बिलेनियर बहू 💃 Ch. 1

टूटा रिश्ता और अनजानी मुलाकात - Chapter 1

Posted by Priyanka Amit Bagani • Jun 19, 2026 07:47 PM

मुंबई का वो बड़ा से भव्य होटल, जहां शादी का मंडप सजाया गया था, पूरी तरह से रोशनी में नहाया हुआ था। मार्च की शाम, हल्की ठंडी हवा में फूलों की महक और शहनाई की धुन मिलकर एक खास माहौल बना रही थी। लाल-पीले फूलों से सजा मंडप, चारों तरफ रंग-बिरंगी लाइट्स, और मेहमानों की भीड़। लेकिन अंदर वाले वीआईपी रूम में माहौल बिल्कुल अलग था तनाव भरा, खतरनाक सा।

तिथि शर्मा अभी-अभी वहां पहुंची थी। मुंबई के नामी MBA कॉलेज में फाइनल ईयर चल रहा था। उसकी चॉकलेटी ब्राउन आँखें थकान से भरी हुई थीं, लेकिन चुलबुली स्वभाव अभी भी जिंदा था। काले बालों में ब्राउन हाइलाइट्स, हल्का-सा मेकअप, और एक सिंपल पीच कलर का अनारकली सूट जो उसके थोड़े मोटे लेकिन आकर्षक फिगर पर बहुत प्यारा लग रहा था। वो अपनी बड़ी बहन दिव्या की शादी attend करने आई थी।

"भैया, जल्दी चलो ना। मंडप की तरफ देर हो रही है," तिथि ने दिशांत से कहा। दिशांत MBBS फाइनल ईयर का स्टूडेंट, protective भाई, चुपचाप सिर हिलाकर चलने लगा।

दोनों भाई-बहन बड़े पापा के घर से होटल पहुंचे थे। रिश्ते पहले से तनावपूर्ण थे। जब तिथि की मम्मी की मौत हुई थी, तब बड़े पापा (राकेश शर्मा के बड़े भाई) ने कोई सहारा नहीं दिया था। "अपना घर संभालो," कहकर मुंह मोड़ लिया था। आज सिर्फ बहन की शादी के लिए आए थे।

मंडप में सब कुछ परफेक्ट लग रहा था। लेकिन अचानक खबर आई — दुल्हन भाग गई है।

वीआईपी लाउंज में माहौल बेहद भारी था।

सभी लोग ऊपर दुल्हन के कमरे मे थे।हर्षवर्धन रॉय, 27 साल का dashing युवक, काले सूट में खड़ा था। उसकी शादी थी दिव्या से 3 साल के अफेयर के बाद में आज उसकी शादी थी दिव्या से बहुत खुश था वह पर अब उसके चेहरे की वह खुशी गुस्से दर्द में बदल रही थी था, आँखों में आग। उसके बगल में पूरा रॉय परिवार — दादा रुद्रप्रताप रॉय (strict और powerful), दादी कविता रॉय (elegant लेकिन अभी shocked), पिता अरुणवर्धन, माता प्रियंका, छोटा भाई आर्यन, चाचा विक्रम, चाची नेहा और बाकी कजिन्स आदित्य और विहान। चारों युवा हर्षवर्धन, आदित्य आर्यन और विहान — बेहद handsome, perfect physique वाले, लेकिन इस वक्त सबके चेहरे पर tension साफ दिख रही थी।

दिव्या, तिथि की बड़ी माँ रोते हुए खड़ी थी। उसके आँसू भरे चेहरे पर डर और परेशानी का मिश्रण था।

उन हाथ में रात में एक लेटर था जो उसकी बेटी ने लिख कर गई थी और वह उसे लेटर को पढ़ रही थी

"मैं हर्षवर्धन से शादी नहीं कर सकती!"लिखा तह "वो middle class है! मेरे सपने पूरे नहीं कर सकता। मैं लक्जरी लाइफ चाहती हूँ, foreign trips, big cars... ये सब उसके बस की बात नहीं। हम तीन साल से together थे, लेकिन अब समझ आया कि ये relationship मेरे future के लिए ठीक नहीं है। Sorry! एक बहुत अच्छे अपॉर्चुनिटी मिली है और मैं इस शादी के लिए अपनी वह अपॉर्चुनिटी नहीं छोड़ सकती हो इसलिए मैं जा रही हूं मेरा इंतजार मत करना"

रूम में सन्नाटा छा गया। हर्षवर्धन की मुट्ठियां भिंच गईं। उसकी jawline tense हो गई थी। उस का नाम media में चर्चित था लेकिन उसका चेहरा अभी तक public में reveal नहीं हुआ था। दिव्या को भी नहीं पता था कि हर्षवर्धन असल में रॉय बिजनेस एम्पायर का उत्तराधिकारी है billionaire। हर्षवर्धन ने जानबूझकर छुपाया था। नहीं बताया यह मैं आप की लेखिका फिर कभी बताऊंगी अभी हम स्टोरी पर चलते हैं।

दादाजी रुद्रप्रताप रॉय ने गहरी सांस ली। "ये अच्छा नहीं हुआ। हमारी इज्जत का सवाल है। इतने मेहमान, बहुत लोग है बाहर... बिना दुल्हन के शादी कैसे होगी? शगुन , रसमें , सब बर्बाद!"

दिव्या के पिता (तिथि के बड़े पापा) घबराए हुए थे। उनकी आँखें नम थीं। उन्होंने अचानक राकेश शर्मा (तिथि के पिता) की तरफ देखा और हाथ जोड़ दिए।

"भाई... हमारी इज्जत बचा लो। एक काम कर दो। अपनी बेटी तिथि की शादी हर्षवर्धन से कर दो। प्लीज... society क्या कहेगी? हमारी respect मिट्टी में मिल जाएगी।आप तो जानते ही है मेरा कितना नाम है मैं हमारे समाज का प्रेसिडेंट हूं अगर यह खबर बाहर गई तो मेरी कितनी बदनामी हो जाएगी"

राकेश शर्मा चौंक गए। "क्या मजाक चल रहा है? मेरी बेटी की शादी? नहीं, बिल्कुल नहीं! समाज और दुनिया के लिए मैं अपनी बेटी की जिंदगी नहीं बर्बाद कर सकता। और वैसे भी भाई आप प्रेसिडेंट है आपकी बेटी भाग्य में मेरी बेटी की बाली नहीं दूंगा।"

तभी राकेश जी की मां भी बोली "सही तो बोल रहा है तुझे पता है ना अगर तू शादी के लिए हां कर देगा तो तेरे भाई की इज्जत मिट्टी में मिलने से बच जाएगी तुझे पता है कितनी मेहनत करके यहां पहुंचा है वह और सब कुछ बर्बाद हो जाएगा और वैसे भी कौन करेगा तेरी बेटी से शादी......"

राकेश जी जोर से बोले बस माँ एक शब्द और नहीं सुनुँगा मेरी बेटी के खिलाफ....

माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। दादी कविता रॉय दम से उठकर खड़ी हो गईं। "राकेश जी , सोच लो। दोनों परिवार की इज्जत का सवाल है। क्या इज्जत रह जाएगी अगर हम बिना दुल्हन के लौटे? ख़ुश रहेगी में तुम्हारी बेटी हमारे घर"

तिथि के पिताने हाथ जोड़ कर बोले " मुझे माफ कर दीजिए मां जी मैं आपका अपमान नहीं करना चाहता पर, मैं ये बात भी मान नहीं सकता..."

इतने में दरवाजा खुला।

तिथि अंदर घुसी। उसके चेहरे पर थकान थी। पीच कलर का अनारकली सूट हल्का सा crease हो गया था, बाल हाई पॉनीटेल में बंधे हुए, चॉकलेटी ब्राउन आँखें थोड़ी एंग्जायस हो रही थी ।

"पापा, मुझे जाना होगा। हॉस्टल में 10 बजे के बाद entry नहीं मिलेगी। आपको तो मालूम है, दो दिन बाद मेरे exams हैं। तों मे जा......"

वो अचानक रुक गई।

पूरे कमरे में सब की नजरें उस पर टिक गई थीं। हर्षवर्धन की गुस्से भरी आँखें अचानक तिथि पर पड़ीं। पता नहीं क्यों उसका गुस्सा कम हो रहा था। दादाजी, दादी, दिव्या के माता-पिता, दिशांत सब उसे घूर रहे थे। माहौल कुछ और ही हो गया था। Tension हवा में तैर रही थी।

तिथि के चेहरे पर confusion छा गया। "ये... क्या हो रहा है? सब मुझे क्यों देख रहे हैं? सब ठीक है ना पापा",

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Priy@nka Bagani... ….

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