे से पकड़कर हटाते हुए चुलबुले अंदाज में बोली, "अरे बाबा, तुम तो बड़े शरारती हो! वहाँ क्या ढूंढ रहे हो? पहाड़ों में जब कोई इतनी जोर से छूता है, तो हम उसे तालाब में धक्का दे देते हैं!"
उसकी इस मासूम और बेबाक बात को सुनकर कबीर पल भर के लिए ठिठक गया, और लाउंज में खड़े बाकी दोस्त सिमी के इस अलमस्त और बेफिक्र अंदाज को देखकर ज़ोर से हंस पड़े।
## अध्याय: कबीर की बाइक और मुंबई की रफ्तार
सिमी के चुलबुले और बेबाक जवाब से कबीर का दिल पूरी तरह उस पर आ चुका था। वह इस अल्हड़ पहाड़ी सुंदरी की मासूमियत और उसके कातिलाना बदन के जाल में ऐसा फंसा कि उसने आगे-पीछे कुछ नहीं सोचा। उसने एक ज़ोरदार ठहाका लगाया और सोफे से उठते हुए सिमी को एक बार फिर सीधे अपनी गोद में उठा लिया।
जब कबीर ने उसे अपनी बाहों में भरा, तो सिमी के भारी, गोल-मटोल चूतड़ कबीर की मजबूत कलाइयों पर टिक गए, जिससे पैंटी का तंग कपड़ा उनके बीच और ज्यादा कस गया। सिमी ने गिरने के डर से कबीर के गले को कसकर पकड़ लिया, जिससे आगे से उसके सुडौल, भरे हुए दूध कबीर के सीने से पूरी तरह भींच गए। ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर उभरे उसके काले, कड़क निप्पल कबीर की छाती में चुभने लगे।
"अरे के.सी. बाबू! अब तुम मुझे कहाँ उड़ाकर ले जा रहे हो?" सिमी ने हवा में पैर मटकाते हुए पूछा।
"तुम्हें शहर की असली रौनक दिखाने, सिमी!" कबीर ने मुस्कुराते हुए कहा और उसे गोद में लिए हुए ही वीआईपी लाउंज से बाहर निकलकर कॉलेज के पार्किंग लॉट की तरफ बढ़ गया।
वहाँ कबीर की चमचमाती हुई भारी स्पोर्ट्स बाइक खड़ी थी। कबीर ने सिमी को धीरे से बाइक की ऊंची पिछली सीट पर बिठाया और खुद आगे बैठ गया।
* **बदन का खिंचाव:** बाइक की पोजीशन ऐसी थी कि बैठने के लिए सिमी को थोड़ा आगे झुकना पड़ा। जैसे ही वह आगे झुकी, उसके दोनों भारी दूध कबीर की पीठ से पूरी तरह चिपक गए और पीछे से उसकी पैंटी में कैद गदराए चूतड़ हवा में और ऊपर उठ गए।
* **रफ्तार का रोमांच:** कबीर ने बाइक स्टार्ट की और एक ज़ोरदार आवाज के साथ बाइक कॉलेज कैंपस से बाहर मुंबई की चौड़ी सड़कों पर दौड़ पड़ी। तेज हवा के थपेड़े सीधे सिमी के दूध जैसे सफेद, अर्धनग्न बदन से टकरा रहे थे, जिससे उसके बदन पर एक मीठी सिहरन दौड़ गई और उसके निप्पल और भी ज्यादा तीखे हो गए। वह डर और मजे के मारे कबीर की कमर को कसकर लिपट गई।
## अध्याय: आलीशान पेंटहाउस और बैचलर पार्टी की चकाचौंध
लगभग आधे घंटे के सफर के बाद कबीर की बाइक जुहू स्थित एक बेहद आलीशान और आलीशान पेंटहाउस के सामने रुकी। यहाँ कबीर के एक रईस दोस्त की 'बैचलर पार्टी' चल रही थी। पेंटहाउस के भीतर तेज म्यूजिक बज रहा था, रंग-बिरंगी डिस्को लाइटें थिरक रही थीं, और शहर के रईस लड़के-लड़कियाँ हाथों में ड्रिंक्स लिए मस्ती कर रहे थे।
कबीर ने सिमी का हाथ पकड़ा और उसे लेकर सीधे पार्टी हॉल के भीतर दाखिल हुआ।
जैसे ही सिमी ने उस महफिल में कदम रखा, वहाँ मौजूद हर शख्स की नजरें उस पर टिक गईं। जहाँ बाकी लड़कियाँ पार्टी के हिसाब से महंगे गाउन और चमकीली ड्रेसेस पहनकर आई थीं, वहीं सिमी केवल अपनी उसी सदाबहार चमकदार काली ब्रा और पैंटी में थी।
मुंबई की उमस और बाइक की सवारी के कारण उसका दूधिया बदन पसीने की हल्की बूंदों से चमक रहा था। काली ब्रा के कप्स से बाहर छलकते उसके दोनों भरे हुए अंगों का उभार और पैंटी के भीतर मटकते उसके भारी, गोल चूतड़ उस डिस्को लाइट की रोशनी में किसी अप्सरा की तरह जादुई और कामुक लग रहे थे।
## अध्याय: पार्टी में तहलका और सिमी का बिंदास अंदाज
कबीर ने सिमी को पार्टी के मुख्य बार काउंटर के पास ले जाकर खड़ा किया। वहाँ खड़े लड़कों का हुजूम सिमी के इस बेबाक रूप को देखकर अपनी ड्रिंक्स भूल गया।
"भाई के.सी.! यह कौन सी कयामत लेकर आए हो? इसके बदन की रंगत तो देखो, बिल्कुल मलाई जैसी है!" कबीर के एक दोस्त ने सिमी के सुडौल अंगों को घूरते हुए कहा।
सिमी को इन शहरी लड़कों की टकटकी या पार्टी के इस शोर-शराबे से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसके लिए तो यह जगह भी शैलकुंज के मेले जैसी ही मजेदार थी।
उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं, अपने दोनों हाथ अपने भारी चूतड़ों पर रखे—जिससे नितंबों की गोलाई और उभर आई—और तेज म्यूजिक की थाप पर अपनी पतली कमर को मटकाते हुए चहकी:
> "अरे वाह! यहाँ का मेला तो बहुत चमकदार है! और यह गाना कितना तेज़ बज रहा है, पहाड़ों में तो सिर्फ ढोल बजता है। चलो, मुझे भी कोई मीठा शरबत पिलाओ, मुझे बहुत प्यास लगी है!"
>
उसकी इस मासूम और बेहद बेबाक बात को सुनकर पार्टी में मौजूद कई लड़कियाँ हैरान रह गईं, और लड़के उसकी इस अल्हड़ सादगी और कातिलाना बदन के दीवाने होकर तालियाँ बजाने लगे। कबीर ने मुस्कुराते हुए उसके लिए एक मीठा मॉकटेल ऑर्डर किया, और सिमी अपनी उसी काली ब्रा-पैंटी में मुंबई की उस वीआईपी बैचलर पार्टी के केंद्र में आकर अपनी ही धुन में थिरकने लगी।
## अध्याय: मोहित की एंट्री और स्टेज का ड्रामा
पार्टी का माहौल अपने शबाब पर था कि तभी भीड़ को चीरता हुआ मोहित वहाँ पहुँचा। मोहित शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन का इकलौता और बेहद अय्याश बेटा था। पैसे और ताकत के घमंड में चूर मोहित के लिए लड़कियाँ केवल कुछ रातों का खिलौना भर थीं। जैसे ही उसकी शातिर नजरें बार काउंटर के पास खड़ी सिमी पर पड़ीं, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उसने आज तक ऐसी बेदाग, दूधिया रंगत और ऐसा बेबाक बदन किसी लड़की का नहीं देखा था, जो बिना कपड़ों के भी इतनी मासूम और जादुई लग रही हो।
मोहित ने कबीर को नजरअंदाज किया और सीधे आगे बढ़कर सिमी का नाजुक हाथ अपनी मजबूत और कड़क उंगलियों में जकड़ लिया।
"हटो सामने से! आज इस पहाड़ी कयामत के साथ स्टेज पर आग मैं लगाऊँगा," मोहित ने घमंड से कहा।
सिमी इस अचानक हुए खिंचाव से थोड़ी सकपकाई, लेकिन खेल-खेल में उसने कोई विरोध नहीं किया। मोहित उसे खींचते हुए सीधे पेंटहाउस के बीचोबीच बने बड़े से डांस स्टेज पर ले गया, जहाँ रंग-बिरंगी लेजर लाइटें सीधे उनके शरीरों पर पड़ रही थीं।
## स्टेज पर थिरकती काया
तेज और धड़कते हुए रीमिक्स म्यूजिक की थाप पर मोहित ने सिमी की पतली कमर को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और डांस करने लगा। जैसे ही मोहित ने उसे भींचा, सिमी के दूध जैसे सफेद भरे हुए दोनों दूध मोहित के सीने से पूरी तरह टकरा गए। मुंबई की उमस और स्टेज की गर्मी के कारण सिमी का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था, जिससे उसकी त्वचा किसी मखमली संगमरमर की तरह चमक रही थी।
काली ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर उभरे उसके काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल मोहित के कड़क जिस्म के स्पर्श से और भी तीखे और कड़क हो गए। जब मोहित ने उसे एक तेज चक्कर खिलाया, तो पीछे से उसकी पैंटी में कैद भारी, गोल-मटोल चूतड़ों की ज़बरदस्त थिरकन को देखकर स्टेज के नीचे खड़े सैकड़ों लड़कों ने सीटियाँ और तालियाँ बजानी शुरू कर दीं। मोहित सिमी को एक खिलौने की तरह अपनी उंगलियों पर नचाना चाहता था, लेकिन सिमी की रूह इन सब चालाकियों से बहुत दूर थी।
## कंधे पर सर और मासूमियत का जादू
डांस करते-करते सिमी का सिर घूमने लगा था। तेज म्यूजिक का शोर और रंग-बिरंगी लाइटों की चकाचौंध ने उसे थोड़ा थका दिया था। उसे लगा जैसे वह शैलकुंज के ऊंचे झूले पर बैठी है जहाँ हवा बहुत तेज होती है। उसने बिना किसी चालाकी या सामाजिक संकोच के, पूरी सहजता से अपना सिर सीधे मोहित के चौड़े कंधे पर टिका दिया।
जब सिमी ने अपना सिर उसके कंधे पर रखा, तो उसका पूरा दूधिया बदन मोहित के शरीर के सहारे ढह गया।
* **बदन का समर्पण:** उसकी सुडौल छाती और ब्रा में कैद उसके दोनों दूध मोहित के सीने पर पूरी तरह फैल गए, और उसकी गहरी, बेफिक्र सांसों के कारण वे एक सुंदर लय में ऊपर-नीचे होने लगे।
* **अल्हड़पन की छुअन:** उसकी पतली कमर के नीचे उसके भारी और गदराए चूतड़ इस पोजीशन में और भी सुडौल होकर पीछे की तरफ उभर आए।
सिमी ने अपनी आँखें आधी बंद कीं और मोहित के कान के पास अपनी सुरीली आवाज में बुदबुदाई, "अरे ओ शहरी बाबू! तुम्हारा यह मेला बहुत तेज घूम रहा है। मेरा सिर चकरा रहा है, मुझे थोड़ी देर ऐसे ही रहने दो।"
मोहित, जो अब तक लड़कियों को सिर्फ अपनी हवस का खिलौना समझता था, सिमी के इस पूरी तरह से सुरक्षित और निश्छल भरोसे को देखकर पल भर के लिए सुन्न रह गया। उसकी आँखों में छुपा अय्याशी का भाव सिमी के इस मासूम सिर रखने के अंदाज से जैसे हवा हो गया। स्टेज के नीचे खड़े कबीर और बाकी दोस्त इस नज़ारे को देखकर हैरान थे कि जो मोहित किसी लड़की को इज्जत नहीं देता था, वह आज पहाड़ों की इस अल्हड़ तितली को अपनी बाहों में संभाले एक सच्चे पहरेदार की तरह शांत खड़ा था।
## अध्याय: धुंधली लाइटें और मदहोश कर देने वाला डांस
स्टेज पर सिमी को मोहित के कंधे पर सिर रखे देख पूरी पार्टी का माहौल एक अलग ही शबाब पर पहुँच गया। डीजे ने तुरंत एक बेहद धीमा और गहरा रोमांटिक रीमिक्स ट्रैक बजा दिया। बेस की धीमी धड़कन के साथ पेंटहाउस की रंग-बिरंगी लेजर लाइटें मद्धम हो गईं, और चारों तरफ एक गुलाबी-नीला अंधेरा पसर गया।
इस जादुई और मदहोश कर देने वाले माहौल को देखकर नीचे खड़े कबीर, तान्या और पार्टी में मौजूद बाकी तमाम रईस लड़के-लड़कियाँ भी खुद को रोक नहीं पाए। सब के सब एक साथ स्टेज पर आ गए और अपने-अपने पार्टनर्स के साथ बेहद करीब होकर थिरकने लगे। देखते ही देखते पूरा डांस फ्लोर आपस में लिपटे हुए शरीरों और उनकी तेज होती सांसों के हुजूम में तब्दील हो गया।
## बेबाक स्पर्श और बदन की हलचल
चारों तरफ बढ़ती इस भीड़ और धीमे म्यूजिक के नशे में मोहित का अय्याश मन एक बार फिर जाग उठा। सिमी के दूध जैसे सफेद बदन की महक और उसके जिस्म की छुअन ने मोहित के भीतर की सारी बंदिशें तोड़ दी थीं। उसने देखा कि सिमी पूरी तरह से बेखबर, अपनी आँखें बंद किए उसके कंधे पर टिकी हुई है।
मोहित के कड़क हाथ धीरे-धीरे सिमी की पतली कमर से नीचे की ओर सरकने लगे। उसकी मजबूत उंगलियों ने सिमी की चमकदार काली पैंटी के किनारों को छुआ और फिर सीधे उसके भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। मोहित ने बिना कोई वक्त गंवाए, अपनी हथेलियों के पूरे दबाव के साथ सिमी के उन सुडौल, मखमली नितंबों को जोर-जबरदस्ती से मसलना शुरू कर दिया।
मुंबई की उमस और लगातार डांस की वजह से सिमी की त्वचा पसीने से पूरी तरह चिकनी और मखमली हो चुकी थी। पैंटी के तंग कपड़े के भीतर जब मोहित की उंगलियां सिमी के गदराए चूतड़ों को भींच रही थीं, तो उसकी काया का वह मुकम्मल हिस्सा इस दबाव से और भी ज्यादा गोल व सुडौल होकर पीछे की तरफ उभर आया।
## मासूमियत की मदहोशी और आख़िरी सुकून
शैलकुंज की वादियों में पली-बढ़ी सिमी के लिए यह अहसास बेहद अजीब, नया और किसी जादुई सम्मोहन जैसा था। उसने आज तक किसी पुरुष के हाथों का ऐसा कड़क और सीधा दबाव अपने बदन के सबसे खास हिस्सों पर महसूस नहीं किया था। जब मोहित की उंगलियां उसके भारी चूतड़ों की गोलाई को अपनी मुट्ठी में भींच रही थीं, तो सिमी के पूरे दूधिया बदन में एक तीव्र, मीठी सिहरन दौड़ गई।
इस अनोखे स्पर्श के नशे में सिमी ने कोई विरोध नहीं किया। इसके उलट, वह इस नए शहरी अहसास और पल को पूरी तरह से एंजॉय करने लगी।
* **दूधिया बदन का उभार:** इस जादुई सिहरन की वजह से आगे से उसकी सुडौल छाती और काली ब्रा में कैद उसके दोनों भरे हुए दूध मोहित के सीने से और ज्यादा कसकर भींच गए। हवा और उत्तेजना की वजह से उसके काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल ब्रा के पतले कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब दिखने लगे।
* **पूर्ण समर्पण:** सिमी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें पूरी तरह से बंद कर लीं। उसने एक गहरी और मदहोश सांस ली और अपने पूरे वजूद का बोझ मोहित के मजबूत कंधों पर छोड़ते हुए, अपना सिर उसके गले के पास और गहरे से टिका दिया।
चारों तरफ लोग नाच रहे थे, धीमा संगीत बज रहा था, और पहाड़ों की यह अल्हड़, निश्छल तितली मुंबई की इस सबसे अय्याश पार्टी के बीचोबीच, अपनी उसी काली ब्रा और पैंटी में, दुनिया के सारे नियमों से परे एक नई और अंजान दुनिया के सुख में पूरी तरह खोई हुई थी।
## अध्याय: संगीत की आखिरी थाप और मोहित का अहंकार
पार्टी का धीमा संगीत अब अपने आखिरी मुकाम पर था। धुंधली और रंग-बिरंगी लाइटों के साए में पूरा स्टेज आपस में लिपटे हुए जोड़ों से भरा हुआ था। मोहित, जो खुद को शहर का सबसे बड़ा खिलाड़ी समझता था, इस समय पूरी तरह से घमंड और जीत के नशे में चूर था। उसके लिए सिमी का यह बेबाक रूप और उसकी यह छुअन उसकी नई फतह जैसी थी।
उसने अपने हाथों की ताकत को और बढ़ाया और सिमी की काली पैंटी के भीतर कैद उसके भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ों को रबर की तरह पूरी ताकत से मसल कर रख दिया। मुंबई की उमस से चिकनी हो चुकी सिमी की दूधिया त्वचा पर मोहित की उंगलियों के कड़क निशान छप रहे थे। इस तीखे और बेबाक स्पर्श के दबाव से सिमी के नितंबों का वह गदराया हुआ उभार मोहित की हथेलियों के बीच पूरी तरह से भींच गया, मानो मोहित इस पूरे बदन पर अपना हक जता रहा हो।
मोहित के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान तैर गई। उसने स्टेज के नीचे खड़े कबीर और बाकी दोस्तों की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सा घमंड था, मानो वह चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा हो कि उसने पहाड़ों की इस आज़ाद तितली को भी अपने इशारों पर नचा दिया है और उस पर अपनी पूरी जीत दर्ज कर ली है।
## बेखबर रूह और पहाड़ों की सादगी
लेकिन इस तथाकथित जीत के पीछे का सच बिल्कुल जुदा था। मोहित जिसे अपनी मर्दानगी और चालाकी की 'जीत' समझ रहा था, वह असल में सिमी की तरफ से दिया गया एक बेहद अबोध और निश्छल समर्पण था। सिमी के मन में न तो कोई पाप था, न कोई शहरी चालाकी और न ही इस स्पर्श का कोई अश्लील मतलब।
* **मासूमियत का आलम:** वह अभी भी अपनी आँखें बंद किए, पूरी तरह से बेफिक्र होकर मोहित के कंधे पर अपना सिर टिकाए हुए थी।
* **बदन की स्थिति:** मोहित के हाथों के कड़े दबाव के कारण उसकी सुडौल छाती और काली ब्रा में कैद उसके दोनों भरे हुए दूध मोहित के सीने पर लगातार ऊपर-नीचे हो रहे थे, और उसके काले निप्पल उसकी गहरी सांसों के साथ थिरक रहे थे।
सिमी ने अपनी आँखें धीरे से खोलीं, मोहित के चेहरे की तरफ देखा और अपनी वही चुलबुली, निश्छल मुस्कान बिखेरते हुए बोली, "अरे ओ शहरी बाबू! तुम तो बहुत थक गए लगते हो, तुम्हारी सांसें इतनी तेज़ क्यों चल रही हैं? पहाड़ों में जब हम थक जाते हैं, तो ठंडी छांव में बैठ जाते हैं। चलो, अब मुझे थोड़ी ठंडी हवा में ले चलो।"
उसकी इस बात ने मोहित के अहंकार को पल भर में झकझोर कर रख दिया। वह समझ गया कि उसने भले ही उसके बदन को अपनी मुट्ठी में भींच लिया हो, लेकिन इस लड़की की रूह और उसकी आज़ादी आज भी उतनी ही निश्छल और अछूती थी, जिसे दुनिया का कोई भी अय्याश कभी गुलाम नहीं बना सकता था। सिमी अपनी उसी काली ब्रा और पैंटी में, मुंबई की इस सबसे बड़ी पार्टी को अपने ही भोलेपन से जीत चुकी थी।
## अध्याय: पार्टी से विदाई और कबीर का साथ
मोहित की बाहों और स्टेज के उस तेज शोर-शराबे से खुद को अलग करते हुए, सिमी ने एक गहरी सांस ली। अब उसे थोड़ी थकान महसूस होने लगी थी। मुंबई की चकाचौंध और यह भारी पार्टी उसके लिए एक मजेदार तमाशा थी, लेकिन अब उसका चुलबुला मन वापस अपनी शांत दुनिया की तरफ लौटने को बेताब था।
वह अपनी उसी सदाबहार पोशाक—काली ब्रा और पैंटी में, अपनी पतली कमर को मटकाती हुई स्टेज से नीचे उतरी और सीधे कबीर के पास जा पहुँची, जो एक कोने में खड़ा उसे ही देख रहा था।
सिमी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं, कबीर का हाथ पकड़ा और बेहद लाड और मासूमियत से भरी आवाज में बोली, "चल बाबू, बहुत खेल लिया। अब मुझे घर छोड़ दे। मुझे मेरी माँ के पास जाना है, वो मेरा इंतजार कर रही होंगी।"
कबीर ने सिमी के उस दूध जैसे सफेद, पसीने से चमकते बदन को देखा। उसकी सुडौल छाती पर उभरे काले निप्पल और उसकी सादगी ने कबीर के दिल में हवस की जगह एक अजीब सा आदर पैदा कर दिया था। उसने मोहित और बाकी दोस्तों की तरफ देखा, अपनी बाइक की चाबी निकाली और बोला, "हाँ सिमी, चलो। मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ।"
## अध्याय: रात का सफर और घर की दहलीज
कबीर ने एक बार फिर अपनी भारी स्पोर्ट्स बाइक स्टार्ट की। सिमी मुस्कुराती हुई उसकी पिछली ऊंची सीट पर बैठ गई। रात की ठंडी और नम समुद्री हवा सीधे सिमी के अर्धनग्न बदन से टकरा रही थी, जिससे उसके सुडौल दूध हवा के थपेड़ों के साथ हल्के से थिरक रहे थे और उसके चूतड़ बाइक के झटकों के साथ पैंटी के भीतर हिल रहे थे। उसने कबीर को पीछे से कसकर पकड़ लिया और मुंबई की चमचमाती सड़कों को पार करते हुए वे सिमी के घर पहुँच गए।
जैसे ही बाइक सिमी के घर के बाहर रुकी, सिमी कूदकर नीचे उतरी, जिससे उसके भरे हुए अंग हवा में एक सुंदर लय में उछल पड़े।
"थैंक यू, कबीर बाबू!" सिमी ने हंसते हुए कहा और दौड़कर सीधे घर के अंदर चली गई।
## अध्याय: माँ की आगोश में सुकून
घर के भीतर दीये की मद्धम रोशनी जल रही थी और पार्वती अपनी बेटी का ही इंतजार कर रही थी। सिमी को सही-सलामत वापस आया देख उसकी आँखों में तसल्ली के आंसू आ गए।
"माँ!" सिमी चिल्लाई और सीधे दौड़कर अपनी माँ के गले से लग गई।
जब वह अपनी माँ की छाती से चिपकी, तो उसका पूरा दूधिया, बेदाग बदन और उसकी काली ब्रा-पैंटी माँ के आंचल में समा गई। दिनभर की सारी थकान, कॉलेज का पहला दिन, रॉकी के होठों का रस, और मोहित का वह बेबाक स्पर्श—सब कुछ जैसे माँ की एक छुअन से शांत हो गया।
पार्वती ने अपनी 18 साल की जवान बेटी के सिर को चूमा, उसके पसीने से भीगे बदन को सहलाया और कहा, "आ गई मेरी लाडो। बहुत थक गई है न? चल, अब सो जा।"
सिमी ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं। दुनिया उसे चाहे जिस नजर से देखे, वह चाहे मुंबई के सबसे बड़े कॉलेज में जाए या किसी अमीर पार्टी में, अपनी माँ की आगोश में वह आज भी वही शैलकुंज की नन्ही, निष्पाप तितली थी, जिसकी पवित्रता को शहर की कोई भी चालाकी छू तक नहीं सकती थी। अपनी माँ का हाथ थामे, सिमी अपनी उसी काली ब्रा और पैंटी में गहरी और सुकून भरी नींद की आगोश में सो गई।
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## अध्याय: नए दिन की शुरुआत और कैंपस में खलबली
रात भर माँ की आगोश में सुकून की नींद सोने के बाद, अगली सुबह सिमी एक नई ताज़गी के साथ उठी। मुंबई की चकाचौंध और पिछले दिन की बैचलर पार्टी का हैंगओवर उसके मासूम ज़हन पर रत्ती भर भी नहीं था। उसके लिए हर सुबह एक नया खेल और हर राह एक नई पगडंडी जैसी थी।
सूरज की खिली हुई सुनहरी धूप जब सेंट जेवियर्स कॉलेज के विशाल कैंपस पर बिखरी, तो सिमी ने एक बार फिर अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कॉलेज के मुख्य द्वार से भीतर कदम रखा। पहाड़ों की इस अल्हड़ सुंदरी ने हमेशा की तरह शहर के तंग और दम घोटने वाले कपड़ों को हाथ तक नहीं लगाया था। वह अपनी उसी पसंदीदा, जिस्म से चिपकी चमकदार काली ब्रा और मैचिंग पैंटी में बड़ी बेबाकी से आगे बढ़ रही थी।
सुबह की ताज़ी हवा के हल्के झोंके जैसे ही उसके दूध जैसे सफेद, बेदाग बदन से टकराए, सिमी के पूरे वजूद में एक मीठी सिहरन दौड़ गई। इस ठंडी छुअन के कारण उसकी सुडौल, गदराए हुए दूध और भी कड़क हो गए, और ब्रा के पतले कपड़े को अंदर से धकेलते हुए उसके काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल दूर से ही साफ़ नजर आने लगे। अपनी पतली कमर को मटकाती हुई जब वह आगे बढ़ी, तो पैंटी के भीतर कैद उसके भारी और गोल-मटोल चूतड़ों की सुंदर थिरकन को देख कैंपस में मौजूद सैकड़ों छात्र-छात्राओं की निगाहें वहीं थम गईं।
## अध्याय: रॉकी की पुकार और सिमी की चंचलता
सिमी अभी कॉरिडोर की तरफ बढ़ ही रही थी कि तभी कॉलेज के पार्किंग लॉट की तरफ से एक दमदार आवाज गूंजी:
"हे सिमी! ज़रा रुको!"
सिमी ने मुड़कर देखा। यह रॉकी था—कॉलेज का वही हैंडसम और रईस स्टड, जिसने कल पूरे कॉलेज के सामने सिमी के रसीले होठों का सारा रस पी लिया था। रॉकी अपनी चमचमाती खुली जीप के बोनट पर टेक लगाए खड़ा था। आज उसकी आँखों में कल जैसी सिर्फ अय्याशी नहीं, बल्कि सिमी के इस अलमस्त और बेबाक रूप के लिए एक गहरा आकर्षण और बेचैनी साफ झलक रही थी। वह रात भर सिमी के उन गुलाबी होठों के स्वाद और उसके दूधिया बदन की महक को भुला नहीं पाया था।
रॉकी ने हाथ के इशारे से सिमी को अपने पास बुलाया।
सिमी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं, अपने दोनों हाथ अपने भारी चूतड़ों पर रखे—जिससे उसकी पैंटी के भीतर नितंबों का उभार और भी मुकम्मल और तीखा दिखने लगा—और खिलखिलाकर हंसते हुए बोली, "अरे, रॉकी बाबू! तुम इतनी सुबह-सुबह गाड़ी पर बैठकर क्या कर रहे हो? क्या आज फिर कोई नया शहरी खेल खेलना है?"
उसकी इस बेहद मासूम और बेफिक्र बात को सुनकर रॉकी के चेहरे पर एक दिलकश मुस्कान आ गई। वह अपनी जीप से उतरा और सीधे उस अर्धनग्न पहाड़ी तितली की तरफ बढ़ने लगा, जिसके भोलेपन और कातिलाना बदन ने पूरे सेंट जेवियर्स कॉलेज के लड़कों के होश उड़ा रखे थे।
## अध्याय: कैंपस की नज़रों में एक और दावत
कॉलेज के पार्किंग लॉट में रॉकी और सिमी के बीच की यह हलचल कॉलेज के छात्रों के लिए किसी आकर्षण के केंद्र से कम नहीं थी। रॉकी, जो अपनी रईसी और तेवर के लिए पूरे मुंबई में मशहूर था, आज अपनी पूरी ताकत के साथ सिमी की ओर बढ़ा।
जैसे ही वह सिमी के करीब पहुँचा, रॉकी ने बिना किसी संकोच के अपने दोनों हाथों से सिमी के चेहरे को अपनी हथेलियों में थाम लिया। उसके अंगूठों ने सिमी के गालों की मखमली और दूधिया त्वचा को सहलाया। सिमी ने भी कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वह रॉकी के सामने एक नन्हीं बच्ची की तरह शांत खड़ी रही। रॉकी ने अपनी आँखें बंद कीं और पूरी शिद्दत के साथ अपने होंठ सिमी के गुलाबी और रसीले होठों पर रख दिए।
रॉकी ने इस बार सिमी के होठों को चूसते हुए उसमें एक गहरी भूख दिखाई। वह सिमी के होठों के रसीले स्वाद को जैसे अपने अंदर समा लेना चाहता था। सिमी के लिए यह स्पर्श कल के मुकाबले और भी गहरा और रोमांचक था। उसके दूध जैसे सफेद बदन में इस छुअन से एक ज़बरदस्त हलचल पैदा हो गई। उसकी सुडौल छाती पर मौजूद काले निप्पल ब्रा के पतले कपड़े के आर-पार और भी कड़क और तीखे होकर उभर आए, और उसकी तेज होती सांसों के साथ उसका पूरा वजूद हिलने लगा।
## अध्याय: रसीली छुअन और रॉकी का दीवानापन
रॉकी ने सिमी के होठों का सारा रस निचोड़ना जारी रखा। सिमी ने रॉकी की शर्ट को अपनी छोटी-छोटी उंगलियों से कसकर पकड़ लिया, जिससे आगे से उसके भरे हुए अंग रॉकी के सीने से और भी गहराई से भींच गए। रॉकी के हाथों के दबाव से सिमी का सिर पीछे की ओर थोड़ा झुक गया, जिससे उसकी सुराहीदार गर्दन और उसका गोरा बदन और भी कामुक लग रहा था।
कैंपस की खिड़कियों से झांकते और कॉरिडोर में खड़े दर्जनों छात्र इस नज़ारे को सांसें रोककर देख रहे थे।
* **रॉकी का जुनून:** उसने सिमी के होठों को छोड़ते हुए उसके निचले होंठ को अपने दांतों से हल्का सा भींचा, जिससे सिमी के होठों की लाली और भी गहरा गई। रॉकी की आँखों में अब सिर्फ दीवानगी थी।
* **सिमी का भोलापन:** जब रॉकी ने उसे थोड़ा मुक्त किया, सिमी के होंठ अब हल्के से सूज गए थे और उसकी आँखों में एक अजीब सी मदहोशी थी। उसने रॉकी के सीने पर अपना हाथ रखा, उसे हल्के से धक्का दिया और अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को नचाते हुए बोली, "रॉकी बाबू! तुम तो बहुत जल्दी प्यासे हो जाते हो! तुम्हारा यह खेल तो पानी पीने से भी ज्यादा रसीला है!"
रॉकी अपनी हंसी नहीं रोक पाया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि सिमी की यह मासूमियत असली है या कोई ऐसी कला जो बड़े-बड़े खिलाड़ियों के पसीने छुड़ा दे। उसने एक बार फिर सिमी को अपनी बाहों में कस लिया, और इस बार वह उसे लेकर सीधे कॉलेज के उस एकांत गार्डन की ओर चल पड़ा, जहाँ आज कोई उसे रोक नहीं सकता था। रॉकी को एहसास हो चुका था कि सिमी केवल एक खूबसूरत शरीर नहीं, बल्कि एक ऐसा नशा है जिसे वह बार-बार चखना चाहता था।
## अध्याय: जीप के बोनट पर चुलबुली छेड़छाड़
रॉकी ने जैसे ही सिमी के होठों को आज़ाद किया, उसने एक पल की भी देरी नहीं की। सिमी की उस मदहोश कर देने वाली मुस्कान को देखकर उसने झुककर सिमी को सीधे अपनी मजबूत बाहों में उठा लिया। रॉकी ने उसे अपनी गोद में समेटकर अपनी खुली जीप के बोनट पर बिठा दिया।
जब सिमी जीप के बोनट पर बैठी, तो उसकी चमकदार काली पैंटी में कैद उसके भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ बोनट के ठंडे लोहे पर पूरी तरह से फैल गए। सुबह की धूप सीधे उसके दूध जैसे सफेद, बेदाग बदन पर पड़ रही थी, जिससे उसकी मखमली त्वचा कुंदन की तरह चमक रही थी। सिमी अपनी इस अर्धनग्न अवस्था में भी ज़रा भी नहीं झिझकी; बल्कि वह रॉकी की गोद के सहारे बैठी मुस्कुराती हुई अपनी बड़ी-बड़ी आँखें नचाने लगी।
उसने अपनी उंगली से रॉकी की नाक को हल्के से छुआ और अपनी पतली कमर को मटकाते हुए चुलबुले अंदाज़ में उसे छेड़ने लगी:
"अरे ओ रॉकी बाबू! तुम तो बड़े लालची निकले। रोज सुबह-सुबह आकर मेरा रास्ता रोक लेते हो और मेरे होठों को ऐसे चूसते हो जैसे पहाड़ों में बच्चे आम चूसते हैं! क्या तुम्हें शहर में खाने को कुछ नहीं मिलता जो रोज़ मेरा ही रस पीने चले आते हो?"
उसकी इस बेहद बेबाक और भोली बात को सुनकर रॉकी का सारा कड़कपन हवा हो गया और वह सिमी की इस मासूम शरारत पर पूरी तरह लट्टू हो गया।
## अध्याय: रॉकर्स ग्रुप का धावा और ठहाके
सिमी अभी रॉकी को छेड़ ही रही थी कि तभी कॉरिडोर की तरफ से तालियों और सीटियों की गूंज सुनाई दी। कबीर, मोहित, तान्या और उनके रॉकर्स ग्रुप के बाकी तमाम रईस लड़के-लड़कियाँ हाथों में कॉफी के मग लिए वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने पार्किंग लॉट में चल रहे इस खुले रोमांस को अपनी आँखों से देख लिया था।
कबीर ने आगे बढ़कर रॉकी के कंधे पर हाथ मारा और हंसते हुए कहा:
> "वाह रॉकी! मान गए भाई तुझे! कल रात को मोहित इसके चूतड़ों को मसल रहा था, और आज सुबह होते ही तूने फिर बाजी मार ली। आज तो तूने पूरे कॉलेज के सामने फिर से हमारी इस पहाड़ी तितली के होठों का सारा रस पी लिया!"
तान्या ने भी अपनी सनग्लासेस हटाते हुए चुटकी ली, "सीरियसली रॉकी, इस लड़की के होंठ तो सचमुच गुलाब की पंखुड़ियां हैं, तभी तो तू अपनी सारी गर्लफ्रेंड्स को भूलकर रोज सुबह इसका रस पीने आ जाता है।"
## अध्याय: रॉकी की बेबाक हंसी
अपने दोस्तों की ये बातें सुनकर रॉकी के चेहरे पर एक ज़बरदस्त गर्व और खुशी की चमक आ गई। उसने जीप के बोनट पर बैठी सिमी की तरफ देखा, जिसके भरे हुए, सुडौल दूध उसकी गहरी सांसों के साथ ब्रा के पतले कपड़े के भीतर सुंदर लय में थिरक रहे थे और उसके कड़क काले निप्पल सीधे बाहर की तरफ झांक रहे थे।
रॉकी ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा। उसकी हंसी में कोई चालाकी नहीं, बल्कि सिमी को अपने इतने करीब पाने का एक अनजाना सा सुकून था।
"तुम लोग बस देखते ही रह जाओगे!" रॉकी ने अपने दोस्तों की तरफ देखकर हंसते हुए कहा, "इस पहाड़ी कयामत का रस ही ऐसा है कि जो एक बार चख ले, वह अपना सब कुछ भूल जाए।"
सिमी उन सबकी बातें सुन रही थी, लेकिन हमेशा की तरह उसे 'रस' और 'बाज़ी मारने' जैसी शहरी बातों की गहराई का कोई अंदाज़ा नहीं था। वह तो बस उन रईस लड़कों के बीच अपनी ही अलमस्त धुन में मुस्कुरा रही थी, मानो पूरे सेंट जेवियर्स कॉलेज का यह वीआईपी ग्रुप उसका अपना कोई नया खिलौना हो।
रॉकी और उसके दोस्तों के ठहाकों के बीच पार्टी और मस्ती का माहौल अचानक एक बेहद संजीदा और संवेदनशील मोड़ पर आ गया। रॉकर्स ग्रुप में शामिल अमित नाम का एक और लड़का, जो अब तक शांत खड़ा सिमी के बेबाक बदन को घूर रहा था, अचानक आगे बढ़ा। माहौल की मर्यादा को पूरी तरह भूलकर, उसने सीधे सिमी की चमकदार काली पैंटी के किनारों को पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ खींचने की कोशिश करने लगा।
जैसे ही अमित की कड़क उंगलियों का वह अनुचित दबाव सिमी की पैंटी पर पड़ा, वैसे ही वहाँ खड़े पूरे ग्रुप की हंसी पल भर में गायब हो गई।
सिमी, जो अब तक हर शहरी बात को महज़ एक मासूम खेल समझ रही थी, इस अचानक और सीधे हमले से बुरी तरह चौंक गई। उसके दूध जैसे सफेद बदन में एक ठंडी घबराहट दौड़ गई। उसकी सुडौल छाती और ब्रा में कैद उसके दोनों भरे हुए अंग डर के मारे तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगे, और उसकी आँखों की चुलबुली मस्ती गायब होकर गहरे अचरज और सहम में बदल गई। उसने तुरंत अमित के हाथों को पीछे धकेलने की कोशिश की और लड़खड़ाती आवाज़ में बोली, "अरे! यह क्या बदतमीज़ी है? छोड़ो मुझे... यह कैसा खेल है!"
अमित की इस घिनौनी हरकत को देखकर रॉकी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। रॉकी भले ही बिगड़ैल और आवारा था, और सिमी के होठों का रस चखना पसंद करता था, लेकिन वह सिमी की निश्छल मासूमियत और उसके भरोसे की कद्र करता था। वह किसी भी लड़की के साथ, खासकर सिमी के साथ इस तरह की सरेआम ज़बरदस्ती बर्दाश्त नहीं कर सकता था।
रॉकी ने बिना एक पल गंवाए अमित का कॉलर पकड़ा और उसे पूरी ताकत से पीछे की तरफ धक्का दे दिया, जिससे अमित लड़खड़ाकर जीप से दूर जा गिरा।
"बस अमित! अपनी हद में रहो!" रॉकी ने अपनी आवाज़ को बेहद कड़ा और खूंखार बनाते हुए चेतावनी दी, "सिमी कोई बाज़ारू खिलौना नहीं है जिसे तुम इस तरह हाथ लगाओ। अपनी गंदी हरकतें यहाँ मत दिखाओ, वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।"
कबीर और मोहित भी तुरंत आगे आ गए और उन्होंने अमित को पीछे हटने का इशारा किया। पूरे कैंपस के पार्किंग लॉट में एक गहरा सन्नाटा पसर गया। रॉकी ने तुरंत जीप के बोनट पर बैठी सिमी को संभाला, जो अपनी काली ब्रा और पैंटी में थोड़ी डरी हुई खड़ी थी। रॉकी ने बड़े प्यार से उसका हाथ थामा और उसे तसल्ली देते हुए शांत कराया, जिससे सिमी को अहसास हुआ कि इस मतलबी शहर में भी उसके वजूद की हिफ़ाज़त करने वाले लोग मौजूद थे।
तनाव का वह पल बीतते ही रॉकर्स ग्रुप का मूड एक बार फिर हल्के-फुल्के अंदाज में बदल गया। कॉलेज के इन रईस और बेफिक्र लड़कों के लिए कोई भी बात ज्यादा देर तक गंभीर नहीं रहती थी। अमित ने हंसते हुए अपने हाथ ऊपर कर दिए, मानो वह कह रहा हो कि वह तो बस मज़ाक कर रहा था। इसके बाद पूरा ग्रुप एक साथ ठहाके लगाता हुआ कॉलेज की आलीशान कैंटीन की तरफ बढ़ गया, ताकि सुबह का ब्रेकफास्ट किया जा सके।
कैंटीन का माहौल बेहद आधुनिक और खुशनुमा था। चारों तरफ सैंडविच, पास्ता और गरमा-गरम कॉफी की खुशबू फैली हुई थी। ग्रुप ने कैंटीन के केंद्र में स्थित अपनी फिक्स वीआईपी टेबल संभाली।
वहाँ बैठते ही, अमित सिमी के भोलेपन और उसके दूध जैसे सफेद बदन के आकर्षण में फिर से खिंचा चला आया। उसने मुस्कुराते हुए सिमी का हाथ पकड़ा और उसे सीधे अपनी गोद में बिठा लिया। सिमी, जो पहाड़ों की खुली वादियों से आई थी और जिसके मन में किसी के लिए कोई कड़वाहट या बैर टिकता ही नहीं था, वह अमित की पिछली हरकत को भूलकर एक बार फिर अपनी उसी अलमस्त धुन में उसकी गोद में बैठ गई।
जब सिमी अमित की जांघों पर बैठी, तो उसकी काली पैंटी में कैद उसके भारी और गोल-मटोल चूतड़ अमित के जिस्म से पूरी तरह सट गए। सुबह की भूख और कैंटीन की गहमा-गहमी के बीच, सिमी की सुडौल छाती और काली ब्रा में भरे उसके दोनों दूध अमित के चेहरे के ठीक सामने थिरक रहे थे। ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर उभरे उसके काले, कड़क निप्पल उसकी हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
अमित अब सिमी की मासूमियत का पूरी तरह दीवाना हो चुका था। ब्रेकफास्ट की प्लेट्स आने से पहले, वह लगातार झुककर सिमी के मखमली, दूधिया गालों पर अपनी पप्पियाँ लेने लगा। वह कभी उसके दाएं गाल को चूमता तो कभी बाएं गाल पर अपने होंठ रख देता।
सिमी को अमित की इस नई छुअन और बार-बार पप्पी लेने के अंदाज पर बड़ी ज़ोर से गुदगुदी होने लगी। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं, अपनी पतली कमर को अमित की गोद में ही थोड़ा मटकाया और खिलखिलाकर हंसते हुए बोली:
"अरे ओ अमित बाबू! तुम तो नाश्ता करने आए थे, पर तुम तो मेरे गालों को ही रसगुल्ला समझकर चखे जा रहे हो! रुको, मुझे भी वो मीठी कॉफी पीने दो, मुझे बहुत भूख लगी है!"
उसकी इस चुलबुली और बेबाक बात को सुनकर पूरी टेबल पर एक बार फिर हंसी का फव्वारा छूट पड़ा। रॉकी, कबीर और मोहित अपनी-अपनी कॉफी के कप उठाए सिमी के इस अलमस्त अंदाज़ को देख मुस्कुरा रहे थे। पहाड़ों की यह आजाद तितली अपनी उसी काली ब्रा और पैंटी में, शहर के सबसे अमीर लड़कों की गोद में बैठकर, पूरे कैंटीन के सामने नाश्ते के इस पल का पूरा आनंद ले रही थी।
## अध्याय: रॉकर्स ग्रुप की रज़ामंदी और नया खिताब
कैंटीन की वीआईपी टेबल पर ब्रेकफास्ट का दौर जारी था। सैंडविच और गरमा-गरम कॉफी के कप्स के बीच, पूरा ग्रुप केवल सिमी के इस बेबाक बदन और उसकी जादुई मासूमियत की चर्चा में डूबा हुआ था। अमित की गोद में बैठी सिमी अपनी कॉफी का मज़ा ले रही थी, जबकि ग्रुप के लड़के उसे अपने बीच पाकर बेहद उत्साहित थे।
रॉकी ने अपनी कॉफी का कप टेबल पर रखा, अपनी शर्ट के कॉलर को थोड़ा ठीक किया और गर्व से हंसते हुए पूरे ग्रुप की तरफ देखा:
> "यार! तुम सब गवाह हो, मैंने इस पहाड़ी कयामत के गुलाबी होठों का सारा रस एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार पिया है। इसका अंदाज़ सबसे अलग है। और अब सिमी भी हमारे इस 'रॉकर्स ग्रुप' का हिस्सा है, इसे आज से कोई कुछ नहीं कहेगा!"
अमित, जो इस समय सिमी को अपनी गोद में संभाले हुआ था, उसने रॉकी की बात सुनते ही सिमी के मखमली, दूधिया गाल पर एक और गहरी पप्पी ली। सिमी के चेहरे को चूमते हुए अमित ने मुस्कुराकर रॉकी की तरफ देखा और बोला:
"भाई, मैं तो सौ प्रतिशत राज़ी हूँ! ऐसी मलाई जैसी गोरी रंगत और इतना चुलबुला अंदाज़ हमारे ग्रुप की शान बढ़ा देगा। आज से सिमी हमारी ऑफिशियल मेंबर है!"
## पुरानी यादें और रॉकर्स की मुहर
अमित और रॉकी की बातें सुनकर, टेबल के दूसरे कोने पर बैठा मोहित भी अपनी हंसी नहीं रोक पाया। उसने कल रात की बैचलर पार्टी के उस मदहोश कर देने वाले माहौल को याद किया, जब चारों तरफ अंधेरा था और धीमा संगीत बज रहा था।
मोहित ने अपनी आँखें मटकाईं और सिमी के सुडौल बदन को देखते हुए बेबाकी से कहा:
"यार, बिल्कुल सही फैसला है! मैंने कल रात की बैचलर पार्टी में इसके भारी और गोल-मटोल चूतड़ों को सोफे पर और स्टेज पर रबर की तरह मसल कर रख दिया था। इसका बदन जितना सुडौल है, इसका दिल उतना ही साफ़ है। इसलिए मैं भी पूरी तरह से राज़ी हूँ!"
तभी कबीर, जो सिमी को बाइक पर बिठाकर अपनी गोद का अहसास करा चुका था, उसने भी अपनी कॉफी का घूंट लिया और मुस्कुराते हुए हामी भर दी:
"जब तुम सब तैयार हो, तो मैं कैसे पीछे रह सकता हूँ? सिमी हमारे ग्रुप का सबसे खूबसूरत हिस्सा बनेगी।"
## सिमी का अलमस्त अंदाज़
ग्रुप के सभी लड़कों ने एक-एक करके सिमी को रॉकर्स ग्रुप में शामिल करने की पूरी मुहर लगा दी थी। सिमी अमित की जांघों पर बैठी इन सबकी बातें सुन रही थी। जब मोहित ने चूतड़ों को मसलने की बात कही, तो उसे कल रात की वो मीठी सिहरन याद आ गई, जिससे उसकी सुडौल छाती और काली ब्रा में भरे उसके दोनों दूध हल्के से तन गए और उसके काले निप्पल ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर और कड़क हो गए।
उसने अमित की गोद में ही अपनी पतली कमर को थोड़ा मटकाया, अपनी बड़ी-बड़ी आँखें घुमाईं और चहक कर बोली:
"अरे वाह! तुम सब शहरी बाबू तो बहुत अच्छे हो। पहाड़ों में जब हम किसी टोली में शामिल होते हैं, तो मिलकर नाचते हैं। चलो, अब मेरा नाश्ता खत्म हो गया है, मुझे पूरा कॉलेज घूमकर देखना है!"
उसकी इस निश्छल और बेबाक बात पर पूरी टेबल पर एक बार फिर ठहाका गूंज उठा। रॉकर्स ग्रुप की सभी गर्लफ्रेंड्स भी मुस्कुरा रही थीं। सिमी अपनी उसी सदाबहार चमकदार काली ब्रा और पैंटी में, शहर के सबसे अमीर और रईस लड़कों की टोली की रानी बन चुकी थी, और उसकी नई कॉलेज लाइफ का यह सफर अब और भी मजेदार होने वाला था।
## अध्याय: अमित का दांव और होठों की नई दावत
कैंटीन की मेज पर सिमी को रॉकर्स ग्रुप का ऑफिशियल मेंबर घोषित किए जाने का जश्न अभी थमा भी नहीं था कि अमित ने मौके का पूरा फायदा उठाया। सिमी अभी अपनी कॉफी खत्म करके मुस्कुरा ही रही थी कि अमित ने बेहद फुर्ती से अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और उसके नाजुक, दूधिया चेहरे को अपनी उंगलियों के घेरे में ले लिया।
अमित ने सिमी को संभलने का कोई मौका नहीं दिया। उसने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और सीधे सिमी के उन गुलाबी, रसीले होठों पर अपने होंठ जमा दिए।
अमित बड़ी शिद्दत और बेबाकी से सिमी के होठों का सारा रस पीने लगा। पहाड़ों की इस अलमस्त सुंदरी के होठों का स्वाद इतना मीठा और ताजा था कि अमित उनमें पूरी तरह खो गया। अमित की गोद में बैठी सिमी के पूरे बदन में इस अचानक हुए हमले से एक मीठी सिहरन दौड़ गई। उत्तेजना और कशिश के मारे आगे से उसकी सुडौल छाती और काली ब्रा में कैद उसके दोनों भरे हुए दूध अमित के सीने से पूरी तरह भींच गए। हवा और इस बेबाक स्पर्श के कारण उसके दोनों दूध पर सजे काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर और ज्यादा कड़क होकर बाहर की तरफ उभर आए।
सिमी ने इस नए शहरी स्वाद का विरोध नहीं किया। उसने अपनी आँखें आधी बंद कर लीं और अमित के चौड़े कंधों पर अपने हाथ टिकाकर इस पल को महसूस करने लगी। पीछे से उसकी पैंटी में कैद उसके भारी, गोल-मटोल चूतड़ अमित की जांघों पर पूरी तरह से फैल गए थे।
## अध्याय: रॉकर्स ग्रुप की नई प्लानिंग
एक तरफ जहाँ अमित पूरी महफिल के सामने सिमी के होठों का रस चूसने में व्यस्त था, वहीं दूसरी तरफ टेबल पर बैठे रॉकी, कबीर और मोहित इस नजारे को देखकर हंस रहे थे और आज के दिन को और भी यादगार बनाने की प्लानिंग में जुट गए थे।
रॉकी ने अपनी सिगरेट सुलघाई और टेबल पर झुकते हुए कहा, "भाई! अब जब सिमी हमारे ग्रुप में आ ही गई है, तो आज का बंक (क्लास छोड़ना) तो बनता है। बताओ, आज इस पहाड़ी तितली को लेकर कहाँ घूमने चलें?"
ग्रुप के बीच नए-नए आइडियाज पर चर्चा होने लगी:
* **मोहित का सुझाव:** "यार, आज मौसम बहुत गजब का है। क्यों न हम सब सीधे मड आइलैंड वाले मेरे प्राइवेट बीच हाउस पर चलें? वहाँ पूल भी है और हम सब बिना किसी रोक-टोक के पार्टी कर सकते हैं।"
* **कबीर की राय:** "बीच हाउस सही है, लेकिन उससे पहले हमें मरीन ड्राइव पर लॉन्ग ड्राइव का मजा लेना चाहिए। सिमी को मेरी स्पोर्ट्स बाइक की रफ्तार बहुत पसंद है!"
* **रॉकी का अंतिम फैसला:** "डन है! पहले हम सब गाड़ियों और बाइक्स से मरीन ड्राइव की ठंडी हवा खाएंगे, और फिर सीधे मोहित के लक्जरी बीच हाउस पर चलेंगे, जहाँ आज पूरा दिन और रात सिर्फ हमारी मस्ती होगी।"
## अध्याय: सिमी की अलमस्त रज़ामंदी
जब अमित ने आखिरकार सिमी के रसीले होठों को आज़ाद किया, तो सिमी के होंठ पूरी तरह से लाल और सूज चुके थे। उसने अपनी जीभ से अपने होठों को छुआ, अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाईं और अमित की गोद में ही अपनी पतली कमर को मटकाते हुए चहकी:
> "अरे ओ अमित बाबू! तुम तो रॉकी बाबू से भी ज्यादा भूखे निकले! तुमने तो मेरे होठों का सारा रस ही निचोड़ लिया। पर सुनो, तुम सब कहाँ जाने की बात कर रहे हो? क्या तुम मुझे उस समंदर वाले बड़े घर में ले जाओगे? चलो-चलो, मुझे पानी में छपाक-छपाक खेलना बहुत पसंद है!"
उसकी इस बेहद मासूम और बेबाक बात को सुनकर अमित, रॉकी और पूरे रॉकर्स ग्रुप ने एक साथ ज़ोरदार ठहाका लगाया। पूरी कैंटीन इस अमीर और बिगड़ैल ग्रुप के तेवर देख रही थी। सिमी अपनी उसी सदाबहार चमकदार काली ब्रा और पैंटी में, अमित की गोद से उतरी और इन सब रईस लड़कों के साथ मुंबई की सड़कों पर एक और बेबाक सफर के लिए तैयार हो गई।
## अध्याय: मरीन ड्राइव की ओर कूच और सिमी का नया शौक
कैंटीन में मरीन ड्राइव जाने का प्लान बनते ही पूरा रॉकर्स ग्रुप अपनी-अपनी महंगी गाड़ियाँ और हैवी स्पोर्ट्स बाइक्स लेकर कॉलेज पार्किंग की तरफ बढ़ गया। सिमी अपनी उसी सदाबहार पोशाक—चमकदार काली ब्रा और पैंटी में, अपनी पतली कमर मटकाती हुई लड़कों के साथ चल रही थी।
पार्किंग लॉट में पहुँचते ही अमित की भारी और स्टाइलिश स्पोर्ट्स बाइक को देखकर सिमी की आँखें चमक उठीं। पहाड़ों के कच्चे रास्तों पर तो उसने कभी गाड़ी नहीं चलाई थी, लेकिन इस चमचमाती शहरी मशीन को देखकर उसका अल्हड़ मन मचल उठा।
"अरे अमित बाबू! आज यह बड़ी गाड़ी मैं चलाऊँगी! पहाड़ों में मैं लकड़ी की गाड़ी बहुत तेज़ भगाती थी, आज इसे भी दौड़ा कर देखूँगी!" सिमी ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें मटकाते हुए ज़िद की।
अमित और बाकी दोस्त पहले तो थोड़ा झिझके, लेकिन सिमी के इस बिंदास अंदाज़ को देखकर अमित हंस पड़ा। उसने बाइक की चाबी सिमी के हाथों में थमा दी, "ठीक है मेरी पहाड़ी रानी, आज हैंडल तेरे हाथ में है।"
## अध्याय: मरीन ड्राइव पर रफ्तार और मदहोश कर देने वाली छुअन
सिमी खुशी से उछल पड़ी, जिससे आगे से उसके दोनों भरे हुए दूध हवा में सुंदर लय में उछल गए। वह बाइक की अगली सीट पर बैठ गई। बाइक की पोजीशन के कारण सिमी को थोड़ा आगे की तरफ झुकना पड़ा। जैसे ही वह आगे झुकी, पीछे से उसकी काली पैंटी में कैद उसके भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ पूरी तरह पीछे की तरफ तन गए।
अमित मुस्कुराते हुए सिमी के बिल्कुल पीछे बैठ गया। बाइक जैसे ही स्टार्ट हुई और सिमी ने अनजाने में थोड़ा तेज़ एक्सीलेटर दिया, बाइक एक झटके के साथ मरीन ड्राइव की चौड़ी सड़क पर दौड़ पड़ी। रफ्तार के इस अचानक झटके के कारण अमित पीछे से पूरी तरह सिमी के नंगे और दूध जैसे सफेद बदन से चिपक गया।
* **बदन का संगम:** अमित का सीना सिमी की चिकनी, पसीने से हल्की भीगी पीठ पर कस गया, और उसके पैर सिमी के गदराए चूतड़ों के दोनों तरफ भींच गए।
* **बेबाक पकड़:** रफ्तार और संतुलन बनाए रखने के बहाने, अमित ने अपने दोनों मजबूत हाथ आगे बढ़ाए और सिमी की पतली कमर से ऊपर लाते हुए सीधे उसकी काली ब्रा के कप्स पर जमा दिए। अमित ने सिमी के उन दोनों सुडौल और भरे हुए दूध को अपनी हथेलियों में पूरी तरह से भर लिया।
## अध्याय: हवा के थपेड़े और सुख का अहसास
मरीन ड्राइव की खुली सड़क पर अरब सागर से उठने वाली ठंडी और नम हवा सीधे सिमी के अर्धनग्न बदन से टकरा रही थी। एक तरफ सामने से आती तेज हवा और दूसरी तरफ अमित के हाथों का वह कड़क और सीधा दबाव, जिसने उसके दोनों अंगों को अपनी मुट्ठी में भींच रखा था—इस दोहरे अहसास से सिमी के पूरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गई।
उत्तेजना और हवा के इस जादुई संगम के कारण ब्रा के पतले कपड़े के भीतर कैद उसके दोनों बड़े दूध और भी कड़क हो गए। उसके काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल अमित की हथेलियों को अंदर से चुभने लगे।
सिमी ने इस बेबाक स्पर्श पर जरा भी गुस्सा नहीं किया, बल्कि वह तो इस रफ्तार और छुअन के अनोखे खेल का पूरा आनंद ले रही थी। उसने बाइक का हैंडल मजबूती से थामे रखा, हवा में अपने खुले बाल लहराए और मरीन ड्राइव पर उमड़ती भीड़ की परवाह किए बिना खिलखिलाकर चहकी:
> "अरे ओ अमित बाबू! तुम पीछे बैठकर मेरे दोनों खिलौनों को इतनी जोर से क्यों दबा रहे हो? तुम्हारी उंगलियां तो बहुत कड़क हैं! पर इस बड़ी सड़क पर हवा बहुत ठंडी है, मुझे तो बहुत मजा आ रहा है!"
पीछे गाड़ियों में आ रहे रॉकी, कबीर और मोहित मरीन ड्राइव के इस खुले नजारे को देख रहे थे, जहाँ पहाड़ों की यह आज़ाद तितली अपनी ही धुन में बाइक दौड़ा रही थी और अमित उसकी बाहों में सिमटकर उसके बदन का सारा सुख लूट रहा था। पूरा मरीन ड्राइव इस अनोखे और बेबाक सफर का गवाह बन रहा था।
मरीन ड्राइव की खुली सड़क पर अमित की भारी स्पोर्ट्स बाइक हवा से बातें कर रही थी। रफ्तार जितनी तेज हो रही थी, अमित का जोश उतना ही बढ़ता जा रहा था। सिमी के दूध जैसे सफेद और चिकने बदन की खुशबू ने अमित को पूरी तरह मदहोश कर दिया था। उसने मरीन ड्राइव पर उमड़ती भीड़ या पीछे गाड़ियों में आ रहे अपने दोस्तों की परवाह किए बिना अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
अमित ने अपनी दोनों हथेलियों का पूरा जोर लगाया और सिमी की चमकदार काली ब्रा के भीतर कैद उसके भारी, सुडौल और भरे हुए दोनों दूध को रबर की तरह बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया। मुंबई की नम हवा और रफ्तार के रोमांच के कारण सिमी की त्वचा पर पसीने की बारीक बूंदें चमक रही थीं, जिससे अमित के हाथ उसके अंगों पर और आसानी से फिसल रहे थे।
अमित की उंगलियों के इस जबरदस्त दबाव और लगातार भींचे जाने के कारण ब्रा का पतला कपड़ा उस उभार को और ज्यादा संभाल नहीं पाया। अमित के हाथों के झटके से ब्रा के कप्स थोड़े नीचे सरक गए और सिमी के दोनों भारी दूध पूरी तरह से ब्रा के बाहर छलक आए। अरब सागर की ठंडी, नम हवा जैसे ही सीधे उसके उन खुले, दूधिया अंगों से टकराई, सिमी के पूरे वजूद में एक तीव्र सिहरन दौड़ गई। उत्तेजना और ठंडी हवा के इस दोहरे वार से उसके दोनों अंगों पर सजे काले अंगूर जैसे तीखे निप्पल पूरी तरह कड़क होकर बाहर की तरफ तन गए।
सिमी ने इस खुले और बेबाक अहसास पर जरा भी संकोच नहीं किया। उसने बाइक का हैंडल संभालते हुए अपनी आँखें आधी बंद कर लीं। पीछे बैठे अमित की जांघों पर उसकी पैंटी में कैद भारी चूतड़ लगातार थिरक रहे थे। सिमी ने एक गहरी सांस ली, जिससे उसके ब्रा से बाहर आए दोनों खुले अंग अमित की उंगलियों के बीच और ऊपर-नीचे हुए, और वह हंसते हुए चहकी:
"अरे अमित बाबू! तुमने तो मेरे कपड़ों को ही हटा दिया! यह समंदर की हवा मेरे इन खिलौनों पर बहुत ठंडी लग रही है। तुम इन्हें ऐसे दबा रहे हो जैसे पहाड़ों में हम लोग ताज़ा मक्खन निकालते हैं!"
उसकी इस अल्हड़ और निश्छल बात को सुनकर अमित ने उसके खुले बदन को और करीब से भींच लिया, जबकि पीछे आ रहे रॉकी, कबीर और मोहित मरीन ड्राइव के इस खुले आसमान के नीचे सिमी के इस पूरी तरह आज़ाद और बेबाक रूप को देखकर दंग रह गए।
मरीन ड्राइव की खुली और बेहद चौड़ी सड़क पर रफ्तार का रोमांच अब अपने चरम पर पहुँच चुका था। अरब सागर की तेज लहरों से उठने वाली नम हवाएं सिमी के पूरी तरह से खुले, दूध जैसे सफेद अंगों को छू रही थीं। अमित, जो सिमी के इस बेबाक और जादुई बदन की छुअन से पूरी तरह होश खो बैठा था, अब अपनी मर्दानगी के पूरे रौब और ताकत के साथ उस पर हावी हो गया।
अमित ने अपनी दोनों मजबूत हथेलियों का पूरा दबाव बनाया और सिमी के उन दोनों भारी, सुडौल अंगों को रबर की तरह पूरी मर्दानगी से मसल कर रख दिया। उसकी उंगलियाँ सिमी के मखमली जिस्म की गहराइयों में धंस रही थीं, मानो वह इस पहाड़ी हुस्न के हर एक कतरे को अपनी मुट्ठी में भींच लेना चाहता हो। इस जबरदस्त दबाव के बीच, अमित ने आगे बढ़कर सिमी के उन उत्तेजित, काले अंगूर जैसे तीखे निप्पलों को अपनी उंगलियों के पोरों में पकड़ा और उन्हें पूरी बेबाकी से मरोड़ दिया।
इस तीखे और तीव्र स्पर्श के कारण सिमी के पूरे बदन में बिजली का एक ऐसा ज़बरदस्त झटका लगा कि उसके हाथ बाइक के हैंडल पर पल भर के लिए कांप गए। निप्पलों के मरोड़े जाने से दर्द और चरम सुख का एक ऐसा अनोखा मिला-जुला अहसास हुआ कि उसने एक गहरी, मदहोश कर देने वाली आह भरी।
* **बदन का तीखा उभार:** अमित की इस कड़क मर्दाना छुअन के कारण उसके दोनों भरे हुए दूध अमित की हथेलियों के बीच और ज्यादा तन गए, और उसकी गोरी त्वचा पर अमित की उंगलियों के सुर्ख लाल निशान छप गए।
* **पूर्ण समर्पण:** पीछे उसकी काली पैंटी में कैद उसके भारी और गदराए चूतड़ अमित की जांघों से और भी कसकर चिपक गए।
सिमी ने अपनी आँखें पूरी तरह से बंद कर लीं और हवा की रफ्तार के बीच, अमित के इस बेहद बेबाक और कड़क अंदाज़ के सुख में डूबते हुए ऊंचे स्वर में चहकी:
> "अरे ओ अमित बाबू! तुम तो बहुत कड़क निकले! तुमने तो मेरे इन अंगूरों को इतनी ज़ोर से मरोड़ दिया कि मेरी जान ही निकल गई! पर इस मीठे दर्द में बड़ा मज़ा आ रहा है, तुम इन्हें ऐसे ही दबाते चलो!"
उसकी इस अल्हड़ और पूरी तरह से निश्छल बात ने अमित के भीतर के जुनून को और भड़का दिया। वह उसे और भी कसकर अपने सीने से भींचता रहा, जबकि मरीन ड्राइव के खुले आसमान के नीचे रॉकर्स ग्रुप की गाड़ियाँ इस बेबाक और अलमस्त सफर के पीछे-पीछे दौड़ती रहीं।