मैं गुंडा हूँ - Chapter 2
मुंबई का वो लग्जरी होटल, जहां शादी का मंडप सजाया गया था, पूरी तरह से जगमगा रहा था। बाहर फूलों की महक, शहनाई की धुन और मेहमानों की हल्की-फुल्की बातें चल रही थीं, लेकिन अंदर वाले वीआईपी लाउंज में माहौल बेहद भारी और तनावपूर्ण था। एयर-कंडीशंड कमरे में भी गुस्सा और निराशा की गंध फैली हुई थी।
दादी कविता रॉय तिथि को देखकर मुस्कुराईं। उनकी आँखों में ममता झलक रही थी। उन्होंने तिथि का हाथ पकड़ लिया और प्यार से बोलीं,
“कितनी प्यारी बच्ची है यह...... अगर ये मेरे घर की बहू बन गई तो सच में मुझे बहुत अच्छा लगेगा। इतनी चुलबुली, इतनी सुंदर...”
तिथि कंफ्यूज हो गई। उसकी चॉकलेटी ब्राउन आँखें चौड़ी हो गईं। वो अपने पापा राकेश शर्मा की तरफ देखने लगी। “पापा... ये क्या कह रही हैं? मैं कुछ समझ नहीं पा रही।”
राकेश शर्मा का चेहरा पीला पड़ गया। उन्होंने गहरी सांस ली और धीरे से बोले,
“बेटा... तुम्हारी ब दिव्या भाग गई है। उसने एक लेटर छोड़ दिया है। वो ये से शादी नहीं करना चाहती। अब ये लोग चाहते हैं कि... तुम ही शादी कर लो।”
तिथि के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसका चेहरा सफेद हो गया। वो तुरंत अपने पापा के पास आई और उनके हाथ पकड़ लिए।
“पापा... आप भी? प्लीज पापा, कह दीजिए ना कि ये सब मजाक है।”
राकेश शर्मा ने अपनी बेटी के सिर पर हाथ फेरा। उनकी आँखों में दर्द था।
“नहीं बेटा, मैं भी ये नहीं चाहता। मुझे पता है मेरी बेटी को मैं जबरदस्ती समाज, दुनिया या पैसे के लिए इन सब चक्करों में नहीं फंसा सकता। हम middle class हैं, खुशहाल हैं। तेरी जिंदगी तेरी है। सपने हैं और तू उसे हिसाब से ही चाहिए कोई जबरदस्ती नहीं होगा ”
इतने में दिशांत भी कमरे में आ गया। उसने पूरी बात सुन ली। उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया वो आगे बढ़ा और साफ-साफ बोला,
“मैं अपनी बहन को ऐसे किसी भी रिश्ते में बंधने नहीं दूंगा। Whatever happens, she is not marrying anyone under pressure. No way!”
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। तभी हर्षवर्धन रॉय की गहरी, authoritative आवाज गूंजी पुरे कमरे मे ।
“मुझे सिर्फ 5 मिनट इन से बात करनी है।”
दिशांत और राकेश दोनों ने एक साथ मना कर दिया। “कोई जरूरत नहीं है!”
लेकिन दादी कविता रॉय ने फिर तिथि का हाथ पकड़ लिया। उनकी आँखें नम थीं।
“बेटा प्लीज... एक बार मेरी बात सुन लो।”
तिथि ने हाथ छुड़ाते हुए कहा, “दादी प्लीज, माफ कीजिये आप emotional blackmail मत कीजिए। ऐसा सिर्फ फिल्मों में होता है अचानक शादी कर ली और सब happy ending। Reality में ऐसा कुछ नहीं होता। मैं ऐसा कुछ नहीं कर सकती। मैं जा रही हूँ।”
उसने दिशांत का हाथ पकड़ा और बाहर की तरफ बढ़ने लगी। उसके पीच कलर के अनारकली सूट में हल्की सी crease पड़ गई थी, बाल हाई पॉनीटेल से थोड़े बिखरे हुए थे, और चेहरे पर गुस्सा व डर का मिश्रण था।
हर्षवर्धन को भयंकर गुस्सा आ गया। पहली बार उसकी दादी ने किसी के सामने “प्लीज” कहा था, और उसे reject कर दिया गया। उसकी jawline tense हो गई, आँखों में आग जल रही थी। वो तेजी से उठा, अपनी पगड़ी ठीक की, और बाहर निकल आया।
“सुनो!” उसने तेज आवाज में पुकारा।
तिथि मुड़ी ही थी कि हर्षवर्धन ने उसका wrist पकड़ लिया। उसकी पकड़ मजबूत थी। बिना कुछ कहे उसने तिथि को पास वाले एक प्राइवेट रूम में घसीट लिया, दरवाजा बंद कर दिया और लॉक कर दिया। जाते-जाते उसने अपने छोटे भाई आर्यन को इशारा कर दिया। इतनी जल्दी हुआ कि कोई उसे रोक ही नहीं पाया बाहर दरवाजे पर उसका भाई दरवाजा पिता था अगर तुमने दरवाजा नहीं खोला तो मैं पुलिस को बुलाऊंगा ओपन द दो तुम मेरी बहन के साथ जबरदस्ती भी नहीं कर सकते....
रूम में अकेले रह गए दोनों। हर्षवर्धन का काला सूट उसके perfect physique पर फिट बैठ रहा था। उसका चेहरा गुस्से से लाल था।
कुछ ही मिनट बाद उसके फोन पर कुछ मैसेज आए। उन्हें पढ़कर उसकी आँखों में एक dangerous spark आ गया।
“तुम ये शादी करोगी। अभी। इसी वक्त।”
तिथि बहुत गुस्सा हो गई। उसकी चॉकलेटी आँखें आग उगल रही थीं।
“तुम अपने आप को क्या समझते हो? Because ,your Bride run away you eant i will marry you? Look Mister, मुझे तुमसे शादी करने में कोई interest नहीं है!”
हर्षवर्धन ने एक कदम आगे बढ़ाया। उसकी आवाज ठंडी लेकिन खतरनाक थी। उसने कुछ ऐसी बात कही जिससे तिथि डर गई। उसके चेहरे पर भय छा गया। रीड की हड्डी तक सिहर गई पूरा शरीर कांपने लगा.. …..
“तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे...” तिथि ने कांपती आवाज में कहा।
हर्षवर्धन ने ठंडे स्वर में जवाब दिया, “अगर तुमने मुझसे शादी नहीं की तो मैं वैसा कर सकता हूँ कि तुम्हारा...”
तिथि ने जोर से उस को धक्का दिया ओर गुस्से में कहा, “तुम हो कौन? गुंडे वाली हरकतें कर रहे हो क्या?!”
हर्षवर्धन ने उसकी गलतफहमी दूर नहीं की। बल्कि मुस्कुराते हुए बोला,
“हाँ, मैं गुंडा हूँ अब मेरी बात नहीं मानी तो देख लेना। 5 मिनट। तैयार होकर बाहर आओ मंडप में।”
तिथि की आँखों में आंसू आ गए। वो कांप रही थी।
“ये तुमने अच्छा नहीं किया। बहुत पछताओगे Mister...”
हर्षवर्धन ने दरवाजा खोल दिया। तिथि बाहर आई। उसका चेहरा आंसुओं से नम था। वो अपने पापा के पास गई और धीरे से बोली,
“पापा... मैं शादी के लिए तैयार हूँ।”
राकेश शर्मा चौंक गए। “बेटा, इसकी जरूरत नहीं। अगर उसने तुम्हें डराया है तो मैं समझाऊंगा...”
तिथि ने आंसू पोंछते हुए कहा, “नहीं पापा... ऐसा कुछ नहीं है। मैं तैयार हूँ।”
इतने में दो लड़कियां ब्यूटीशियन कमरे में आ गईं। “मैडम, हम आपको तैयार करते हैं।”
सब लोग नीचे मंडप की तरफ चले गए। ब्यूटीशियन्स ने तिथि को तेजी से तैयार किया। कुछ ही पल में उसका मेकअप किया गया, बालों को खूबसूरत तरीके से सजाया गया, और एक traditional red bridal lehenga (जो पहले दिव्या के लिए रखा गया था) पहना दिया गया। लहंगे का heavy embroidery उसके चॉकलेटी स्किन टोन पर शानदार लग रहा था। बड़े-बड़े चॉकलेटी ब्राउन आँखों में आंसू अभी भी थे, लेकिन वो अब मजबूत दिख रही थी। हाइलाइट वाले बालों को dupatta के नीचे व्यवस्थित किया गया। वो बेहद सुंदर, लेकिन उदास लग रही थी।
दरवाजे पर नॉक हुई। ब्यूटीशियन लड़कियों ने दरवाजा खोला। सामने हर्षवर्धन खड़ा था —
To be continued...