रूबी डार्लिंग के दूध को पी लिया
स्टेज पर अब कामुकता और दीवानगी की सारी हदें पार हो चुकी थीं। बिल्कुल नंगी हो चुकी रूबी के सामने खड़ा जुआरी पूरी तरह नियंत्रण खो बैठा था। उसने आगे बढ़कर रूबी के गोल-मटोल स्तनों को अपने हाथों में थामा और उसके गुलाबी दूध को पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया।
इस सीधे और तीखे स्पर्श से रूबी का बदन हवा में लहराया। वह अपनी आँखें मूंदकर लगातार गहरी और मादक आहें भरने लगी। उसने पीछे हटने की बजाय उस जुआरी के सिर को अपने हाथों से और कसकर अपने सीने से चिपका लिया, मानों वह अपनी मर्जी से उसे अपना दूध पिला रही हो।
कसीनो के लाउडस्पीकरों से गूंजती रूबी की हर एक आह नीचे खड़े शराबी और जुआरियों के दिलों पर छुरियां चला रही थी। कसीनो की लाल लाइटों के बीच स्टेज पर घट रहा यह नग्न और उन्मादी खेल वहाँ मौजूद हर शख्स को एक ऐसे सम्मोहन में धकेल चुका था जहाँ से वापस लौटना नामुमकिन था। खेल, पैसा, जुआ—सब कुछ इस बदन के सैलाब में बह चुका था।
स्टेज पर चल रहा वह उन्मादी और नग्न दृश्य अब अपनी अंतिम कड़ियों की ओर बढ़ रहा था। जुआरी पूरी तरह होश खोकर रूबी के स्तनों से दूध पीने में व्यस्त था, और रूबी की मदहोश कर देने वाली आहें कसीनो की ठंडी होती हवाओं में लगातार गूंज रही थीं। पूरा हॉल इस बदन के खेल के सम्मोहन में पूरी तरह डूब चुका था।
इस बीच, कसीनो के शातिर मैनेजमेंट और मुस्तैद स्टाफ ने इस दीवानगी का पूरा फायदा उठा लिया था। फर्श पर बिखरे नोट, टेबल्स पर छोड़ी गई रईसों की गड्डियां और बेशकीमती चिप्स पूरी तरह से बटोरे जा चुके थे। कसीनो के गल्ले आज रात रिकॉर्ड तोड़ कमाई से लबालब भरे थे।
तभी, कसीनो की मुख्य बत्तियां धीरे-धीरे मद्धम होने लगीं और भारी सायरन की आवाज गूंज उठी—यह इस बात का संकेत था कि कसीनो के बंद होने का वक्त आ चुका था। बाउंसरों ने आगे बढ़कर बाकी बचे शराबी और जुआरियों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया। रात के इस आखिरी पहर में, पैसे और होश दोनों गंवा चुके लोग लड़खड़ाते कदमों से बाहर अंधेरे की तरफ बढ़ रहे थे, जबकि स्टेज पर अभी भी उस मदहोश कर देने वाले खेल की आखिरी सांसें बाकी थीं।
स्टेज की मद्धम पड़ती लाइटों और कसीनो के बंद होने के सायरन के बीच, वह दृश्य अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया। उस जुआरी ने पूरी शिद्दत से रूबी को अपने आगोश में लिए रखा और अपनी जीत का जश्न उसी मदहोशी में मनाया। रूबी के उस बेबाक और सम्मोहक जिस्म के साथ अपनी हवस और दीवानगी को पूरी तरह शांत करने के बाद, वह भारी कदमों से स्टेज से नीचे उतरा। पैसे, रसूख और बदन के उस चरम खेल से तृप्त होकर, वह अंततः कसीनो के भारी दरवाजों से बाहर अंधेरी रात की तरफ निकल गया।
पीछे कसीनो के खाली हॉल में सिर्फ बिखरी हुई कुर्सियां, खाली बोतलें और उस तूफानी रात की खामोशी बची थी। कसीनो के मुख्य द्वार बंद हो गए, और 'द ग्रैंड इंपीरियल' की वह चर्चित रात इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई।
कसीनो की मुख्य बत्तियां बुझ चुकी थीं और चारों तरफ पसरी खामोशी में सिर्फ काउंटिंग मशीन के चलने की हल्की आवाज आ रही थी। स्टेज पर बिखरी रोशनी के बीच रूबी अब भी वहीं बैठी थी, उसका बदन थकावट और उस तूफानी रात के असर से धीरे-धीरे सामान्य हो रहा था।
तभी भारी कदमों की आहट के साथ कसीनो का मैनेजर, हाथों में नोटों की गड्डियों से भरा एक आलीशान ब्रीफकेस लिए मुस्कुराता हुआ रूबी के पास आया। उसके चेहरे पर कामयाबी की चमक साफ देखी जा सकती थी।
उसने ब्रीफकेस को पास की टेबल पर रखा और बेहद खुश होकर आदर के साथ कहा, "मैडम, आज तो कमाल ही हो गया! आज इतनी बम्पर कमाई हुई है कि कसीनो के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। उस जुआरी की दीवानगी और आपकी एक-एक आह ने आज रात यहाँ आए हर रईस की तिजोरी खाली करवा दी। आप वाकई इस ग्रैंड इंपीरियल की असली मालिकाना ताकत हैं।"
रूबी ने अपनी बिखरी हुई जुल्फों को पीछे किया, मैनेजर की तरफ देखा और उसके चेहरे पर एक गहरी, रहस्यमयी मुस्कान उभर आई।
मैनेजर ने पूरी गंभीरता से रूबी की बात सुनी और सहमति में अपना सिर हिलाया। वह जानता था कि रूबी जितनी बेबाक और कातिलाना स्टेज पर थी, दिमाग से उतनी ही शातिर और हिसाब-किताब में पक्की थी।
उसने ब्रीफकेस को मजबूती से बंद करते हुए कहा, "जी मैडम, बिल्कुल ऐसा ही होगा। कल सुबह सबसे पहले यह रकम बैंक के मुख्य खाते में जमा करा दी जाएगी। 10 प्रतिशत हिस्सा उस कमिश्नर तक पहुंच जाएगा जो इस कसीनो की सुरक्षा और कानूनी कागजातों पर आंखें मूंदे रहता है, ताकि पुलिस का कोई झमेला न हो।"
मैनेजर थोड़ा रुका, फिर उसने सम्मान और अचरज भरी नजरों से रूबी की तरफ देखा और आगे कहा, "और 15 प्रतिशत हिस्सा शहर के सबसे बड़े अनाथ आश्रम को 'गुमनाम दान' के रूप में भेज दिया जाएगा। आपकी यह दरियादिली ही है जो इस धंधे के काले पैसों में भी एक संतुलन बनाए रखती है।"
रूबी स्टेज से उठी, अपना सिल्क का गाउन अपने बदन पर लपेटा और खिड़की की तरफ बढ़ गई, जहाँ से शहर की चमचमाती लाइटें साफ दिख रही थीं। उसने एक गहरी सांस ली और कहा, "इस शहर से जितना छीनना है छीनो, लेकिन जिन्हें जरूरत है, उन तक उनका हक पहुंचना चाहिए। अब जाओ, और कल सुबह के काम में कोई चूक नहीं होनी चाहिए।"
मैनेजर ने झुककर सलाम किया और दबे पांव केबिन से बाहर निकल गया।
कसीनो के विशाल लोहे के गेट भारी आवाज के साथ बंद हो गए। गार्ड्स ने ताले लटका दिए और कसीनो का बचा-कुचा स्टाफ भी अपनी थकान समेटे हुए धीरे-धीरे अपने-अपने घरों की तरफ रवाना हो गया। शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसर चुका था और सिर्फ स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी उस खामोशी को चीर रही थी।
रूबी अपनी लग्जरी कार की पिछली सीट पर बैठी थी। खिड़की के कांच से बाहर दिखते अंधेरे को देखते हुए वह गहरी सोच में डूबी हुई थी। कसीनो का वह शोर, जुआरियों की वो दीवानगी और बदन का वो उन्मादी खेल अब पीछे छूट चुका था।
कुछ ही देर में उसकी गाड़ी शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक आलीशान और सुनसान हवेली के सामने आकर रुकी। हवेली का ऊंचा फाटक खुला और गाड़ी अंदर दाखिल हो गई। हवेली के भीतर का माहौल कसीनो से बिल्कुल जुदा था—यहाँ एक अजीब सा सुकून और रहस्यमयी शांति थी।
रूबी गाड़ी से उतरी और भारी कदमों से चलती हुई अपने विशाल बेडरूम में पहुँच गई। उसने सिल्क का गाउन उतारकर फेंका और शॉवर के नीचे खड़ी हो गई। ठंडे पानी की बौछारों के बीच उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। पानी की हर बूंद के साथ वह कसीनो क्वीन 'रूबी' के मुखौटे को उतार फेंक रही थी, ताकि वह खुद से मिल सके।
तभी बेडरूम के सन्नाटे में उसके फोन की घंटी बजी। इस वक्त, इतनी रात गए उसे कौन फोन कर सकता था?