My Disable Wife - Chapter 1
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Part 1
राजस्थान की एक विशाल और शाही हवेली में सुबह से ही काफी चहल - पहल मची हुई थी। आखिर हो भी क्यों न... इस घर का वारिस, जो कई सालों बाद लंदन से वापस लौट रहा था।
हवेली के हर सदस्य के चेहरे पर एक अलग ही खुशी साफ दिखाई दे रही थी। सबकी आँखों में उत्साह था और दिलों में बस एक ही का इंतजार था.. शिवांश प्रताप सिंह का।
हवेली के बड़े से लिविंग एरिया में रखे आलीशान सोफे पर 68 वर्षीय महिला " अंबिका देवी " बैठी हुई थीं। उम्र ढल चुकी थी, लेकिन उनके चेहरे का रौब और व्यक्तित्व की गरिमा आज भी वैसी ही थी, जो इस परिवार की सबसे बड़ी और सम्मानित सदस्य होने का एहसास कराती थी।
उनके पास वाले सोफे पर उनके पति प्रताप सिंह खानदान के मुखिया, " बृजेश प्रताप सिंह " बैठे हुए थे। उम्र ढल चुकी थी, लेकिन उनकी आँखों का तेज आज भी वैसा ही था, जैसा वर्षों पहले हुआ करता था।
अंबिका देवी के पास ही उनके छोटे बेटे अभेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी, भावना प्रताप सिंह खड़ी थीं। वह उनसे किसी बात को लेकर बातें कर रही थीं, लेकिन उनकी निगाहें बार - बार हवेली के मुख्य दरवाजे की तरफ चली जाती थीं।
तभी उनके कानों में एक परिचित आवाज पड़ी।
" Mom... " उस एक आवाज ने जैसे पूरे माहौल को थाम लिया।
सभी ने एक साथ दरवाजे की तरफ देखा। सामने लंबा, आकर्षक और रौबदार व्यक्तित्व लिए खड़ा था। " शिवांश प्रताप सिंह " उम्र 27, लंबाई लगभग छह फीट, गोरा रंग, हल्की नीली आँखें और तीखे नैन - नक्श उसके आकर्षक व्यक्तित्व को और भी निखार रहे थे। उसकी फिट और मजबूत बॉडी उसके दमदार व्यक्तित्व में चार चाँद लगा रही थी।
उसे देखते ही सबके चेहरों पर बड़ी सी मुस्कान फैल गई। सात साल बाद घर का चिराग वापस लौटा था।
भावना जी की आँखें अपने बेटे को देखते ही चमक उठीं। वह लगभग दौड़ते हुए उसके पास पहुँचीं और उसके चेहरे को दोनों हाथों में थामकर बोलीं, " आ गया मेरा बेटा... " उनकी आँखें नम हो चुकी थीं। आखिर पूरे सात साल बाद उन्होंने अपने बेटे को इतने करीब से देखा था।
शिवांश हल्का सा मुस्कुराया और अगले ही पल झुककर अपनी माँ के गले लग गया। " आई मिस्ड यू, Mom... " उसकी आवाज में वही अपनापन था, जिसे सुनने के लिए भावना जी ने न जाने कितने साल इंतजार किया था।
तभी उसी समय कदमों की आहट के साथ शिवांश की दादी अंबिका देवी और दादा जी बृजेश प्रताप सिंह भी शिवांश के पास आए। जैसे ही शिवांश की नजर अपने दादा - दादी पर पड़ी, वह तुरंत आगे बढ़ा और झुककर दोनों के पेर छू लिए।
" खुश रहो बेटा... हमेशा तरक्की करो, " अंबिका देवी ने अपने पोते के सिर पर हाथ फेरते हुए आशीर्वाद दिया, बृजेश प्रताप सिंह ने भी मुस्कान के साथ उसे आशीर्वाद दिया।
उसी दौरान शिवांश के पास खड़ी एक लड़की, जो अब तक चुपचाप सब कुछ देख रही थी, धीरे - धीरे सबकी नजरों में आई। अभी तक किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया था, क्योंकि सबका ध्यान सिर्फ शिवांश पर था। लेकिन जैसे ही अंबिका देवी की नजर उस लड़की पर पड़ी, उन्होंने उसे ऊपर से नीचे तक गौर से देखा।
उस लड़की ने हल्के मेकअप के साथ एक स्टाइलिश टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहनी हुई थी। उसका गोरा रंग, ब्राउन बाल और कॉन्फिडेंट अंदाज उसे और भी अलग बना रहा था।
अंबिका देवी की भौंहें हल्की सी सिकुड़ गईं।
" शिवांश बेटा... ये लड़की कौन है ? " उन्होंने शांत लेकिन सख्त आवाज में पूछा।
शिवांश हल्का सा मुस्कुराया और बड़े आराम से बोला, " दादी, meet my girlfriend... Elena. "
उस नाम को सुनते ही वहां एक पल के लिए सन्नाटा सा छा गया।
एलिना हल्का सा मुस्कुराई और आगे बढ़कर आत्मविश्वास के साथ बोली, " Hello Grandma... " उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया। अंबिका देवी ने एक पल उसके हाथ को देखा, फिर उनकी नजर सीधे उसके चेहरे पर टिक गई। उनका रिएक्शन बिल्कुल ठंडा और पढ़ना मुश्किल था।
उधर शिवांश ने तुरंत उसे एक तेज नजर से देखा, जैसे बिना बोले ही चेतावनी दे रहा हो। शायद उसी इशारे को समझकर एलिना एक पल के लिए ठिठकी जैसे उसे कुछ याद आया। फिर उसने अपना हाथ वापस खींच लिया।
" Oops… " उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा और तुरंत झुककर पहले अंबिका देवी के चरण स्पर्श किए, फिर बृजेश प्रताप सिंह के और उसके बाद भावना जी के भी।
वहां का माहौल अब और भी दिलचस्प और भारी होता जा रहा था… क्योंकि हवेली में पहली बार कोई ऐसा मोड़ आया था, जिसे कोई भी अभी पढ़ नहीं पा रहा था।
शिवांश की Mom ने अपने सास और ससुर के चेहरे के बदलते हुए भावों को साफ महसूस कर रही थीं। शिवांश के साथ आई उस लड़की के लिए उनका रिएक्शन थोड़ा असहज और स्वीकार न कर पाने वाला सा था। माहौल को और बिगड़ने से बचाने के लिए भावना जी तुरंत आगे आईं और हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, " अरे… बेटा, चलो अंदर चलो। बैठो तुम लोग, बहुत थक गए होंगे ना सफर से। "
उनकी बात सुनकर माहौल थोड़ा सामान्य हुआ। शिवांश ने हल्का सा सिर हिलाया और एलिना के साथ अंदर की तरफ बढ़ गया। दोनों जैसे ही हवेली के भीतर आए, एलिना की आँखें चारों तरफ घूमने लगीं। विशाल झूमर, पुरानी शाही सजावट और दीवारों पर लगी ऐतिहासिक तस्वीरें देखकर वह पूरी तरह से उत्साहित हो उठी।
वह अचानक से शिवांश का हाथ पकड़कर हल्के से कूदते हुए बोली, Wowww… Shinu baby This place is like a real royal palace… I mean, it’s sooo beautiful!
उसकी आवाज में excitement थी और वो बिना किसी झिझक के पूरे हॉल को देख रही थी। फिर वह शिवांश के करीब आकर उसके बाजू को पकड़कर बोली, " Seriously love, it feels like I’ve stepped into some kind of movie set… like a royal Indian movies "
वह लगातार चारों तरफ देखते हुए आगे बढ़ती रही और हर चीज पर अपनी छोटी - छोटी comments देती जा रही थी,
Oh my God… these chandeliers! And those paintings… it’s giving such a vintage royal vibe… I love it!
उसकी इस बेझिझक और खुली हुई हरकत को देखकर कुछ लोग उसे अजीब तरह से देख रहे थे, लेकिन एलिना को इसकी कोई परवाह नहीं थी। वह पूरी तरह से उस माहौल को enjoy कर रही थी।
शिवांश ने एलिना की हरकतों को कुछ पल शांत नजरों से देखा। फिर थोड़ा सा झुककर, उसकी आँखों में देखते हुए धीमे लेकिन सख्त लहजे में बोला, " Elena… control yourself. " उसकी आवाज में हल्की सी चेतावनी थी।
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Hey Lovies ❤️
तो कैसी लगी आपको My Disable Wife की शुरुआत ?
आखिर सात साल बाद शिवांश अपने घर वापस लौट आया है, लेकिन उसके साथ आई एलिना ने हवेली में आते ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अपने thoughts और reviews ज़रूर शेयर करना। आपके comments पढ़ना मुझे बहुत अच्छा लगता है। ❤️
Lots of Love 💕